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परमेश्वर का वचन और भोजन

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भोजन खाए बिना, मनुष्य ठीक से काम नहीं कर सकते, न तो ठीक से सोच सकते हैं और न ही अपने उद्देश्य और योजनाओं को पूरा कर सकते हैं। आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। यदि हम आत्मिक भोजन न खाएं, तो हम उन आत्मिक कार्यों के अनुग्रहमय परिणाम नहीं प्राप्त कर सकते जिनकी हम आशा करते हैं।

बाइबल हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि परमेश्वर का वचन हमारे लिए जीवन का भोजन है और उसमें हमारी आत्माओं को नया करने की शक्ति है। यीशु ने हमें सिखाया है कि, “नाशवान् भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है”(यूह 6:27)। यीशु ने चेतावनी दी कि हमें नाशवान् भोजन का, यानी सांसारिक चीजों का पीछा करके, आत्मिक भोजन यानी परमेश्वर के वचन की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। अब, आइए हम यह समझने के लिए कुछ समय लें कि परमेश्वर के वचनों का भोजन हमारे लिए कितना बहुमूल्य है।

मजदूर मधुमक्खी और रानी मधुमक्खी के बीच का अंतर

मधुमक्खियां एक परिश्रमी जीव हैं जो पौधों को फल उत्पन्न करने में सहायता करता है और प्राकृतिक पारितंत्र को बनाए रखने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उनमें मजदूर मधुमक्खियां होती हैं जो अपने जीवन भर काम करती हैं और एक रानी मधुमक्खी होती है जो अपने झुण्ड की अगुआई करती है। मजदूर मधुमक्खियों और रानी मधुमक्खी के बीच केवल भोजन का ही अंतर होता है।

जब मधुमक्खियां अंडों से निकलकर इल्लियों में बदलते हैं, तो वे सभी रॉयल जेली कहा जाने वाला एक ही भोजन खाती हैं। लेकिन मजदूर मधुमक्खियां अपने जीवन के पहले तीन या चार दिनों तक रॉयल जेली खाती हैं और बाद में दूसरा भोजन खाती हैं, जबकि रानी मधुमक्खी अपने पूरे जीवन-भर रॉयल जेली खाती है। रानी मधुमक्खी मजदूर मधुमक्खियों से आकार में बड़ी होती है और वह उनसे कहीं अधिक लम्बी आयु जीती है; मजदूर मधुमक्खियों के सात सप्ताहों के जीवनकाल की तुलना में रानी मधुमक्खी सात साल तक जीती है। यह अंतर उनके भोजन के कारण पैदा होता है।

कीड़ों की दुनिया में, हम परमेश्वर के प्रयोजन को देख सकते हैं। अनन्त स्वर्ग के राज्य में हमें राजकुमार और राजकुमारियां बनाने के लिए, परमेश्वर ने राज-पदधारी याजकों के पद को आरक्षित रखा है और वह इस पृथ्वी पर हमें आत्मिक रूप से प्रशिक्षित करते हैं(1पत 2:9; नीत 17:3)। फिर भी, यदि हम इस सांसारिक जीवन से थक कर, परमेश्वर के वचनों की उपेक्षा करें और परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करना रोक दें, तो अंत में हम उस शानदार पद तक पहुंचने में असफल रहेंगे जो हमारा इंतजार कर रहा है।

इस संसार में रहते हुए, हम संसार की चीजों पर बहुत समय बिताते हैं। हम शारीरिक भोजन के लिए काम करने में, सांसारिक मामलों, मनोरंजन और शौक के लिए काफी समय खर्च करते हैं। इस सांसारिक जीवन में, हमें अपने आप से सवाल करना चाहिए कि ‘हम परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करने में कितने घंटे बिताते हैं?’ मधुमक्खियों की दुनिया में, कुछ मधुमक्खियां केवल तीन या चार दिनों तक रॉयल जेली खाती हैं और अंत में एक मजदूर मधुमक्खी बन जाती हैं जो सात सप्ताहों के लिए रहती है। उसके विपरीत, वह मधुमक्खी जो रॉयल जेली को खाना जारी रखती है, धीरे-धीरे बदलती है और एक रानी मधुमक्खी बनती है जो आकार में बहुत बड़ी होती है और दूसरी सभी मधुमक्खियों से बहुत लंबा जीवन जीती है। इसी तरह से, जो परमेश्वर के वचनों का भोजन खाना जारी रखते हैं, वे दूसरों का नेतृत्व करने और हमेशा के लिए शासन करने की स्थिति में होंगे।

