WATV.org is provided in English. Would you like to change to English?

पूरीम

हामान ने सारे फारस[मादी-फारस] में हर यहूदी को मार डालने के दिन को “पूर(चिट्ठी)” डालकर नियुक्त किया(एस 3:7)। मगर उसी दिन जिसे हामान ने यहूदियों को मारने के दिन के रूप में चुना, एस्तेर और मोर्दकै ने हामान को पराजित किया(एस 9:1)। इस घटना का स्मरण करने का दिन पूरीम है। मूसा की व्यवस्था में तीन बार में सात पर्व हैं जो परमेश्वर ने मूसा के द्वारा स्थापित किए। लेकिन “पूरीम” इस्राएलियों का एक पर्व है जो तीन बार के सात पर्वों में शामिल नहीं है। आइए हम “पूरीम” की शुरुआत के बारे में देखें। 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि यहूदियों को बेबीलोन में बंदी बनाया गया था। हालांकि, बेबीलोन थोड़े समय के बाद फारस[मादी-फारस] के द्वारा नष्ट हो गया। इसलिए फारस…

यूनानी दर्शन

नया नियम उस यूनानी भाषा में लिखा गया था, जो उन दिनों में अंतर्राष्ट्रीय भाषा थी। दर्शन के लिए यूनानी शब्द “फिलोसोफिया”(φιλοσοφια) है, जिसका मतलब है, “बुद्धि से प्रेम करना।” हेलाज(यूनान) एक देश था जहां दर्शनशास्त्र प्राचीन समय से विकसित हुआ और बहुत से दार्शनिक जैसे कि सुकरात, प्लेटो, अरस्तू इत्यादि उत्पन्न हुए। कुरिन्थुस, इफिसुस और आर्डेन हेलाज के मशहूर नगर थे जहां प्रेरित पौलुस प्रचार किया करता था। प्रेरितों की पुस्तक में एक दृश्य है जहां प्रेरित पौलुस ने प्रचार करते समय इपिकूरी और स्तोईकी दार्शनिकों के साथ विवाद किया। तब इपिकूरी और स्तोईकी दार्शनिकों में से कुछ उससे तर्क करने लगे, और कुछ ने कहा, “यह बकवादी क्या कहना चाहता है?” परन्तु दूसरों ने कहा, “वह अन्य देवताओं…

रहब और अजगर

... क्या तू वही नहीं है जिसने रहब को टुकड़े टुकड़े किया था, जिसने अजगर को छेदा? क्या तू वही नहीं जिस ने समुद्र को अर्थात् गहिरे सागर के जल को सुखा डाला और उसकी गहराई में अपने छुड़ाए हुओं के लिए पार जाने का मार्ग निकाला था? यश 51:9 आइए हम अजगर और रहब के बारे में अध्ययन करें, जिन्हें परमेश्वर ने अतीत में टुकड़े टुकड़े किया था और अंतिम दिन में भी टुकड़े टुकड़े करेंगे। “रहब,” जो यशायाह 51:9 में प्रकट होता है, वह राहब(רחב) वेश्या नहीं है जिसने उन दो भेदियों को छिपाया था जिन्हें यहोशू ने कनान देश का भेद लेने के लिए भेजा था। एक इब्रानी नाम, “रहब(רהב)” एक पौराणिक कथा में एक समुद्री राक्षस…

गेहन्ना

1. एक जगह का नाम गेहन्ना इब्रानी शब्द उस “गेहिन्नोम”[हिन्नोम की घाटी] से निकला यूनानी शब्द है, जो प्राचीन यरूशलेम के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक संकरी घाटी है। इस्राएल के राजाओं के युग में यह बड़ी बदनाम जगह थी जहां एक देवता के लिए छोटे बच्चों को आग में जलाकर बलि चढ़ाया जाता था। उस समय, इस्राएली पराए देवता मोलेक(एक बैल के आकार की मूर्ति) के लिए बलि चढ़ाते थे। यह एक घृणित बलिदान था: वे आग से लोहे से बनी मूर्ति को गर्म करते थे, और फिर वे लोहे के लाल तपे दो हाथों पर अपने छोटे बच्चों को रखकर भस्म करते थे। “यहोवा की यह वाणी है: इसका कारण यह है कि यहूदियों ने वह काम किया है,…

