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बादल और शरीर

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पुराने नियम में मसीह के आने के बारे में बहुत सी भविष्यवाणियां थीं। 2,000 वर्ष पहले धार्मिक नेताओं के लिए यीशु को मसीह के रूप में स्वीकार करना बहुत मुश्किल था, क्योंकि वह गुप्त रूप से आए थे।

इसलिए प्रेरित यूहन्ना ने इस प्रकार लिखा: “जो आत्मा मान लेती है कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया है वह परमेश्वर की ओर से है, और जो आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है (1यूह 4:2–3)।” यह दिखाता है कि उस समय यह विश्वास करना बहुत कठिन था कि मसीह शरीर में आए।

इसलिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत जो प्रथम चर्च के संतों के पास था, वह यह था कि मसीह शरीर में आए। आइए हम अध्ययन करें कि बाइबल मसीह के बादलों पर आने के विषय में कैसे बताती है जिसकी दानिय्येल ने भविष्यवाणी की थी, और प्रथम चर्च के संतों ने कैसे उन्हें स्वीकार कर लिया।

मैं ने रात में स्वप्न में देखा, और देखो, मनुष्य के सन्तान–सा कोई आकाश के बादलों समेत आ रहा था, और वह उस अति प्राचीन के पास पहुंचा, और उसको वे उसके समीप लाए। तब उसको ऐसी प्रभुता, महिमा और राज्य दिया गया, कि देश–देश और जाति–जाति के लोग और भिन्न–भिन्न भाषा बोलनेवाले सब उसके अधीन हों; उसकी प्रभुता सदा तक अटल, और उसका राज्य अविनाशी ठहरा। दान 7:13–14

दानिय्येल नबी ने जो यीशु के जन्म से करीब 600 वर्ष पहले मौजूद था, भविष्यवाणी की कि मसीह बादलों पर आएंगे, लेकिन यीशु असली बादलों पर नहीं आए जो आकाश में तैरते हैं, परन्तु वह पृथ्वी पर शरीर में जन्मे थे।

तब क्या इसका मतलब यह है कि दानिय्येल ने जिनके बारे में भविष्यवाणी की थी, वह यीशु नहीं थे? ऐसा नहीं है। मसीह जिनके बारे में दानिय्येल ने भविष्यवाणी की थी, निश्चय ही यीशु थे।

यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ…” Mt 28:18-20

और जैसे मेरे पिता ने मेरे लिये एक राज्य ठहराया है, वैसे ही मैं भी तुम्हारे लिये ठहराता हूं… लूक 22:29

वह यीशु थे जो बादलों समेत आए और जिन्हें अधिकार और राज्य दिया गया। वह शरीर में आए। तब क्यों दानिय्येल ने ऐसा स्वप्न देखा कि यीशु बादलों समेत आ रहे थे?

इसे समझने के लिए, आइए हम बाइबल की विशेषताओं को देखें।

ये सब बातें यीशु ने दृष्टान्तों में लोगों से कहीं, और बिना दृष्टान्त वह उनसे कुछ न कहता था, कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो: “मैं दृष्टान्त कहने को अपना मुंह खोलूंगा: मैं उन बातों को जो जगत की उत्पत्ति से गुप्त रही हैं (दृष्टान्त में) प्रगट करूंगा।” मत 13:34–35

यह लिखा है कि परमेश्वर जगत की उत्पत्ति से गुप्त रही बातों को प्रगट करने के लिए दृष्टान्तों का उपयोग करते हैं। यह एक बड़ा रहस्य है कि परमेश्वर अपनी पहचान छिपाकर पृथ्वी पर शरीर में आए। अगर परमेश्वर अपनी उजली ज्योति दिखाते हुए और स्वर्गीय सेना के विशाल समूह के द्वारा रक्षा पाते हुए गर्जन और तुरही की तीव्र ध्वनि के साथ आएं, तो कौन उनके सामने मुंह के बल झुककर दण्डवत् न करेगा? लेकिन अगर परमेश्वर मनुष्य के रूप में आएं जो सबसे शक्तिहीन और कमजोर है, तो कितने लोग उन्हें परमेश्वर मानकर स्वीकार करेंगे? सिर्फ वे लोग ही जो अपने पूरे हृदय से परमेश्वर से प्रेम करते हैं और जो परमेश्वर से जन्मे हैं, उन पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करेंगे।

