मुझे बपतिस्मा लेने में क्या बाधा है?

प्रे 8:26–39

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“उठ और दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से गाजा को जाता है।”

परमेश्वर के स्वर्गदूत से निर्देश पाकर फिलिप्पुस चल दिया और जंगल में पहुचा। वहां फिलिप्पुस एक एकान्त जगह में इथोपिया के उच्चाधिकारी खोजे से मिला। वह आराधना करने के लिए यरूशलेम में गया था, और लौटते हुए वह अपने रथ में बैठकर पवित्रशास्त्र पढ़ रहा था।

पवित्र आत्मा के निर्देशानुसार फिलिप्पुस ने उस रथ के पास जाकर उससे पूछा, “क्या जिसे तू पढ़ रहा है, उसे समझता है?”

“मैं भला तब तक कैसे समझ सकता हूं, जब तक कोई मुझे इसकी व्याख्या नहीं करे?”

फिर उसने फिलिप्पुस से विनती की कि वह रथ पर चढ़कर उसके पास बैठे।

“वह भेड़ के समान वध होने को पहुंचाया गया, और जैसा मेम्ना अपने ऊन कतरनेवालों के सामने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला… यह मुझे बताइए कि भविष्यवक्ता यह किसके बारे में कह रहा है?”

खोजे के सवाल पर, फिलिप्पुस ने उसी वचन से शुरू करके उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया। मार्ग में आगे बढ़ते हुए वे कहीं पानी के पास पहुंचे। फिर खोजे ने कहा,

“देख! यहां पानी है। अब मुझे बपतिस्मा लेने में क्या बाधा है?”

और फिलिप्पुस और खोजा दोनों पानी में उतर गए, और फिलिप्पुस ने उसे बपतिस्मा दिया।

उच्चाधिकारी इथोपियाई खोजे ने जो अपने देश के सारे राजकोष का प्रबंध करता था, फिलिप्पुस से सुसमाचार सुनकर महसूस किया कि यीशु मसीह हैं। उसके तुरन्त बाद जो उसने किया, वह यह था कि उसने मसीह के नाम से बपतिस्मा लिया और पापों की क्षमा पाई।

खोजा यह कह सकता था कि वह अपने पद के लिए एक उपयुक्त और बेहतर जगह में बपतिस्मा ले। लेकिन वह जंगल की खराब स्थिति की परवाह किए बिना परमेश्वर के वचन के अनुसार सब किया। क्योंकि वह जानता था कि उसकी गरिमा या सम्मान से ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है।

जो आशीष का मूल्य जानता है, वह बिना किसी हिचकिचाहट के परमेश्वर की इच्छा का पालन करता है। इसके आगे कुछ नहीं हो सकता। सत्य को बहुमूल्य मानने और परमेश्वर को भय मानने की विनम्रता, यह सद्गुण हमारे पास तब होगा जब हम अपनी आत्माओं को मृत्यु से बचाने वाले उद्धारकर्ता को सही रूप से पहचान लें। परमेश्वर ऐसे नम्र लोगों को इकट्ठा करते हैं। संसार के सब नम्र लोग जो परमेश्वर के नियमों का पालन करते हैं, स्वर्ग के मालिक हैं(सपन 2:1–3)।