“मैं अपनी मां में था”

विज्ञान द्वारा प्रकट मातृत्व का रहस्य

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बच्चे कभी-कभी मजाक से कहते हैं, “मुझे लगता है मेरी मां एक ईश्वर है। चाहे मैंने इसे चोरी-छिपे किया था, फिर भी किसी न किसी तरह वह उसके बारे में जानती है।” वह केवल मेरा खुशी और आनंदित होना ही नहीं, बल्कि वह मेरा बीमार पड़ जाना, अकेला और दुखी होना भी जानती है। यह ऐसा है जैसे कि वह मुझ से भी अधिक मेरे बारे में जानती हो। इतना ही नहीं, वह मृत्यु के जोखिम में भी अपने बच्चों की रक्षा करती है।

27 सप्ताह की आयु का अपरिपक्व शिशु मर गया था लेकिन वह दो घंटे तक उसकी माता की बांहों में रखे जाने से पुनर्जिवित हो गया। चाहे हम इस अंतरराष्ट्रीय खबर का उल्लेख न करें, ऐसी बहुत सी माताएं हैं जिन्होंने एक चमत्कार की तरह अपने बच्चे को मृत्यु के कगार पर भी बचाया। इसे मातृत्व कहा जाता है। मातृत्व की सामर्थ्य जो एक कमजोर शरीर से फूट निकलती है! यह रहस्यमय सामर्थ्य कहां से आती है?

माता का मस्तिष्क अपने बच्चे को खुद के बराबर पहचानता है

पूर्वकथित प्रश्न का उत्तर देने के लिए, मई 2011 में सबसे पहली बार माता के प्रेम पर एक प्रयोग किया गया जिसे एक शैक्षिक चैनल पर प्रसारित किया गया था। कोरिया विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग ने मस्तिष्क स्कैन के लिए कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (fMRI) का उपयोग करते हुए उस प्रयोग को अंजाम दिया था।

इस प्रयोग में कूल मिलाकर 22 माताओं ने भाग लिया, जिनके बच्चे माध्यमिक स्कूल के थे; इनमें 11 कोरियाई थीं, और अन्य 11 अमेरिकी थीं। प्रयोग की अवधि दस मिनट थी, जिसमें व्यक्तित्व और भावना से जुड़े 150 विशेषण दिए गए थे। माताओं को उन शब्दों का, जो उन्हें लगा कि उनका वर्णन करते हैं, चयन करना था। फिर उन्हें उन शब्दों का चयन करने के लिए कहा गया जो उन्हें लगा कि उनके बच्चों का वर्णन करते हैं, और अंत में उन शब्दों का भी जो दूसरों का वर्णन करते हैं।

इस प्रयोग ने दिखाया कि मातओं के मस्तिष्क खुद के, अपने बच्चों और दूसरों के बारे में विचार करने पर कैसे प्रतिक्रिया दिखाते हैं। मानव मस्तिष्क स्वयं के विषय में राय देते समय मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का उपयोग करता है। मस्तिष्क का यह क्षेत्र, जो समाज से जुड़ी जानकारी पर कार्य करता है, इसका उपयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति स्वयं के विषय में विचारों का वर्णन करता है। दूसरी ओर, पृष्ठीय मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का उपयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति दूसरों के विषय में राय देता है।

प्रयोग के दौरान, भाग लेने वाली माताओं की मस्तिष्क गतिविधि मस्तिष्क स्कैन के माध्यम से दिखाई दी। जब माताएं उन शब्दों का चयन कर रही थीं जो उन्हें लगा कि उनका वर्णन करते हैं, तब मस्तिष्क का वह क्षेत्र जो स्वयं के विषय में राय देता है, अर्थात् मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स सक्रिय था। और जब उन शब्दों का चयन करते समय जो उन्हें लगा कि वे दूसरों का वर्णन करते हैं, पृष्ठीय मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स सक्रिय था।

फिर, माता के मस्तिष्क अपने बच्चों को जो स्वयं या दूसरे नहीं हैं, कैसे पहचानते हैं? प्रयोग का परिणाम आश्चर्यजनक था। जब माताओं ने अपने बच्चों के विषय में जानकारी पर राय दी, तब मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, मस्तिष्क का वह क्षेत्र जो स्वयं के विषय में सोचते समय सक्रिय होता है, सक्रिय था। कोरियाई माताओं और अमेरिकी माताओं ने एक समान प्रतिक्रिया दिखाई।

