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बपतिस्मा क्या है?

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विवाह एक प्रेमी जोड़े के लिए जीवन की नई शुरुआत है। विवाह समारोह के दौरान वे अपने जीवन के बाकी समय में पति और पत्नी के रूप में सुख-दुख को बांटने की शपथ लेते हैं। उसी तरह, बपतिस्मा परमेश्वर की ओर जाने के लिए पहला कदम है, और यह एक विधि है जिसमें हम परमेश्वर के साथ वाचा बांधते हैं।

बपतिस्मा के द्वारा परमेश्वर हमारे सभी पापों को क्षमा करते हैं, और हम अपने जीवन के पिछले पापमय मार्ग से फिरने और अपने जीवन के बाकी समय में सिर्फ परमेश्वर की सेवा करने के द्वारा परमेश्वर के लोगों के रूप में जीने की प्रतिज्ञा करते हैं। बपतिस्मा हमारे जीवन में एक ऐसा मोड़ होता है, जिसके द्वारा हमारे अतीत के सभी पाप और अपराध क्षमा किए जाते हैं और हम नया जीवन शुरू करते हैं। इस नए जीवन में हम स्वर्ग जाने तक परमेश्वर की शिक्षाओं का पालन करते हैं। इस तरह, बाइबल स्पष्ट रूप से हमें उस बपतिस्मा का अर्थ और महत्व सिखाती है जो परमेश्वर के साथ वाचा बांधने के लिए एक विधि है।

यीशु ने बपतिस्मा लेने का उदाहरण दिखाया

यीशु ने भी बपतिस्मा लिया और फिर सुसमाचार का प्रचार करना शुरू किया।

उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे यूहन्ना के पास उससे बपतिस्मा लेने आया। परन्तु यूहन्ना यह कह कर उसे रोकने लगा, “मुझे तो तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है?” यीशु ने उसको यह उत्तर दिया, “अब तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सब धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली। और यीशु बपतिस्मा लेकर…मत 3:13-17

बपतिस्मा एक ऐसी विधि है जिससे पापी को पापों की क्षमा प्राप्त होती है(प्रे 2:38)। यीशु जो बिना पाप के हैं, अनन्त स्वर्ग के राज्य के मार्ग पर हमारी अगुवाई करने के लिए उद्धारकर्ता के रूप में इस पृथ्वी पर आए, और सब धार्मिकता को पूरा करने के लिए उन्होंने यूहन्ना के द्वारा बपतिस्मा लिया। बपतिस्मा लेने का उदाहरण स्थापित करके, यीशु ने दिखाया कि बपतिस्मा परमेश्वर पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए सब धार्मिकता को पूरा करने की एक विधि है।

इसके बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा। यूहन्ना भी शालेम के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था, क्योंकि वहां बहुत जल था, और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे।यूह 3:22-23

यीशु ने बपतिस्मा लिया और फिर अपनी सेवकाई शुरू की। उन्होंने लोगों को बपतिस्मा देने का भी उदाहरण दिखाया। यीशु ने यह कहते हुए कि यह परमेश्वर की दृष्टि में उचित है, बपतिस्मा लेने का और लोगों को बपतिस्मा देने का उदाहरण इसलिए दिखाया, क्योंकि बपतिस्मा में वह महत्वपूर्ण सत्य है जो मानवजाति की उद्धार की ओर अगुवाई करता है।

बपतिस्मा का सही अर्थ

भले ही हमने पहले से ही शारीरिक रूप से जन्म लिया था, बपतिस्मा हमें परमेश्वर में नए सिरे से जन्म लेने देता है(यूह 3:3-5 संदर्भ)। इस विधि के द्वारा, परमेश्वर मनुष्यों को पाप के दासत्व से आजाद करते हैं और उन्हें अनन्त स्वर्ग के लोग बनाते हैं।

… क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया, उसकी मृत्यु का बपतिस्मा लिया। अत: उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।रो 6:1-4