चूंकि परमेश्वर ने यह आत्मिक भोजन सभी लोगों को दिया है, इसलिए सभी को बिना हिचकिचाहट के उसे ग्रहण करना और खाना चाहिए। जब हम हर रोज परमेश्वर के वचनों का भोजन करते हैं और परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीवन जीते हैं, तो हमें उन राज-पदधारी याजकों के रूप में योग्य होने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा जिनके पास परमेश्वर के वचनों के प्रति आज्ञापालन, परमेश्वर के प्रति आदर और विश्वास हैं।

परमेश्वर के वचन हमारी आत्माओं के लिए भोजन हैं

हमें अपना जीवन हमेशा परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीते हुए और उस स्वर्गीय आशा को रखते हुए जो परमेश्वर अपने वचनों के द्वारा हमें देते हैं, अपने सभी वर्तमान कष्टों और कठिनाइयों को पार करना चाहिए। आइए हम बाइबल की शिक्षा को देखें जो परमेश्वर के वचनों का आत्मिक भोजन के रूप में वर्णन करती है।

परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, “देखो, ऐसे दिन आते हैं, जब मैं इस देश में महंगी करूंगा; उस में न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी।” आम 8:11

परमेश्वर के वचन हमारी आत्माओं के लिए भोजन हैं। जब हमने पहली बार सत्य को ग्रहण किया, तब हमने बहुत सा अनुग्रह प्राप्त किया और वचनों से गहराई तक प्रभावित होते हुए सत्य के वचनों का अध्ययन किया था। लेकिन, जैसे जैसे समय गुजरता है, ऐसा सोचते हुए कि हम सब कुछ जानते हैं, हम परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करने में उपेक्षा करने लगते हैं। सांसारिक कार्यों में व्यस्त रहते हुए, हम परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करने में उपेक्षा करते हैं, धीरे-धीरे परमेश्वर के वचनों का स्वाद खो देते हैं जो शुरुआत में उन्हें शहद के समान मीठे लगते थे। जब इस्राएली के पास जंगल में भोजन नहीं था, परमेश्वर ने उनके लिए हर दिन मन्ना बरसाया था। शुरुआत में, उन्होंने मन्ना का आनन्द लिया, जो मधु के बने हुए पूए के समान स्वादिष्ट था, लेकिन बाद में उन्होंने उसे एक निकम्मी रोटी कहते हुए नापसंद किया(निर्ग 16:31; गिन 21:5)। हमें अपने आपको जांचना चाहिए कि कहीं हम भी ऐसी ही परिस्थिति में तो नहीं।

यदि हम परमेश्वर के वचन, यानी आत्मिक भोजन का लगातार अध्ययन न करें, तो यह उन मजदूर मधुमक्खियों के समान है जो अपने जीवन के पहले तीन या चार दिनों तक रॉयल जेली खाती हैं और बाद में उसे खाना बंद कर देती हैं। जिस क्षण से हम परमेश्वर के वचनों से दूर होना शुरू करेंगे, उसी क्षण से हम स्वर्ग के राज-पदधारी याजक के पद से भी दूर हो जाएंगे। यदि हम अपनी आत्माओं को परमेश्वर के वचनों की निरंतर आपूर्ति करें, और चाहे कल अध्ययन किया था, आज फिर से परमेश्वर के वचन पर ध्यान दें, तो हम उसमें से एक ऐसा नया सबक खोज सकेंगे, जो आज हम पर लागू हो सकता है।

क्योंकि तुम ने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से, परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। क्योंकि “हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है। घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है, परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है।” और यही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था। 1पत 1:23-25

यीशु ने कहा था, “यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता”(यूह 3:3)। परमेश्वर के वचनों में ऐसे अत्यावश्यक तत्व हैं जो हमें परमेश्वर की प्रजा के रूप में नये सिरे से जन्म लेने देते हैं।

हमें परमेश्वर के वचनों से दूर नहीं होना चाहिए। दिन प्रतिदिन, हमें परमेश्वर के वचनों के करीब आना चाहिए। यदि परमेश्वर का वचन हमारे हृदय पर अंकित है, तो हम उसे अपने रोजमर्रा के जीवन में अभ्यास में ला सकते हैं। लेकिन, यदि हम केवल संसार की चीजों को देखें और सुनें, तो हम केवल संसार के मानदण्ड से सभी चीजों का न्याय करेंगे।

