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माता के द्वारा सौंपा गया कार्य

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जो विश्वास के एक सही मार्ग पर चलते हैं, वे निश्चय ही एक विशेष बदलाव पाते हैं। जब लोग परमेश्वर पर विश्वास करना शुरू करते हैं, तब वे कैसे बच सकते हैं और स्वर्ग जा सकते हैं, इसके बारे में सोचते हैं। जैसे-जैसे वे नई वाचा के सत्य में अपने उद्धार के विषय में विश्वस्त हो जाते हैं, वे परमेश्वर के हृदय के सदृश होने लगते हैं जो सारी मानव जाति को बचाना चाहते हैं।

यदि पहले हम केवल अपने बारे में चिन्ता करते थे, तो अब हमें पूरे संसार की ओर देखना चाहिए। परमेश्वर ने हमें उद्धार और दूसरे बहुत से आशीर्वाद दिए हैं। यदि हम सत्य में हैं और पिता और माता पर विश्वास करते हैं, तो हमें उन दूसरी भेड़ों की भी देखभाल करनी चाहिए जो अब तक इस भेड़शाला में नहीं आईं।

हम कल जो थे, आज उससे भी ज्यादा बेहतर हो जाने चाहिए। हम पिछले वर्ष में जो थे, इस वर्ष में उससे भी ज्यादा बेहतर हो जाने चाहिए। परमेश्वर की सन्तान के रूप में, जिनके पास एक परिपक्व विश्वास है, हमें इसके बारे में सोचना चाहिए कि हम कैसे संसार को बचा सकते हैं और कैसे आशीष के मार्ग की ओर सब लोगों की अगुआई कर सकते हैं। यह हमारे स्वर्गीय पिता और माता के द्वारा हमें सौंपा गया कार्य है।

माता के द्वारा सौंपा गया कार्य

कई साल पहले मर गए एक मशहूर कोरियाई कवि जो ब्यंग ह्वा ने अपनी मृत्यु से पहले अपनी कब्र के पत्थर पर निम्न कविता लिखी थी;

“माता, मैं आपके द्वारा सौंपे गए कार्यों को करने के लिए इस पृथ्वी पर पैदा हुआ था। अब मैं आपके सभी कार्यों को पूरा करके आपके पास लौट आया हूं।”

उसकी कब्र के पत्थर पर अंकित की गई यह छोटी सी कविता हमारे हृदयों पर एक गहरा प्रभाव छोड़ती है। पुराने नियम के सभी विश्वास के पूर्वज, नए नियम के सुसमाचार के प्रचारक, और आज हम सब भी परमेश्वर के द्वारा सौंपे गए कार्य को पूरा करने के लिए इस पृथ्वी पर पैदा हुए हैं।

हमें ऐसी मूर्ख सन्तान नहीं बननी चाहिए जो इस संसार में उसे सौंपा गया कार्य करने के लिए जन्म लेने पर भी, इस बात को पूर्ण रूप से भूलकर कि वह क्यों यहां आया है, अपना पूरा समय सांसारिक मोह-माया में फंसकर व्यतीत करे और सूर्यास्त होने के बाद घर वापस जाए। यदि माता-पिता अपनी सन्तानों को कुछ कार्य करने के लिए बाहर भेजें, लेकिन यदि संतान अंधेरा होने तक वापस न लौटें, तो इससे केवल माता-पिता को चिन्ता ही होगी।

इस संसार में शायद तीन प्रकार के लोग होते हैं: वे जो बाजार में प्रदर्शित होनेवाली कलाबाजी में आनन्द मनाते हुए अपना पूरा समय व्यतीत करते हैं, और वे जो उन्हें सौंपे गए कार्यों को ईमानदारी से पूरा करते हुए समय व्यतीत करते हैं, और वे जो अपने कार्यों में व्यस्त रहने के कारण उन्हें सौंपे गए कार्यों के बारे में सोचते भी नहीं हैं। तीर के समान समय तीव्र गति से बीत रहा है। हमारे जीवन में संध्या और रात भी निश्चय ही आएगी, तब हम चाहें या न चाहें, हमें अपने अनन्त स्वर्गीय घर में वापस लौटना ही होगा।

