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चर्च ऑफ गॉड का सत्य

चर्च ऑफ गॉड परमेश्वर के द्वारा दी गईं बाइबल की शिक्षाओं का पालन करता है।

क्या 'अलग' का अर्थ 'गलत' है?

चूंकि यह अलग है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि यह गलत है।
ऐसा प्रतीत होता है कि "अलग" और "गलत" का अर्थ एक समान है, लेकिन वे पूरी तरह से अलग हैं।
शब्दकोश शब्द "अलग" का वर्णन "एक समान नहीं" के रूप में करता है।
उदाहरण के लिए, सेब और संतरा अलग हैं।

शब्द "गलत" का अर्थ है "सही नहीं।

बहुत से लोग दोनों के बीच के अंतर को नहीं समझते हैं।
वे अपनी राय से अलग राय को गलत मानते हैं, और हठ करते हैं कि वे सही हैं।
जब वे मतभेदों को स्वीकार करने में विफल हो जाते हैं, तो वे अक्सर कलह में पड़ जाते हैं।

चर्च ऑफ गॉड अलग है

चर्च ऑफ गॉड बाइबल में वर्णित पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर पर विश्वास करता है।

हम यीशु के उदाहरण के अनुसार नई वाचा का फसह मनाते हैं और सातवां दिन शनिवार को सब्त का दिन मनाते हैं। स्त्रियां प्रार्थना करते समय और आराधना के दौरान ओढ़नी ओढ़ती हैं, लेकिन पुरुष अपने सिर पर कुछ भी नहीं पहनते। हम क्रूस की उपासना का इनकार करते हैं क्योंकि बाइबल के अनुसार यह एक मूर्ति है, और हम क्रिसमस नहीं मनाते क्योंकि 25 दिसंबर सूर्य देवता का जन्मदिन है।

इन पहलुओं में, चर्च ऑफ गॉड स्पष्ट रूप से दुनिया के कई अन्य चर्चों से अलग है।

न्याय का मानक बाइबल है।

परमेश्वर पर विश्वास करनेवालों के लिए सही और गलत के बीच के निर्णय का मानक एक चर्च का सिद्धांत या किसी के वचन नहीं हैं। सिर्फ इस कारण से कि बहुत से लोग उसका पालन करते हैं, वह सत्य नहीं बन सकता।

न्याय का मानक केवल बाइबल है। क्योंकि परमेश्वर का वचन जो मानव जाति को बचाने के लिए प्रदान किया गया है, सत्य और उद्धार का एकमात्र मार्ग है।

अनेक लोग परमेश्वर का वचन और स्वर्ग की अभिलाषा करते हुए सत्य और उद्धार की खोज करते हैं। हम आशा करते हैं कि आप पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर के पास आएं जो मानव जाति का नेतृत्व उद्धार और अनन्त जीवन की ओर करते हैं, ताकि आप सत्य खोज सकें और बिना मूल्य जीवन का जल प्राप्त कर सकें।

माता परमेश्वर

बहुत से लोग मानते हैं कि केवल एक परमेश्वर - पिता परमेश्वर है। परन्तु, बाइबल हमारे आत्मिक पिता और आत्मिक माता दोनों के बारे में गवाही देती है: "हे हमारे पिता तू जो स्वर्ग में है..."(मत्त 6:9), और "पर ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है"(गल 4:26)। चर्च ऑफ गॉड बाइबल के आधार पर पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर पर विश्वास करता है।

पिता परमेश्वर

चर्च ऑफ गॉड ईसाई धर्म का मूल सिद्धांत, त्रिएक पर दृढ़ता से विश्वास करता है। त्रिएक का अर्थ है पिता परमेश्वर, पुत्र परमेश्वर और पवित्र आत्मा परमेश्वर एक है चाहे परमेश्वर प्रत्येक युग में अलग-अलग नाम से कार्य करते हैं। यीशु पिता परमेश्वर यहोवा हैं जो नए नियम के समय में पुत्र परमेश्वर के रूप में आए, और आन सांग होंग पवित्र आत्मा परमेश्वर अर्थात् बाइबल की भविष्यवाणियों के अनुसार इस युग में दूसरी बार आए मसीह हैं।

