पहिलौठे का अधिकार और सौभाग्य

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हमारे सिय्योन के परिवार के सदस्यों ने संसार के सभी क्षेत्रों में बड़ी मेहनत से सुसमाचार के खेतों की जुताई की है। अब इस आत्मिक शरद् ऋतु में उनका पसीना और उनकी मेहनत बहुतायत से फल पैदा कर रही है। हम उन एलोहीम परमेश्वर को धन्यवाद और प्रशंसा चढ़ाते हैं जो भविष्यवाणियों के अनुसार बहुतायत से अच्छे फलों से हमें आशीर्वादित करते हैं।

मैं विश्वास करता हूं कि हम सभी सदस्यों ने दास की नहीं, लेकिन पुत्र की मानसिकता के साथ नई वाचा के सुसमाचार का प्रचार किया है, इसलिए परमेश्वर ने हमारे हृदयों को देखकर जगत की उत्पति से पहले तैयार किए गए अच्छे फलों से हमें सिय्योन भरने की अनुमति दी है। हम दास नहीं, लेकिन स्वर्ग के पहिलौठे हैं, जिनके लिए स्वर्गीय मीरास और सभी प्रकार के आत्मिक आशीर्वाद तैयार किए गए हैं। इस समय, आइए हम स्वर्गीय पहिलौठे के अधिकार का मूल्य और उसके सौभाग्य के बारे में विचार करें।

एसाव और याकूब

इसहाक और रिबका से जन्मे जुड़वां बच्चे, एसाव और याकूब का पहिलौठे के अधिकार के प्रति दृष्टिकोण बिल्कुल ही अलग–अलग था। एसाव ने, जिसने जन्म से ही पहिलौठे का अधिकार पाया था, नहीं समझा कि उसका पहिलौठे का अधिकार कितना बड़ा सौभाग्य है, और अपनी क्षणिक भूख को संतुष्ट करने के लिए एक कटोरा–भर मसूर की दाल के बदले उसे बेच दिया। हालांकि, उसके छोटे भाई, याकूब ने हमेशा पहिलौठे का अधिकार पाना चाहा और उसे पाने के मौके ढूंढ़ता रहा।

… एसाव तो वनवासी होकर चतुर शिकार खेलनेवाला हो गया, पर याकूब सीधा मनुष्य था और तम्बुओं में रहा करता था। इसहाक एसाव के अहेर का मांस खाया करता था, इसलिये वह उससे प्रीति रखता था; पर रिबका याकूब से प्रीति रखती थी। एक दिन याकूब भोजन के लिये कुछ दाल पका रहा था; और एसाव जंगल से थका हुआ आया। तब एसाव ने याकूब से कहा, “वह जो लाल वस्तु है, उसी लाल वस्तु में से मुझे कुछ खिला, क्योंकि मैं थका हूं।” इसी कारण उसका नाम एदोम भी पड़ा। याकूब ने कहा, “अपना पहिलौठे का अधिकार आज मेरे हाथ बेच दे।” एसाव ने कहा, “देख, मैं तो अभी मरने पर हूं: इसलिए पहिलौठे के अधिकार से मेरा क्या लाभ होगा?” याकूब ने कहा, “मुझ से अभी शपथ खा,” अत: उसने उससे शपथ खाई, और अपना पहिलौठे का अधिकार याकूब के हाथ बेच डाला। इस पर याकूब ने एसाव को रोटी और पकाई हुई मसूर की दाल दी; और उसने खाया–पिया, और उठकर चला गया। यों एसाव ने अपना पहिलौठे का अधिकार तुच्छ जाना। उत 25:27–34

