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जो कुछ सारा तुझ से कहे, उसकी सुन

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अब से 3,500 साल पहले जब परमेश्वर सीनै पर्वत पर उतरा, उसने बड़ी ऊंची आवाज़ में दस आज्ञाओं की घोषणा की, और इन्हें पत्थर की पटियाओं पर खोदा। परमेश्वर की सारी आज्ञाओं का संहिताबद्ध किए जाने से, पुराने नियम बाइबल जो आज हम देखते हैं, का आधार बन गया। और 2 हज़ार वर्ष पहले, इस धरती पर देहधारी होकर आए यीशु के कार्य और उसकी शिक्षाओं को अभिलिखित किए जाने से, बाइबल नए नियम का केन्द्रीय स्तम्भ बन गया।

जैसे पतरस, यूहन्ना और याकूब भक्तिपूर्वक यीशु का पालन करते थे, और यीशु ने पर्वत पर बहुत से लोगों के सामने धर्मोपदेश दिया, उसने बीमारों को चंगा किया और अनेक आश्चर्यकर्म किए और फसह के पर्व पर ऐसा वादा करके नई वाचा को स्थापित किया कि रोटी और दाखमधु उसका मांस और लहू है, बाइबल में वैसी अनेक घटनाएं लिखी हैं जो हमें भक्तिपूर्ण मसीही जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं। पिता के युग की घटनाओं को, पुत्र के युग की घटनाओं के साथ जोड़े जाने से बाइबल हमें उद्धार पाने के लिए बुद्धि प्रदान करती है।

आज, पवित्र आत्मा के युग की घटनाएं अभिलिखित तो नहीं हुईं, पर इस युग के सुसमाचार का कार्य भी, पिता के युग और पुत्र के युग की तरह बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिस प्रकार सभी वचन और आज्ञाएं, जो परमेश्वर ने बीते इतिहास में बताए, पुराने एवं नए नियम में लिखे जाकर आज हमें अनेक शिक्षाएं देते हैं, उसी प्रकार सभी वचन और आज्ञाएं भी, जो अब परमेश्वर हमारे साथ शरीर में रहते हुए देता है, हमारे लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य शिक्षाएं हैं, जिनकी अवहेलना हमें कभी नहीं करना है।

जो कुछ सारा तुझ से कहे, उसकी सुन

बाइबल में परमेश्वर की शिक्षाएं लिखी हैं जो स्वर्गीय प्रजाओं को कभी नहीं भूलना है और जिसके अधीन होना उनके लिए अनिवार्य है। उनमें से “विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण रखना” और “फसह का पर्व स्मृति-दिवस के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी में मनाओ”, केवल ये परमेश्वर की शिक्षाएं ही महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि “जो कुछ सारा तुझ से कहे, उसकी सुन” यह शिक्षा भी महत्वपूर्ण है जो उद्धार पाने वालों को अवश्य ही जानना चाहिए।

बाइबल में इब्राहीम के परिवार की कहानी के द्वारा, आइए हम सब से पहले जानें कि इब्राहीम के परिवार में सारा का पद व भूमिका क्या थी और और सारा किसको दर्शाती है, ताकि हम साथ ही जान सकें कि क्यों परमेश्वर ने इब्राहीम को सारा की बात सुनने को कहा।

“और वह बालक बढ़ा और उसका दूध छुड़ाया गया, और जिस दिन इसहाक का दूध छुड़ाया गया उसी दिन इब्राहीम ने एक बड़ा भोज दिया। तब सारा ने मिस्री हाजिरा के पुत्र को जो इब्राहीम से उसको उत्पन्न हुआ था, उपहास करते देखा। अत: वह इब्राहीम से बोली, “इस दासी को इसके पुत्र सहित निकाल दे; क्योंकि इस दासी का पुत्र मेरे पुत्र इसहाक के साथ उत्तराधिकारी न होगा।” अपने पुत्र के कारण इब्राहीम को इस बात से गहिरा आघात पहुंचा। परन्तु परमेश्वर ने इब्राहीम से कहा, “अपनी दासी और लड़के के कारण व्यथित न हो। जो कुछ सारा तुझ से कहे, उसकी सुन, क्योंकि इसहाक ही के वंश से तेरा नाम चलेगा।” उत 21:8-12

