अंतिम तीन इच्छाएं

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सिय्योन के सदस्य सभी मानव जाति के उद्धार के लिए अभी ईमानदारी से सुसमाचार का प्रचार कर रहे हैं। भले ही प्रचार करने के हमारे प्रयास छोटे-छोटे हैं, फिर भी परमेश्वर हमारे लिए महान और अतुल्य आशीष, और पुरस्कार तैयार कर रहे हैं।

यह अमेरिका में घटी एक सच्ची घटना है। एक दिन, एक कॉलेज का विद्यार्थी रास्ते पर चल रहा था। उसे प्यास लगी, और उसने एक फार्म हाउस का दरवाजा खटखटाया। तब एक लड़की बाहर आई, और उसने उससे एक ग्लास पानी मांगा। लड़की ने एक बड़े ग्लास में दूध डाल दिया और बड़े प्यार से उस विद्यार्थी को परोसा जो उसके लिए एक अजनबी था।

समय गुजरा, और वह लड़की बड़ी हो गई। फिर एक दिन वह गंभीर रूप से बीमार हो गई, और उसे ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। वह ऑपरेशन एक डॉक्टर के द्वारा किया गया था जो प्रसूति विज्ञान और स्त्रीरोग विज्ञान विभाग में अद्वितीय चिकित्सक था। यह डॉक्टर वही जवान विद्यार्थी था जो एक बार उस लड़की के घर आया था।

उसका ऑपरेशन सफल हुआ, पर वह इलाज के महंगे खर्च को लेकर चिंतित थी। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के दिन, बिल उसके कमरे में लाया गया और उस पर यह लिखा हुआ था:

“एक ग्लास दूध के द्वारा बिल का पूरा भुगतान किया गया है।”

उपर्युक्त कहानी में उस व्यक्ति के समान, परमेश्वर हमारे सभी प्रयासों को याद रखते हैं चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, और जब हम अपने अनन्त घर स्वर्ग जाएंगे, तब वह उनके बदले में हमें पुरस्कार देंगे जो हमारी उम्मीद से हजारों गुना या लाखों गुना ज्यादा बड़ा है। जब हम बाइबल में तोड़ों या मुहरों के दृष्टांत को देखें, जिन दासों ने स्वामी की आज्ञा का पालन किया और अधिक लाभ कमाया, उन्होंने बड़ी महिमा और अधिकार प्राप्त किया। इसलिए हम सभी को छोटी बात में भी विश्वासयोग्य बनना चाहिए जो परमेश्वर ने हमें सौंपी है(मत 25:14-30; लूक 19:12-27)।

​यीशु की अंतिम इच्छा, “सुसमाचार का प्रचार करो”

यीशु ने पुनरुत्थान के बाद अपनी एक ही इच्छा पतरस को तीन बार बताई। उनकी एक ही इच्छा थी कि पतरस उनके भेड़ों को चराए।

भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हां, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं।” उसने उससे कहा, “मेरे मेमनों को चरा।” उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हां, प्रभु; तू जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ों की रखवाली कर।” उसने तीसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है?” पतरस उदास हुआ कि उसने उससे तीसरी बार ऐसा कहा, “क्या तू मुझ से प्रीति रखता है?” और उससे कहा, “हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है; तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं।” यीशु ने उससे कहा, “मेरी भेड़ों को चरा।” यूह 21:15-17

परमेश्वर के लोग जो भेड़ों से दर्शाए गए हैं, उनका आत्मिक भोजन परमेश्वर का वचन है। इसलिए “मेरी भेड़ों को चरा,” यीशु के ऐसा कहने का मतलब है कि मरती हुई आत्माओं को जीवन के वचन के द्वारा, यानी सुसमाचार का प्रचार करने के द्वारा बचाओ।

क्योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है; पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं। 1थिस 2:3-4

