परमेश्वर से मान्यता प्राप्त करना

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यदि आपके पास कोई ऐसी चीज है जिस पर आपको बहुत गर्व है, तो आप उसकी डींग मारना चाहते हैं। यह मनुष्य का स्वभाव है। सभी मनुष्यों में अन्य व्यक्तियों से मान्यता प्राप्त करने की बुनियादी चाह होती है।

आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं; व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं। उत्साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सतानेवाला; और व्यवस्था की धार्मिकता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था। परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। वरन् मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिसके कारण मैं ने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिससे मैं मसीह को प्राप्त करूं और उसमें पाया जाऊं…फिलि 3:5-9

प्रेरित पौलुस ने एक कुलीन परिवार में जन्म लिया था और ऊंची पढ़ाई भी की थी। उसके पास ऐसी बहुत सी चीजें थीं जिन पर वह गर्व कर सकता था। लेकिन उसने कभी अपनी इन चीजों की डींग नहीं मारी। इसका कारण यह था कि वह मनुष्य से नहीं, परन्तु परमेश्वर से मान्यता प्राप्त करना चाहता था। चूंकि वह परमेश्वर से मान्यता प्राप्त करना चाहता था, इसलिए वह मसीह के ज्ञान को छोड़कर अन्य सब चीजों को कूड़ा समझता था। जीवन जिसे परमेश्वर से मान्यता प्राप्त होती है! यदि यह हमें स्वर्ग की आशीषें दिलाए, तो इससे ज्यादा आशीषित जीवन संसार में और क्या हो सकता है?