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विश्व सुसमाचार और माता का समर्थन

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हर कोई अपने आत्मिक घर की कमी महसूस करता है जो खुशी और हर्ष से भरपूर रहता है, और वहां जाने की कामना करता है। लेकिन स्वर्ग जाने के लिए हमें पहले पृथ्वी पर अपने दिए हुए जीवन के सही मार्ग पर पूरी तरह चलना चाहिए। जिस प्रकार इस्राएली 40 वर्ष तक जंगल के मार्ग पर चलने के बाद ही कनान देश में पहुंच सके, उसी प्रकार हम तभी स्वर्ग में पहुंच सकेंगे जब हम आत्मिक जंगल, यानी विश्वास के मार्ग पर पूरी तरह चलेंगे जिस पर पिता चले और माता आज चल रही हैं।

हम अपने पापों के कारण इस पृथ्वी पर निकाल दिए गए हैं। अपनी पापी संतानों को स्वर्ग के राज्य में लौटाने के लिए, परमेश्वर ने उनके स्वर्ग वापस जाने की यात्रा में “प्रचार” नामक एक प्रक्रिया को रख दिया है। परमेश्वर ने उस प्रक्रिया के द्वारा एक मार्ग को तैयार किया है, जिसके द्वारा हम स्वर्गीय पिता और माता के प्रेम और बलिदान को महसूस करके और परमेश्वर का मन समझकर जो एक आत्मा को दुनिया की किसी भी चीज से ज्यादा मूल्यवान मानता है, स्वर्ग में पहुंच सकते हैं। इस मार्ग में चलते हुए थके हुए अपने बच्चों को माता अब भी लगातार प्रोत्साहित कर रही है और बढ़ावा दे रही हैं।

मानव जाति को बचाने का लक्ष्य और मिशन

विश्व गांव में अरबों लोग रहते हैं। कुछ लोग बिना किसी लक्ष्य के दिशाहीन जीवन जीते हैं, और कुछ लोग जीवन में कोई न कोई लक्ष्य बनाकर जीते हैं। हर व्यक्ति अलग–अलग लक्ष्य मानकर बैठा है। किसी का लक्ष्य बड़ा है, तो किसी का छोटा।

अधिकतर लोग अपने छोटे लक्ष्यों और प्रयासों से संतुष्ट होते हैं। लेकिन जैसे कि एक पुरानी कहावत है, “हे जवानो, बड़ा सपना देखो!” हमसे पहले की पीढ़ियों के बुद्धिमान व्यक्तियों ने लोगों को बड़ा सपना रखने की सलाह दी है। इसका मतलब है कि हमें अपने पास एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखना चाहिए। हमें अपने विश्वास के जीवन में भी बड़ा लक्ष्य बनाना जरूरी है।

यह मतलब नहीं कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं; पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिसके लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। हे भाइयो, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं जिसके लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। फिलि 3:12–14

प्रेरित पौलुस ने कहा, “मैं आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं जिसके लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।” निशाने का दूसरा शब्द है, लक्ष्य।

अनन्त स्वर्ग के राज्य में जीवन खुशीमय व्यतीत करने के लिए, हमें पहले अपनी दौड़ को सफलतापूर्वक पूरा करना चाहिए। हमें बिना किसी योजना या लक्ष्य के अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए; इसके बजाय, हमारे पास दुनिया के सभी लोगों को सुसमाचार की घोषणा करने का दृढ़ संकल्प होना चाहिए और हमें मानव जाति को बचाने के महान लक्ष्य की ओर दौड़ते हुए हर दिन 24 घंटे बिताने चाहिए। प्रचार का कार्य सबसे महान और सबसे पवित्र कार्य है जिसे परमेश्वर ने हमें सौंपा है(1थिस 2:4)।