बपतिस्मा के द्वारा हमारा पापमय शरीर यीशु के साथ क्रूस पर चढ़ाया जाता है, और हम नए सिरे से जन्म लेते हैं जैसे यीशु मरे हुओं में से जी उठे। यीशु का क्रूस पर चढ़ाया जाना हमारे अपने पापों को पहचानकर पश्चाताप करने को दर्शाता है। यीशु का कब्र में गाड़ा जाना बपतिस्मा के द्वारा हमारे पापों को पानी में दफनाने को दर्शाता है। यीशु का मरे हुओं में से जी उठना नया व्यक्ति बनकर मसीह के जीवन का पालन करने के हमारे वादे को दर्शाता है। जो बपतिस्मा लेते और नया जीवन जीते हैं, उन्हें परमेश्वर ने उद्धार देने की प्रतिज्ञा की है।

उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; इससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है।1पत 3:21

बपतिस्मा हमारी आत्माओं को बचाने की परमेश्वर की प्रतिज्ञा का चिन्ह है। अन्त तक इस चिन्ह को बनाए रखने के लिए, हमें परमेश्वर से की हुई अपनी प्रतिज्ञा के प्रति वफादार रहना चाहिए। कभी भी ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम अपने पाप से फिरकर मसीह के साथ नया जीवन जीने की अपनी प्रतिज्ञा को तोड़ते हुए परमेश्वर से यह अनुरोध करें कि बस वह हमें बचाने की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करें।

जैसे मसीह ने संसार के उद्धार के लिए अपना जीवन समर्पित किया, ठीक वैसे ही हमें मानवजाति को बचाने और उन्हें लाभ देकर उनके साथ स्वर्ग के अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा बांटने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। इसलिए यीशु ने हमें बपतिस्मा के द्वारा उद्धार का चिन्ह दिया है और हमें जाकर सब जातियों के लोगों को बपतिस्मा देने को कहा है, ताकि पूरी दुनिया में सुसमाचार का प्रचार हो सके।

यीशु ने उनके पास आकर कहा, “… इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ : और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।”मत 28:18-20

यीशु के वचनों के द्वारा, हम महसूस कर सकते हैं कि बपतिस्मा जो परमेश्वर के साथ की गई एक प्रतिज्ञा है, मानवजाति के लिए कितना महत्वपूर्ण है। जब हम लोगों को सब आज्ञाएं जो मसीह ने हमें दी है मानना सिखाते हैं, तब जो सबसे पहले हमें करना चाहिए वह बपतिस्मा है।

बपतिस्मा धार्मिकता को पूरा करता है

यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले को, जिसकी भविष्यवाणी यशायाह में जंगल के एक पुकारनेवाले के रूप में की गई थी, परमेश्वर की ओर से भेजा गया था, और उसने यीशु और लोगों को बपतिस्मा दिया(मत 3:1-6)। उसने ऐसा अपनी खुद की इच्छा से नहीं किया, बल्कि परमेश्वर की ओर से भेजे गए नबी के रूप में यह मिशन पूरा किया।

… यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं कि महसूल लेनेवाले और वेश्याएं तुम से पहले परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। क्योंकि यूहन्ना धर्म का मार्ग दर्शाते हुए तुम्हारे पास आया, और तुम ने उसका विश्वास न किया; पर महसूल लेनेवालों और वेश्याओं ने उसका विश्वास किया : और तुम यह देखकर बाद में भी न पछताए कि उसका विश्वास कर लेते।”मत 21:31-32

वह धर्म का मार्ग जिसे यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला लाया, बपतिस्मा को दर्शाता है(यूह 1:24-34)। परमेश्वर की ओर से भेजे गए यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले का मिशन लोगों को मनफिराव का बपतिस्मा देना था। यीशु ने हमें सिखाया कि बपतिस्मा धार्मिकता को पूरा करने की एक पवित्र विधि है, और उन्होंने बपतिस्मा लेने से इनकार करने वाले लोगों का वर्णन उन लोगों के रूप में किया जो न तो पश्चाताप करते और न ही विश्वास करते।