एसाव ने अपने पहिलौठे के अधिकार को व्यर्थ समझा और अपना समय आमोद प्रमोद में बिताया, और वह केवल शिकार में लिप्त रहा। उसे शिकार करना पसंद था, और वह अक्सर अपने पिता को शिकार किए हुए जानवरों का मांस खिलाता था। हालांकि, वह तो केवल ऐसी वस्तु थी जो उस कार्य से पाई गई थी जो उसने अपने आनन्द के लिए किया था, और कुछ नहीं। इसके विपरीत, याकूब हमेशा तम्बू में रहकर अपनी माता की सहायता करता था। चूंकि वह एक पहिलौठे के समान घरेलू काम काज का ध्यान रखता था और अपनी माता की काम में सहायता करता था, इसलिए उसकी माता को परमेश्वर के कहे गए वचन याद आए कि, “जेठा छोटे का दास होगा,” और उसने अपने पुत्र याकूब की पहिलौठे का आशीर्वाद पाने में सहायता की। हम उत्पत्ति की पुस्तक में इन बातों को देख सकते हैं।

जो अपने पहिलौठे के अधिकार का मूल्य नहीं समझता वह उसे खोने पर भी उसकी परवाह नहीं करता, और जब उसका मूल्य उजागर किया जाता है, तब उसे अफसोस होना शुरू होता है।

जैसे ही यह आशीर्वाद इसहाक याकूब को दे चुका, और याकूब अपने पिता इसहाक के सामने से निकला ही था, कि एसाव अहेर लेकर आ पहुंचा… तब इसहाक ने अत्यन्त थरथर कांपते हुए कहा, “फिर वह कौन था जो अहेर करके मेरे पास ले आया था, और मैं ने तेरे आने से पहले सब में से कुछ कुछ खा लिया और उसको आशीर्वाद दिया? अब उसको आशीष लगी भी रहेगी।” अपने पिता की यह बात सुनते ही एसाव ने अत्यन्त ऊंचे और दु:ख भरे स्वर से चिल्लाकर अपने पिता से कहा, “हे मेरे पिता, मुझको भी आशीर्वाद दे!… क्या तू ने मेरे लिये भी कोई आशीर्वाद नहीं सोच रखा है?… हे मेरे पिता, क्या तेरे मन में एक ही आशीर्वाद है? हे मेरे पिता, मुझ को भी आशीर्वाद दे।” यों कहकर एसाव फूट फूटके रोया। उत 27:30–38

एसाव ने बाद में आशीर्वाद का मूल्य समझा, और यदि उसके लिए एक छोटा सा आशीर्वाद भी बाकी हो, तो उसे भी पाने की कोशिश की। जब उसे सभी आशीर्वादों को पाने का मौका दिया गया, तो उसने उनकी अवहेलना की, और जब आशीर्वाद किसी दूसरे को दे दिए गए, तो वह अपने दांत पीसते हुए, ऊंचे स्वर में रोने लगा। अपना पहिलौठे का अधिकार खो देने के बाद, एसाव ने ऊंचे स्वर से रोते हुए, अपने पिता से विनती की कि यदि उसके लिए कोई आशीर्वाद बाकी रहा हो तो उसे दे। हालांकि, दुर्भाग्य से उसके पिता के पास उसे देने के लिए कोई भी आशीर्वाद बाकी नहीं रहा था।

एसाव ने यह न समझते हुए कि उसका पहिलौठे का अधिकार कितना बड़ा आशीर्वाद है, उसकी उपेक्षा की। परिणाम में, वह कोई भी आशीर्वाद नहीं पा सका। कोई भी आशीर्वाद आसानी से नहीं दिया जाता: आशीर्वाद केवल उसी को दिया जाता है जो उसके मूल्य को समझता है और उसे पाने के लिए मेहनत करता है। याकूब ने आशीर्वाद का मूल्य समझ लिया था, इसलिए अपनी जांघ की नस के चढ़ जाने के दर्द के बावजूद, उसने आशीर्वाद को नहीं छोड़ा।(उत 32:24–30)

1,44,000 जन जिन्हें स्वर्ग का पहिलौठे का अधिकार दिया गया है

बाइबल की सभी भविष्यवाणियां हम परमेश्वर की सन्तानों के लिए लिखी गई हैं, जो आज जी रही हैं।(रो 15:4) परमेश्वर पुराने नियम के इतिहास को एक परछाई के रूप में दिखाकर, नई वाचा के प्रथम फलों को, यानी 1,44,000 जनों को यह सिखाते हैं कि हमारे पास कैसा विश्वास होना चाहिए।