स्वर्गीय परिवार और सांसारिक परिवार

'पिता' और 'माता' इस उपाधि का प्रयोग परिवार में किया जाता है। बाइबल कहती है कि परमेश्वर हमारे आत्मिक पिता(मत 6: 9) और हमारी आत्मिक माता(गल 4:26) हैं, और हम परमेश्वर की संतान हैं(2कुर 6:17-18)। जैसे आपका पृथ्वी पर एक परिवार है जो प्रेम का एक समुदाय है, वैसे ही स्वर्ग में भी आपका एक आत्मिक परिवार है - जो अनन्त प्रेम का एक समुदाय है। सांसारिक परिवार के सदस्य लहू से संबंधित हैं। उसी तरह, स्वर्गीय परिवार के सदस्य फसह द्वारा दी गई वाचा के लहू से संबंधित हैं।

शरीर में आने वाले परमेश्वर

ईसाई धर्म एक ऐसा धर्म है जो मूल रूप से उन परमेश्वर पर विश्वास करता है जो मानवजाति को बचाने के लिए शरीर में आते हैं। परमेश्वर सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ है। वह जब चाहें तब मनुष्य के रूप में आ सकते हैं। यीशु के विषय में जिनका 2,000 वर्ष पहले बालक के रूप में जन्म हुआ था, बाइबल कहती है परमेश्वर जो आदि में वचन थे, देहधारी हुए और हमारे बीच में डेरा किया। बाइबल में भविष्यवाणी की गई है कि मसीह, जो लोग उनकी बाट जोहते हैं उनके उद्धार के लिए दूसरी बार दिखाई देंगे(इब्र 9:28)। चूंकि मसीह का अस्तित्व हमेशा आत्मा में है, उनके दूसरी बार दिखाई देने का अर्थ है कि वह अपने प्रथम आगमन के समान शरीर में आएंगे।

फसह का पर्व

फसह जीवन का वह सत्य है जिसे परमेश्वर ने मानवजाति को अनन्त जीवन देने के लिए स्थापित किया। इस नाम का अर्थ है, "विपत्ति से पार होना।" बाइबल के अनुसार फसह पवित्र कैलेंडर में पहले महीने के चौदहवें दिन को गोधूलि के समय मनाया जाना चाहिए, जो सूर्य-कैलेंडर में मार्च या अप्रैल में पड़ता है। 2,000 वर्ष पहले यीशु मसीह लोगों को पाप और मृत्यु की जंजीर से बचाने आए और उन्हें रोटी और दाखमधु देकर जो उनकी देह और लहू को दर्शाता है, पापों की क्षमा और अनंत जीवन की प्रतिज्ञा की। उन्होंने कहा, "यह कटोरा मेरे उस लहू में... नई वाचा है।" जब हम यीशु के उदाहरण का अनुसरण करते हुए फसह मनाते हैं, तब हम परमेश्वर का मांस और लहू प्राप्त करते हैं और परमेश्वर की संतान बन जाते हैं।

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सब्त का दिन

आजकल, अधिकांश चर्च रविवार को आराधना मनाते हैं, लेकिन बाइबल सातवें दिन सब्त को परमेश्वर की आराधना करने के पवित्र दिन के रूप में वर्णन करती है। सब्त वह दिन था जब परमेश्वर ने छह दिन में आकाश और पृथ्वी की सृष्टि करके विश्राम किया। उन्होंने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्र ठहराया, और अपनी प्रजाओं को उसे मनाने की आज्ञा दी। ऐतिहासिक तथ्य और कैलेंडर दिखाते हैं सब्त आज के सात दिनों के सप्ताह की प्रणाली में शनिवार है।