यदि इस पृथ्वी पर हमारा जन्म माता का कार्य करने के लिए हुआ हो, तो हमें ईमानदारी के साथ उनके कार्य को पूरा करना चाहिए, ताकि अंत में हम कह सकें कि, “माता, हमने आपके कार्य को पूरा किया है और अब आपके पास लौट आए हैं।” 2,000 साल पहले, जब प्रेरित पौलुस ने अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखा था, तो वह विश्वास के साथ यह कह सका था कि अब स्वर्ग में उसके लिए धर्म का मुकुट तैयार किया गया है क्योंकि उसने अपनी दौड़ पूरी कर ली है(2तीम 4:1-8)।

विश्वास के पूर्वजों के इतिहास के द्वारा, जिन्होंने परमेश्वर के कार्य को ईमानदारी के साथ किया था, हमें अपने आपको जांचना चाहिए कि हमने माता के द्वारा सौंपे गए कार्य को ईमानदारी के साथ पूरा किया है या नहीं।

विश्वास के पूर्वज जिन्होंने परमेश्वर के कार्य को ईमानदारी के साथ पूरा किया

दूसरे शब्दों में, परमेश्वर के द्वारा सौंपा गया कार्य परमेश्वर से दिया गया मिशन है। प्रत्येक युग में, परमेश्वर ने विश्वास के पूर्वजों को कोई न कोई विशेष मिशन सौंपा था।

फिर यहोवा ने कहा, “मैं ने अपनी प्रजा के लोग जो मिस्र में हैं, उनके दु:ख को निश्चय देखा है… इसलिए अब सुन, इस्राएलियों की चिल्लाहट मुझे सुनाई पड़ी है, और मिस्रियों का उन पर अन्धेर करना भी मुझे दिखाई पड़ा है। इसलिये आ, मैं तुझे फिरौन के पास भेजता हूं कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए।” निर्ग 3:7-10

ऊपर के वचनों में, हम देख सकते हैं कि परमेश्वर ने मूसा को यह कार्य सौंपा कि वह इस्राएलियों को मिस्र के दासत्व से छुड़ाकर कनान देश तक उनकी अगुआई करे। मूसा ने इस कार्य को ईमानदारी के साथ किया। मिस्र के दासत्व में पड़े इस्राएलियों के एक नेता के रूप में, वह मिस्र के राजा, निरंकुश सत्ताधारी फिरौन के सामने भी खड़ा हो गया, और इस्राएलियों को मिस्र से बाहर निकाल ले आया। उसके बाद जंगल में सब प्रकार की मुसीबतें और लोगों की बहुत सी शिकायतों के बावजूद, वह उन्हें प्रतिज्ञा किए हुए कनान देश की सीमा तक ले आया। परमेश्वर के कार्य को ईमानदारी के साथ करने के कारण, वह परमेश्वर के नबी के रूप में परमेश्वर के आशीर्वादों को प्राप्त कर सका।

केवल मूसा नहीं, परन्तु यहोशू को भी परमेश्वर से कार्य दिया गया था।

… यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा, “मेरा दास मूसा मर गया है; इसलिए अब तू उठ, कमर बांध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार होकर उस देश को जा जिसे मैं उनको अर्थात् इस्राएलियों को देता हूं। उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात् जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हें दे देता हूं… तेरे जीवन भर कोई तेरे सामने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोड़ूंगा। इसलिये हियाव बांधकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा।” यहो 1:1-6

जब मूसा ने इस पृथ्वी पर परमेश्वर के कार्य को समाप्त किया, तो परमेश्वर ने यहोशू को यह कार्य दिया कि वह कनान देश को अपने वश में कर ले जिसमें दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, और देश को इस्राएल के गोत्रों के अनुसार बांटे। परमेश्वर की आज्ञा का पालन करते हुए, यहोशू ने इस्राएलियों के अधिकार के कनान की भूमि से सभी विदेशियों को निकाल दिया, ताकि इस्राएली वहां बस सकें। इस तरह से, उसने परमेश्वर के कार्य को ईमानदारी के साथ पूरा किया। इन सब बातों का वर्णन पुराने नियम की यहोशू की पुस्तक में किया गया है।