और सब साधारण लोगों ने सुनकर और चुंगी लेनेवालों ने भी यूहन्ना का बपतिस्मा लेकर परमेश्वर को सच्चा मान लिया। परन्तु फरीसियों और व्यवस्थापकों ने उससे बपतिस्मा न लेकर परमेश्वर के अभिप्राय को अपने विषय में टाल दिया। “अत: मैं इस युग के लोगों की उपमा किससे दूं कि वे किसके समान हैं? वे उन बालकों के समान हैं जो बाजार में बैठे हुए एक दूसरे से पुकारकर कहते हैं, ‘हम ने तुम्हारे लिये बांसली बजाई, और तुम न नाचे; हमने विलाप किया, और तुम न रोए!’ ”लूक 7:29-32

बहुत से लोगों ने बपतिस्मा लिया, लेकिन फरीसियों और शास्त्रियों ने बपतिस्मा लेने से इनकार किया। स्वाभाविक बात है कि लोग बांसली बजाई जाने पर एक साथ अनायास ही झूमने-नाचने लगते हैं, और विलाप को सुनने पर एक साथ शोक मनाते हैं। लेकिन चाहे यीशु ने कितना भी यत्न से उन्हें सत्य सिखाया हो, उन्होंने असंवेदनशील लोगों की तरह परमेश्वर के सत्य के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं की। यीशु ने कहा कि उन्होंने परमेश्वर की इच्छा को अस्वीकार कर दिया क्योंकि उन्होंने बपतिस्मा लेने से इनकार कर दिया।

यीशु ने बताया कि सिर्फ वे जो परमेश्वर की इच्छा पर चलते हैं, स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं(मत 7:21)। इन वचनों के माध्यम से, हम देख सकते हैं कि बपतिस्मा मानवजाति को बचाने और स्वर्ग में उनकी अगुवाई करने के लिए परमेश्वर की एक पवित्र इच्छा है।

और उसने उनसे कहा, “तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा।”मर 16:15-16

नई वाचा में उद्धार का बपतिस्मा

कुछ लोग सोचते हैं कि उन्हें अब बपतिस्मा लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि उनका पहले ही से दूसरे चर्चों में बपतिस्मा हुआ था। लेकिन उन्हें इस पर विचार करना चाहिए कि वह बपतिस्मा जो उन्होंने पाया बाइबल पर आधारित है या नहीं। क्योंकि हर बपतिस्मा, भले ही वह पानी के जरिए दिया गया हो, उद्धार का बपतिस्मा नहीं हो सकता जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की है।

बपतिस्मा सिर्फ एक धार्मिक संस्कार नहीं लेकिन एक ऐसी विधि है जिसमें परमेश्वर की प्रतिज्ञा शामिल है। भले ही बपतिस्मा का पानी और नहाने का पानी दोनों एक ही है, लेकिन प्रतिज्ञा के मामले में दोनों के बीच बड़ा अंतर है। पानी जिसका बपतिस्मा की विधि में उपयोग किया जाता है, उद्धार का चिन्ह है जिसकी परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है, लेकिन पानी जिसका नहाने के लिए उपयोग किया जाता है, उसका परमेश्वर की प्रतिज्ञा से कुछ लेना-देना नहीं है और यह पानी सिर्फ हमारे शरीर की गंदगी को दूर करता है।

मान लीजिए कि 2,000 वर्ष पहले फरीसियों ने यीशु और उनके चेलों की नकल करके बपतिस्मा दिया। क्या फरीसियों का बपतिस्मा लोगों की उद्धार की ओर अगुवाई कर सकता था? बिल्कुल नहीं। उनके बपतिस्मा में परमेश्वर की प्रतिज्ञा बिल्कुल नहीं है। सिर्फ वह बपतिस्मा जिसमें परमेश्वर की प्रतिज्ञा है, हमारे लिए उद्धार का चिन्ह हो सकता है।

