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जहां कहीं भी पवित्र आत्मा हमारी अगुवाई करता है

प्रेरितों के काम 16:6-15

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पौलुस और उसके साथी अपनी प्रचार की यात्रा में फ्रूगिया और गलातिया(आज केंद्रीय तुर्की) प्रदेशों में से होकर मूसिया में गए, क्योंकि पवित्र आत्मा ने उन्हें एशिया में वचन सुनाने से मना किया। फिर उन्होंने बितूनिया जाने का जतन किया, लेकिन वहां भी उन्हें जाने नहीं दिया गया। अत: वे पश्चिम की ओर मुड़े और एशिया और यूरोप के बीच में स्थित त्रोआस की ओर गए।​

त्रोआस में रात के समय पौलुस ने एक मकिदुनी पुरुष का दर्शन देखा।

“पार उतरकर मकिदुनिया में आ, और हमारी सहायता कर।”

पौलुस ने अपने साथियों को वह दर्शन बताया। तब तुरन्त ही यह परिणाम निकालते हुए कि परमेश्वर ने वहां सुसमाचार का प्रचार करने उन्हें बुलाया है, उन्होंने जहाज पर चढ़कर मकिदुनिया जाने की ठान ली।

कुछ दिन तक वे फिलिप्पी में रहे, जो मकिदुनिया प्रान्त का मुख्य नगर था। और सब्त के दिन यह सोचते हुए कि प्रार्थना करने के लिए वहां कोई स्थान होगा, वे नगर-द्वार के बाहर नदी पर गए, और उन्होंने वहां एकत्र स्त्रियों को सत्य का प्रचार किया। वहीं लुदिया नामक थुआथीरा नगर की बैंजनी कपड़े बेचनेवाली एक स्त्री बड़े ध्यान से वचन सुन रही थी। परमेश्वर ने उसके हृदय के द्वार खोल दिए थे ताकि वह उन बातों पर ध्यान दे सके, और उसने अपने घराने समेत बपतिस्मा लिया। लुदिया के घराने से शुरुआत करके, नई वाचा का सुसमाचार पूरे यूरोप में फैलने लगा।

जब हमारी योजना पर आकस्मिक रूप से रोक दी जाती है, तब हम उदास होते हैं। अगर यही स्थिति कई बार दुहराई जाती है, तो हम निराश होते हैं और हार मानना चाहते हैं; हम पहले शिकायत कर सकते हैं।

प्रथम चर्च के प्रेरितों ने किसी भी अनपेक्षित स्थिति में शिकायत नहीं की या प्रचार करना नहीं रोका, लेकिन जैसे पवित्र आत्मा ने उनकी अगुवाई की, वैसे वे आगे बढ़े। चूंकि उन्होंने ऐसा किया, जहां कहीं भी वे गए, वे उन लोगों से मिल सके जिन्हें परमेश्वर ने तैयार कर रखा था, और उद्धार का नया इतिहास रचा। प्रथम चर्च के सुसमाचार के कार्य की उत्कृष्ट सिद्धि उस विश्वास की नींव पर आधारित थी जो धन्यवाद के साथ वहां जाता है जहां कहीं भी पवित्र आत्मा अगुवाई करता है।

चाहे हम ध्यान न देते हों, उन सभी मार्गों में जिन पर हम चलते हैं, और उन सभी चीजों में जो हम करते हैं, परमेश्वर की इच्छा है। जब हम मार्ग को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते या हमारी योजना के अनुसार चीजें काम नहीं करतीं, हमें निराश होने की जरूरत नहीं है। भले ही स्थिति हमारी अपेक्षा से भिन्न है, आइए हम पूरी तरह से विश्वास करें कि परमेश्वर हमेशा हमारी अगुवाई आशीष की ओर करते हैं, और धन्यवाद के साथ उनका पालन करें। क्योंकि जितनी कठिन प्रक्रिया होगी, उतना शानदार परिणाम हम पाएंगे।