प्रचार एक मिशन है जो परमेश्वर ने हमें, यानी अपनी संतानों को सौंपा है। बाइबल कहती है कि परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा। इसलिए हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि प्रचार का कार्य हमारी क्षमता से बाहर नहीं है। लड़की उस जवान व्यक्ति के प्रति विचारशील होकर उसके लिए एक ग्लास दूध लाई, और अपने छोटे से परिश्रम के कारण उसने भारी मेडिकल बिल में छूट पाने की आशीष पाई। इसी तरह, अगर हम जितना हो सके अपने परिवार या पड़ोसियों को अपने पूरे मन और हृदय के साथ जीवन के वचन का प्रचार करेंगे, तो परमेश्वर स्वर्ग की असीम आशीषों से हमें उसका प्रतिफल देंगे।

हमें ऐसी असीम आशीष देने के लिए, परमेश्वर ने सुसमाचार का प्रचार करने का अनुरोध तीन बार किया। प्रचार वह कार्य है जो सिर्फ वे लोग कर सकते हैं जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं। इसलिए परमेश्वर ने वह प्रचार का कार्य सिर्फ उन लोगों को सौंपा है, जिन्हें परमेश्वर ने योग्य ठहराया है। यानी वे ऐसे लोग हैं, जिनके बारे में परमेश्वर ऐसा मानते हैं, ‘वे वो लोग हैं जो वास्तव में मुझ से प्रेम करते हैं।’ इसलिए हमारा प्रचार करना इस बात का सबूत होता है कि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं।

आखिरी अनुरोध जो मसीह ने पतरस और दूसरे चेलों से किया, वह भी यह था, “सुसमाचार का प्रचार करना।”

“… परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।” यह कहकर वह उन के देखते-देखते ऊपर उठा लिया गया, और बादल ने उसे उनकी आंखों से छिपा लिया। प्रे 1:7-9

अपने स्वर्गारोहण से पहले, यीशु ने अपने प्रिय चेलों से कहा कि, “मेरे गवाह बनो।” यह भी अनुरोध था कि वे सुसमाचार का प्रचार करने वाले प्रचारक बनें, है न? यह सब अनुरोध परमेश्वर से प्रेम करनेवाले लोगों से किया गया है।

जो सुसमाचार का प्रचार नहीं करते उनका परिणाम

वह अदालत है जहां गवाहों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। मान लीजिए कि एक व्यक्ति है जिस पर झूठा आरोप लगाया गया है। जब वह अभियुक्त के रूप में अदालत में लाया गया है, अगर कोई गवाह जो सत्य जानता है, साक्षी दे कि वह निर्दोष है, तो वह निर्दोष प्रमाणित किया जा सकता है। लेकिन क्या परिणाम होगा अगर गवाह बिना कुछ कहे चुप रहे?

गवाह को चुप नहीं रहना चाहिए, नहीं तो जज आरोपी के विरुद्ध गलत फैसला करेगा। उसे गवाह होने के नाते अपना कर्तव्य पूरा करना चाहिए, ताकि जज सही फैसला कर सके। भले ही वह जानता है कि आरोपी एक अच्छा व्यक्ति है, लेकिन अगर वह अदालत जाने में परेशानी होने के कारण, या मौसम ठंडा या गर्म होने के कारण, या लोगों के सामने शर्म आने के कारण अपना कर्तव्य न निभाए और चुप रहे, तो सत्य विकृत किया जाएगा, और वह अभियुक्त झूठे तरीके से दोषी ठहराया जाएगा। इस मामले में गवाह अपने कर्तव्य की अवहेलना करने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।

सात दिन के व्यतीत होने पर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, “हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तुझे इस्राएल के घराने के लिए पहरुआ नियुक्त किया है; तू मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चिताना। जब मैं दुष्ट से कहूं, ‘तू निश्चय मरेगा,’ और यदि तू उसको न चिताए, और न दुष्ट से ऐसी बात कहे जिस से कि वह सचेत हो और अपना दुष्ट मार्ग छोड़कर जीवित रहे, तो वह दुष्ट अपने अधर्म में फंसा हुआ मरेगा, परन्तु उसके खून का लेखा मैं तुझी से लूंगा। पर यदि तू दुष्ट को चिताए, और वह अपनी दुष्टता और दुष्ट मार्ग से न फिरे, तो वह तो अपने अधर्म में फंसा हुआ मर जाएगा; परन्तु तू अपने प्राणों को बचाएगा।” यहेज 3:16-19

परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने हमें पहरुआ नियुक्त किया है। इसका अर्थ है कि परमेश्वर ने हमें ऐसे गवाह बनाया है जो परमेश्वर की ओर से लोगों को वचन सुनाते हैं। चाहे हम ईमानदारी से गवाही दें, लेकिन अगर लोग नहीं समझेंगे, तो परमेश्वर उनसे उनके पापों का लेखा लेंगे। परन्तु, अगर हम कुछ नहीं कहेंगे और सिर्फ चुप रहेंगे, तो परमेश्वर उनके पापों का लेखा हमसे लेंगे।

इसलिए प्रेरित पौलुस ने कहा कि सुसमाचार का प्रचार ऐसा कार्य नहीं है जिसे वह चाहे तो कर सकता है और न चाहे तो नहीं कर सकता, लेकिन यह वह कार्य है जो उसे अवश्य ही करना चाहिए।

… यदि मैं सुसमाचार सुनाऊं, तो मेरे लिए कुछ घमण्ड की बात नहीं; क्योंकि यह तो मेरे लिये अवश्य है। यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं, तो मुझ पर हाय! क्योंकि यदि अपनी इच्छा से यह करता हूं तो मजदूरी मुझे मिलती है, और यदि अपनी इच्छा से नहीं करता तौभी भण्डारीपन मुझे सौंपा गया है। तो मेरी कौन सी मजदूरी है? यह कि सुसमाचार सुनाने में मैं मसीह का सुसमाचार सेंत मेंत कर दूं, यहां तक कि सुसमाचार में जो मेरा अधिकार है उसको भी मैं पूरी रीति से काम में न लाऊं। क्योंकि सब से स्वतंत्र होने पर भी मैं ने अपने आप को सब का दास बना दिया है कि अधिक लोगों को खींच लाऊं। 1कुर 9:15-19

अगर एक व्यक्ति सत्य कहने के लिए गवाह के रूप में चुना गया है, पर वह झूठी गवाही देता है, तो सत्य विकृत हो जाएगा और झूठा माना जाएगा, और अंत में गवाह के रूप में अपना कर्तव्य निभाना भूलने के कारण, वह सभी दण्ड और विपत्तियां भोगेगा।

प्रेरित पौलुस को यह तथ्य महसूस हुआ, और उसने यह कहते हुए कि, “यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं, तो मुझ पर हाय!” खुद को हमेशा नम्र बनाकर सुसमाचार के प्रचार के लिए अपने आपको समर्पित किया, ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों की मन फिराव और उद्धार की ओर अगुवाई कर सके।

सुहावने पांव जो परमेश्वर का पालन करते हैं

परमेश्वर ने हमें सुसमाचार का प्रचार करने के लिए बुलाया और गवाह के रूप में चुना है। फिर भी, अगर हम चुप रहेंगे, तो सत्य छिप जाएगा, यानी यह सत्य कि परमेश्वर इस युग में उद्धारकर्ता के रूप में आए हैं, संसार में तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाएगा। उद्धारकर्ता को ग्रहण किए बिना कैसे मानवजाति बच सकती है?