तब इस परिणाम ने मातृत्व के विषय में क्या बताया? यह दिखाता है कि माताएं स्वयं और अपने बच्चों को एक समान प्राणी मानती हैं। दूसरे शब्दों में, माताओं के मस्तिष्क अपने बच्चों को अपनों की तरह यानी अपनों में से अन्य एक और व्यक्ति के रूप में पहचानते हैं।

इस परिणाम के विषय में, मनोविज्ञान के विशेषज्ञों ने कहा, “माता अपने मस्तिष्क में अपने बच्चे को खुद के बराबर पहचानती है,” और उन्होंने कहा, “सार्वभौमिक रूप से, माताएं अपने बच्चों के बारे में स्वयं के रूप में सोचती हैं; इसलिए, मातृत्व जैविक रूप से मौजूद है।” प्रसारण ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि माताएं अपने बच्चों को स्वयं के रूप में मानती हैं, इसलिए माताओं में अपने बच्चों के प्रति बेशर्त प्रेम यानी अपनी जान खतरे में डालने से भी न कतराने का प्रेम हो सकता है।

तब, ऐसा क्यों है कि माताओं के मस्तिष्क अपने बच्चों को अपने समान पहचानते हैं? क्या यह इसलिए नहीं क्योंकि जन्म से ही माताओं और उनके बच्चों के बीच एक मजबूत बंधन है? जब हम उन परिणामों को देखते हैं जो वैज्ञानिकों ने निर्धारित किए हैं, तो यही कारण होता है।

चित्र 1. सक्रिय मस्तिष्क का क्षेत्र जब एक माता स्वयं के विषय में राय देती है(पृष्ठीय मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, पीले रंग का भाग)।
सक्रिय मस्तिष्क का क्षेत्र जब एक माता दूसरों के विषय में राय देती है(पृष्ठीय मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, नीले रंग का भाग)।
चित्र 2. सक्रिय मस्तिष्क का क्षेत्र जब एक माता अपने और अपने बच्चों के विषय में राय देती है (समान भाग)।
✽ छवियां ईबीएस टीवी डॉक्यूमेन्टरी “मदर शॉक” भाग 2 से हैं: “मां के मस्तिष्क में बच्चा है।”

माइक्रोचिमेरिज्म(Microchimerism – सूक्ष्मकाइमेरावाद), माता और बच्चे के बीच का बंधन

एक वैज्ञानिक प्रयोग के अनुसार, माताएं और उनके बच्चे माइक्रोचिमेरिज्म(Microchimerism) यानी सूक्ष्मकाइमेरावाद कहे जानेवाला एक रहस्यमय तंत्र द्वारा बंधे हुए हैं।

‘माइक्रो(Micro)’ का अर्थ सूक्ष्म होता है। ‘चिमेरा(Chimera)’ 1 का अर्थ है दो या अधिक तत्वों का संश्लेषण जिनकी अलग-अलग उत्पत्ति है। सभी स्तनधारी गर्भवती होने पर अपने भ्रूण के साथ अपने डीएनए और कोशिकाओं का साझा करते हैं। माइक्रोचिमेरिज्म ऐसी कोशिकाओं की एक अल्प संख्या की उपस्थिति है जो मेजबान कोशिका से आनुवंशिक तौर पर भिन्न होती है।

1. पारिभाषिक शब्द ‘चिमेरा’ की उत्पत्ति यूनानी पौराणिक कथा में उस जीवधारी से हुई जिसका सिर सिंह का सा, शरीर बकरे का सा, और पूंछ सांप का सा है (कॉमन सेंस डिक्शनरी पार्कमुनगक द्वारा प्रकाशित, 2013)

मनुष्यों के साथ भी ऐसा ही है। सभी लोगों में उनकी माताओं की कोशिकाएं होती हैं, जो उन्हें उस समय से मिलीं जब वे अपनी माताओं के गर्भ में थे। लगभग 60 वर्ष पहले, वैज्ञानिकों ने मातृक माइक्रोचिमेरिज्म(Maternal Microchimerism) की खोज की, जो एक माता के कोशिकाओं की भ्रूण के अंदर जड़ लगानेवाली घटना है।