फिर मैं ने दृष्टि की, और देखो, वह मेम्ना सिय्योन पहाड़ पर खड़ा है, और उसके साथ एक लाख चौवालीस हजार जन हैं, जिनके माथे पर उसका और उसके पिता का नाम लिखा हुआ है… वे सिंहासन के सामने और चारों प्राणियों और प्राचीनों के सामने एक नया गीत गा रहे थे। उन एक लाख चौवालीस हजार जनों को छोड़ जो पृथ्वी पर से मोल लिए गए थे, कोई वह गीत न सीख सकता था। ये वे हैं जो स्त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुऐ, एक कुंवारे हैं; ये वे ही हैं कि जहां कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं; ये तो परमेश्वर के निमित्त पहले फल होने के लिए मनुष्यों में से मोल लिए गए हैं। प्रक 14:1–4

1,44,000 जन प्रथम फल हैं, जिन्हें मनुष्यों में से मोल लिया गया है, और वे स्वर्ग के पहिलौठे हैं। परमेश्वर ने हमें पहिलौठे के अधिकार का आशीर्वाद दिया है। हम में से किसी को भी इस आशीर्वाद की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

परमेश्वर के द्वारा हमें दिया गया स्वर्गीय पहिलौठे का अधिकार हमें बहुत से सौभाग्य प्रदान करता है: सब्त के दिन परमेश्वर की आराधना करने का सौभाग्य, फसह का पर्व मनाने का सौभाग्य, इत्यादि। किसी राष्ट्रीय पर्व के दिन आयोजित समारोह में, जहां राष्ट्रपति भाषण देता है, पहले से बुलाए गए कुछ खास मेहमानों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। उसी तरह से, इस पृथ्वी पर छह अरब लोग रहते हैं, लेकिन केवल हम सिय्योन के लोगों को यह सौभाग्य प्रदान किया गया है कि सब्त और फसह जैसे परमेश्वर के पर्वों में परमेश्वर की आराधना कर सकें।

मलिकिसिदक की रीति के अनुसार दशमांश देना भी एक सौभाग्य है जो केवल हम स्वर्ग के पहिलौठों को दिया गया है, और नए गीतों के साथ नए नाम की स्तुति करने और नई यरूशलेम की महिमा में स्तुतिगान करने का सौभाग्य भी केवल हमें ही दिया गया है। आत्माओं को बचाने के लिए मेहनत करना, परमेश्वर के वचनों का उत्सुकता से अध्ययन करना इत्यादि अपने पहिलौठे के अधिकार के सौभाग्य का प्रयोग करना है।

आखिरकार परमेश्वर के द्वारा दी गई सभी व्यवस्थाएं और विधियां हमारे लिए सौभाग्य हैं, जिनका हम स्वर्ग के पहिलौठे प्रयोग कर सकते हैं। परमेश्वर ने ये सब बातें संसार के लोगों से छिपा रखी हैं और उन्हें केवल हम पर प्रकट किया है, क्योंकि ये सभी आशीर्वाद केवल स्वर्ग के पहिलौठों को दिए जाने हैं।

ये सब परमेश्वर से प्राप्त हुए सौभाग्य और विशेष उपहार हैं। फिर भी, यदि कोई इन सब का पालन करते हुए भी यह महसूस न करे कि इनसे उसे क्या आशीर्वाद दिए जाएंगे, तो वह व्यक्ति एसाव से बिल्कुल अलग नहीं होगा जिसने अपने पहिलौठे के अधिकार को नहीं समझा और जो केवल अपने सुख के लिए शिकार करने जाता था। यदि हम अपने पहिलौठे के अधिकार के सौभाग्य के बारे में गंभीरता से न सोचें और उनका प्रयोग न करें, तो हमारे स्थान वे लोग छीन लेंगे जो उसे पाने के लिए हर प्रकार की मेहनत करते हैं। हमें परमेश्वर के द्वारा दी गई किसी भी चीज की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि परमेश्वर का अनन्त राज्य आ जाने के बाद हम देर से इस बात का एहसास करते हुए अफसोस करें कि हमें दिया गया सब कुछ सौभाग्य है।