संसार में सभी को सुसमाचार का प्रचार करना कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे परमेश्वर के दृष्टिकोण से महान माना जाता है; हालांकि, यह मनुष्य के दृष्टिकोण से एक महान कार्य है। चूंकि यह हमारे लिए बहुत बड़ा लक्ष्य है, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें बहुत बड़ा प्रयास करने की जरूरत है। जब हम संसार में सभी को बचाने के लक्ष्य को सामने रखकर काम करेंगे, तब से हमारी मानसिकता और व्यवहार बदल जाएंगे ताकि हम बड़ा काम कर सकें, और इसके साथ ही सभी आत्मिक सिस्टम चालू हो सकेंगे। कोई सोचता है कि, ‘एक महीने में केवल एक फल पैदा करना मेरे लिए पर्याप्त है,’ और कोई सोचता है कि, ‘मैं एक महीने में एक सौ या एक हजार फल पैदा करूंगा।’ इन दोनों के विचारों की सीमा, उनके कामों के पैमाने, उनके द्वारा किए जाने वाले प्रयासों की मात्रा और गुणवत्ता में अवश्य ही फर्क होता है।

संसार में हर किसी को बचाने के लिए परमेश्वर की सहायता अति आवश्यक है। बड़े यत्न से परमेश्वर से सहायता के लिए प्रार्थना करते हुए, जितना हो सके आइए हम यह लक्ष्य पूरा करने का प्रयास करें। परमेश्वर ने बाइबल में स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि यह जरूर पूरा हो जाएगा।

विश्व सुसमाचार प्रचार की पूर्ति विश्वास पर निर्भर करती है

पूरे संसार में सुसमाचार का प्रचार करना उन परमेश्वर के लिए कोई कठिन नहीं है जिन्होंने पूरे अंतरिक्ष की सृष्टि की। परमेश्वर स्वयं उसे शायद एक मिनट या एक सेकंड में ही पूरा कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने हमें आशीष पाने का मौका देने के लिए सुसमाचार का प्रचार करने का मिशन सौंप दिया है और इस मिशन के जरिए हमें परमेश्वर का बलिदान और प्रेम सिखाया है।

सुसमाचार का कार्य बहुत जल्दी तब पूरा हो जाएगा जब हम दृढ़ता से विश्वास करें कि हम इसे कर सकते हैं और इसे पूरा करने के प्रयास करें।

जब यीशु वहां से आगे बढ़ा, तो दो अंधे उसके पीछे यह पुकारते हुए चले, “हे दाऊद की सन्तान, हम पर दया कर!” जब वह घर में पहुंचा, तो वे अंधे उसके पास आए, और यीशु ने उनसे कहा, “क्या तुम्हें विश्वास है कि मैं यह कर सकता हूं?” उन्होंने उससे कहा, “हां, प्रभु!” तब उसने उनकी आंखें छूकर कहा, “तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो।” और उनकी आंखें खुल गईं। यीशु ने उन्हें चिताकर कहा, “सावधान, कोई इस बात को न जाने।” पर उन्होंने निकलकर सारे देश में उसका यश फैला दिया। मत 9:27–31

यीशु ने यह कहकर अंधों को प्रोत्साहित किया, “तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो।” तब जैसे ही अंधों के मन में विश्वास हुआ, उन्हें दृष्टि मिल गई।

बाइबल में हम देख सकते हैं कि चाहे कोई भी युग हो, परमेश्वर की सामर्थ्य वैसे ही काम करती है जैसा विश्वास है। पुराने समय में कनान देश में प्रवेश करना लोगों के विश्वास पर ही निर्भर था। कुछ लोगों ने कनान देश में प्रवेश किया, जबकि कुछ लोग उसमें प्रवेश नहीं कर सके। वे लोग जंगल में नष्ट हो गए जिन्होंने कहा था कि, “वे बहुत शक्तिशाली हैं। उनके सामने हम लोगों ने अपने आपको टिड्डा अनुभव किया है। हम उनसे लड़कर विजयी नहीं हो सकेंगे।” लेकिन यहोशू और कालेब जिन्होंने कहा था कि, “हमारे साथ परमेश्वर हैं! हम उन्हें सरलता से हरा देंगे,” कनान देश में प्रवेश कर सके।