उस समय एक रिपोर्ट ने यह दिखाया कि एक माता की त्वचा की कैंसर कोशिकाएं भ्रूण के साथ साझा की गई थीं। तब से, जीवविज्ञान विशेषज्ञ यह समझने लगे कि माता की रक्त कोशिकाओं का साझा भ्रूण के साथ भी किया जा सकता है। अमेरिका के सिएटल के फ्रेड हचिन्सन कैंसर रिसर्च सेंटर में जे. ली नेल्सन नामक एक प्रतिरक्षाविज्ञानी ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ 32 स्वस्थ महिलाओं के रक्त की जांच की और यह पाया कि उनमें से 7 महिलाओं में उनकी माताओं की श्वेत रक्त कोशिकाएं थीं।

फिर क्या भ्रूण को माता के साथ कोशिकाओं को साझा करना संभव होगा? जी हां। गर्भावस्था के दौरान, माता और भ्रूण कोशिकाओं का परस्पर आदान-प्रदान करते हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन माताओं ने गर्भावस्था का अनुभव किया है, उनमें उनके बच्चों की कोशिकाएं हैं। भ्रूण से कोशिकाएं प्राप्त करना, जिसे भ्रूण माइक्रोचिमेरिज्म (Fetal Microchimerism) कहा जाता है, 1893 में एक जर्मन विकृतिविज्ञानी द्वारा खोजा गया था जिसे गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप से मर गई माताओं के फेफड़ों में भ्रूण कोशिकाएं मिलीं। बाद में, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग में लियोनार्ड ए. हर्ज़ेनबर्ग और उनके सहयोगियों ने उन महिलाओं की रक्त कोशिकाओं में जिनके गर्भ में पुत्र थे, वाई गुणसूत्र पाया जो भ्रूण के लिंग को पुरुष के रूप में तय करता है।

महिलाओं में दो एक्स गुणसूत्र होते हैं। इसलिए, यह निश्चित था कि उनके वाई गुणसूत्र उनकी गर्भावस्था के दौरान उनके भ्रूण से उत्पन्न हुए थे। इसके अलावा, टफ्ट्स मेडिकल सेंटर में डायना डब्ल्यू. बियानची नामक एक आनुवंशिकीविद् ने उन माताओं में जिन्होंने पुत्र जन्माने का अनुभव किया था, पुरुष डीएनए पाया।

शोध के परिणामों के आधार पर, माता और भ्रूण के बीच की माइक्रोचिमेरिक कोशिकाएं कई अलग-अलग अंगों में पाई गईं जैसे कि हृदय, यकृत, फेफड़े, किडनी, मज्जा, त्वचा, रक्त, थाइरोइड आदि। वैज्ञानिक बताते हैं कि वाई गुणसूत्र, जो माता के रक्त में पाया जाता है, गर्भावस्था के दौरान पुरुष भ्रूण से आता है। गर्भवती महिलाओं के 80 से 90% रक्त में भ्रूण का डीएनए पाया जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भ में होने पर गर्भ से भ्रूण की कोशिकाएं बीजांडासन से गुजरकर माता के शरीर में प्रवेश करती हैं।

लेकिन, इस तथ्य का कि महिला के शरीर में वाई गुणसूत्र पाया जाता है, अर्थ यह नहीं है कि माता केवल अपने बेटे के साथ कोशिकाओं का आदान-प्रदान करती है। चूंकि माता और बेटी दोनों में केवल एक्स गुणसूत्र हैं, माता में मादा भ्रूण की कोशिकाओं को ढूंढ़ना मुश्किल है। वैज्ञानिक बताते हैं कि मादा भ्रूण भी पुरुष भ्रूण के समान अपनी माताओं के शरीर के कई भागों में छाप छोड़ती है।

माता और भ्रूण के बीच माइक्रोचिमेरिक कोशिकाएं माता के शरीर के कई हिस्सों में पाई जाती हैं।(वह हिस्सा जहां माइक्रोचिमेरिक कोशिकाएं माता और भ्रूण के बीच बस जाती हैं)
जे. ली नेल्सन, तुम्हारी कोशिकाएं मेरी कोशिकाएं हैं, साइंटिफिक अमेरिकन, फरवरी 2008

उनकी माताओं में रहने वाली बच्चों की कोशिकाएं

बच्चे की कोशिकाएं जिन्होंने खुद को माइक्रोचिमेरिज्म के माध्यम से माता के शरीर में लगाया है, कैसे भूमिका अदा करती हैं? आमतौर पर, जो कोशिकाएं मज्जा प्रत्यारोपण या रक्त प्राप्त करने के माध्यम से दूसरों में स्थानांतरित होती हैं, वे प्रतिरक्षा अस्वीकृति के कारण दुष्प्रभाव डालती हैं, या प्रतिरक्षा प्रणाली के रक्षा तंत्र द्वारा हमला किए जाकर कुछ ही समय में गायब हो जाती हैं।