स्वर्ग के पहिलौठों को सौंपा गया आत्माओं को बचाने का सौभाग्य

परमेश्वर के स्वर्ग के पहिलौठों को दिए सौभाग्यों में सबसे बड़ा सौभाग्य आत्माओं को बचाने का है। इसलिए यीशु ने अपने प्रथम आगमन के समय स्वर्ग जाने से ठीक पहले, स्वर्ग के सभी पहिलौठों को प्रचार करने का सौभाग्य प्रदान किया।

यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।” मत 28:18–20

अब हम सब ऐसे समय में जी रहे हैं जब हम यीशु के कहे हुए वचन के अनुसार सब जातियों के लोगों को चेला बनाते हैं और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा देते हैं। उनकी आज्ञा के अनुसार, परमेश्वर के लोग अब संसार के सभी क्षेत्रों में जा रहे हैं और वहां सुसमाचार का प्रचार कर रहे हैं। वे सभी स्वर्ग के पहिलौठों को दिए गए सौभाग्य का प्रयोग कर रहे हैं।

चूंकि यह हमारा अपना सौभाग्य है, हमें इसकी उपेक्षा या अवहेलना नहीं करनी चाहिए। संसार के छह अरब लोगों में से केवल हम स्वर्ग के पहिलौठों को ही यह सौभाग्य दिया गया है कि हम नए नाम और नई यरूशलेम के नाम का प्रचार कर सकते हैं। चाहे हमारे पास सबसे बड़ा सौभाग्य है, यदि हम इसका मूल्य न समझें और इसे अमल में न लाएं, तो यह ठीक वैसा ही होगा जैसे हमने अपने सौभाग्य को छोड़ दिया हो।

इस बात को सुनिश्चित करके कि प्रचार करने का सौभाग्य केवल स्वर्गीय सन्तानों को ही दिया गया है, आइए हम याकूब की तरह हमें दिए गए पहिलौठे के अधिकार का मूल्य पूर्ण रूप से समझें और अपने सौभाग्य को अनुग्रहपूर्ण रीति से अमल में लाएं।

… क्योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है; पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं। 1थिस 2:1–4

परमेश्वर ने उन स्वर्ग के पहिलौठों को, जिन्हें वह योग्य ठहराते हैं, सुसमाचार के प्रचार का कार्य सौंपते हैं। परमेश्वर ने यह आज्ञा केवल अपनी प्रिय सन्तानों को दी है कि, ‘यरूशलेम की महिमा का पूरे संसार में प्रचार करो और लोगों को उन सौभाग्यों के बारें में बताओ जो केवल स्वर्गीय सन्तानों को दिए जाते हैं।’

हमें बचाने के लिए, जो मरने के लिए नियुक्त थे, परमेश्वर ने अपना जीवन त्याग दिया। वह हमसे कितना ज्यादा प्रेम करते हैं? परमेश्वर अपनी बहुमूल्य सन्तानों को कभी झुलसाने वाली धूप में तो कभी सूखे और जलरहित जगह में ले जाते हैं, ताकि अंत में वे आशीर्वाद पा सकें।(व्य 8:15–16) इस बात को मन में रखते हुए, हम सिय्योन की सन्तानों को परमेश्वर के द्वारा दिए गए सौभाग्यों का मूल्य समझना चाहिए और उन्हें अभ्यास में लाना चाहिए।

स्वर्ग के पहिलौठों के लिए अनन्त आशीर्वाद

परमेश्वर ने उन्हें सुसमाचार के प्रचार का कार्य सौंपा है जिन्हें वह योग्य ठहराते हैं। आइए हम दानिय्येल की पुस्तक से यह देखें कि यह उन पर कौन सा आशीर्वाद लाता है।