निकिया की परिषद और अरियसवाद

325 ई. में, फसह के विवाद सहित मुख्य रूप से अरियसवाद के विवाद को निपटाने के लिए निकिया की परिषद की बैठक बुलाई गई। उस विवाद के कारण इतना लहू बहाया गया कि वह इतिहास में एक अंधकार का विषय बन गया है। अरियस का हठ मिस्र में अलेक्जेंड्रिया के चर्च में अरियस एक प्रेसबिटर के रूप में सर्वोच्च पदधारी व्यक्ति था। उसने एक अजीब सिद्धांत पर जोर देकर सार्वजनिक आलोचना पैदा की। वह इस प्रकार है: मसीह देहधारी लोगोस(ग्रीक में λóγoς, जिसका अर्थ है, “शब्द” या “सत्य”) मसीह परिवर्तन और पीड़ा के लिए सक्षम है। इसलिए, लोगोस परिवर्तनीय है और परमेश्वर के सदृश्य नहीं है। अरियस के हठ के अनुसार, यीशु परमेश्वर नहीं है, लेकिन सिर्फ एक जीव है,…

​झूठा दोष

1.कसदियों ने दानिय्येल के तीन साथियों पर दोष लगाया बेबीलोन के राजा, नबूकदनेस्सर ने घोषणा की कि जो मुंह के बल गिरकर सोने की मूर्ति को दण्डवत् न करेगा वह उसी घड़ी धधकते हुए भट्ठे में डाल दिया जाएगा। इसके बावजूद, दानिय्येल के तीन साथी, शद्रक, मेशक और अबेदनगो ने सोने की मूर्ति को दण्डवत् नहीं किया। उस समय, कुछ कसदियों ने जो उनसे ईर्ष्या करते थे, यह देखकर उन पर दोष लगाया और राजा को उन्हें दण्ड देने के लिए कहा। उसी समय कई एक पुरुष राजा के पास गए, और कपट से यहूदियों की चुगली खाई(दोष लगाने लगे, आइबीपी बाइबल)। दान 3:8 ※ कसदी दक्षिण बेबीलोन के एक क्षेत्र का नाम था। जब से कसदियों ने बेबीलोन पर…

पुराने नियम में बलिदान

बलिदान की विधियां, जो पुराने नियम के समय पवित्रस्थान में ही की जाती थीं, इतनी अधिक मुश्किल और जटिल थीं कि उस याजक के बिना जिस पर उनका संपूर्ण दायित्व था, कोई भी उनके बारे में विस्तार से नहीं जानता था। सिर्फ इतना ही नहीं, बलिदान के प्रकार, तरीके और नाम बराबर या एक जैसे थे, इसलिए उनका अंतर करना आसान नहीं था। चूंकि पुराने नियम के बलिदान की विधियों को सही ढंग से वर्गीकृत करना और समझाना कठिन है, इसलिए आइए हम कुछ बलिदानों की विधियों पर एक नजर डालें जो बाइबल में कई बार प्रकट हुईं और विश्वास के जीवन में हमारी मदद कर सकती हैं। 1. बलिदान के उद्देश्य के अनुसार वर्गीकरण: पापबलि, दोषबलि, मेलबलि 1) पापबलि…

छुड़ौती

“जैसे उसने अपेक्षा की, यीशु उन आत्माओं को बचाने के लिए जिन्होंने पाप किया था नीचे पृथ्वी पर शरीर में आए, और अपने शरीर को पापबलि के रूप में उनके लिए बलिदान किया। बाइबल कहती है, “पाप की मजदूरी मृत्यु है।” तो उन आत्माओं को बचाने के लिए जिन्होंने पाप किया था, पाप के बिना एक धर्मी मनुष्य को मरना चाहिए। प्राचीन व्यवस्था के अनुसार, अगर एक मनुष्य किसी पापी को छुड़ाता है, तो उसे पापी के बदले मरना चाहिए” (1रा 20:42)। सत्य की पुस्तक से उद्धरण “स्वर्गदूतों की दुनिया से आए मेहमान”— अध्याय 13: पहला आदम और अंतिम आदम 1. शाब्दिक अर्थ “छुड़ौती,” किसी व्यक्ति को छुड़ाने के लिए मांगी गई या दी गई रक्कम 2. इतिहास में छुड़ौती…