विश्वास के पूर्वजों के सभी इतिहास इस बात की गवाही है कि उन्होंने अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि से परमेश्वर के द्वारा उन्हें सौंपे गए कार्यों को किया था।

… यहोवा तुझे यह भी बताता है कि यहोवा तेरा घर बनाए रखेगा। जब तेरी आयु पूरी हो जाएगी, और तू अपने पुरखाओं के संग सो जाएगा, तब मैं तेरे निज वंश को तेरे पीछे खड़ा करके उसके राज्य को स्थिर करूंगा। मेरे नाम का घर वही बनवाएगा… 2शम 7:11-14

ऊपर के वचनों में, परमेश्वर ने दाऊद को बताया है कि उन्होंने सुलैमान को उनके लिए भवन बनाने को चुन लिया है। परमेश्वर का भवन बनाना, यह परमेश्वर के द्वारा सुलैमान को सौंपा गया एक कार्य था। सुलैमान ने उत्सुकता के साथ परमेश्वर के इस कार्य को पूरा किया; परमेश्वर का भवन बनाने में उसे सात वर्ष लगे। भवन का निर्माण पूरा होने पर, उसने परमेश्वर को बलिदान चढ़ाया। परमेश्वर उसके बलिदान से प्रसन्न हुए, और परमेश्वर का तेज मंदिर में भर गया(2इत 5:1-14)।

परमेश्वर के द्वारा हमें सौंपा गया कार्य

विश्वास के पूर्वजों के इतिहास के द्वारा, हमें यह समझना चाहिए कि आज हम यहां क्यों हैं। जैसा कि जो ब्यंग ह्वा नामक कवि की कब्र के पत्थर पर लिखा गया था, हम सब भी इस पृथ्वी पर माता का कार्य करने के लिए आए हैं।

आज इस युग में हमें सौंपा गया माता का कार्य क्या है? आइए हम इससे संबंधित कुछ वचनों को देखें और सोचें कि क्या हम माता के कार्य को ईमानदारी के साथ पूरा कर रहे हैं या नहीं।

और उन बन्दियों के पास जाकर, जो तेरे जाति भाई हैं, उन से बातें करना और कहना, ‘प्रभु यहोवा यों कहता है;’ चाहे वे सुनें, या न सुनें… हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तुझे इस्राएल के घराने के लिए पहरुआ नियुक्त किया है; तू मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चिताना। यहेज 3:11, 17

यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।” मत 28:18-20

आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले। प्रक 22:17

आत्मा और दुल्हिन इस संसार के सभी लोगों से कहते हैं कि, “आओ!” वे कहते हैं कि, “सिय्योन में, पिता और माता की बांहों में आओ, और जीवन का जल सेंतमेंत लो।” परमेश्वर के इस समाचार को सभी जातियों को सुनाना ही माता के द्वारा हमें दिया गया कार्य है।

हमें सामरिया और पृथ्वी की छोर तक जाना चाहिए, अपने खोए हुए भाइयों और बहनों तक पिता और माता की आवाज पहुंचानी चाहिए, और उन्हें स्वर्ग के राज्य में ले जाना चाहिए। यह एक ऐसा कार्य है जो किसी दूसरी पीढ़ी या युग में किसी और को नहीं, लेकिन हमें इस युग में करना है। उन सब लोगों के पास जाकर जिन्होंने अब तक सत्य को ग्रहण नहीं किया है, और उन्हें उस जीवन के जल की ओर ले आकर जो आत्मा और दुल्हिन देते हैं, आइए हम परमेश्वर की सन्तान के रूप में ईमानदारी से इस कार्य को पूरा करें। आज नहीं तो कल, हमें स्वर्ग में वापस लौटना है। हम में से प्रत्येक को पिता और माता के द्वारा सौंपे गए कार्य को ईमानदारी से पूरा करना चाहिए, ताकि हम सब कह सकें कि, “पिता और माता, हम आपके सौंपे कार्य को पूरा करने के बाद वापस लौटे हैं।”

