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अपने पुराने मनुष्यत्व को उतारकर नए मनुष्यत्व को पहिन लो

रिवरसाइड, सीए, अमरीका से विवियन पियर देवोंग

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जब मैं अपने पिछले दिनों को देखती हूं, शर्म के मारे अपना सिर झुक जाता है। पहले मैं घमंडी और अशिष्ट थी। मैं सफल होकर दूसरे लोगों के सामने अपनी डींग मारना चाहती थी। मैं केवल चाहती थी कि सभी चीजें अपनी योजना के अनुसार हों, और मैं असफलता की कल्पना ही नहीं करना चाहती थी। इस संसार में कोई भी मेरे जिद्दी स्वभाव को नहीं बदल सकता था। जब मैं पीछे मुड़कर अपने अतीत की ओर देखती हूं, मेरा बीता हुआ कल अंधकारमय था।

कुछ साल बीत गए और मुझे सुलैमान के समान महसूस होने लगा: “व्यर्थ ही व्यर्थ! व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है।” मेरे जीवन में एक ऐसा भी समय आया जब मैंने सोचा कि, ‘यदि मैं अभी मर जाऊं, तो इस पृथ्वी पर मेरा अस्तित्व नहीं होगा और मुझे काम करने की आवश्यकता भी नहीं होगी!’ पूरे तीन दिनों तक मैंने इसके बारे में सोचा था और मेरे मन में विचार आया कि मुझे किसी चर्च में जाकर बाइबल का अध्ययन करना चाहिए। परमेश्वर के अस्तित्व को जानकर मुझे शायद कुछ आशा मिल सके।

उसी समय में, जब किसी ने मेरे पास आकर पवित्र आत्मा की दुल्हिन के बारे में बताया, तो मुझे यह सोचकर बहुत आश्चर्य हुआ कि परमेश्वर मेरे विचारों को पढ़ते हैं। यही तो था जो मैं चाहती थी।

जब मैं ने सिय्योन में कदम रखा, मुझे लगा कि वहां के लोग पहले ही से मेरा परिवार थे। एक शाम को कुछ घंटों तक पढ़ने के बाद, मैंने सत्य को महसूस किया और खुशी के साथ नए जीवन की आशीष पाई। बाद में, स्वर्गीय पिता और माता के उदाहरण का पालन करने वाले सिय्योन के सदस्यों के अनुग्रहपूर्ण शब्दों और कार्यों को देखते हुए, मैं धीरे-धीरे करके बदलने लगी। मेरे बात करने का ढंग और मेरी आदतें बहुत ज्यादा बदल गईं। यहां तक कि अब, यदि कोई जो सत्य ग्रहण करने से पहले मुझे जानते हैं मुझसे मिले, तो वे मुझे पहचान नहीं पाएंगे। यह कितना अद्भुत है कि एलोहीम परमेश्वर ने मेरे लिए उत्पत्ति से पहले कार्य और योजनाओं का निर्माण किया था कि मैं एक ऐसी सन्तान में बदल जाऊं जैसा वे चाहते हैं!

मैंने मेहनत से परमेश्वर के वचनों का अध्ययन किया, और अलास्का में शॉर्ट टर्म मिशन के लिए गई; वहां मुझे आराधना के समय में पियानो बजाने की आशीष दी गई। मेरी छोटी बहन वेलेरी एक बढ़िया सुसमाचार प्रचारक बन गई। लेकिन यह शर्म की बात है कि चाहे मैंने परमेश्वर से बहुत अधिक आशीष पाई, फिर भी मैं संतुष्ट नहीं थी। जितना ज्यादा समय बीत गया, उतना अधिक चीजों के लिए लालची हो गई: मैं और ज्यादा आशीष, और ज्यादा फल प्राप्त करना चाहती थी।

मैंने अपनी परिस्थिति के बारे में सोचे बिना लगातार परमेश्वर से आशीष मांगी क्योंकि मैं केवल और ज्यादा सुसमाचार का कार्य करना चाहती थी। मैं सिर्फ यह सोचती रहती थी कि मैं अपने लिए क्या कर सकती हूं। कभी-कभी, मैं परमेश्वर के खिलाफ शिकायत करती थी, “क्यों मैं और ज्यादा नहीं पा सकती? क्यों मैं और ज्यादा फल उत्पन्न नहीं कर सकती?”

एक दिन, मैंने अपने आप में झांककर देखा कि क्या मेरे पास इतनी बहादुरी से परमेश्वर से यह मांगने की योग्यता थी। मैं केवल एक पापी थी जो स्वर्ग में गंभीर पाप करने के कारण इस पृथ्वी पर गिरा दी गई थी। पूरे ब्रह्मांड के राजा, स्वर्गीय पिता ने अपनी सन्तानों को जीवन देने के लिए अपना लहू बहाया, और बदले में कुछ भी नहीं मांगा। अपनी सभी सन्तानों को खोजकर स्वर्ग में वापस जाने के लिए स्वर्गीय माता कठोर पीड़ा सहते हुए प्रतिदिन प्रार्थना कर रही हैं। क्या मैंने कभी इसके बारे में विचार किया कि पिता और माता मुझसे क्या चाहते हैं और कैसे मैं उस भारी बोझ को हल्का कर सकती हूं जो परमेश्वर उठा रहे हैं? अपने खोए हुए भाइयों और बहनों को खोजने के लिए कितनी बार मैंने माता के बेचैन मन से प्रार्थना की है? मुझे अपने आप पर बहुत शर्म आ रही थी; मैं इतनी स्वार्थी थी कि मैं यह भी नहीं समझ पाई कि माता का मन कितना दुखता होगा।

अब से मैं माता के बोझ को हल्का करूंगी, चाहे वह थोड़ी ही क्यों न हो। मैं अपने लिए आशीष मांगने के बदले यह सोचते हुए सुसमाचार का प्रचार करूंगी कि कैसे मैं पिता और माता की सहायता कर सकती हूं। मैं हमें बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आए पिता और माता के बारे में मेहनत से प्रचार करूंगी।

अपने पुराने दिनों को सोचकर जब मैंने सत्य को महसूस या परमेश्वर को ग्रहण नहीं किया था, मुझे एहसास हुआ कि परमेश्वर ने मेरी अगुवाई की थी और यह भी कि वह मेरी इच्छा या मेरा चुनाव बिल्कुल नहीं था। मुझे दी गईं आशीषों के बारे में सोचने पर मैं अभिभूत हो जाती हूं।

जैसे परमेश्वर ने मुझे प्रेम दिया है, मैं सिय्योन में हर एक को प्रेम करना और उनकी सेवा करना चाहती हूं। मैं अपने पुराने मनुष्यत्व को उतार दूंगी और जब तक हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करें, नए मन के साथ नया जीवन जीऊंगी। मुझे सुसमाचार के मार्ग के बारे में जिस पर मुझे चलना चाहिए, समझाने के लिए मैं स्वर्गीय पिता और माता को सभी प्रशंसा और धन्यवाद देती हूं।