यीशु शरीर पहनने से पहले महिमामय परमेश्वर थे। हालांकि जब वह इस पृथ्वी पर आए, उन्होंने अपनी महिमा छिपाई। उनमें बुद्धि और ज्ञान के सारे भण्डार छिपे, तो हमें यह कहने में कोई संकोच न होगा कि वह परमेश्वर का रहस्य थे।

उनके मनों में शान्ति हो और वे प्रेम से आपस में गठे रहें, और वे पूरी समझ का सारा धन प्राप्त करें, और परमेश्वर पिता के भेद को अर्थात् मसीह को पहचान लें। कुल 2:2

चूंकि परमेश्वर के रहस्यों में मसीह सबसे बड़ा रहस्य हैं, इसलिए उन्होंने अपने आगमन के तरीके को दृष्टान्तों में कहा, ताकि अपने पूरे हृदय से परमेश्वर से प्रेम रखने वाले के अलावा कोई व्यक्ति उन्हें न पहचान सके।

बादल पानी है

बाइबल के दृष्टान्तों में एक भी ऐसा दृष्टान्त नहीं है जो प्रकृति के सिद्धांत के विरुद्ध हो। बादलों का दृष्टान्त भी उस प्रकृति के सिद्धांत के अनुसार दिया गया है, जिसकी परमेश्वर ने सृष्टि की थी।

जब धरती से पानी वाष्पित होकर ऊपर उठता है और फिर वायुमंडल में संघनित होकर तैरता है, तो हम इसे बादल कहते हैं। बादल जलवाष्प (H2O) का संग्रहित रूप है। और नीचे जमीन के पास तैरने वाले बादल को “कोहरा” कहा जाता है। बाइबल ने शरीर धारण किए हुए लोगों की तुलना पानी से की है।

“… मैं तुझे उस बड़ी वेश्या का दण्ड दिखाऊं, जो बहुत से पानी पर बैठी है…” फिर उसने मुझ से कहा, “जो पानी तू ने देखे, जिन पर वेश्या बैठी है, वे तो लोग और भीड़ और जातियां और भाषाएं हैं। प्रक 17:1–15

बादल मूल रूप से पानी है। बहुत से पानी लोगों और भीड़ों को दर्शाते हैं जिनके पास शरीर है। फिर मसीह के बादलों पर आने की भविष्यवाणी के अनुसार यीशु का बालक के रूप में शरीर में जन्म लेना क्या यह बेहद उचित नहीं है?

प्रकृति में बादल की भूमिका क्या है? अगर हम वैज्ञानिक दृष्टि से बताएं, तो बहुत सी भूमिकाएं हो सकती हैं, लेकिन हम दो प्रमुख भूमिकाओं के बारे में सोच सकते हैं: पहली, वह प्रकाश को छिपाता है, और दूसरी, वह वर्षा बरसाता है।

बादलों की भूमिका – प्रकाश को छिपाना

परमेश्वर सृष्टिकर्ता हैं जिन्होंने आकाश और पृथ्वी और उसकी प्रत्येक वस्तु की रचना की। परमेश्वर वह प्रकाश हैं जो सूर्य से लाखों गुणा उज्ज्वल है। परमेश्वर के पास वह प्रताप और महिमा है जो हम जैसे पापी देखने की हिम्मत भी नहीं कर सकते।

प्राचीन समय में जब इस्राएलियों ने सीनै पर्वत पर दस आज्ञाओं को प्राप्त किया, परमेश्वर नीचे उतरे और पूरा पर्वत थरथरा उठा। जब सभी लोगों ने काली घटा और अंधकार देखा और गर्जन और नरसिंगे की ध्वनि सुनी, तब वे डर से कांप उठे। भले ही परमेश्वर उनके सामने दिखाई नहीं दिए, फिर भी उन्होंने मूसा से गिड़गिड़ाकर विनती की कि परमेश्वर उनसे सीधे बात न करें।

परमेश्वर के ईश्वरत्व के बारे में प्रेरित पौलुस ने कहा कि “अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्य ज्योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्य ने देखा और न कभी देख सकता है” (1तीम 6:16)। और प्रेरित यूहन्ना ने गवाही दी कि परमेश्वर ज्योति हैं (1यूह 1:5)।

