‘ऐसा ही होना अवश्य है,’ इस पवित्रशास्त्र के वचन के अनुसार

मत्ती 26:46–56

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रात को यीशु अपने चेलों के साथ गतसमनी नामक एक स्थान में आए। जब यीशु प्रार्थना कर चुके, तो वह नींद से भरे चेलों के पास आए।

“उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वानेवाला निकट आ पहुंचा है।”

जब वह यह कह ही रहे थे, यहूदा इस्करियोती आया, और उसके साथ तलवारों और लाठियों से लैस प्रधान याजकों और लोगों के पुरनियों की भेजी एक बड़ी भीड़ भी थी।

यहूदा ने उस संकेत के अनुसार यीशु को चूमा, जिसे उसने पहले सैनिकों के साथ बनाया था।

“हे मित्र, जिस काम के लिए तू आया है, उसे कर।”

फिर भीड़ के लोगों ने पास जाकर यीशु को दबोच कर बंदी बना लिया। यीशु के चेलों में से पतरस ने तलवार खींच ली और महायाजक के दास पर चलाकर उसका कान उड़ा दिया। यीशु ने उसे डांटा।

“अपनी तलवार को म्यान में रखो। क्या तू नहीं जानता कि मैं अपने पिता को बुला सकता हूं और वह तुरंत स्वर्गदूतों की बारह पलटन से भी अधिक मेरे पास भेज देगा? परन्तु यदि मैं ऐसा करूं तो पवित्रशास्त्र की वे बातें कि ऐसा ही होना अवश्य है, कैसे पूरी होंगी?”

और फिर यीशु ने भीड़ से कहा,

“तुम तलवारें और लाठियां लेकर मुझे पकड़ने ऐसे क्यों आए हो जैसे किसी चोर को पकड़ने आते हैं? मैं हर दिन मन्दिर में बैठकर उपदेश दिया करता था और तुमने मुझे नहीं पकड़ा। परन्तु यह सब इसलिए हुआ है कि भविष्यवक्ताओं के वचन पूरे हों।”

पलटन प्राचीन रोमन सेना की इकाई है; एक पलटन 6,000 सैनिकों को दर्शाती है। तब बारह पलटनें 70,000 से अधिक सैनिक होंगे।

यीशु इतनी बड़ी संख्या के स्वर्गदूतों को तुरन्त बुलाकर दुश्मनों को नष्ट कर सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, ताकि पवित्रशास्त्र की वे बातें कि ऐसा ही होना अवश्य है, पूरी हो सकें। मसीह का हमारे पापों के बदले दुख उठाना और बलिदान करना, यह सब बाइबल की भविष्यवाणी थी। ये सब बातें पूरी होने के बाद ही हम उद्धार प्राप्त कर सकते हैं।

वह दुख जो परमेश्वर हमारे उद्धार के लिए इस संसार पर उठा रहे हैं, समाप्त नहीं हुआ (यश 54)। भविष्यवाणी पूरी होने के दौरान चाहे परमेश्वर की सामर्थ्य अदृश्य हो, हमें संदेह करने या हड़बड़ी में होने की जरूरत नहीं है। सभी बातें ‘ऐसा ही होना अवश्य है,’ इस पवित्रशास्त्र के वचन के अनुसार पूरी हो रही हैं।