परमेश्वर हमेशा हमसे कहते हैं, “तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो।” यदि आप यह विश्वास रखें, ‘जो इसे करेगा, वह मैं नहीं हूं, बल्कि वह परमेश्वर ही हैं जो मेरे द्वारा काम करते हैं। परमेश्वर के लिए सब कुछ संभव है!’ और इस विश्वास के साथ यदि सुसमाचार का प्रचार करें, तो आप कहीं भी सुन्दर फल पैदा कर सकेंगे। लेकिन यदि आप पहले से यह सोच लें, ‘यहां की परिस्थिति मेरे लिए अनुकूल नहीं है, इसलिए यहां प्रचार करना कठिन लग रहा है,’ तो आपके विश्वास के अनुसार परमेश्वर ऐसा होने देंगे।

दुनिया के हर महाद्वीप में सिय्योन के भाई–बहनें आज भी पूरी लगन से सुसमाचार का प्रचार कर रहे हैं। वे सभी माता के सहयोग से विश्व सुसमाचार प्रचार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। आइए हम विश्वास और एकता के साथ इस मिशन को जल्दी पूरा करें। परमेश्वर ने पहले ही वादा किया है कि सुसमाचार का प्रचार सारे जगत में किया जाएगा।

परन्तु जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा। मत 24:13–14

यीशु ने कहा कि राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में सभी जातियों को गवाही के रूप में प्रचार किया जाएगा। ऐसा होने के बाद ही, हम अपने आत्मिक घर जा सकेंगे। वह अनन्त दुनिया हमारा इंतजार कर रही है जहां हम सदा नहीं मुरझा जाएंगे, कभी ऊब नहीं जाएंगे या कभी थक नहीं जाएंगे और हम इस तारे और उस तारे की यात्रा करेंगे और अनन्त जीवन की आशीष भोग लेंगे।

चूंकि परमेश्वर ने हमें बताया है कि हम पूरी दुनिया में अपने बिछुड़े हुए सब भाई–बहनों को ढूंढ़कर उस महिमामय दुनिया में अपने साथ ले आएं, इसलिए हमें पहले सभी जातियों के पास जाकर आत्मिक पिता और माता सुनाना चाहिए और नई वाचा का प्रचार करना चाहिए जो पिता और माता ने हमें बताई है। यही वह मार्ग है जिस पर हमें चलना है। आज हम जिस किसी से भी मिलते हैं, उसे यह पता लगाने के लिए स्वर्ग का समाचार और पिता और माता सुनाते हैं कि क्या वह हमारा भाई है या क्या वह हमारी बहन है। जिनको हम प्रचार करते हैं, उनमें से कोई हमारा भाई या बहन हो सकता है और कोई नहीं हो सकता। यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व सुसमाचार प्रचार पूरा किया जाएगा। बाइबल में भविष्यवाणी के वचनों के अनुसार, राज्य का सुसमाचार सभी जातियों को एक निर्विवाद गवाही के रूप में सारे जगत में प्रचार किया जाएगा।

सब कुछ हमारे विचारों का फल है

मत्ती के 9वें अध्याय में यदि दो अंधों ने यह न सोचा होता कि यीशु उन्हें ठीक कर सकते, तो वे अपनी दृष्टि को दुबारा नहीं पा सकते थे। लेकिन उन्होंने विश्वास किया कि यीशु उन्हें चंगा कर सकते हैं। इसलिए जैसे ही यीशु ने कहा, “तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो,” उन्हें वे चीजें दिखाई देने लगीं जो वे पहले कभी नहीं देख सकते थे। यह सब उनके विचारों का परिणाम था।

यहोवा यों भी कहता है: “सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे। पर उन्होंने कहा, “हम उस पर न चलेंगे।” मैं ने तुम्हारे लिये पहरुए बैठाकर कहा, ‘नरसिंगे का शब्द ध्यान से सुनना!’ पर उन्होंने कहा, ‘हम न सुनेंगे।’ इसलिये, हे जातियो, सुनो, और हे मण्डली, देख, कि इन लोगों में क्या हो रहा है। हे पृथ्वी, सुन; देख, कि मैं इस जाति पर वह विपत्ति ले आऊंगा जो उनकी कल्पनाओं का फल है, क्योंकि इन्होंने मेरे वचनों पर ध्यान नहीं लगाया, और मेरी शिक्षा को इन्होंने निकम्मी जाना है। यिर्म 6:16–19