आइए हम पुष्टि करें कि कहां और किसके द्वारा परमेश्वर ने हमें उद्धार का बपतिस्मा दिया है। यीशु ने स्वयं बपतिस्मा लेने का उदाहरण दिखाया, और फिर उन्होंने अपने चेलों के साथ बहुत लोगों को बपतिस्मा दिया(यूह 3:22-30)। बाइबल विस्तार से बताती है कि चेलों के पास जो यीशु के उदाहरण के अनुसार लोगों को बपतिस्मा देते थे कौन सा सत्य और विश्वास था।

तब अखमीरी रोटी के पर्व का दिन आया, जिसमें फसह का मेम्ना बलि करना आवश्यक था। यीशु ने पतरस और यूहन्ना को यह कहकर भेजा : “जाकर हमारे खाने के लिये फसह तैयार करो।”… फिर उसने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उनको यह कहते हुए दी, “यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिये दी जाती है : मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।” इसी रीति से उसने भोजन के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, “यह कटोरा मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिये बहाया जाता है नई वाचा है।” लूक 22:7-8, 19-20

पतरस और यूहन्ना ने यीशु की आज्ञा के अनुसार फसह का पर्व तैयार किया और यीशु के साथ नई वाचा का फसह मनाया। सभी चेले जिन्होंने यीशु के साथ लोगों को बपतिस्मा दिया, नई वाचा के सत्य में रहते थे।

हमारा बपतिस्मा परमेश्वर के द्वारा तब ही स्वीकार किया जाएगा जब हम परमेश्वर के निवास स्थान पर बपतिस्मा लेते हैं। परमेश्वर का निवास स्थान सिय्योन है जहां परमेश्वर के नियत पर्व मनाए जाते हैं(भज 132:13-14; यश 33:20)। परमेश्वर सिय्योन के लोगों से कहते हैं, “तुम मेरी प्रजा हो,” और नई वाचा मनाने वाले लोगों को अपनी प्रजा बनाते हैं(यश 51:16; यिर्म 31:31-34)।

इन भविष्यवाणियों के अनुसार, यीशु ने फसह के पर्व के द्वारा नई वाचा की घोषणा की। सिर्फ वह बपतिस्मा जो सिय्योन यानी परमेश्वर के उस निवास स्थान में दिया जाता है जहां नई वाचा का सत्य है, उद्धार का बपतिस्मा हो सकता है।

प्रेरितों के युग में बपतिस्मा के इतिहास से एक सबक

बाइबल के इतिहास में, बपतिस्मा उन चेलों के द्वारा दिया जाता था, जो यीशु के पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद प्रेरितों के युग के दौरान नई वाचा के सत्य का प्रचार करते थे।

इस पर खोजे ने फिलिप्पुस से पूछा, “मैं तुझ से विनती करता हूं, यह बता कि भविष्यद्वक्ता यह किसके विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में?” तब फिलिप्पुस ने अपना मुंह खोला, और इसी शास्त्र से आरम्भ करके उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया। मार्ग में चलते-चलते वे किसी जल की जगह पहुंचे। तब खोजे ने कहा, “देख यहां जल है, अब मुझे बपतिस्मा लेने में क्या रोक है।” फिलिप्पुस ने कहा, “यदि तू सारे मन से विश्वास करता है तो ले सकता है।” उसने उत्तर दिया, “मैं विश्वास करता हूं कि यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है।” तब उसने रथ खड़ा करने की आज्ञा दी, और फिलिप्पुस और खोजा दोनों जल में उतर पड़े, और उसने खोजा को बपतिस्मा दिया। जब वे जल में से निकलकर ऊपर आए…प्रे 8:34-39

रानी कन्दाके के खोजे ने इसलिए बपतिस्मा लिया, क्योंकि बपतिस्मा में उद्धार की प्रतिज्ञा शामिल है। उद्धार की गारंटी देनेवाला बपतिस्मा किसी भी व्यक्ति के द्वारा नहीं, बल्कि सिर्फ उन नबियों द्वारा दिया जाता था जिन्होंने सिय्योन में निवास करनेवाले परमेश्वर से अधिकार पाया था।