जब हम इब्राहीम के परिवार की कहानी को देखते हैं, इब्राहीम का उत्तराधिकार स्वतंत्र स्त्री सारा से, जो इब्राहीम की पत्नी थी, जन्मे इसहाक को दिया गया। जब सारा ने देखा कि दासी हाजिरा से जन्मे इश्माएल अपने छोटे भाई, इसहाक को परेशान कर रहा था, सारा बहुत क्रोधित हो उठी, और उसने इब्राहीम से मांगा कि हाजिरा और इसके पुत्र इश्माएल को निकाल दे। इश्माएल भी इब्राहीम की सन्तान थी, इसलिए इब्राहीम इस पर बहुत चिंतित हुआ। लेकिन परमेश्वर ने इब्राहीम से यह कहते हुए, “जो कुछ सारा तुझ से कहे, उसकी सुन”, निर्णय किया कि सारा की इच्छा के अनुसार इश्माएल और हाजिरा निकाल दिए जाए।

यह एक भविष्यवाणी है कि इस युग में परमेश्वर की सन्तान स्वतंत्र स्त्री, स्वर्गीय माता के द्वारा ही स्वर्गीय आज्ञाकारी हो सकेंगी।

“हे तुम जो व्यवस्था के अधीन रहना चाहते हो, मुझे बताओ: क्या तुम व्यवस्था की नहीं सुनते? यह लिखा है कि इब्राहीम के दो पुत्र थे, एक दासी से और एक स्वतन्त्र स्त्री से। परन्तु जो पुत्र दासी से उत्पन्न हुआ वह शारीरिक रीति से जन्मा, और जो पुत्र स्वतन्त्र स्त्री से हुआ वह प्रतिज्ञा के अनुसार जन्मा। इसमें एक दृष्टान्त है: ये स्त्रियां मानो दो वाचाएं हैं, एक तो सीनै पर्वत की, जिस से केवल दास ही उत्पन्न होते हैं-और वह हाजिरा है। और हाजिरा मानो अरब का सीनै पर्वत है, जो वर्तमान यरूशलेम के समान है, क्योंकि वह अपनी सन्तानों सहित दासत्व में है। परन्तु ऊपर की यरूशलेम स्वतन्त्र है, और वह हमारी माता है। … और हे भाइयो, तुम इसहाक के समान प्रतिज्ञा की सन्तान हो।” गल 4:21-28

हम इसहाक के समान प्रतिज्ञा की सन्तान हैं। हमें सदा परमेश्वर के राज्य के उत्तराधिकारी होने के लिए अवश्य ही, सारा से दर्शाई गई स्वर्गीय माता की आत्मिक सन्तान बननी चाहिए, जिसका अर्थ है कि हमें स्वर्गीय माता की शिक्षाओं और इच्छाओं पर आज्ञाकारी रहना चाहिए।

परमेश्वर ने विश्वास के पूर्वज, इब्राहीम से कहा कि जो सारा कहती है वही करे। उस समय पितृसत्तात्मक समाज था जो पुरुष की इच्छा पर चलता था, फिर भी परमेश्वर ने इब्राहीम की इच्छा के अनुसार नहीं, पर सारा की इच्छा के अनुसार करने को कहा था। इसके अंदर स्वर्गीय पिता की यह इच्छा होगी कि हम अपने विचार या जिद्द और न्याय को सामने न रखते हुए सिर्फ आत्मिक सारा, माता की इच्छा का पालन करें और उसके प्रति आज्ञाकारी रहें।

यरूशलेम की सेवा न करके चले जाने वाले लोगों का परिणाम

परमेश्वर ने इब्राहीम को सलाह दी कि वह सारा के फैसले का पालन करे। क्योंकि स्वर्गीय माता के वचन का पालन करना ही, अनन्त स्वर्ग का उत्तराधिकार पाने में महत्वपूर्ण शर्त है।

“हे यरूशलेम, मैंने तेरी शहरपनाह पर पहरेदार नियुक्त किए हैं; वे दिन-रात कभी चुप न बैठेंगे। हे यहोवा को स्मरण दिलानेवालो, तुम शान्त न रहना और जब तक वह यरूशलेम को स्थिर करके पृथ्वी पर उसकी प्रशंसा न फैलाए तब तक उसे भी शान्त न रहने देना।” यश 62:6-7