… परन्तु उस समय तेरे लोगों में से जितनों के नाम परमेश्वर की पुस्तक में लिखे हुए हैं, वे बच निकलेंगे। जो भूमि के नीचे सोए रहेंगे उन में से बहुत से लोग जाग उठेंगे, कितने तो सदा के जीवन के लिये, और कितने अपनी नामधराई और सदा तक अत्यन्त घिनौने ठहरने के लिये। तब सिखानेवालों की चमक आकाशमण्डल की सी होगी, और जो बहुतों को धर्मी बनाते हैं, वे सर्वदा तारों के समान प्रकाशमान रहेंगे। दान 12:1–3

जो बहुतों को धर्मी बनाते हैं, उनकी महिमा बहुत महान है। नई वाचा के सुसमाचार का प्रचार करने का सौभाग्य केवल हमें दिया गया है, और स्वर्गदूत भी इसकी ईर्ष्या करते हैं।(1पत 1:12) आइए हम कभी भी इस बहुमूल्य सौभाग्य को न खोएं।

इन दिनों बहुत से लोग, चाहे वे किसी भी जाति के हों और उम्र के हों, कसरत को लेकर काफी उत्सुक होते हैं। प्रचार करना एक आत्मिक कसरत है। परमेश्वर ने हमें सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य सौंपा है, ताकि हम आत्मिक रूप से मजबूत हो सकें और ज्यादा आशीर्वाद पा सकें। चूंकि प्रेरित पौलुस ने इस बात को समझ लिया था, उसने हमेशा प्रचारक के कार्य पर जोर देते हुए, अपना पूरा जीवन प्रचार करने के लिए समर्पित कर दिया।

परमेश्वर और मसीह यीशु को गवाह करके, जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करेगा, और उसके प्रगट होने और राज्य की सुधि दिलाकर मैं तुझे आदेश देता हूं कि तू वचन का प्रचार कर, समय और असमय तैयार रह… पर तू सब बातों में सावधान रह, दु:ख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर, और अपनी सेवा को पूरा कर… मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूं, मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा, और मुझे ही नहीं वरन् उन सब को भी जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। 2तीम 4:1–8

पौलुस हमें व्यर्थ चीजों में समय न गंवाते हुए, समय और असमय तैयार रहकर वचन का प्रचार करने के लिए प्रेरित करता है। यदि हम ऐसा करें, तो हमें अंत में अफसोस नहीं होगा, और परमेश्वर हम सब को जिन्होंने विश्वास की रखवाली की है, धर्म का मुकुट देंगे।

सामान्य रूप से, एक राजा ही मुकुट को पहनता है। परमेश्वर ने कहा है कि वह अपने उन लोगों को, जिन्होंने सब प्रकार की परेशानियों और तकलीफों में भी विश्वास बनाए रखा है, स्वर्ग में राज–पदधारी याजक बनाएंगे और उन्हें धर्म का मुकुट देंगे।

हम स्वर्ग के पहिलौठों को दिए गए सभी सौभाग्यों में से सबसे पहला और उत्तम सौभाग्य प्रचार करना है। हमें इस सौभाग्य को बोझ या विवशता में किया जाने वाला कार्य नहीं समझना चाहिए। केवल वे जो आनन्द के साथ अपने सौभाग्यों को अभ्यास में लाते हैं, स्वर्ग में राज–पदधारी याजक बन सकते हैं और राजाओं के राजा और प्रभुओं केप्रभु, स्वर्गीय पिता और माता की सेवा करते हुए, सर्वदा महिमा को भोग सकते हैं।

“मैं तुम को मनुष्यों के पकड़नेवाले बनाऊंगा”

प्रकाशितवाक्य 22:17 में हम यह देख सकते हैं कि हमारे पिता और माता पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में प्रकट होकर यह कहते हुए प्रचार करते हैं कि, “आओ! जो प्यासा हो वह आए।” प्रचार करना एक महान आशीर्वाद है, इसलिए हमारे पिता और माता स्वयं इस पृथ्वी पर नीचे आए और हमें प्रचार करने का नमूना दिखाया।