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तीन बार में सात पर्व

परमेश्वर के पर्वों में साप्ताहिक पर्व सब्त और तीन बार में सात वार्षिक पर्व हैं: फसह, अखमीरी रोटी का पर्व, पुनरुत्थान का दिन, पिन्तेकुस्त, नरसिगों का पर्व, प्रायश्चित का दिन और झोपड़ियों का पर्व। ये सब यीशु द्वारा सिखाई गई नई वाचा के पर्व हैं और ये उनके तीन वर्ष के सुसमाचार के कार्य में मनाए गए थे। प्रत्येक पर्व में परमेश्वर के अनन्त जीवन, पापों की क्षमा, पुनरुत्थान और पवित्र आत्मा की आशीष शामिल है।

बपतिस्मा

बपतिस्मा एक ऐसी विधि है जिससे एक व्यक्ति का फिर से जन्म होता है, क्योंकि पाप की देह पानी में दफनाई जाती है। बाइबल के अनुसार, बपतिस्मा परमेश्वर के साथ एक वाचा अर्थात् उद्धार का चिन्ह है। बपतिस्मा विश्वास के जीवन की ओर पहला कदम है, और जिन लोगों का बपतिस्मा होता है उनके पास परमेस्वर की प्रजा के रूप में स्वर्ग की नागरिकता है। इस युग में, बपतिस्मा केवल तभी मान्य हो सकता है जब यह पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से दिया जाता है, जैसे यीशु ने कहा, "जाओ और सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।"

ओढ़नी की विधि

बाइबल के आधार पर, चर्च ऑफ गॉड में प्रार्थना करते समय या आराधना के दौरान पुरुष अपने सिरो को नहीं ढांकते हैं जबकि स्त्रियां ओढ़नी ओढ़ती हैं। 1कुरिन्थियों अध्याय 11 के अनुसार, ओढ़नी की विधि का पालन करना मसीह का अनुकरण करना है। यह चर्च को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए स्थापित की गई थी और यह परमेश्वर की सृष्टि के सिद्धांत को प्रतिबिंबित करती है।

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क्रूस एक मूर्ति है

जब लोग शब्द, "चर्च" सुनते हैं तब हर कोई क्रूस की कल्पना करता है। लेकिन चर्च ऑफ गॉड में कोई क्रूस नहीं है। प्रथम चर्च ने, जिसे यीशु ने स्थापित किया था और जहां प्रेरित जाते थे, क्रूस को कभी भी खड़ा नहीं किया न ही वहां क्रूस को विश्वास का प्रतीक मानने का सिद्धांत था। क्रूस रखना और उसमें अर्थ देना दस आज्ञाओं में से दूसरी आज्ञा "तू अपने लिए कोई भी मूर्ति खोदकर न बनाना," का उल्लंघन करना है। इतिहास से पता चलता है कि क्रूस का उपयोग कई प्राचीन धर्मों द्वारा विश्वास के प्रतीक के रूप में किया गया था। यह यीशु के समय में एक मृत्युदंड का यंत्र था। जैसे-जैसे ईसाई धर्म भ्रष्ट होता गया, क्रूस चर्च में लाया गया। चर्च ऑफ गॉड क्रूस की प्रतिमा को अस्वीकार करता है क्योंकि यह एक मूर्ति है, और मसीह को जिन्होंने क्रूस पर खुद को बलिदान किया, और उनके बहुमूल्य लहू के अर्थ को महत्व देता है।

क्रिसमस सूर्य देवता का जन्मदिन है

25 दिसंबर को क्रिसमस कहा जाता है और इसे यीशु के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। पूर्व और पश्चिम की परवाह किए बिना पूरी दुनिया उत्सव मनोदशा में होती है। लेकिन, चर्च के इतिहास के अनुसार, 25 दिसंबर यीशु का जन्मदिन नहीं, बल्कि रोम के सूर्य देवता का जन्मदिन है। जैसे-जैसे ईसाई धर्म भ्रष्ट होता गया, वह दिन यीशु के जन्मदिन से जुड़ गया। चर्च ऑफ गॉड क्रिसमस नहीं मनाता जिसका यीशु से कोई संबंध नहीं है।