परमेश्वर ने योजना की कि भविष्य में यरूशलेम को स्थिर करके पृथ्वी पर उसकी प्रशंसा व स्तुति फैलाए। इसलिए हम तभी पृथ्वी पर कीर्ति और प्रशंसा पा सकते हैं और स्वर्ग जाने के योग्य बन सकते हैं जब हम माता पर सम्पूर्ण रूप से विश्वास करें और उसका वचन सुनते हुए, जहां कहीं भी वह जाती है वहीं उसके पीछे हो लें। इसके विपरीत, जो यरूशलेम माता के वचन को नहीं सुनते और स्वीकार नहीं करते, उनके बारे में बाइबल ने भविष्यवाणी की है कि वे नाश हो जाएंगे।

“चारों ओर अपनी दृष्टि उठाकर देख: वे सब इकट्ठे होकर तेरे पास आ रहे हैं। तेरे पुत्र दूर देश से आएंगे, और तेरी पुत्रियां हाथों-हाथ पहुंचाई जाएंगी। … तेरे फाटक सदैव खुले रहेंगे। वे दिन-रात बन्द नहीं किए जाएंगे, जिस से देश देश का धन और पांति बान्ध बान्ध कर उनके राजा तेरे पास लाए जाएं। क्योंकि जिस जाति और राज्य के लोग तेरी सेवा न करें वे नाश हो जाएंगे, हां, ऐसी जातियों का सत्यानाश किया जाएगा।” यश 60:4-12

परमेश्वर ने यरूशलेम की चमकीली महिमा भविष्य में प्रकट होने की घोषणा की है, और इसके साथ ही जोर दिया है कि जाति और राज्य के लोग जो यरूशलेम की सेवा नहीं करेंगे, अवश्य ही नाश हो जाएंगे। जैसे 2 हज़ार वर्ष पहले, जिन्होंने देहधारी होकर इस धरती पर आए यीशु को महसूस नहीं किया था और उसे ठुकरा दिया था, वे नाश हो गए थे, वैसे ही आज इस युग में, जो इस धरती पर आए पवित्र आत्मा और दुल्हिन को स्वीकार न करें और उनके वचन के आज्ञाकारी न रहें, उनका नाश होना निश्चित है।

“क्योंकि मेरी प्रजा ने दो बुराइयां की हैं: उन्होंने मुझे, अर्थात् जीवन-जल के सोते को त्याग दिया है और अपने लिए हौज़ बना लिए हैं, टूटे हुए हौज़, जिनमें जल टिक नहीं सकता।” यिर्म 2:13

“फिर उस दिन यह भी होगा कि जीवन का जल यरूशलेम से बह निकलेगा। उसका आधा भाग पूर्वी सागर की ओर तथा आधा भाग पश्चिमी सागर की ओर बहेगा। वह ग्रीष्म और शीत दोनों ऋतुओं में बहता रहेगा।” जक 14:8

हमें हमारे उद्धार के लिए शरीर में आए परमेश्वर से दूर चले जाते हुए या उसके वचन का विरोध करते हुए कभी आत्मिक बुराई नहीं करनी चाहिए। परमेश्वर ने कहा है कि यरूशलेम, यानी स्वर्गीय माता, जो इब्राहीम के परिवार में स्वतंत्र स्त्री सारा से दर्शाई गई, जीवन-जल का सोता है, और कहा है कि यदि कोई स्वर्गीय माता से दूर चला जाता हो या उसका पालन न करता हो, तो वह परमेश्वर की दृष्टि से दुष्टकर्म करने वाला है। हम ने स्वर्ग में शैतान से भरमाए जाने से स्वर्गीय माता के साथ विश्वासघात किया और हम बड़ा पाप करके इस धरती पर निकाल दिए गए। ऐसा होने पर भी, अगर हम माता के साथ, जो हमें बचाने के लिए इस धरती पर आई है, फिर से विश्वासघात करें और उसका पालन और सेवा न करें, तब हमारा पाप कितना और ज़्यादा बढ़ जाएगा?

हमारे विचार और न्याय को सामने खड़ा करते हुए, हमें न तो माता की इच्छा का उल्लंघन करना है और न ही माता से दूर होकर चले जाना है। आम तौर पर सारा को परिवार का स्वामी, इब्राहीम की इच्छा का पालन करना था, मगर परमेश्वर ने फैसला किया कि इब्राहीम अपनी पत्नी सारा की इच्छा का पालन करे।

आज इस युग में, पिता परमेश्वर हम से चाहता है कि हम यरूशलेम माता की, जो आत्मिक सारा है और जीवन–जल का सोता है, शिक्षाओं के आज्ञाकारी रहें और उसकी इच्छाओं का पालन करते हुए आशीष पाएं। इसी वजह से पिता जब इस धरती पर था, संतान को नमूना दिखाने के लिए अपने हाथों से यह लिखा था, ‘मैं माता का पालन करता हूं।’

