अभिनेता–प्रेक्षक पूर्वाग्रह

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यदि आपको काम पर पहुंचने में देर हो जाती है, तो आप ट्रैफिक जाम या बस का लंबा अंतराल जैसे कई कारणों से अपने आप को सही ठहराते हैं। लेकिन यदि आपका सहकर्मी देर से आता है, तो आप उसे अलसी व्यक्ति मानते हैं। यदि आपकी परीक्षा खराब होती है, तो आपको लगता है कि वह परीक्षा बहुत मुश्किल थी, लेकिन यदि दूसरे खराब करते हैं, तो आप यह निष्कर्ष निकालते हैं कि उन्होंने यत्न से अध्ययन नहीं किया है। हर किसी को कभी न कभी इस तरह की मनोवैज्ञानिक त्रुटि प्राप्त होती है।

‘अभिनेता–प्रेक्षक पूर्वाग्रह’ सामाजिक मनोविज्ञान में एक शब्द है। यह ऐसी प्रवृत्ति को दर्शाता है कि खुद के कार्यों के लिए बाहरी कारणों पर दोष लगाता है और अन्य लोगों के कार्यों के लिए आंतरिक कारणों पर दोष लगाता है। दरअसल लोग अपने आपको दी गई स्थिति के अनुसार जो अभिनेता है या प्रेक्षक है, सोचने के ढंग अलग–अलग हैं।

ऐसी गलती न करने के लिए, हमें दूसरों को समझने के लिए प्रयास करने चाहिए। चूंकि हम दूसरों की परिस्थितियों और विचारों को 100% नहीं समझ सकते, भले ही हमें लगता है कि हम अपने तरीकों से दूसरों के प्रति विचारशील हैं, यह फिर भी एक गलतफहमी हो सकती है। इसलिए हमें दूसरों के प्रति अधिक उदार बनना चाहिए। जब हम प्रेक्षक के पद से बाहर आकर दूसरों की स्थिति में खुद को डालते हैं, और जब हम अप्रत्याशित कारणों की संभावना को ध्यान में रखते हैं, तो हम अभिनेता–प्रेक्षक पूर्वाग्रह को कम कर सकते हैं।