हमें सब्त कैसे मनाना चाहिए?

आइए हम जानें कि हमें परमेश्वर से प्रचुर आशीष प्राप्त करने के लिए सब्त की तैयारी कैसे करनी चाहिए और उसे कैसे मानना चाहिए। पहला, हमें तैयारी के दिन के द्वारा सब्त की तैयारी करनी चाहिए। सब्त से एक दिन पहले तैयारी का दिन कहा जाता है जिसका अर्थ है सब्त की तैयारी करना। हमें सब्त से एक दिन पहले अपने निजी कार्य को समाप्त करना चाहिए, ताकि ऐसा न हो कि संसारिक बातें हमें सब्त मनाने में रुकावत डालें। “परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसकी आराधना करनेवाले आत्मा और सच्चाई से आराधना करें।” यूह 4:24 दूसरा, हमें आराधना के लिए समयनिष्ठ होना चाहिए। सब्त का दिन पूरे ब्रह्मांड के शासक, परमेश्वर से मिलने का दिन है। अगर…

आराधकों के रवैए

आराधकों को परमेश्वर के प्रति आदर व्यक्त करने का रवैया होना चाहिए। यदि हम एक राजा से मिलने वाले हैं, तो हम उस बैठक की तैयारी करने की पूरी कोशिश करेंगे। तो ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता, परमेश्वर से मिलने के लिए हमें कितना अधिक तैयारी करनी चाहिए। पहले, हमें आराधना का महत्व और उसकी आशीष के बारे में महसूस करना चाहिए और आराधना को संसार की किसी भी चीज से ज्यादा महत्व देना चाहिए और धन्यवादी मन के साथ आराधना में भाग लेना चाहिए। हमें दूसरों के विश्वास से नहीं, बल्कि अपने विश्वास से आराधना में भाग लेना है। और, पवित्र और अनुग्रहपूर्ण ढंग से आराधना करने के लिए हमारे पास आराधना के लिए तैयारी करने की मानसिकता होनी है। आइए…

आराधना का क्रम

प्रत्येक विधि एक नियत क्रम में संचालित की जाती है। उसी तरह, परमेश्वर की आराधना करने का एक क्रम है। हर स्थानीय चर्च की विशेष परिस्थिति के अनुसार आराधना का कुछ अलग सा क्रम हो सकता है। आराधना का सामान्य क्रम निम्म लिखित है: 1) शांत प्रार्थना हम अपनी आंखें बंद करते हुए, पवित्र मन के साथ परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं(भज 143:5); यह खामोशी से की जाती है। 2) प्रशंसा हम नए गीत के साथ परमेश्वर को धन्यवाद और महिमा देते हैं(प्रक 5:13); इस समय हम खड़े होकर गीत गाते हैं। 3) प्रार्थना धन्यवाद, महिमा, पश्चात्ताप और आशाओं के क्रम से प्रार्थना की जाती है। आम तौर पर उपदेशक प्रार्थना करता है।(इस समय भी सब सदस्य खड़े होते हैं)…

आराधना के बारे में

आराधना स्वयं को दीन बनाते हुए और उन परमेश्वर को प्रार्थना और प्रशंसा के साथ महिमा और धन्यवाद देते हुए हमारे आदर की भावना व्यक्त करने की एक विधि है, जो हम मरणाधीन मानव जाति को स्वर्ग के राज्य में ले जाने के लिए अनंत जीवन, उद्धार और पापों की क्षमा देते हैं। तब, हमें किस दिन परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए? वे दिन जो हमें परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए, इस प्रकार है: पहले, हमें सब्त के दिन परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए। सब्त का दिन सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सामर्थ्य को स्मरण करने का दिन है। सब्त का दिन मनाने के द्वारा, हम पुष्टि करते हैं कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की, और हम इस दिन…

आराधना के उद्देश्य

हम मूल रूप से स्वर्ग के पापी हैं। हमारे परमेश्वर की आराधना करने का उद्देश्य क्या है? पहला, परमेश्वर के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए जो उपासना का विषय बन जाता है, वह परमेश्वर है, जिन्होंने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की, मनुष्यों को जीवन का श्वास दिया, हमें पापों से बचाया और सत्य के वचनों के द्वारा हम से स्वर्ग का राज्य देने का वादा किया। परमेश्वर में, जिन्होंने सब कुछ बनाया, किसी चीज का अभाव नहीं है। फिर भी, उन्होंने हमें आज्ञा दी है कि हम उनकी आराधना करें। यह इसलिए नहीं है कि वह हमें अपनी सेवा करवाना चाहते हैं, बल्कि इसलिए है कि वह हम, आराधकों को बहुतायत से आशीष और स्वर्ग के राज्य के…