यदि हम परमेश्वर के कार्य को न करते हुए केवल समय को व्यर्थ गंवाएंगे, तो परमेश्वर को क्या उत्तर देंगे? परमेश्वर के सामने हम कितना अपराधी और शर्मिंदा महसूस करेंगे? मूसा, यहोशू, और पौलुस के समान जिन्होंने परमेश्वर के सौंपे हुए कार्यों को ईमानदारी से पूरा किया था, हमें भी परमेश्वर के सौंपे हुए कार्यों को पूरा करना चाहिए, ताकि हम में से प्रत्येक अंत में विश्वास के साथ ऐसा कह सके कि, “मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, और अब मेरे लिए धर्म का मुकुट तैयार किया गया है।”

मसीह के उदाहरण और शिक्षा का पालन करो

जब हम संसार को बचाने के कार्य को करते हैं, तो हमें मसीह के उदाहरण का पालन करना चाहिए, जो खोए हुओं को ढूंढ़ने और उनका उद्धार करने स्वयं पृथ्वी पर आए थे।

भोर को दिन निकलने से बहुत पहले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। तब शमौन और उसके साथी उसकी खोज में गए। जब वह मिला, तो उससे कहा, “सब लोग तुझे ढूंढ़ रहे हैं।” उसने उनसे कहा, “आओ; हम और कहीं आसपास की बस्तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं।” अत: वह सारे गलील में उनके आराधनालयों में जा जाकर प्रचार करता… मर 1:35-39

मसीह ने हमें स्वर्ग की अनन्त महिमा में प्रवेश करने का रास्ता दिखाया, और हमें यह सिखाया कि कैसे हम एक धर्मी और आशीषित जीवन जी सकते हैं, और हमें प्रचार करने का उदाहरण दिखाया। अंत में देखा जाए, तो वह प्रचार ही था जिससे परमेश्वर अति प्रसन्न हुए, जिसे उन्होंने सबसे उत्तम समझा, जिसे उन्होंने स्वयं किया और हमें सौंपा।

प्रचार के माध्यम का प्रयोग किए बिना, हम न तो अपने खोए हुए भाइयों और बहनों को ढूंढ़ सकते हैं और न ही संसार को बचा सकते हैं। इसलिए मसीह ने उन्हें, जो बेकार की चीजों में बंधकर व्यर्थता और निराशा में जी रहे थे, इस सुसमाचार का प्रचार किया कि स्वर्ग के राज्य का अस्तित्व है, और उन्हें जीवन के सही अर्थ और मूल्य को समझाया।

यदि हम सच में परमेश्वर के साथ रहते हैं, तो आइए हम वही कार्य करें जो परमेश्वर ने किए थे। मसीह की दिलचस्पी केवल संसार को उद्धार दिलाने में थी; उन्होंने सुबह जल्दी उठकर प्रार्थना करते हुए दिन शुरू किया, और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करते हुए, सभी गांवों और शहरों में घूमे। यह सब हमारे लिए व्यावहारिक सबक है।

मसीह जो हमारा उदाहरण है, उनका अनुकरण करते हुए हमें भी संसार को बचाना चाहिए और इसके बारे में सोचना चाहिए कि कैसे संसार के सभी लोगों की आशीषित जीवन की ओर अगुआई की जा सकती है। चूंकि हमारे पिता ने हमसे यरूशलेम माता का पालन करने और उनकी महिमा पूरे संसार में फैलाने के लिए कहा है, हमें पिता के द्वारा दिए गए इस कार्य को ईमानदारी के साथ पूरा करना चाहिए।