विचारों के फल का वर्णन विश्वास के फल के रूप में भी किया जा सकता है। इस युग में भी परमेश्वर जोर देकर कह रहे हैं, “सब कुछ तुम्हारे विश्वास के अनुसार पूरा हो जाएगा। सब कुछ हमारे विचारों का फल है।” परमेश्वर ने यह कहा है कि सुसमाचार सामरिया और पृथ्वी के छोर तक प्रचार किया जाएगा। वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर जो सब कुछ कर सकते हैं, हमसे पूरे संसार में सुसमाचार का प्रचार करने के लिए लगातार कहते हैं और हमें वह मार्ग दिखाते हैं जिस पर हमें अवश्य ही चलना चाहिए।

यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ…” मत 28:18–20

जब हम उस मार्ग की ओर जाते हैं, सिर्फ तभी हम अपने अनन्त घर, स्वर्ग में पहुंच सकते हैं। इस कार्य को करने के लिए जो परमेश्वर की सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा है, हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

फौज में सिर्फ बंदूक उठाने वाले सैनिक ही नहीं होते, बल्कि अन्य भोजन पहुंचाने वाले और सामग्रियों की आपूर्ति करने वाले प्रशासनिक सैनिक भी होते हैं। उन सभी को एकता के साथ एकजुट हो जाना चाहिए। यही एकता सुसमाचार के कार्य के लिए भी आवश्यक है। जब हम एकजुट होकर अपनी सारी शक्तियों को एक साथ मिलाकर सुसमाचार के कार्य में लगाएं, तब हम सुसमाचार का अद्भुत परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं। चाहे चर्च में रसोई का काम हो, चर्च के दफ्तर का काम, चर्च का प्रबंध या कोई और, जितने भी काम हैं, यदि आप उन्हें परमेश्वर के लिए करते हैं, तो आप सुसमाचार के कार्य में भाग लेते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां काम करते हैं। हम अपनी परिस्थितियों में पूरी तरह वफादारी से अपने कर्तव्यों को निभाते हुए और एक दूसरे की सहायता करते हुए सुसमाचार का कार्य पूरा कर सकते हैं जिससे पिता और माता प्रसन्न होते हैं।

विश्वास करनेवाले के लिए सब कुछ संभव है

हम चाहे जहां कहीं भी हों, चाहे जिस किसी से भी मिलें, सुसमाचार का प्रचार कर सकते हैं। नौकरी करने वालों को अपने कार्यस्थलों में, छात्रों को अपने स्कूलों में, और गृहिणियों को अपने घर और पड़ोस में प्रचार करना चाहिए। यदि हम एकता में मिलकर काम करते रहेंगे, तब वह दिन अवश्य आएगा जब हर देश परमेश्वर का सुसमाचार सुनेगा।

क्या यहोवा के लिये कोई काम कठिन है?… उत 18:14

यीशु ने उससे कहा, “यदि तू कर सकता है? यह क्या बता है! विश्वास करनेवाले के लिये सब कुछ हो सकता है।” मर 9:23

क्या परमेश्वर के लिए कोई काम कठिन है? वह सब कुछ करने में सक्षम हैं। यद्यपि बाइबल हमें परमेश्वर के बारे में इस तरह स्पष्ट रूप से सिखाती है, फिर भी संदेह करते हुए इसे लेकर दुविधा में रहना गलत है कि क्या यह सच में संभव है? सब कुछ हमारे विचारों का फल है और हमारे विश्वास के अनुसार होता है। हमें अपनी योग्यता पर आधारित नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचनों पर आधारित होकर न्याय करना चाहिए। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने पहले से यह वादा किया है कि वह हमारे लिए सब कुछ पूरा करेंगे।