मसीह का दोषपत्र: “यह यहूदियों का राजा यीशु है”

हम सब, जो सत्य में रहनेवाले परमेश्वर के लोग हैं, अच्छे से जानते हैं कि स्वर्ग में किए गए हमारे पापों को क्षमा करने के लिए, यीशु छुड़ौती के रूप में क्रूस पर बलिदान हुए। तब, स्वर्ग के राज्य में हमने किस प्रकार का पाप किया? आइए हम यीशु के छुड़ौती बलिदान के द्वारा देखें कि हमारे पाप क्या थे, जिनके कारण हमें स्वर्ग से निकाल दिया गया। जब यीशु को क्रूस पर लटकाया गया, एक दोषपत्र उनके सिर के ऊपर लगाया गया, जिसमें लिखा था, “यहूदियों का राजा।” और उसका दोषपत्र उसके सिर के ऊपर लगाया, कि “यह यहूदियों का राजा यीशु है।” मत 27:37 जब यीशु का जन्म हुआ, तब यहूदिया रोमन साम्राज्य के द्वारा नियुक्त किए गए…

बाइबल की संरचना और विशेषताएं

1. बाइबल की भाषाएं “बाइबल” शब्द यूनानी भाषा में “βιβλος(Biblos = किताब)” शब्द से निकला है। (1) पुराना नियम इब्रानी भाषा में लिखा गया था। ※ पुराने नियम की कुछ पुस्तकें(एज्रा 4:8–6:18; 7:12–26; यिर्म 10:11; दान 2:4–7:28) उस अरामी[कसदी] भाषा में लिखी गई थीं जिसका उपयोग बेबीलोन में होता था। यह कहा जाता है कि बेबीलोन में बंदी बनाए जाने के बाद, यहूदी लोग इब्रानी और अरामी दोनों भाषाओं में बात करते थे। (2) नया नियम उस यूनानी भाषा में लिखा गया था जिसका उपयोग उस समय दुनिया भर में होता था। यूनानी भाषा पहली शताब्दी में रोमन साम्राज्य की आधिकारिक भाषा बन गई। ※ नया नियम इब्रानी या अरामी में नहीं, लेकिन यूनानी में इसलिए लिखा गया था, क्योंकि…

यीशु कौन हैं?

चौथी शताब्दी से लेकर आज तक, यीशु के स्वरूप को लेकर लगातार विवाद चल रहा है। कुछ चर्च त्रिएक से इनकार करते हुए यीशु को हमारी तरह सृष्ट किया गया एक जीव समझते हैं। कुछ चर्च कहते हैं कि यीशु एक स्वर्गदूत हैं। कुछ चर्च दावा करते हैं कि परमेश्वर और यीशु दोनों का उद्देश्य और इच्छा एक ही हैं, इसी कारण भले ही उन दोनों को एक जैसा माना जा सकता है, लेकिन वे दोनों एक नहीं हैं। क्यों सभी चर्चों में एक ही बाइबल को लेकर अलग–अलग व्याख्या है? यह इसलिए है क्योंकि वे पवित्र शास्त्र को जो पवित्र आत्मा की प्रेरणा से लिखा गया है, पाप से ढकी हुई शारीरिक आंखों से देखकर उसकी व्याख्या करते हैं।…

आत्मा के बारे में प्रेरितों के विचार

“क्या होता है जब मनुष्य मरता है?” “क्या मनुष्य के पास सच में आत्मा होती है?” “मृत्यु के बाद मनुष्य कहां जाता है?” ये अनगिनत लोगों के लिए लंबे समय से अनसुलझे सवाल थे। अनगिनत लोगों ने “मैं” के अस्तित्व के बारे में सोचा और इस पर अध्ययन किया, लेकिन कोई भी जवाब नहीं पा सका। यह न जानते हुए कि किसने “मुझे” बनाया है, उन्होंने आत्मा के विषय में जानने की लालसा को पूरा करने के लिए विभिन्न विचारों व दर्शनों को प्रस्तुत किया है। लेकिन आत्मा के बारे में जो ज्ञान मसीह के द्वारा सिखाया गया है, वह मानवजाति को यह जानने देता है कि वे कौन हैं, उनके अस्तित्व का मूल्य कितना है और उनके जीवन का…