हमें इतना महान मिशन दिया गया है। परमेश्वर ने इस युग में हमें गवाह के रूप में चुना है ताकि हम इस पृथ्वी पर शरीर में आए स्वर्गीय पिता और माता की गवाही दें, और परमेश्वर ने हम से कहा कि हम सिर्फ किसी एक क्षेत्र में नहीं, पर सामरिया में और पृथ्वी की छोर तक उनके गवाह बनें।

आइए हम संसार में जाकर लोगों को साफ साफ बताएं कि मसीह आन सांग होंग और नई यरूशलेम स्वर्गीय माता क्यों परमेश्वर हैं और वे क्यों नहीं बच सकते जब तक वे आत्मा और दुल्हिन पर विश्वास नहीं करते। अगर हम उन्हें नहीं बताएंगे, तो उनके पास परमेश्वर को जानने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है, और वे परमेश्वर को गलत समझ सकते हैं।

… क्योंकि, “जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।” फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम कैसे लें? और जिसके विषय सुना नहीं उस पर कैसे विश्वास करें? और प्रचारक बिना कैसे सुनें? और यदि भेजे न जाएं, तो कैसे प्रचार करें? जैसा लिखा है, “उनके पांव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं!” परन्तु सब ने उस सुसमाचार पर कान न लगाया: यशायाह कहता है, “हे प्रभु, किसने हमारे समाचार पर विश्वास किया है?” अत: विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन से होता है। रो 10:12-17

लोग प्रचारक के बिना कैसे सुसमाचार के बारे में खुद जान सकेंगे? गवाहों को अपना मुंह खोलना चाहिए ताकि सत्य का पता चल सके। अदालत में सिर्फ उस व्यक्ति को, जो सक्रिय रूप से सत्य की गवाही दे सकता है, गवाह के रूप में चुना जाता है।

इस संसार के बहुत से लोगों में से एलोहीम परमेश्वर ने हमें चुना और हमें अपने गवाह के रूप में नियुक्त किया है। चूंकि परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराया है और वह हमसे प्रसन्न होते हैं, इसलिए उन्होंने हमें परमेश्वर के गवाह होने का बहुमूल्य मौका दिया है। तो हमें यह मौका नहीं खोना चाहिए, पर सुसमाचार के प्रचारक के रूप में सक्रिय रूप से परमेश्वर की गवाही देनी चाहिए।

अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिनके द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 1कुर 3:5-6

प्रेरित पौलुस ने अपने सुसमाचार के सेवा कार्य का सारांश एक वाक्य में बताया: उसने सुसमाचार का बीज लगाया, और अपुल्लोस ने लोगों को परमेश्वर के अनुग्रहपूर्ण वचन प्रदान किए, परन्तु परमेश्वर ने सारा प्रबंध किया और उसे बढ़ाया। हम केवल परमेश्वर के गवाह और कार्यकर्ता हैं, और जो सुसमाचार के कार्य को संचालित करते हैं, वह सिर्फ परमेश्वर हैं, जो हमारे हृदय में पवित्र आत्मा उंडेलते हैं और विश्वास देते हैं।

गवाहों को मुकदमे के परिणाम की परवाह किए बिना गवाहों के रूप में सिर्फ अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाना चाहिए। यहेजकेल नबी के द्वारा, परमेश्वर ने हमें सिखाया कि चाहे लोग सुनें या न सुनें, तौभी लोगों को प्रचार करना हमारा कर्तव्य है।

अभी हमें पूरे संसार के लोगों को यत्न से सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए। हमें संसार के सारे लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए, ताकि वे इस पृथ्वी पर आए मसीह को सही ढंग से जानकर ग्रहण करें और उद्धार पाकर स्वर्ग के राज्य में जा सकें।

आइए हम पूरे संसार में वचन का प्रचार करके गवाहों के मिशन को पूरा करें

बाइबल में बहुत सारी जगहों में परमेश्वर हमसे वचन का प्रचार करने के लिए कहते हैं। सुसमाचार के सेवकों के लिए, जो इस इच्छा का पालन करते हैं, परमेश्वर ने धर्म के मुकुट की प्रतिज्ञा की है।

परमेश्वर और मसीह यीशु को गवाह करके, जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करेगा, और उसके प्रगट होने और राज्य की सुधि दिलाकर मैं तुझे आदेश देता हूं कि तू वचन का प्रचार कर, समय और असमय तैयार रह… पर तू सब बातों में सावधान रह, दु:ख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर, और अपनी सेवा को पूरा कर। क्योंकि अब मैं अर्घ के समान उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूं, मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा, और मुझे ही नहीं वरन् उन सब को भी जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। 2तीम 4:1-8

क्या आप महिमामय धर्म का मुकुट पाना नहीं चाहते? कौन दुख और पीड़ा सहन कर सकता है अगर वह अकेले जीवन का मुकुट न पा सके, जबकि उसके आसपास सभी लोग उसे प्राप्त करें?

