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हम प्रेम की गर्माहट साझा करते हैं

कांगनुंग, कोरिया से किम ह्य ग्यंग

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मैंने अपने पति के साथ कोयले की ईंटों का वितरण करने के स्वयंसेवा कार्य में भाग लिया।

मैं भावनाओं से भर गई क्योंकि मैं विभिन्न कारणों से उस स्वयंसेवा कार्य में कई सालों से शामिल नहीं हो सकती थी। स्वयंसेवा कार्य के एक दिन पहले, मैंने बहुत उत्साह के साथ सदस्यों से कहा कि मैं वहां सबसे ज्यादा काम करूंगी। फिर उन्होंने मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया, “आप यह तब कहिए जब आप वहां पहुंचेंगी।”

अगले दिन, उस स्थल पर पहुंचने के बाद, जहां हम कोयले की ईंटों का वितरण करने वाले थे, मैं समझ गई कि उनकी मुस्कुराहट का क्या मतलब था।

गांव समुद्र के पास एक ढलान पर स्थित था। मुझे सीढ़ियों से चलने के लिए रेलिंग पकड़नी थी। ढलान तक एक कोयले की ईंट भी पहुंचाना मुश्किल लग रहा था। जब मैं चिंतित होकर सोच रही थी कि मैं कैसे वहां कोयले की ईंटें पहुंचाऊंगी, भाई और बहनें सीढ़ियों से ऊपर चले गए जैसे कि वे एक पहाड़ पर चढ़ते हों, और वे सीढ़ियों पर व्यवस्थित तरीके से एक लाइन में खड़े हुए। मैं भी लाइन में आ गई, और कोयले की ईंटें पहुंचाने लगी जो एक के बाद एक सदस्यों के द्वारा मेरे हाथों में पहुंचाई गईं। आराम करने का कोई समय नहीं था क्योंकि कोयले की ईंटें लगातार पहुंचाई जा रही थीं, लेकिन हम सभी ने मिलजुलकर अच्छे से काम किया।

यदि आसपास कोई थक जाता, तो हम जगह को बदल लेते थे, और यदि किसी को लाइन छोड़नी होती थी, तो हम खाली जगह को भरने के लिए फैल जाते थे; हम सभी ने ऐसे कार्य किया जैसे कि हम एक देह थे। परिणामस्वरूप, कोयले की ईंटों के वितरण को समाप्त होने में अधिक समय नहीं लगा। अंतिम कोयले की ईंट पहुंचाने के बाद, हम सभी खुशी से चिल्लाए।

एर व्यक्ति के लिए सौ कोयले की ईंटों को पहुंचाना बहुत मुश्किल है। लेकिन, हम में से सौ व्यक्तियों ने एक व्यक्ति के समान कार्य किया, तो हम बिना किसी कठिनाई के एक हजार से अधिक कोयले की ईंटें वितरित कर सके। मुस्कुराहट, प्रेम और विचारशीलता के साथ किए गए इस दिन की स्वयंसेवा कार्य ने न केवल अपने पड़ोसियों के लिए, बल्कि हमारे लिए भी, जिन्होंने एक बनकर काम किया, प्रेम की गर्माहट को पहुंचाया।