देहधारी होकर आए परमेश्वर के प्रति सम्पूर्ण विश्वास

उन भक्तों के, जिन्होंने यीशु को सही रूप से पहचान कर उसका पालन किया, विश्वास पर ध्यान देते हुए, आइए हम विचार करें कि हमारे, जिन्होंने इस युग में माता को स्वीकार किया है, विश्वास का रवैया कैसा होना चाहिए।

“और जब उसने कफरनहूम में प्रवेश किया तो एक सूबेदार उसके पास आया और विनती करके कहने लगा, “हे प्रभु, मेरा सेवक लकवे का मारा घर में पड़ा हुआ अत्यन्त पीड़ा में तड़प रहा है।” उसने उस से कहा, “मैं आकर उसे चंगा करूंगा।” परन्तु सूबेदार ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैं इस योग्य नहीं कि तू मेरी छत तले आए, परन्तु केवल वचन कह दे और मेरा सेवक चंगा हो जाएगा। क्योंकि मैं भी शासन के अधीन हूं, और मेरे अधीन सिपाही हैं। जब मैं एक से कहता हूं, ‘जा!’ तो वह जाता है, और दूसरे से, ‘आ!’ तो वह आता है, और जब अपने दास से कहता हूं, ‘यह कर!’ तो वह करता है।” जब यीशु ने यह सुना तो अचम्भा किया और अपने पीछे आने वालों से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, मैंने इस्राएल के किसी व्यक्ति में भी ऐसा बड़ा विश्वास नहीं पाया। … यीशु ने सूबेदार से कहा, “जा, तेरे विश्वास के अनुसार ही तेरे लिए हो।” और सेवक उसी क्षण चंगा हो गया।” मत 8:5-13

सूबेदार को यीशु के परमेश्वरत्व का एहसास हुआ, इसलिए उसे इस पर बहुत खेद हुआ कि परमेश्वर, जिसने संसार की सृष्टि की, आप ही पापी के घर के अन्दर आने के लिए मेहनत की, और उसने विश्वास किया कि केवल वचन कहने से उसका सेवक चंगा हो जाएगा। तब यीशु सूबेदार के मन को देखकर प्रसन्न हुआ और उसने सूबेदार के विश्वास के अनुसार सेवक को चंगा किया।

उस समय में भी, इस्करियोती यहूदा की तरह कुछ लोगों ने यीशु पर विश्वास न करते हुए उसके साथ विश्वासघात किया था, और महायाजकों की तरह कुछ लोग दूसरों को उकसाने के द्वारा यीशु को क्रूस पर लटकाने में शामिल कराते थे, और कुछ लोग, हर समय जब यीशु शिक्षा देता था, यीशु पर रुकावट डालते थे। इसका कारण यही था कि परमेश्वर शरीर धारण करके मनुष्य के रूप में आया। इसके विपरीत, सूबेदार की तरह कुछ लोग यीशु को सही रूप से पहचान कर स्वीकार करते थे। हमें भी पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में आए परमेश्वर को सही रूप से पहचानना है, और उनकी सेवा और पालन सम्पूर्ण विश्वास के साथ करना है। वास्तव में, हम उस पवित्र आत्मा के युग में जी रहे हैं जब दोनों पिता और माता, एलोहीम परमेश्वर की महिमा प्रकट हुई है। इसलिए हमें उनसे भी और बड़ा विश्वास रखना चाहिए।

“… यीशु उठा और इस के पीछे चल पड़ा और उस के चेलों ने भी ऐसा ही किया। और देखो, एक स्त्री ने जो बारह वर्ष से लहू बहने के रोग से पीड़ित थी, उसके पीछे आकर उसके चोगे का किनारा स्पर्श किया; क्योंकि वह अपने मन में कहती थी, “यदि मैं उसके वस्त्र को ही स्पर्श कर लूं तो चंगी हो जाऊंगी।” यीशु ने मुड़ कर उसे देखा और कहा, “पुत्री, साहस रख, तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है।” वह स्त्री उसी घड़ी चंगी हो गई।” मत 9:18-22