परमेश्वर सिय्योन नगर में शरीर में वास करते हैं

सभी ईसाइयों को जो उद्धार और अनन्त जीवन की आशा करते हैं, एक चीज को अनदेखा नहीं करना चाहिए, और वह चीज है, परमेश्वर से मिलना। यशायाह नबी ने लिखा, “जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो।” इन वचनों के द्वारा, हम समझ सकते हैं कि हम परमेश्वर से सिर्फ तभी मिल सकते हैं जब परमेश्वर हमारे निकट हैं। तब, आइए हम खोजें कि परमेश्वर के निकट रहने का समय कब है, हम कहां परमेश्वर से मिल सकते हैं, और परमेश्वर कैसे हमें अपने लोग बनाते हैं और हमें उद्धार देते हैं। सिय्योन नगर – सच्चा चर्च जहां परमेश्वर निवास करते हैं हमारे पर्व के नगर…

भोजन जो हम खा सकते हैं, और भोजन जो हमें नहीं खाना है

यहूदी धर्म जो मूसा की व्यवस्था का पालन करता है, और ईसाई धर्म जो मसीह की व्यवस्था का पालन करता है, उनके बीच बहुत से अंतर हैं। उनमें से एक है, भोजन के बारे में नियम। आइए हम अदन वाटिका के समय से शुरू होकर मूसा की व्यवस्था के युग से गुजरकर प्रथम चर्च के युग तक, कालानुक्रम के अनुसार भोजन के नियमों का अध्ययन करें और फिर उस शिक्षा को देखें जिसका हमें इस नए नियम के युग में पालन करना चाहिए। हर युग में दिया गया भोजन 1. अदन वाटिका में दिया गया भोजन अदन वाटिका में, परमेश्वर ने मानवजाति को भोजन के लिए बीजवाले सब पौधे और सब फल दिए। फिर परमेश्वर ने उनसे कहा, “सुनो, जितने…

मूर्तियों से दूर रहोमूर्तियों से दूर रहो

मूर्ति एक दृश्य या अदृश्य प्रतिमा है, जिसे शैतान ने इसलिए बनाया है कि हम परमेश्वर से दूर होकर उसकी उपासना करें। एक झूठा सिद्धांत जो हमें सत्य का पालन करने से रोकता है, वह भी एक प्रकार की मूर्ति है। व्यापक अर्थ में हर चीज जिसे हम परमेश्वर से अधिक प्रिय मानते हैं, एक मूर्ति है। इस समय, आइए हम विस्तार से देखें कि मूर्ति क्या है। 1.दृश्य मूर्तियां “तू अपने लिए कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, या पृथ्वी पर, या पृथ्वी के जल में है। तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना...” निर्ग 20:4–5 परमेश्वर के द्वारा सृजा गया अंतरिक्ष असीम है; वह मानव ज्ञान से भी…

इब्रानी भाषा बोलनेवाले और यूनानी भाषा बोलनेवाले

उन दिनों में जब चेलों की संख्या बहुत बढ़ने लगी, तब यूनानी भाषा बोलनेवाले इब्रानी भाषा बोलनेवालों पर कुड़कुड़ाने लगे, कि प्रतिदिन की सेवकाई में हमारी विधवाओं की सुधि नहीं ली जाती। प्रे 6:1 प्रेरितों के 6वें अध्याय में इब्रानी भाषा बोलनेवाले और यूनानी भाषा बोलनेवाले हैं। आइए हम एक एक करके देखें कि इब्रानी भाषा बोलनेवाले और यूनानी भाषा बोलनेवाले कौन हैं। इब्रानी भाषा बोलनेवाले वे लोग थे, जो इब्रानी भाषा(प्रथम चर्च के दिनों में अरामी भाषा) का उपयोग करते थे, और यूनानी भाषा बोलनेवाले वे लोग थे, जो यूनानी भाषा का उपयोग करते थे। अरामी भाषा और यहूदी करीब 600 ईसा पूर्व में यहूदियों को बेबीलोन में बंदी बनाया गया था, जहां वे 70 वर्ष तक दासत्व में…

