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भोर की ओस की तरह युवा के रूप में नए सिरे से जन्मी मेरी मां

ग्वांगजू, कोरिया से इम सु जंग

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मेरी मां मुझे चर्च जाना पसंद नहीं करती थी। जब मैं उससे मिलने जाती और जरा भी सच्चाई का प्रचार करने की कोशिश करती, तो वह मुझे धक्के मारकर तुरंत घर जाने के लिए कहती थी। जब मैं उसे फोन पर प्रचार करती, तो वह फोन पटककर रख देती थी। जब मैंने उसे चर्च में आमंत्रित करने का साहस किया, तो उसने यह कहते हुए मुझ पर गुस्सा उतार दिया कि, “तुम क्यों समय और ताकत बर्बाद करती हो?” मैं रो पड़ी। धर्म की परवाह किए बिना, उसकी संतान के रूप में मैंने अपना कर्तव्य पूरा करने की कोशिश की, लेकिन उसका हृदय कठोर बना रहा।

यह तब की बात थी जब मेरी सास मेरे घर रहने आई थी क्योंकि कहीं गिर जाने से उसे चोट लगी थी। मेरी मां और सास दोनों ही बुढ़ापे में बीमारियों और दुर्घटनाओं से पीड़ित थीं। उन्हें देखकर, मैं राज्य का सुसमाचार सुनाने के लिए उत्सुक थी जहां कोई पीड़ा और दुःख नहीं है। मेरी सास चाहती थी कि मैं “चर्च” शब्द का जिक्र भी न करूं, लेकिन उसने ध्यान से परमेश्वर के वचनों को सुना; शायद इसलिए क्योंकि वह पूरे दिन भर घर में रहकर बहुत ऊब चुकी होगी। मैंने बड़े अक्षरों में प्रिंट की गई बाइबल खरीदी और विस्तार से उसे सच्चाई बताई।

वह सच्चाई समझ गई लेकिन आसानी से स्वीकार नहीं कर सकती थी क्योंकि उसे इस बात की परवाह थी कि परिवार के अन्य सदस्य क्या सोचेंगे। उसे दिन-ब-दिन कमजोर होते हुए देखकर, मैं हार नहीं मान सकती थी। मैंने दृढ़ता से उसे फसह को मनाने के लिए कहा जिसमें उद्धार की आशीष है। फिर उसने एक निर्णय लिया। वह उस परमेश्वर पर विश्वास करना चाहती थी जिसे अपनी बहू मानती है, और उसने मेरे साथ फसह का पर्व मनाया।

मेरी सास हमारे सिय्योन के परिवार की सदस्य बनने के बाद, मैंने अपनी मां के बारे में और अधिक सोचा। मैंने उत्सुकता से प्रार्थना की और फिर से उसके पास गई। वह कुछ अलग दिख रही थी क्योंकि मेरे पिता के कैंसर के ऑपरेशन के बाद उनकी देखभाल करते हुए, वह थक गई थी। मैंने उसके साथ दो घंटे तक बाइबल का अध्ययन किया, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।

उसका सपना और भी आश्चर्यजनक था। उसने सपने में देखा कि लोग एक के बाद एक स्वर्ग से नीचे आने वाली सीढ़ी से ऊपर चढ़ रहे थे। जब उसकी बारी आई, तो वह सीढ़ी चढ़कर ऊपर चली गई और एक शानदार दरवाजे के सामने जाकर खड़ी हो गई। लेकिन वह प्रवेश नहीं कर सकी क्योंकि उसका नाम पुस्तक में लिखा हुआ नहीं मिला। वह बहुत ही चिंतित हो गई और उसी समय वह सपने से जाग गई। जब उसने जीवन की पुस्तक के बारे में अध्ययन किया, तो उसने कहा, “वह जगह स्वर्ग होगा,” और उसने सच्चाई प्राप्त की।

लंबे समय तक बाइबल का अध्ययन करना उसे इतना पसंद आया; जब वह हमारे एक सदस्य से परमेश्वर के वचन सीख रही थी, तो मैं बाइबल के वचन खोजने में उसकी मदद करते हुए थक गई। वह ध्यान से सत्य की पुस्तकें पढ़ती थी, और सब्त के दिन किसी और से पहले चर्च पहुंच जाती थी।

जब फसह का पर्व निकट आ रहा था, उसने लगातार फोन करके और मैसेज भेजकर मेरे छोटे भाई को सच्चाई बताई। मेरे भाई ने मुझसे कहा कि मैं मां को चर्च क्यों ले गई और मेरे कारण वह उसे परेशान कर रही है। लेकिन वह मां के बदलाव से आश्चर्यचकित लग रहा था क्योंकि वह मेरे विश्वास का विरोध किया करती थी। मां के बदलाव ने मेरे छोटे भाई को उसके घर के पास के सिय्योन में नया जीवन प्राप्त करने दिया।

मेरी मां ने मेरे पिता को सुसमाचार सुनाया; उसने कहा कि सबसे बड़ा उपहार, जो वह अपने परिवार को दे सकती है, वह एक साथ स्वर्ग जाना है। जैसा मेरी मां ने अतीत में किया था, कई महीनों तक मेरे पिता ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। लेकिन, एक सब्त के दिन पर कुछ अप्रत्याशित घटित हुआ कि मेरे पिता चर्च जाने का रास्ता पूछकर खुद ही चर्च में आ गए। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य दयालु होने के कारण चर्च बहुत उज्ज्वल दिख रहा है, और खुशी से उद्धार की आशीष प्राप्त की। यहां तक कि उन्होंने आराधना भी रखी।

सब्त के पूरे दिन भर मेरी मां अपनी बाइबल अपने करीब ही रखती थी, और अब वह पूरे दिन उपदेश प्रचार का अभ्यास करती है। 20 वर्षों तक उसका मन एक पत्थर के समान कठोर था, लेकिन अब वह पूरी तरह से बदल गई है। यह बहुत अद्भुत है। परमेश्वर के वचन “ठीक समय पर यह सब कुछ शीघ्रता से पूरा करूंगा,” मेरे परिवार में भी पूरे किए गए हैं।

इन दिनों, मेरी मां को देखकर मैं भोर की ओस की तरह युवा के अर्थ के बारे में नए सिरे से सोचने लगी। वह शारीरिक रूप से वृद्ध है, लेकिन आत्मिक रूप से युवा है। मेरे लिए, वह सच में भोर की ओस है। मेरी मां के साथ, जो भोर की ओस की तरह युवा के रूप में नए सिरे से जन्मी है, मैं ईमानदारी से अपने परिवार के बाकी सदस्यों के लिए सबसे बड़ा उपहार तैयार करूंगी।