सब्त के दिन हम नगर के फाटक के बाहर नदी के किनारे यह समझकर गए कि वहां प्रार्थना करने का स्थान होगा, और बैठकर उन स्त्रियों से जो इकट्ठी हुई थीं, बातें करने लगे। लुदिया नामक थुआथीरा नगर की बैंजनी कपड़े बेचनेवाली एक भक्त स्त्री सुन रही थी। प्रभु ने उसका मन खोला कि वह पौलुस की बातों पर चित्त लगाए। जब उसने अपने घराने समेत बपतिस्मा लिया…प्रे 16:13-15

… तब वह दीया मंगवाकर भीतर लपका, और कांपता हुआ पौलुस और सीलास के आगे गिरा; और उन्हें बाहर लाकर कहा, “हे सज्जनो, उद्धार पाने के लिये मैं क्या करूं?” … रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जाकर उनके घाव धोए, और उसने अपने सब लोगों समेत तुरन्त बपतिस्मा लिया।प्रे 16:27-33

… “क्या कोई जल की रोक कर सकता है कि ये बपतिस्मा न पाएं, जिन्होंने हमारे समान पवित्र आत्मा पाया है?” और उसने आज्ञा दी कि उन्हें यीशु मसीह के नाम में बपतिस्मा दिया जाए…प्रे 10:37-48

लुदिया के परिवार और दारोगा के परिवार ने पौलुस के द्वारा बपतिस्मा लिया, और सूबेदार कुरनेलियुस और उसके घरवालों ने पतरस के द्वारा बपतिस्मा लिया। पौलुस एक प्रेरित था जिसने यह कहते हुए नई वाचा के फसह का प्रचार किया, “यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी(1कुर 11:23)।” और पतरस एक प्रेरित था जिसने यीशु की आज्ञा के अनुसार नई वाचा का फसह तैयार किया और उसे मनाया। उन सभी को परमेश्वर के नियत पर्वों के नगर, यानी सिय्योन में सिखाया गया था, और उन सभी ने सिय्योन में परमेश्वर की आराधना की और सिय्योन में ही नई वाचा की व्यवस्था का पालन किया। चूंकि बपतिस्मा नई वाचा की व्यवस्थाओं में से एक है, इसलिए उन्होंने यीशु की शिक्षा के अनुसार बपतिस्मा दिया।

आज बहुत से चर्च कहते हैं कि वे भी बपतिस्मा देते हैं। लेकिन बपतिस्मा जो उन चर्चों में दिया जाता है जहां नई वाचा का सत्य नहीं है, वह सिर्फ एक निरर्थक औपचारिकता है, जिसे परमेश्वर स्वीकार नहीं करते। केवल सिय्योन में आयोजित बपतिस्मा को, जहां नई वाचा का सत्य है, सच्चे बपतिस्मा के रूप में स्वीकार किया जाता है जिसमें परमेश्वर का वादा शामिल है। परमेश्वर ने केवल सिय्योन में उद्धार की प्रतिज्ञा और अनन्त जीवन की आशीष प्रदान की है।

हमारे बपतिस्मा के अर्थ पर एक बार फिर से विचार करते हुए, आइए हम स्वर्गीय पिता और माता को हमें सिय्योन में बुलाने के लिए और हमें पापों की क्षमा और उद्धार की आशीष देने के लिए धन्यवाद दें। और आइए हम बहुत लोगों को सुसमाचार का प्रचार करें जिन्होंने अब तक नई वाचा के सत्य में उद्धार का बपतिस्मा प्राप्त नहीं किया है, ताकि वे सिय्योन में उद्धार का चिन्ह प्राप्त कर सकें जहां परमेश्वर निवास करते हैं। आइए हम हमेशा बपतिस्मा में दी हुई परमेश्वर की प्रतिज्ञा को स्मरण रखें, और जैसे परमेश्वर ने हमें बचाने के लिए कड़ी मेहनत की, ठीक वैसे ही हम दुनिया को बचाने में सक्रिय रूप से भाग लें। ऐसा करके, आइए हम सुंदर विश्वास रखकर परमेश्वर के साथ एकजुट हो जाएं।