लेकिन, भ्रूण कोशिकाएं की, जो माइक्रोचिमेरिज्म के माध्यम से माता में प्रवेश करती हैं संख्या में वृद्धि होती रहती और वे दसियों वर्षों तक बढ़ती रहती हैं। माइक्रोकाइमेरिक कोशिकाएं उसके बच्चे के जन्म के 25 वर्ष बाद भी माता के रक्त में पाई जाती हैं और 20 वर्ष के बाद यकृत ऊतक कोशिकाओं में पाई जाती हैं।

माइक्रोचिमेरिक कोशिकाएं, जो प्रसव के बाद भी माता के रक्त में मौजूद होती हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित कार्य करती हैं। इस मामले में, बीमारी पैदा करने जैसे कुछ नकारात्मक प्रभाव होते हैं, परन्तु यह जाना जाता है कि ज्यादातर समय माता के शरीर में भ्रूण की कोशिकाएं माता की चोटों में चली जीती और ऊतकों को पुनर्जीवित करती हैं।

वे कहते हैं कि भ्रूण की कोशिकाएं ऊतकों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में एक पूर्ववर्ती कोशिका(एक मूल कोशिका जो उस अवस्था तक विकसित हुई है जहां वह एक निश्चित प्रकार की नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करती है) के रूप में कार्य करती है और माता की देह की सहायता करती है। दरअसल, यह साबित हुआ कि भ्रूण की कोशिकाएं स्तन कैंसर या आमवातीय संधिशोथ को ठीक या कम करने में एक महान भूमिका निभाती हैं। कुछ वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि पुरुषों की तुलना में स्त्रियों के लंबे समय तक जीवित रहने का कारण उन्हें भ्रूण से मिलेवाली ताजी कोशिकाएं हैं।

भ्रूण की कोशिकाएं, जो माता के शरीर में लाई गई हैं, माता के हृदय की क्षति को ठीक करने में भी सहायता करती हैं। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई मेडिकल सेंटर में हिना चौधरी सहित डॉक्टरों की एक टीम ने इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित करके कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्था का अनुभव किया है वे कार्डियोमायोपैथी या दिल के दौरे से दूसरों की तुलना में तेजी से ठीक हो जाती हैं, यह जांच किया कि भ्रूण की कोशिकाएं इसे सहायता प्रदान करती हैं या नहीं।

परिणामस्वरूप, नवंबर 2011 में, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की एक अकादमिक पत्रिका ने इस खोज को प्रकाशित किया कि गर्भावस्था के दौरान मादा चुहे के दिल में प्रवेश हुई बच्चे चुहे की कोशिकाएं, नए प्रकार की मायोकार्डियल कोशिकाएं बन गईं और उसके हृदय की क्षति को ठीक करने में सहायता प्रदान कीं। डॉक्टर चौधरी ने कहा, “माता के मस्तिष्क में प्रवेश करने वाली भ्रूण की कोशिकाएं भी नई तंत्रिका कोशिकाएं बन जाएंगी,” और यह भी कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि भ्रूण की कोशिकाएं माता के मस्तिष्क को बीमारी से बचाने में सहायता प्रदान करती हैं।”

एक माता अपने जीवन भर अपने बच्चे को अपने मस्तिष्क में रखकर रहती है।

हाल के दिनों तक, वैज्ञानिकों ने यह दावा किया था कि मनुष्यों के मामले में भ्रूण की माइक्रोचिमेरिक कोशिकाएं जो माता के शरीर में रखी गई थीं, मस्तिष्क को छोड़कर शरीर के सभी हिस्सों में पाई गईं; उन्होंने सोचा कि रक्त-मस्तिष्क बाधा के कारण माता और भ्रूण के बीच मानव मस्तिष्क में माइक्रोचिमेरिज्म का होना असंभव है।