दिन में तीन बार भोजन किए बिना, हम ठीक से काम नहीं कर सकते। उसी तरह से, परमेश्वर के वचनों के बिना, हम आत्मिक कार्य नहीं कर सकते। परमेश्वर का वचन ऐसा बहुमूल्य भोजन है जो हमारी आत्माओं को पोषण देता है। इसलिए, हमें इसके बारे में ध्यान से सोचना चाहिए कि हम इस भोजन को केवल कुछ दिनों तक खाएंगे या उसे लगातार खाकर स्वर्ग के राज्य में राज-पदधारी याजक बनेंगे।

परमेश्वर के वचन से जीवित रहेगा

जब यीशु ने चालीस दिनों के उपवास और प्रार्थना को समाप्त किया था, शैतान ने सबसे पहले भोजन के द्वारा ही उनकी परीक्षा की थी। जैसे कि शैतान सभी मानव जाति को फुसलाने का प्रयास करता है कि वे अपने जीवन के उद्देश्य और दिशा इस शारीरिक जीवन की ओर रखें, उसने यीशु को भी फुसलाकर उन्हें पराजित करने की कोशिश की।

तब आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इब्लीस से उस की परीक्षा हो। वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, तब उसे भूख लगी। तब परखनेवाले ने पास आकर उस से कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियां बन जाएं।” यीशु ने उत्तर दिया : “लिखा है, ‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा।’ ” मत 4:1-4

परमेश्वर के मुख से निकलने वाला प्रत्येक वचन हमारे उद्धार के लिए आत्मिक भोजन है। यीशु सिर्फ स्थिति से बचने के लिए ऐसा नहीं बोले, बल्कि हमारी आत्माओं के जीने का रास्ता दिखाने के लिए बोले। यीशु का अर्थ था कि शारीरिक भोजन नाशवान् भोजन है, इसलिए हमें उस भोजन को ढूंढ़ना चाहिए जो अनन्त जीवन तक बना रहता है। जब यीशु ने कहा, “मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा,” तब शैतान योजना पूरी तरह से विफल रही।

यदि हम स्वर्ग के राज्य में राज-पदधारी याजक के रूप में अनन्त जीवन और खुशी को भोगना चाहते हैं, तो हमें हर दिन उत्सुकता से अपने आपको परमेश्वर का वचन खिलाना चाहिए, जिसमें हमारी आत्माओं को बचाने की शक्ति है। बेशक, हमें शारीरिक भोजन खाने की ज़रूरत है। लेकिन, यदि हम केवल शारीरिक भोजन के लिए ही जीवन जीएं, तो पशुओं और हमारे बीच क्या अंतर है? हम मनुष्यों के हृदय में विश्वास और अनादि-अनन्त काल का ज्ञान है। इसलिए, यदि हम सदा तक जीवित रहना चाहते हैं, तो हमें निरंतर अनन्त जीवन के लिए परमेश्वर द्वारा दिए गए भोजन को खाना चाहिए।

यदि हमने परमेश्वर के वचनों का ध्यानपूर्वक अध्ययन नहीं किया है, तो आइए हम उनका फिर से अध्ययन करें। यदि बाइबल के कुछ ऐसे भाग हैं जिन्हें हमने ध्यानपूर्वक नहीं पढ़ा, तो आइए हम ध्यान से उन्हें पढ़ें। इसके अतिरिक्त, आइए हम सत्य की पुस्तकें पढ़ें, और उपदेश वीडियो देखें। ऐसा करते हुए, आइए हम पिता के वचनों को समझें और माता की शिक्षाओं पर विचार करें। इस तरह, हमें निरंतर आत्मिक भोजन खाना और बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार जीवन जीना चाहिए।

परमेश्वर के वचन के अनुसार जीवन जीने वालों की महिमा

यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाएं, जो मैं आज तुझे सुनाता हूं, चौकसी से पूरी करने को चित्त लगाकर उसकी सुने, तो वह तुझे पृथ्वी की सब जातियों में श्रेष्ठ करेगा। फिर अपने परमेश्वर यहोवा की सुनने के कारण ये सब आशीर्वाद तुझ पर पूरे होंगे… धन्य हो तू भीतर आते समय, और धन्य हो तू बाहर जाते समय। “यहोवा ऐसा करेगा कि तेरे शत्रु जो तुझ पर चढ़ाई करेंगे वे तुझ से हार जाएंगे; वे एक मार्ग से तुझ पर चढ़ाई करेंगे, परन्तु तेरे सामने से सात मार्ग से होकर भाग जाएंगे। तेरे खत्तों पर और जितने कामों में तू हाथ लगाएगा उन सभों पर यहोवा आशीष देगा; इसलिये जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसमें वह तुझे आशीष देगा। यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं को मानते हुए उसके मार्गों पर चले, तो वह अपनी शपथ के अनुसार तुझे अपनी पवित्र प्रजा करके स्थिर रखेगा। और पृथ्वी के देश देश के सब लोग यह देखकर, कि तू यहोवा का कहलाता है, तुझ से डर जाएंगे।” व्य 28:1-10

परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की कि यदि हम परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीवन जीएं और उनका पालन करें तो वह हमें पृथ्वी की सब जातियों में श्रेष्ठ करेंगे। संसार में ऐसे बहुत से लोग हैं जो एक राजनयिक, राष्ट्रपति या संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बनने का सपना देखते हैं और अपने भविष्य के जीवन के लिए तैयारी कर रहे हैं। सभी लोगों में श्रेष्ठ होने के लिए, वे बहुत समय, पैसा और परिश्रम लगाकर अपनी क्षमता और अनुभव को बढ़ाते हैं और बहुत सी अन्य चीजों को तैयार करते हैं। लेकिन, जो परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीवन जीते हैं, केवल वे ही ऐसे लोग हैं जो संसार की सारी जातियों में श्रेष्ठ किए जाएंगे और जो सच में अपने भविष्य के लिए तैयारी कर रहे हैं।

वास्तव में, जब सुसमाचार के सेवक विदेश में प्रचार यात्रा पर जाते हैं, तो बहुत से लोग उनसे परमेश्वर के वचन सीखने के लिए नहीं आते? जैसे कि यीशु ने कहा है, “जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ,” वे सभी जो सत्य में आते हैं, चाहे वे प्रोफेसर हों या वैज्ञानिक हों या किसी शाही परिवार के सदस्य हों या फिर राष्ट्रपति हों, वे हमारे चेले बनते हैं; हम अपने आप ही उनके शिक्षक बन जाते हैं। चाहे वे इस पृथ्वी पर ऊंचे पदों पर हैं, लेकिन जब वे सिय्योन में आते हैं, तो वे सब परमेश्वर के नाम के सामने अपने घुटने टेकते हैं और उनके वचनों का पालन करते हैं। संसार के लोगों के द्वारा उन्हें आदर और सम्मान दिया जाता है, लेकिन वे उन लोगों को महान समझते और उनका आदर करते हैं जो परमेश्वर के वचन का भोजन खाते हैं और उसे दूसरों के साथ बांटते हैं।

चूंकि हमारे पास इस संसार में सबसे ज्यादा मूल्यवान खजाना, परमेश्वर का वचन है, इसलिए, हमें उसे सिर्फ नहीं रख छोड़ना, लेकिन लगातार उस पर पालिश करना चाहिए ताकि वह और ज्यादा चमक सके। हमें हमेशा परमेश्वर के वचन को अपने मुंह में रखना चाहिए, ताकि हम किसी भी समय दूसरों को उसका प्रचार करने के लिए तैयार हो जाएं। जब हम ऐसा करेंगे, तो शैतान पीछे हटेगा, और परमेश्वर हमें आत्मिक रूप से बुद्धिमान बनाएंगे और हमारी आत्माओं को पुनर्जीवित करेंगे ताकि सभी लोगों को अनन्त जीवन की ओर ले जाया जा सके।

परमेश्वर अपने वचनों के अनुसार सब कुछ पूरा करते हैं

परमेश्वर ने अपने वचनों से सारी वस्तुओं की सृष्टि की थी। जब उन्होंने कहा, “उजियाला हो,” तो उजियाला हुआ था। जब उन्होंने कहा, “जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए,” तो ऐसा ही हो गया था। सब कुछ परमेश्वर के वचन के अनुसार हो गया था। जो कुछ परमेश्वर कहते हैं, वह अवश्य ही पूरा हो जाएगा; परमेश्वर के वचन में सब कुछ पूरा करने की सामर्थ्य है।

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है; और प्राण और आत्मा को, और गांठ-गांठ और गूदे-गूदे को अलग करके आर-पार छेदता है और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। सृष्टि की कोई वस्तु उससे छिपी नहीं है वरन् जिस से हमें काम है, उसकी आंखों के सामने सब वस्तुएं खुली और प्रगट हैं। इब्र 4:12-13

परमेश्वर का वचन जीवित और प्रबल है, और निश्चित रूप से पूरा होता है। जब परमेश्वर कहते हैं कि वह हमें राज-पदधारी याजक बनाएंगे, तो वह निश्चय ही ऐसा करेंगे। लेकिन समस्या हमारी मानसिकता है जो आत्मिक भोजन यानी परमेश्वर के वचन को करीब रखना नहीं चाहती।

