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पिता का घर

मैड्रिड, स्पेन से तानिया मरियल टोमाटेओ ममनी

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जब मैं छोटी थी, मेरे पिता ने खुद ही एक घर बनाया; उन्होंने अपना वेतन बचाकर ईंटों, सीमेंट, स्टील सलाखों और फावड़ियों जैसी सामग्रियां खरीदीं, और उन्हें बगीचे में इकट्ठा किया। मुझे अभी भी याद है कि मेरे पिता का चेहरा नाली खोदते हुए मिट्टी से ढक गया था और उनके माथे पर पसीना बह रहा था। बचपन में, मुझे ऐसा लगा कि निर्माण कार्य कभी खत्म नहीं होगा, और मुझे समझ में नहीं आया कि वह घर बनाने के लिए इतना कठिन परिश्रम क्यों कर रहे थे।

जब मैं वयस्क हो गई, तो घर जो मेरे पिता ने पिछले कुछ वर्षों से बना रहा था, पूरा बन गया। वह आसपास के घरों में से सबसे सुंदर दो मंजिला घर था। शानदार रंग से पेंट की गई बाहरी दीवार, मां के लिए बनाया गया एक बगीचा, और घर का आंतरिक भाग जो गर्माहट महसूस कराता है… घर के हर कोने में और हर एक ईंट में मेरे पिता का प्रेम समया हुआ था।

जब भी मैं काम करने के बाद घर में वापस आती थी, मुझे महसूस होती थी कि मेरे पिता का परिश्रम कितना मूल्यवान था। ‘पिता को कितना गर्व महसूस हुआ होगा?’ मैं पिता के मन की कल्पना करती थी।

जब मैंने शादी की, तो मैं विदेश में रहने लगी और मेरे माता-पिता और बहन भी विदेश में रहने लगे। मेरे माता-पिता कुछ सालों से विदेश में बस गए, तो उन्हें दो मंजिला घर बेचना पड़ा।

जब हम घर खाली करने के लिए वहां फिर से गए, तो मैंने कमरे और बैठक कक्ष में छोड़े गए निशानों को बारीकी से देखा। दीवार पर निशान जो मेरी बहन के साथ खेलते समय छोड़ गया, खिड़की जिस पर मेरा नाम लिखा था, और जगह जिस पर फोटो फ्रेम लटके हुए थे… घर की याद में डूबकर मैं अंत में रो पड़ी।

पिता कभी भी खुद के लिए चीजें नहीं खरीदते थे। पिता ने इनकी परवाह नहीं की कि घर बनाने के लिए कितना खर्च आएगा, कितना समय लगेगा, और उन्हें क्या छोड़ना पड़ेगा। पिता हर महीने सामग्रियां खरीदते थे और हमें एक सुखद और आरामदायक जगह प्रदान करने के लिए एकमात्र इच्छा के साथ हमारा घर बनाया था।

आजकल ज्यादातर लोग पहले से ही बनाए गए घर को खरीदते हैं या किराए पर लेते हैं और इसे थोड़ा सा मरम्मत करते हैं। लेकिन हमारा घर बहुत खास था। क्योंकि हमारा घर पिता के प्रेम, धैर्य और भक्ति के साथ बनाया गया था। अपने पिता के द्वारा बनाए गए विशेष घर में रहने वाले लोग कितने होंगे?

लेकिन, मैंने कभी भी पिता को अपना प्रेम या उनके प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त नहीं किया। जब भी मैं अपने वृद्ध पिता के कठोर हाथ देखती हूं, मुझे शर्म आती है कि मैंने पिता को कभी धन्यवाद नहीं दिया जिन्होंने परिवार के लिए कड़ी मेहनत की थी।

वह घर उनके लिए एक खजाने की तरह था, लेकिन जब उन्हें विदेश में जाना पड़ा तो उन्होंने उसे छोड़ने में संकोच नहीं किया। मुझे ऐसा लगा कि चाहे उन्होंने कड़ी मेहनत से सुंदर घर बनाया, फिर भी परिवार के बिना वह सुंदर घर उनके लिए व्यर्थ था। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि सभी परिवारवाले एक साथ रहते हैं।

जहां कहीं भी हम हैं पिता हमारा घर बन जाते हैं। मैं खुश हूं क्योंकि मेरे पास पिता नामक एक घर है। पिता, जो आपने हमारे लिए किया, उन सब के लिए मैं धन्यवाद देती हूं।