आदरणीय पीनट मैन

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जॉर्ज वॉशिंगटन कार्वर (1864–1943) अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान दास के पुत्र के रूप में पैदा हुए थे। भले ही उन्हें गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी परिस्थिति के बारे में शिकायत नहीं की और अपने मन को सीखने में लगा दिया। उन्हें “पीनट मैन” कहा जाता था क्योंकि उन्होंने मूंगफली के लिए 105 प्रकार के व्यंजन बनाए और 300 से अधिक उत्पादों का आविष्कार किया। लेकिन उन्होंने जानबूझकर अपने आविष्कारों के पेटेंट के लिए आवेदन नहीं दिया ताकि बहुत लोग आसानी से उनकी तकनीकों का इस्तेमाल कर सकें। इसके साथ–साथ, उन्होंने एक अच्छी नौकरी की पेशकश को खारिज कर दिया और केवल गरीब किसानों के लिए अपना ध्यान सिर्फ आविष्कार करने पर केंद्रित किया।

एक दिन उन्हें एक रोगग्रस्त मूंगफलियों का बैग और एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि यदि वह उस रोग का कारण और उपचार करने का तरीका खोज लें तो उन्हें एक बड़ी रकम दी जाएगी। उन्होंने उस रोग को खत्म करने के लिए एक तरीका खोज निकाला। लेकिन उन्होंने किसी भी तरह के मुआवजे का दावा नहीं किया और अपने पत्र में अपनी तकनीकी जानकारी को प्रस्तुत करके यह लिखा,

“परमेश्वर ने इंसानों को अपनी भूमि में मूंगफली बढ़ाने दिया है। लेकिन वह उसके बदले में कोई मुआवजा लेना नहीं चाहते। तो किसी रोग का कारण खोजने के लिए मैं कैसे कुछ मांग सकता हूं?”

एक ईसाई के रूप में उन्होंने हमेशा एक विनम्र जीवन जिया। वह इतनी मितव्ययता से जीते थे कि वह प्रयोगात्मक उपकरणों के रूप में एक धंसे हुए बर्तन और एक कांच की बोतल का इस्तेमाल करते थे। लेकिन वह बिना किसी हिचक के अन्य लोगों के साथ अपनी चीजें बांटते थे, इसलिए अभी भी उन्हें अमेरिकियों की ओर से मान–सम्मान प्राप्त होता है।