सभी मनुष्यों के मस्तिष्क में रक्त-मस्तिष्क बाधा है। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह रक्त और मस्तिष्क को लपेटने वाले तरल के बीच एक बाधा है जो मस्तिष्क में प्रवेश करने का प्रयास करनेवाली बाहरी वस्तुओं से मस्तिष्क की रक्षा करती है। इसलिए, यह किसी भी प्रकार के औषधीय रसायनों, रोगजनक और हानिकारक पदार्थों को रोकती है जो रक्त के माध्यम से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की ओर जाते हैं। वैज्ञानिकों ने सोचा कि माता के मस्तिष्क में भ्रूण की कोशिकाओं के प्रवाह के लिए कोई जगह नहीं है क्योंकि यह रक्त-मस्तिष्क बाधा माता और भ्रूण के बीच कोशिकाओं के आदान-प्रदान को प्रतिबंधित करती है।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने एक मादा चूहे के मस्तिष्क में वाई गुणसूत्र को खोजा। इसमें कोई संदेह नहीं था कि गर्भावस्था के दौरान मादा चूहे को अपने नर भ्रूण से यह गुणसूत्र प्राप्त हुआ था। इससे, भ्रूण की कोशिकाओं के माता के मस्तिष्क में चले जाने की संभावना पर सवाल उठ गया और यदि ऐसा है, तो यह रक्त-मस्तिष्क बाधा को कैसे पार करता है, फ्रेड हचिन्सन कैंसर रिसर्च सेंटर ने एक प्रयोग शुरू किया। 26 सितंबर 2012 को, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका प्लोस वन(PLOS ONE) के माध्यम से अपने परिणाम प्रस्तुत किए। निष्कर्ष यह था कि वाई गुणसूत्र महिला के मस्तिष्क के कई क्षेत्रों में पाए गए जिन्होंने गर्भावस्था का अनुभव किया था। यह महिलाओं के मस्तिष्क में नर डीएनए की पहली खोज थी।

फ्रेड हचिन्सन कैंसर रिसर्च सेंटर में डॉ. विलियम एफ. एन. चान की टीम ने उन 59 महिलाओं के मस्तिष्क के ऊतकों को इकट्ठा किया जो 31 से 101 की उम्र में निधन हो गई थीं, और जांचा उनमें वाई गुणसूत्र मौजूद है या नहीं। परिणामस्वरूप, शोध टीम ने पाया कि लगभग 63% महिलाओं के मस्तिष्क में वाई गुणसूत्र थे। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान भ्रूण से वाई गुणसूत्र स्थानांतरित किए गए थे। डॉ. चान ने मीडिया में साझा किया, “जब एक महिला अपनी गर्भावस्था में होती है, तो रक्त-मस्तिष्क बाधा में बदलाव होता है, और पुरुष भ्रूण के ऊतक आसानी से उसके मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं। इस प्रयोग के माध्यम से, हमने पाया है कि इस तरह का माइक्रोचिमेरिज्म संभव है।”

शोध टीम ने यह भी कहा कि जिस तरह भ्रूण की कोशिकाएं माता की बीमारी को ठीक करने में सहायता प्रदान करती हैं, ठीक उसी तरह माता के मस्तिष्क में भ्रूण की कोशिकाएं अल्जाइमर या मनोभ्रंश से उबरने में सहायता प्रदान करती हैं। मनोभ्रंश से पीड़ित महिलाओं के मस्तिष्क में उन महिलाओं की तुलना में भ्रूण की कोशिकाएं कम होती हैं, जिन्हें मनोभ्रंश नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वाई गुणसूत्र यानी भ्रूण की कोशिकाओं ने माता के मस्तिष्क की रक्षा करने में सहायता प्रदान की है।

उन्होंने यह भी पता लगाया कि रक्त-मस्तिष्क बाधा से गुजरने वाली भ्रूण कोशिकाएं लंबे समय तक माता के मस्तिष्क में रहती हैं। इस प्रयोग में, सबसे बूढ़ी महिला जिसमें वाई गुणसूत्र मिला था, 94 वर्ष की थी। यह साबित होता है कि भ्रूण की कोशिकाएं गर्भावस्था के बाद कई दशकों तक भी माता के मस्तिष्क में रहती हैं। इसका अर्थ है कि माता अपने जीवन भर अपने बच्चे को अपने मस्तिष्क में रखकर रहती है।