क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता। लूक 1:37

जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है, वह प्रभावरहित नहीं होता। जब परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो,” तब पूरी अंधेरी और सुनसान पृथ्वी में उजियाला हो गया। जब परमेश्वर ने कहा, “जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए,” तब उसके नीचे का जल और उसके ऊपर का जल अलग–अलग हो गए। परमेश्वर के मुख से निकलने वाला हर वचन अवश्य पूरा होता है और वह व्यर्थ ठहरकर वापस नहीं लौटता(उत 1:1–8; यश 55:11)।

परमेश्वर ने पूरे अंतरिक्ष, असंख्य आकाशगंगाओं और उनके तारों को बनाया और सूर्य से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर पृथ्वी को लटकाया और चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने दिया और साथ ही चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के द्वारा पृथ्वी पर ज्वार–भाटा पैदा करके सागरों के पानी को ऊपर उठाते हैं और नीचे गिराते हैं। हमें अवश्य विश्वास करना चाहिए कि ऐसा अद्भुत काम करने की शक्ति रखने वाले सृष्टिकर्ता परमेश्वर के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।

ऐसे महान सृष्टिकर्ता परमेश्वर जो अंतरिक्ष में सभी कार्यों का संचालन करते हैं, पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में इस पृथ्वी पर आए हैं और हमसे कहते हैं, “तुम मेरी सन्तान हो। किसी बात की चिंता मत करो। मैं तुम्हारी सहायता करूंगा। मैं तुम्हारे शत्रु को हराकर तुम्हारे सामने से निकाल दूंगा और अंधकार का पर्दा दूर कर दूंगा। इसलिए मत डरो। उठो और प्रकाशमान हो।” चूंकि परमेश्वर हमारी सहायता करते हैं, इसलिए हमें बिल्कुल भी डरने की आवश्यकता नहीं है।

परमेश्वर अपनी सन्तानों को लगातार प्रोत्साहन देते हैं

कृपया उन पलों को याद कीजिए जब आप प्राथमिक स्कूल में खेलकूद दिवस में उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते थे। खेलकूद दिवस में माता–पिता अपने बच्चों के स्कूल में आते हैं, और जब उनके बच्चे दौड़ में भागते, तब वे उनका नाम पुकारते हुए उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। तब वह बच्चा भी जो पहले हमेशा दौड़ में सबसे पीछे रह जाता था, अपनी पूरी शक्ति व स्फूर्ति के साथ दौड़ता है।

विश्व सुसमाचार प्रचार के महान कार्य को हासिल करने के लिए परमेश्वर का समर्थन पूर्णतया आवश्यक है। माता भी पूरे संसार में अपनी संतानों को प्रोत्साहन दे रही हैं, इसलिए आइए हम सब विश्वास रखें, ताकि हम अपनी दौड़ को पूरा करके विजय प्राप्त कर सकें और सुरक्षित रूप से स्वर्ग में पहुंच सकें।

तू जिसे मैंने पृथ्वी के दूर दूर देशों से लिया और पृथ्वी की छोर से बुलाकर यह कहा… मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मर ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्भाले रहूंगा। देख, जो तुझ से क्रोधित हैं वे सब लज्जित होंगे; जो तुझ से झगड़ते हैं उनके मुंह काले होंगे और वे नष्ट होकर मिट जाएंगे। जो तुझ से लड़ते हैं उन्हें ढूंढ़ने पर भी तू न पाएगा; जो तुझ से युद्ध करते हैं वे नष्ट होकर मिट जाएंगे। क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहूंगा, “मत डर, मैं तेरी सहायता करूंगा।” यश 41:9–13

… मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम लेकर बुलाया है, तू मेरा ही है। जब तू जल में होकर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में होकर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं… मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरे बदले मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा। मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा, और पश्चिम से भी इकट्ठा करूंगा। यश 43:1–5

यह हमारे लिए एक संदेश है जिसे पिता और माता ने हमें प्रोत्साहित करने के लिए 2,700 साल पहले यशायाह नबी के द्वारा दिया था। परमेश्वर ने कहा है कि वह अपनी सन्तानों को बचाएंगे, उन्हें इकट्ठा करेंगे और उनकी सहायता करेंगे। परमेश्वर ने हमसे कहा है कि वह हमारी सहायता करेंगे, तो इससे बड़ा प्रोत्साहन और क्या हो सकता है?