इस्राएल

1. याकूब का दूसरा नाम एक रात, परमेश्वर ने स्वप्न में याकूब से अपनी मां के भाई लाबान के घर को छोड़कर अपनी जन्मभूमि पर लौटने के लिए कहा। इसलिए याकूब अपने सभी परिवारवालों को और पशुओं को संग लेकर अपनी जन्मभूमि के लिए निकला। अपने घर लौटने के मार्ग पर, जब वह यब्बोक नदी पर पहुंचा, तो उसने अपने परिवारवाले और अपना सब कुछ नदी के पार सुरक्षित जगह में उतार दिया। तो याकूब अकेला रह गया, तब एक पुरुष आकर पौ फटने तक उससे मल्लयुद्ध करता रहा। जब उसने देखा कि वह याकूब पर प्रबल नहीं होता, तब उसकी जांघ की नस को छुआ, और याकूब की जांघ की नस उससे मल्लयुद्ध करते ही करते चढ़ गई। तब…

जीवन का पुनरुत्थान और दण्ड का पुनरुत्थान

आइए हम उस सत्य के द्वारा जो यीशु ने चेलों को सिखाया, जीवन के पुनरुत्थान और दण्ड के पुनरुत्थान के बारे में अध्ययन करें, और इस युग में जीवन के पुनरुत्थान का भागी होने का मार्ग जानें। इससे अचम्भा मत करो; क्योंकि वह समय आता है कि जितने कब्रों में हैं वे उसका शब्द सुनकर निकल आएंगे। जिन्होंने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे और जिन्होंने बुराई की है वे दंड के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे। यूह 5:28–29 यीशु के वचनों के द्वारा हम समझ सकते हैं कि जीवन का पुनरुत्थान है और दण्ड का पुनरुत्थान है। प्रेरित पौलुस ने भी गवाही दी कि दो प्रकार के पुनरुत्थान होंगे। और परमेश्वर से आशा रखता…

बादल और शरीर

पुराने नियम में मसीह के आने के बारे में बहुत सी भविष्यवाणियां थीं। 2,000 वर्ष पहले धार्मिक नेताओं के लिए यीशु को मसीह के रूप में स्वीकार करना बहुत मुश्किल था, क्योंकि वह गुप्त रूप से आए थे। इसलिए प्रेरित यूहन्ना ने इस प्रकार लिखा: “जो आत्मा मान लेती है कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया है वह परमेश्वर की ओर से है, और जो आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है (1यूह 4:2–3)।” यह दिखाता है कि उस समय यह विश्वास करना बहुत कठिन था कि मसीह शरीर में आए। इसलिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत जो प्रथम चर्च के संतों के पास था, वह यह था…

निवासस्थान

1. दस आज्ञाएं और निवासस्थान जब मूसा ने सीनै पर्वत पर पत्थर की पटियाएं पाईं जिन पर दस आज्ञाएं लिखी थीं, परमेश्वर ने उसे स्वर्ग का निवास दिखाया था। जब मूसा पर्वत पर से नीचे आया, तो उसने इस्राएल के लोगों को परमेश्वर के वचन कह सुनाए। उस समय वह निवास बनाने की जरुरत थी जहां दस आज्ञाओं की पटियाओं को रखा जा सके। इसलिए मूसा ने लोगों से निवास बनाने के लिए सोना, चांदी, मलमल, सूती कपड़ा जैसी चीजें इकट्ठी करने को कहा। लोग प्रतिदिन स्वेच्छा से भेंट लेकर आने लगे, और निवास बनाने के लिए इकट्ठी हुईं चीजें जरुरत से भी ज्यादा हो गईं, इसलिए मूसा ने उनसे और भेंट न लाने के लिए कहा। (निर्ग 35:4–36:7) बसलेल,…

निवासस्थान

19:25
0:00 19:25

प्लेबैक गति

1x

यह आवाज़ AI द्वारा उत्पन्न है। कुछ भिन्नताएँ हो सकती हैं।