हमारा चर्च ऑफ गॉड हर साल फसह मनाता है। कुछ लोग कहते हैं “विश्वास के जीवन में औपचारिकता से ज्यादा महत्वपूर्ण विश्वास है।” क्या आप मुझे बता सकते हैं कि क्यों मुझे फसह मनाना चाहिए?
हम फसह मनाते हैं क्योंकि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा। ऐसा कोई मरीज है जो कहता है कि उसे डाक्टर पर भरोसा है, लेकिन वह डाक्टर की बात नहीं सुनता। यदि मरीज को डाक्टर पर भरोसा है, तो वह डाक्टर के निर्देशों का पालन करता है। उसी तरह, यदि हम जो पापी हैं, उद्धारकर्ता परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, तो यह हमारे लिए स्वाभाविक है कि हम पापों की क्षमा की व्यवस्था का पालन करें जिसे परमेश्वर ने मनाने को कहा है।
आपका मतलब है कि क्योंकि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, हमें उनके वचनों का पालन करना चाहिए, है न?
हां, फसह एक बहुमूल्य आज्ञा है जिसे हमें परमेश्वर की संतानों के रूप में मानना चाहिए, क्योंकि यीशु ने जो हमारे विश्वास के आदर्श हैं, स्वयं हमें इस पर्व को मानने की आज्ञा दी(यूहन्ना 13:15 संदर्भ)।
उसने कहा, “नगर में अमुक व्यक्ति के पास जाकर उससे कहो, ‘गुरु कहता है कि मेरा समय निकट है। मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहां पर्व मनाऊंगा’।” अत: चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी और फसह तैयार किया… जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिए पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।”
मत्ती 26:18-28
यीशु ने अपने चेलों को फसह तैयार करने की आज्ञा दी और उनके साथ उसे मनाया। यीशु परमेश्वर हैं जो हमें बचाने के लिए पृथ्वी पर आए (फिलिप्पियों 2:5-8)। जो कोई परमेश्वर पर विश्वास करता है, उसे परमेश्वर के नमूने का पालन करना चाहिए।
मैं थोड़ी सी जिज्ञासु हूं कि क्यों परमेश्वर हमें फसह मनाने को कहते हैं।
फसह में बहुत से अर्थ शामिल हैं, लेकिन यदि संक्षेप में कहूं, तो परमेश्वर उससे हमें अनन्त जीवन देना चाहते हैं।
“मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है…” यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं। जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है, अनन्त जीवन उसी का है; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।”
यूहन्ना 6:47-56
जो कोई यीशु, यानी अविनाशी जीव का मांस खाता और उनका लहू पीता है, वह अनन्त जीवन पा सकता है। यीशु का मांस खाने और उनका लहू पीने का तरीका फसह है। निष्कर्ष में जब हम फसह मनाते हैं, तब हम यीशु का मांस खा सकते हैं और यीशु का लहू पी सकते हैं, और उसके द्वारा हम अनन्त जीवन पा सकते हैं।
यदि हम अनन्त जीवन पाएं, तो क्या हम पृथ्वी पर सदा के लिए रहेंगे?
अनन्त जीवन जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हमसे की है, वह नए आकाश और नई पृथ्वी में हमारी आत्मा के सदा तक रहने के लिए है। अपनी नाशवान देह के साथ हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते जहां हम उत्सुकता से जाना चाहते हैं, क्योंकि स्वर्ग में मृत्यु नहीं है।
“फिर मैं ने नये आकाश और नई पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहला आकाश और पहली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा… वह उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी…”
प्रकाशितवाक्य 21:1-4
स्वर्ग जाने के लिए जहां मृत्यु नहीं है, हमें अविनाशी देह धारण करना चाहिए। परमेश्वर ने फसह में अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा रखी है। जो कोई फसह मनाता है, वह अविनाशी देह बनने और स्वर्ग में प्रवेश करने के योग्य बनता है। इसलिए यीशु ने स्वयं फसह मनाने का नमूना दिखाया और अपने चेलों को उसे मनाने का निदेर्श दिया।
अब मैं समझ सकती हूं। इसलिए फसह स्वर्ग का मार्ग है।
परमेश्वर की सभी आज्ञाएं हमारे पापों को धोने और हमें स्वर्ग ले जाने के लिए स्थापित की गई हैं। जब हम परमेश्वर के वचनों पर विश्वास करके आज्ञाकारिता के साथ फसह मनाते हैं, तब हम स्वर्ग जा सकते हैं।
अब मैंने समझा। आज जब मैंने सीखा है कि क्यों परमेश्वर ने हमें फसह मनाने को कहा है, तो मुझे लगता है कि मैं आनेवाले फसह को अधिक अनुग्रहपूर्ण ढंग से मना सकूंगी। मैं पहले से ही फसह मनाने का इंतजार कर रही हूं!