ऊपर की आयत में भी एक स्त्री ने मसीह पर सम्पूर्ण विश्वास करने के द्वारा उद्धार का अनुग्रह पाया जो परमेश्वर ने उसके लिए तैयार किया था। हमें केवल उसके बीमारी से चंगा होने पर ध्यान तो न देना है, बल्कि हमें इस पर ध्यान देना है कि उस स्त्री ने सम्पूर्ण विश्वास के द्वारा अनन्त जीवन की आशीष पाई थी। सूबेदार की और लहू बहने के रोग से पीड़ित स्त्री की कहानी बाइबल में इसलिए नहीं लिखी गई कि उनका चंगा होना कोई खास बात है, बल्कि यह दिखाने के लिए लिखी गई कि किस तरह के विश्वास के साथ, उन्होंने यीशु को देखा था और किस विश्वास का रवैया अपनाया था।

इसके अतिरिक्त, बाइबल के नए नियम में यीशु के अनेक आश्चर्यकर्म लिखे गए हैं, जैसे कि अंधे की आंखें खोली गईं और रोगी चंगा हुआ। लेकिन हमें सिर्फ आश्चर्यकर्म की ओर ध्यान केन्द्रित नहीं करना है, लेकिन हमें इसकी ओर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए कि लोगों ने, जिन्होंने ऐसी आशीष पाई, किस तरह के विश्वास के साथ यीशु के वचन का पालन किया था।

जैसे स्त्री ने यीशु का चोगा स्पर्श किया और अंधे ने शीलोह के कुण्ड में आंखों को धो लिया, कोई भी वैसे ही कर सकता है। लेकिन मुख्य बात यही है, जिन्होंने विश्वास किया था कि यीशु के पास बीमार को चंगा करने की सामर्थ्य है और यीशु के वचन के अनुसार किया था, उन्होंने ही आशीष पाई।

वे देहधारी होकर आए परमेश्वर पर सम्पूर्ण विश्वास करते थे और उस पर भरोसा करते थे। परमेश्वर ने उनके खूबसूरत विश्वास को देखकर रोग से चंगा होने की थोड़ी देर की खुशी और उसके साथ ही, अनन्त जीवन की सदा की आशीष भी दी। ये सभी वर्णन हमारे लिए अति मूल्यवान शिक्षा बनते हैं कि आज, हमें जो प्रतिज्ञा की सन्तान के रूप में बुलाए गए हैं, आत्मिक सारा, स्वर्गीय माता के प्रति किस तरह का विश्वास अपनाते हुए, माता के वचन का पालन करना है।

जहां कहीं भी माता जाती है वहीं उसके पीछे हो लें

पवित्र आत्मा के युग में उद्धार देने के लिए इस धरती आए स्वर्गीय पिता और स्वर्गीय माता को सही रूप से पहचानते हुए और सम्पूर्ण रूप से विश्वास करते हुए, हमें उद्धार के अनुग्रह की ओर आगे बढ़ना चाहिए। पिता इस पर चिंतित हुआ कि सन्तान शायद ही महसूस न करे और विश्वास न करे, इसलिए उसने इब्राहीम के परिवार की कहानी के द्वारा, हमें शिक्षा दी कि हमें सारा की बात अवश्य ही, सुननी चाहिए।

यदि सूबेदार या लहू बहने के रोग से पीड़ित स्त्री या अंधे ने यीशु पर विश्वास न किया होता और उसके वचन के अनुसार नहीं किया होता, तब उनके विश्वास के बारे में वर्णन बाइबल में नहीं किया गया होता। हम उन विश्वास के पूर्वजों से भी और बड़े विश्वास के साथ माता के वचन के आज्ञाकारी रहते हुए उसका सम्पूर्ण रूप से पालन करेंगे, जिससे कि सुसमाचार के ग्रंथ, प्रेरितों के काम से भी और खूबसूरत सुसमाचार की सफलता का वर्णन किया जा सके।

हम माता के साथ रह रहे हैं, और वास्तव में अब भी पवित्र आत्मा के युग की बाइबल, हमारे द्वारा लिखी जा रही है। हम सूबेदार से कहीं बड़े विश्वास से और लहू बहने के रोग से पीड़ित स्त्री से कहीं सुन्दर विश्वास से परमेश्वर को प्रसन्न करेंगे। हे सिय्योन के सदस्यो, जहां कहीं भी माता जाती है वहीं अन्त तक खुशी और आज्ञाकारिता सहित उसके पीछे हो लें और अनन्त स्वर्ग के राज्य के उत्तराधिकारी बनें।