फिर यदि परमेश्वर मनुष्यों के सामने, जो पाप के वस्त्र यानी शरीर पहने हुए हैं, अपने असली स्वरूप को, जैसा है वैसा ही प्रकट करें, तो कौन जीवित रहेगा? कौन उनके नजदीक जाने की और उन्हें देखने की हिम्मत कर सकेगा? शरीर पहने हुए मनुष्यों को बचाने के लिए, परमेश्वर अपनी महिमा की उज्ज्वल ज्योति को शरीर में छिपाकर पृथ्वी पर आए। जैसे बादल सूर्य के प्रकाश को छिपाता है, वैसे शरीर ने जिसे यीशु ने पहना, परमेश्वर की महिमा की ज्योति को छिपाकर बादल की भूमिका निभाई।

“देखो, एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,” जिसका अर्थ है – परमेश्वर हमारे साथ। मत 1:23

अगर परमेश्वर अपनी ज्योति को नहीं छिपाएंगे, तो वह कैसे हमारे साथ हो सकते हैं? परमेश्वर ने वह शरीर पहना जो केवल उन आत्माओं को पहनना चाहिए जिन्होंने स्वर्ग में पाप किया था, यह दिखाता है कि परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करते हैं।

यीशु के जन्म से करीब 700 साल पहले, यशायाह नबी ने भविष्यवाणी की थी कि यहोवा परमेश्वर इस पृथ्वी पर आएंगे, और एक नबी होगा जो यहोवा का मार्ग सुधारेगा।

किसी की पुकार सुनाई देती है, “जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो।”… बहुत ऊंचे शब्द से सुना, ऊंचे शब्द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, “अपने परमेश्वर को देखो!” देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ्य दिखाता हुआ आ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा; देखो, जो मजदूरी देने की है वह उसके पास है और जो बदला देने का है वह उसके हाथ में है। यश 40:3–10

जब यह भविष्यवाणी पूरी हुई, जैसे कि लोगों ने कल्पना की थी, यहोवा परमेश्वर वैसे ही शानदार रूप से या भड़कीलेपन से प्रकट नहीं हुए। और यहोवा का मार्ग सुधारने वाला भी ऐसे व्यक्ति के रूप में नहीं आया जिसे संसार के लोग बड़ा सम्मान दे सकते थे।

उन दिनों में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा: “मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।” यह वही है जिसकी चर्चा यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा की गई… “मैं तो पानी से तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूं, परन्तु जो मेरे बाद आनेवाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उसकी जूती उठाने के योग्य नहीं।” मत 3:1–11

यहोवा का मार्ग सुधारने के लिए पुकारनेवाला जिसके बारे में यशायाह ने भविष्यवाणी की थी, वह यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला था। और यहोवा परमेश्वर जो आनेवाले थे, वह यीशु थे जो शरीर में आए। जब यशायाह की भविष्यवाणी और उसकी वास्तविक पूर्णता की तुलना की जाए, तो दोनों में शारीरिक दृष्टिकोण से बड़ा अंतर है।

परमेश्वर अपने प्रेमी लोगों को बचाने के लिए पृथ्वी पर आए, लेकिन उन दिनों के धार्मिक नेता और समाज के मुखियाओं ने उन्हें नहीं पहिचाना और तुच्छ समझा और उन पर अत्याचार किया, क्योंकि परमेश्वर की महिमा की ज्योति उनसे छिपी थी।

यीशु के दिनों में बहुत से लोग थे, लेकिन ज्यादा लोगों ने यीशु को परमेश्वर के रूप में नहीं पहिचाना। हालांकि, प्रेरित यूहन्ना जैसे लोग, जिन्होंने परमेश्वर के अनुग्रह को महसूस किया, यीशु को परमेश्वर कहकर बुलाने से नहीं हिचकिचाए।

उसमें जीवन था और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति था। ज्योति अन्धकार में चमकती है, और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिसका नाम यूहन्ना था। वह गवाही देने आया कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया… यूह 1:4–14