विश्व सुसमाचार प्रचार माता के समर्थन से पूरा किया जा रहा है

माता ने सिय्योन में अपनी संतानों से कहा, “आप ही मेरी एकमात्र चिंता और मेरे जीवन का सब कुछ हैं।” समर्थन के इस संदेश को सुनने के बाद, हमारे सदस्य बहुत प्रोत्साहित हुए, और सुसमाचार के लिए अपने दृढ़ संकल्प को नवीनीकृत किया। इस तरह के एहसास के बारे में खुशी की खबर दुनिया भर से लगातार आ रही है। माता के प्रोत्साहन के शब्दों को सुनकर, उन्होंने एक बार फिर अपने विश्वास के जीवन पर प्रतिबिंब किया और सोचने लगे: “माता हमेशा हर तरह से मेरा समर्थन करती हैं। क्या मेरे जीवन में माता ही मेरी एकमात्र चिंता और मेरा सब कुछ हैं? अब तक सभी समयों में मेरे पास किस बात की चिंता थी? क्या मैंने अपना जीवन सभी प्रकार की सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने में नहीं बिताया है?”

उस से मेलमिलाप कर तब तुझे शान्ति मिलेगी; और इससे तेरी भलाई होगी। उसके मुंह से शिक्षा सुन ले, और उसके वचन अपने मन में रख। यदि तू सर्वशक्तिमान की ओर फिरके समीप जाए, और अपने डेरे से कुटिल काम दूर करे, तो तू बन जाएगा। तू अपनी अनमोल वस्तुओं को धूल पर, वरन् ओपीर का कुन्दन भी नालों के पत्थरों में डाल दे, तब सर्वशक्तिमान आप तेरी अनमोल वस्तु और तेरे लिये चमकीली चांदी होगा। तब तू सर्वशक्तिमान से सुख पाएगा, और परमेश्वर की ओर अपना मुंह बेखटके उठा सकेगा। तू उससे प्रार्थना करेगा, और वह तेरी सुनेगा; और तू अपनी मन्नतों को पूरी करेगा। जो बात तू ठाने वह तुझ से बन भी पड़ेगी और तेरे मार्गों पर प्रकाश रहेगा। अय 22:21–30

परमेश्वर के विश्वासयोग्य वचन हमेशा हमें बड़ी राहत, प्रोत्साहन और हौसला देते हैं। हमें परमेश्वर के वचनों को अपने हृदय में अंकित करके परमेश्वर को अपना खजाना मानना चाहिए।

परमेश्वर हमेशा हमारी चिंता करते हैं, लेकिन हम अक्सर सांसारिक बातों पर ध्यान लगा रहे हैं। परमेश्वर कहते हैं कि यदि हम उन्हें निकाल फेंकें, तो जो कुछ हम तय करेंगे उसमें हमें सफलता मिलेगी। ठीक ऐसा ही सुसमाचार के कार्य के साथ भी है। यदि हम सिर्फ परमेश्वर के बारे में सोचें और उन्हें अपने जीवन का सब कुछ बना लें, तब हम सब कुछ कर सकेंगे। जो कुछ हमने तय किया है वह पूरा हो जाएगा।

माता के प्रोत्साहन के संदेश को याद करते हुए, आइए हम भी माता को यह प्रोत्साहन का संदेश भेजें कि, “हम सिर्फ आपके बारे में चिंतित हैं और आप ही हमारे जीवन का सब कुछ है!” मैं सिय्योन के सभी भाई–बहनों से उत्सुकता से निवेदन करता हूं कि आप सुन्दर विश्वास रखें और हमेशा माता के प्रोत्साहन के द्वारा हौसला बढ़ाते हुए सामरिया और पृथ्वी के छोर तक संसार के सब लोगों के सामने पिता और माता की महिमा चमकाएं।