यदि हम किसी भी ऐसे व्यक्ति से मिलें, जो अभी तक सत्य में नहीं आया है, चाहे परिवार का कोई हो या पड़ोसी हो या फिर सहकर्मी हो, तो हमें उसे वचन का प्रचार करना चाहिए। जैसे एक लड़की एक ग्लास दूध परोसने के छोटे प्रयास के प्रतिफल के रूप में भारी मेडिकल बिल का भुगतान कर सकी, वैसे ही हमें निश्चित रूप से अपने प्रयासों का प्रतिफल मिलेगा चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों। परमेश्वर ने हमें जीवन के वचन दिए हैं जिनसे लोग पुनर्जीवित हो सकते हैं अगर वे सिर्फ उसे सुनें, और इस युग में अपने लोगों को इतने आश्चर्यजनक परिणाम भी प्रदान किए हैं कि हम प्रेरित पौलुस से अधिक गर्व महसूस कर सकें।

अगर हम परमेश्वर के द्वारा निर्धारित रीति के अनुसार काम करें, तो सुसमाचार का कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा। अपने तरीके या विचार पर जोर देने के बजाय, हमें अपने आपको जांचना चाहिए कि जो हम सोच रहे हैं और कर रहे हैं, क्या वह परमेश्वर की इच्छा से मेल खाता है या नहीं। जब हम अपना जीवन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जिएं, तो हम सुसमाचार के सुंदर और विश्वासयोग्य गवाह होंगे।

गवाहों को सिर्फ शब्दों के द्वारा नहीं, पर कर्मों के द्वारा भी अपने कर्तव्य को निभाना चाहिए। चाहे हम घर के अन्दर हों या नौकरी पर हों, हमें सिर्फ बाइबल के शाब्दिक अर्थों का प्रचार नहीं करना चाहिए, पर हमें अपने दैनिक जीवन में रोजाना ही कर्मों के द्वारा यह भी गवाही देनी चाहिए कि परमेश्वर कितने सच्चे और खरे हैं। अगर हम परमेश्वर के विश्वासयोग्य गवाह हैं, तो हमें अपने अच्छे कर्मों के द्वारा संसार का नमक और ज्योति बनकर सेवा करनी चाहिए और परमेश्वर के वचन का प्रचार करके संसार की सत्य की ओर अगुवाई करनी चाहिए। स्वर्गीय पिता और माता की शिक्षाओं का पालन करके हमें हमेशा धार्मिक जीवन जीना चाहिए। और परमेश्वर के सिखाए हुए सुंदर कर्मों के साथ, हमें सामरिया और पृथ्वी की छोर तक जाना चाहिए और सिर्फ अपने देश में ही नहीं, पर सारे संसार के हर क्षेत्र में परमेश्वर के गवाहों के रूप में अपना मिशन पूरा करना चाहिए।

कृपया इसे न भूलें कि यीशु ने 2,000 साल पहले तीन बार हमसे क्या अनुरोध किया। यह हमारे स्वर्गीय पिता का अंतिम अनुरोध भी है, जिसे उन्होंने इस पृथ्वी पर दूसरी बार आकर किया। परमेश्वर जिन्होंने हमें बुलाया और चुना है, उनकी इच्छा को महसूस करते हुए आइए हम सब पूरे संसार के लोगों को परमेश्वर के गवाहों के रूप में सुसमाचार का प्रचार करें और अपने मिशन को पूरा करें।