माता, बच्चों के जीवन के लिए जीने के लिए प्रोग्राम की गई है

अधिकांश वैज्ञानिक एक ही निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जब एक स्त्री माता बनती है, तो वह पूरी तरह से अलग व्यक्ति बन जाती है। जब एक महिला गर्भवती हो जाती है, तो वह एक योद्धा का स्वभाव रखने लगती है मानो वह अपने बच्चे के लिए मौजूद होने वाला एक संरक्षक दूत हो। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भ्रूण की कोशिकाएं माता के शरीर में अपनी जड़ें जमाती हैं तब वे उस माता को ‘वंडर वुमन’ के समान एक योद्धा के रूप में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मनोवैज्ञानिक यह भी बताते हैं, “भ्रूण की कोशिकाएं माता की नसों में प्रवेश करती हैं और मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से में प्रवाहित होती हैं जो बच्चे की रक्षा करने की इच्छा को लाता है।”

मातृत्व एक मातृ प्रवृत्ति लाता है।

उस समय से जब माता के पास एक बच्चा होता है, वह अपने बच्चे के जीवन के लिए अधिक प्रयास करती है मानो वह केवल अपने बच्चे के लिए जीती हो। वह इस प्रक्रिया में प्राप्त होने वाले सभी दर्द और चोटों की पूरी तरह से उपेक्षा करती है। जब उसके बच्चों की बात आती है तब वह किसी भी तरह के दर्द से गुजरते हुए भी अपने बच्चों के लिए बलिदान करती है और यहां तक कि वह अपनी जान देने के लिए भी स्वैच्छिक होती है। ऐसा प्रेम और बलिदान केवल इसलिए संभव है क्योंकि वह एक माता है।

परमेश्वर ने एक बच्चे को अपनी माता के शरीर में नौ महीने तक रहने दिया, और उस समय की अवधि में, बच्चे की कोशिकाओं को मस्तिष्क सहित अपनी माता के शरीर के कई अंगों में बसाने दिया है। इसलिए, एक माता को इस तरह प्रोग्राम किया गया है कि वह अपने जीवन भर अपने शरीर और मस्तिष्क में अपने बच्चे की कोशिकाओं को रखकर केवल अपने बच्चों के लिए समर्पित करती है और खुद का जीवन का भी त्याग करती है।

इस तरीके से, एक माता की सृष्टि एक ऐसी व्यक्ति के रूप में की गई है जो अपने मृत्यु के पल तक केवल ख्याल, प्रेम और बलिदान के साथ अपने बच्चों की देखभाल करती और अपनी बच्चों के जीवन की रक्षा करती है।

“मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित होकर बालक उत्पन्न करेगी…” उत 3:16

“हव्वा… जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई” उत 3:20

एक माता को इस तरह प्रोग्राम किया गया है कि वह अपने बच्चे को नौ महीने की लंबी अवधि तक अपनी पेट में रखती है और गंभीर दर्द से पीड़ित होकर उसे उत्पन्न करती है, उसके बाद वह अपने बच्चे के जीवन की रक्षा करती है। मातृत्व जो एक महिला को स्वैच्छा से उसके बच्चे के लिए उसका जीवन भी त्याग देने देता है, इसके रहस्य का अनावरण करने के बाद हमने पाया है कि हमारी माताओं ने हमें अपने शरीर के हर अंगों में रखा है। उन्होंने अपने जीवन भर हमें अपने मस्तिष्क में रखा है।

संदर्भ
ईबीएस टीवी डॉक्यूमेंट्री, मदर शॉक भाग 2: ‘मां के मस्तिष्क में बच्चा है,’ 31 मई, 2011
जे. ली नेल्सन, तुम्हारी कोशिकाएं मेरी कोशिकाएं हैं, साइंटिफिक अमेरिकन, फरवरी 2008, पृष्ठ 72-79
फ्रेड हचिन्सन कैंसर रिसर्च सेंटर से की गई मीडिया रिपोर्ट, ‘महिलाओं के मस्तिष्क में पाया गया पुरुष का डीएनए,’ 26 सितंबर, 2012
विलियम एफ. एन. चान, ‘महिलाओं के मस्तिष्क में पुरुष माइक्रोचिमेरिज्म की उत्पत्ति’ प्लोस वन, 26 सितंबर, 2012
मेडिकल न्यूज टुडे, ‘महिला के मस्तिष्क में पुरुष का डीएनए है,’ 27 सितंबर, 2012
ली यंग-वान, ‘माता के मस्तिष्क में बेटा और बेटी रहते हैं,’ जोसन इल्बो, 10 अक्टूबर, 2012