अब हम संसार की सभी जातियों के पास जाते हैं और उन्हें आत्मा और दुल्हिन की वह आवाज सुनाते हैं जो कहती है, “आओ!” परिणाम स्वरूप, बहुत सी आत्माएं भावुक होकर धन्यवाद के आंसुओं के साथ सत्य को ग्रहण कर रही हैं और वचन का अध्ययन कर रही हैं। ऐसे अच्छे समाचार प्रतिदिन यरूशलेम तक पहुंचते हैं।

जिन्होंने अभी अभी पहिलौठे का अधिकार पाया है, वे इस बात से बहुत ज्यादा अभिभूत हो जाते हैं कि उन्हें वह आशीर्वाद दिया गया है जिसकी उन्होंने लम्बे समय से लालसा की थी। तो हमें, जिन्होंने इस पहिलौठे के अधिकार को लम्बे समय से पाया है, उसका मूल्य और अधिक समझना चाहिए। हमें अपने आसपास दूसरे लोगों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। एसाव और याकूब जुड़वां भाई थे, और वे दोनों एक ही घर में रहते थे। हालांकि, याकूब ने अपने भाई एसाव का अनुकरण नहीं किया।

उद्धार पहले केवल यहूदियों के पास था, लेकिन परमेश्वर ने हम सब लोगों के लिए, यानी सब विदेशियों के लिए भी उद्धार के द्वार खोल दिए हैं, इसलिए आज हमें उद्धार दिया गया है। चाहे यह आशीर्वाद पहले से हमारे लिए निर्मित नहीं किया गया था, लेकिन हमने उसे पाने के लिए प्रयास किए। इसलिए परमेश्वर ने हमारे लिए ऐसा मार्ग खोल दिया है जिससे हम उसके लिए बल लगा सकें और उसे पा सकें। चूंकि हमने याकूब के समान होकर अपनी मेहनत के द्वारा इस पहिलौठे के अधिकार को प्राप्त किया है, हमें कभी भी उसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

उस समय से यीशु ने प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, “मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है।” गलील की झील के किनारे फिरते हुए उसने दो भाइयों अर्थात् शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। यीशु ने उन से कहा, “मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़नेवाले बनाऊंगा।” वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए। मत 4:17–20

मैं ने सुना है कि जब हमारे सिय्योन के परिवार के सदस्यों ने, जो अपने पहिलौठे के अधिकार के सौभाग्यों का इस्तेमाल करने के लिए विदेश में गए हैं, प्रचार के द्वारा जिन फलों को पैदा किया था उनके साथ आराधना के समय नए गीत गाए, तब उन्हें पतरस और दूसरे प्रेरितों की याद आई, और उन्होंने अभिभूत होकर आंसू बहाए। आज, हमारे स्वर्गीय पिता और माता ने हमें बुलाया है और हमें पहिलौठों के सौभाग्य प्रदान किए हैं। जो इन सौभाग्यों का इस्तेमाल नहीं करते, वे कभी नहीं जान सकते कि इससे कितनी भावनाएं पैदा होती हैं।

आइए हम एक मन बनें चाहे हम अपने देश में हों या विदेश में हों। अगर कोई सदस्य प्रतिकूल परिस्थितियों में हो, तो हम उसके लिए प्रार्थना करते हुए प्रचार के कार्य में सहभागी हो जाएं, ताकि हमारे पिता और माता की इच्छा शीघ्रता से सामरिया और पृथ्वी की छोर तक घोषित की जाए। पिता और माता ने हमें बुलाया है और हमारा मार्गदर्शन किया है, जिसकी वजह से आज हम यहां तक पहुंच सके हैं जहां आज हम हैं। आइए हम अंत तक, अनन्त स्वर्ग के राज्य तक उनका पालन करें। चूंकि परमेश्वर ने हमें प्रथम फल होने के लिए बुलाया है, हमें अपने पहिलौठे के अधिकार के सौभाग्यों का मूल्य समझते हुए और अनुग्रहपूर्ण रीति से उनका इस्तेमाल करते हुए, पृथ्वी के सभी लोगों के लिए एक अच्छा उदाहरण छोड़ना चाहिए और संसार को बचाना चाहिए।