छह दिनों की उत्पत्ति के वर्णन में, परमेश्वर ने हव्वा को अंतिम दिन में बनाया था; और अब 6,000 वर्षों की उद्धार की योजना के अंत में, परमेश्वर ने माता को हम पर प्रकट किया है और हम से कहा है कि हम सामरिया और पृथ्वी की छोर तक माता की घोषणा करें। मैं आप सब सिय्योन के लोगों से उत्सुकता से विनती करता हूं कि आप सब परमेश्वर की सन्तान बनने का दृढ़ संकल्प करें जो हर बात में परमेश्वर के सदृश हैं, और एक मन होकर परमेश्वर का कार्य उत्सुकता से पूरा करते हुए संसार को बचाएं।

माता के द्वारा सौंपा गया कार्य जो हम प्रेम और एकता के साथ पूरा कर सकते हैं

माता ने हमें अपना कार्य सौंपते हुए यह भी सिखाया है कि हम कैसे इस कार्य को अच्छे से पूरा कर सकते हैं। “आपस में मिलजुल कर रहो, एक-दूसरे की परवाह करो, और दूसरे के लिए त्याग करने को तत्पर रहो। ऐसा करते हुए, तुम्हारे खोए हुए भाई-बहनों को ढूंढ़ो।” माता के इन वचनों में सब जवाब छिपे हुए हैं। हालांकि, कभी-कभी हम माता के सिखाए तरीके को भूल जाते हैं और अपने आसपास की चीजों से प्रभावित हो जाते हैं, और इसके कारण हम अपने दृष्टिकोण से चीजों का न्याय करते हैं और अंत में परमेश्वर के कार्य को पूरा करने में असफल रहते हैं।

माता ने उनके कार्य को अच्छे से पूरा करने का तरीका हमें सिखाया है। 1कुरिन्थियों का 13वां अध्याय हमें बताता है कि वह तरीका क्या है।

यदि मैं मनुष्यों और स्वर्गदूतों की बोलियां बोलूं… परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। प्रेम धीरजवन्त है, और कृपालु है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं, वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 1कुर 13:1-7

माता ने हमें सिखाया है कि यदि हम इस प्रकार के प्रेम का पालन करें, तो हम फल उत्पन्न कर सकते हैं। परमेश्वर की सन्तान के रूप में, हमें प्रेम के साथ अपने भाइयों और बहनों की देखभाल करनी चाहिए, प्रेम के साथ उनकी अगुआई करनी चाहिए, और प्रेम के साथ पिता और माता के द्वारा हमें सौंपे गए कार्य को पूरा करना चाहिए। क्या होगा यदि हम इस पृथ्वी पर इस प्रकार का जीवन न जीएं और मूर्खता से अर्थहीन चीजों का पीछा करने में अपना समय गंवाते हुए, माता के कार्य को पूरा करने में असफल हो जाएं? मैं आशा करता हूं कि हम में से कोई भी अपने पिछले जीवन को देखकर अफसोस न करे।

यदि अब तक हमने जीवन के वचनों का, यानी नई वाचा के सत्य का अच्छे से प्रचार नहीं किया, तो आइए हम अब से अपने मुंह खोलें और तुरहीनाद के समान ऊंचे शब्द से चिल्लाएं। हम माता का कार्य करने के लिए इस पृथ्वी पर आए हैं। आइए हम प्रेम और एकता के साथ ईमानदारी से माता के कार्य को पूरा करें, ताकि हम परमेश्वर के हमें इस पृथ्वी पर दिए समय के अंत में कह सकें कि, “माता, हमने आपके कार्य को अच्छे से पूरा किया है, और अब आपके पास लौट आए हैं।” सिय्योन में मेरे भाइयो और बहनो, मैं आपसे आग्रहपूर्वक विनती करता हूं कि चाहे लोग सुनें या न सुनें, आप परमेश्वर के वचनों का लोगों को उत्सुकता से प्रचार करते हुए और परमेश्वर की सभी सन्तानों की स्वर्ग के राज्य के मार्ग की ओर अगुआई करते हुए, अपने पूरे हृदय और ईमानदारी के साथ माता के कार्य को पूरा कीजिए, ताकि हम सब एक साथ मिलकर अपने अनन्त स्वर्ग के घर में जा सकें।