परमेश्वर ने कहा, “मैं मैदान की घास और आकाश के पक्षियों को खिलाता हूं। क्या तुम उनसे अधिक मूल्य नहीं रखते? इसलिए, अपने प्राण के लिए यह चिंता न करना कि हम क्या खाएंगे और क्या पीएंगे”(मत 6:25-34)। क्या परमेश्वर ने जंगल में जहां भोजन नहीं था स्वर्ग से मन्ना बरसाकर इस्राएलियों को नहीं खिलाया था? जंगल के चालीस साल के इतिहास में, ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं था जो भूख से मर गया था, बल्कि, वे अपने अविश्वास और कुड़कुड़ाने की आदत के कारण मर गए थे।

वचन जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, वह व्यर्थ ठहरकर परमेश्वर के पास न लौटेगा, और परमेश्वर निश्चय अपनी इच्छा और योजना पूरा करेंगे(यश 45:23; 46:10-11)। इसे अपने मन में रखते हुए, हमें आत्मिक भोजन का और ज्यादा पीछा करना चाहिए और इसके बारे में सोचना चाहिए कि परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीने के लिए, पिता और माता को प्रसन्न करने के लिए, और परमेश्वर को और भी ज्यादा महिमा चढ़ाने के लिए हमें क्या करना चाहिए।

परमेश्वर के वचनों का भोजन खाना न रोकिए। यदि हम अनन्त स्वर्ग के राज्य में जाने तक वचनों का भोजन करना जारी रखें, तो हम राज-पदधारी याजक बनेंगे। मजदूर मधुमक्खियों को जो रानी मधुमक्खी से अलग करता है, वह यह है कि वे रॉयल जेली को कितनी देर तक खाती हैं। उसी तरह से, लोग जो थोड़ा ही समय के बाद परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करना रोक देते हैं, और लोग जो प्रतिदिन उत्सुक मन के साथ परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करते हैं, उन दोनों के भविष्य पूरी तरह से अलग होते हैं।

हर रोज परमेश्वर के वचनों का भोजन करने का सबसे अच्छा तरीका सुसमाचार का प्रचार करना है। सत्य के वचनों का प्रचार करनेवाले हमेशा सोचते हैं कि ‘आज मैं उसे क्या सिखाऊंगा? आज मुझे उसे कौन सा भोजन देना चाहिए?’ चूंकि वे दूसरों के बारे में इस प्रकार से सोचते हैं, वे खुद निरंतर परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करते रहते हैं। स्वर्ग की अनन्त महिमा उन लोगों के लिए तैयार की गई है।

फिर स्राप न होगा, और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा और उसके दास उसकी सेवा करेंगे। वे उसका मुंह देखेंगे, और उसका नाम उनके माथों पर लिखा हुआ होगा। फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले की अवश्यकता न होगी, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा, और वे युगानुयुग राज्य करेंगे। प्रक 22:3-5

यदि आप युगानुयुग स्वर्ग के राज्य में राज्य करना चाहते हैं और साथ ही साथ पृथ्वी की सब जातियों में श्रेष्ठ होना चाहते हैं, तो कृपया परमेश्वर के वचनों का अध्ययन करने की उपेक्षा न कीजिए। मेहनत से सत्य की पुस्तकों और बाइबल का अध्ययन कीजिए और लगन से उपदेशों को सुनिए। ये सब आत्मिक रॉयल जेली हैं। हम स्वर्गीय राज-पदधारी याजक हैं जिन्हें आत्मिक रॉयल जेली को हमेशा खाना चाहिए।

परमेश्वर का वचन हमारी आत्माओं के लिए भोजन है, और जब हम शैतान को हराते हैं तो वह एक चोखी तलवार बन जाता है। आइए हम हमेशा परमेश्वर के वचनों को अपने निकट रखें, ताकि इस अंतिम युग में हम स्त्री की शेष संतान के रूप में शैतान के साथ आत्मिक युद्ध करते समय परमेश्वर के वचनों की तलवार से निरंतर विजयी हो सकें।

पिता और माता हमें जीवन के वचन देकर पृथ्वी की सब जातियों में श्रेष्ठ करते और अनन्त स्वर्ग के राज्य में राज-पदधारी याजक बनाते हैं। आइए हम इसके लिए उन्हें धन्यवाद दें। मैं सिय्योन में हमारे परिवार के सभी सदस्यों से हमेशा परमेश्वर के वचन के अनुसार जीने के लिए कहता हूं ताकि हम पिता और माता की युगानुयुग स्तुति कर सकें।