जब परमेश्वर जो ज्योति हैं, पृथ्वी पर आए, उन्होंने शरीर से अपनी महिमा की ज्योति को छिपाया। इसलिए इस संसार के सृष्ट जीव उन्हें स्वीकार नहीं कर सके और सृष्टिकर्ता परमेश्वर के विरुद्ध खड़े रहने की गलती की। हालांकि, उन आत्माओं ने जिन्होंने परमेश्वर से प्रेम किया, यद्यपि परमेश्वर ने अपनी ज्योति छिपाई, लेकिन उस सुसमाचार की ज्योति को देखकर, जो परमेश्वर से धीरे से बह रही थी, परमेश्वर को स्वीकार किया।

बादलों की भूमिका – वर्षा बनाना

अंतरिक्ष में सब कुछ परमेश्वर की इच्छा के द्वारा बनाया गया है। परमेश्वर की इच्छा के द्वारा पृथ्वी पर सभी जीव इस तरह बनाए गए हैं कि वे पानी सोखने के द्वारा अपना जीवन जारी रखें। क्या होगा यदि बादल वर्षा न बरसाएं? बादल बादल के रूप में अपनी मुख्य भूमिका पूरी नहीं कर सकेंगे, और उसके कारण सभी जीव अपनी जान खो देंगे।

जैसे बादलों के पास वर्षा बनाने की भूमिका होती है, वैसे यीशु प्यास के कारण मर रही आत्माओं को जीवन का जल देने और उन्हें जीवित करने के लिए बादल (शरीर) पहनकर आए।

पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, “यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्रशास्त्र में आया है, ‘उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी’।” यूह 7:37–38

यीशु जो मसीह हैं, बादलों (शरीर) समेत आए और हमें वर्षा (पवित्र आत्मा) दी, लेकिन झूठे नबी और झूठे मसीह लोगों को जीवन का जल नहीं दे सकते। इसलिए उन्हें निर्जल बादल कहा गया है।

ये तुम्हारी प्रेम सभाओं में तुम्हारे साथ खाते–पीते, समुद्र में छिपी हुई चट्टान सरीखे हैं, और बेधड़क अपना ही पेट भरनेवाले रखवाले हैं; वे निर्जल बादल हैं, जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है… यहूद 1:12

यीशु परमेश्वर हैं

दानिय्येल नबी ने एक स्वप्न देखा कि परमेश्वर बादलों समेत पृथ्वी पर आ रहे थे, यह इस दृश्य को दर्शाता है कि परमेश्वर अपनी महिमा की ज्योति को छिपाकर शरीर में आते हैं और मानवजाति को जीवन का जल देते हैं। प्रथम चर्च के संतों ने, जिन्होंने यीशु को मसीह के रूप में स्वीकार किया, महसूस किया कि यीशु परमेश्वर का स्वरूप हैं, और भले ही यीशु सबसे कमजोर मानव शरीर में आए थे, लेकिन उन्होंने उनकी उपासना की।

… वचन परमेश्वर था… और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया… यूह 1:1–14

पुरखे भी उन्हीं के हैं, और मसीह भी शरीर के भाव से उन्हीं में से हुआ। सब के ऊपर परम परमेश्वर युगानुयुग धन्य हो। रो 9:5

प्रथम चर्च के संतों ने विश्वास किया कि यीशु स्वयं ही परमेश्वर हैं। लोगों ने जिन्होंने यीशु को महसूस नहीं किया, उन्हें नासरी या एक बढ़ई समझा, परन्तु लोगों ने जिन्होंने उन्हें महसूस किया, उनके शरीर में छिपे ईश्वरत्व को देखा।

क्योंकि उसमें ईश्वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है। कुल 2:9

प्रथम चर्च के संतों का विश्वास और सत्य इन अंतिम दिनों में रहने वाले हम लोगों के लिए बहुत अहमियत रखता है। इस युग में भी, पवित्र आत्मा और दुल्हिन, जो मसीह हैं, अपनी महिमा की ज्योति को छिपाकर बादलों पर आए हैं और जीवन की वर्षा दे रहे हैं। लोग जो बादलों पर आए मसीह को स्वीकार करते हैं, जहां कहीं भी पवित्र आत्मा और दुल्हिन उनकी अगुवाई करें, वहां वे उनका पालन करेंगे, और हर समय उन्हें महिमा और प्रशंसा देंगे।

आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले। प्रक 22:17