उन गलतियों को कैसे न दोहराएं जो पछतावे का कारण बनती हैं

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सितंबर 2019 में, सियोल शहर में एक बस अचानक रुक गई। जिस चालक ने बस रोकी, उसने यात्रियों से क्षमा मांगी और बाहर भाग गया। यह 60 साल की एक महिला को बचाने के लिए था जो सड़क पर गिर गई थी।

कुछ अन्य राहगीर उसकी मदद करने की कोशिश कर रहे थे, फिर भी वह होश में नहीं आई थी। बस चालक ने तुरंत उसको सीपीआर देना शुरू कर दिया। कुछ मिनटों के बाद, वह होश में आई और उसने फिर से सांस लेना शुरू कर दिया। तब बस चालक ने वहां मौजूद एक व्यक्ति से कहा कि वह एम्बुलेंस आने तक उसके साथ रहे, और वह अपनी बस में लौट आया। यात्री बस चालक के उस कार्य से प्रभावित हुए जिसने त्वरित सोच से महिला की जान बचाई।

उसने गिरी हुई राहगीर को देखते ही तुरंत प्रतिक्रिया क्यों दिखाई, इसका कारण घटना के तुरंत बाद उसके साथ किए गए इंटरव्यू से पता चला।

“मैंने मार्च में अपनी पत्नी को एक स्ट्रोक की वजह से खो दिया। अब भी जब मैं यह सोचता हूं कि अगर मैं उसके साथ होता तो शायद वह जिंदा होती, तो मेरा गला भर आता है।”

यह उसकी पत्नी की रक्षा न कर पाने के पछतावे के कारण था। यदि वह हिचकिचाता और गिरी हुई महिला को बचाने का मौका चूक जाता, तो उसे फिर से पछतावा होता। लेकिन, वह बिना देर किए उस महिला के पास गया जिसे मदद की जरूरत थी, और अपने त्वरित कार्य से उसकी जान बचा ली।

हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा पल होता है जिसके लिए उसे पछतावा होता है। ‘यदि मैंने तब हार नहीं मानी होती,’ ‘यदि मैंने पहले ही कदम उठा लिया होता’ … यदि हम वहीं रुक जाते और कुछ नहीं करते, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि हम वही कार्य और निर्णय दोहराएंगे जिससे हमें पछतावा होगा।

यहूदा इस्करियोती अपने अपराध बोध पर काबू नहीं पा सका कि उसने केवल 30 चांदी के सिक्कों के लिए यीशु को बेच दिया था, और उसने स्वयं उद्धार के मार्ग से मुंह मोड़ लिया। दूसरी ओर, पतरस जिसने तीन बार यीशु का इनकार किया था, उसने अपने कमजोर विश्वास के लिए पश्चाताप किया, और अपना शेष जीवन केवल मसीह और सुसमाचार के लिए जिया।

हम फिर से पछताएंगे या पछतावे से सीख लेकर बेहतर भविष्य बनाएंगे, यह हमारे निर्णयों और कार्यों पर निर्भर करता है।