संकट या अवसर

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अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित योजमाइट राष्ट्रीय उद्यान में एक विशाल पेड़ है जिसकी ऊंचाई 262 फीट और तने की मोटाई 16 फीट है। वह जायंट सिकोया है जिसे “राष्ट्रपति पेड़” कहा जाता है। यहां के जायंट सिकोया पेड़ों में कुछ तो 3,000 साल या उससे भी अधिक पुराने हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन पेड़ों पर जगह–जगह जलने के निशान मौजूद हैं। उनमें से कुछ पेड़ों ने 80 बार आग के कहर को झेला और कुछ पेड़ों ने सात दिनों तक जगंल में लगी आग को झेल लिया।

इस जंगल में शुष्क मौसम के दौरान पेड़ों के बीच अचानक रगड़ होने या आसमानी बिजली गिरने से अक्सर आग लग जाती है, लेकिन फिर भी जायंट सिकोया पेड़ इसलिए इतने लंबे समयों तक बचे रह सके हैं, क्योंकि उनकी नरम–नरम छाल है जो लगभग 1 मीटर मोटी है। चूंकि वे अपनी छाल में पर्याप्त जल रखते हैं, इसलिए वे आग के कहर को सह सकते हैं।

जिस दौरान उनकी मोटी छालें आग की लपटों पर काबू पाती हैं, उस दौरान उनकी शाखाओं के छोर पर लटके शंकुफलों में एक छोटा सा बदलाव होने लगता है। सख्त शंकुफल धीरे–धीरे खुलने लगते हैं और उनमें से पंख–युक्त बीज निकलने लगते हैं। दूसरे पेड़ों के विपरीत, जायंट सिकोया पेड़ उच्च तापमान की स्थिति में अपने बीचों को फैलाते हैं। इसलिए उनके बीज तप्त वायु के साथ उड़ जाते हैं और जमीन पर जो जंगल में लगी आग के कारण और अधिक उपजाऊ हो गई है, उतरकर जड़ पकड़ते हैं और फिर अंकुरित होते हैं। एक बार जब वे आग को सहन कर लेते हैं, तब जीवन को खतरे में डालने वाली संकटपूर्ण घटना भी उनके लिए एक और जीवन को पैदा करने का अवसर बन सकती है।

“… हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज, ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।” रो 5:3–4

वे जो अपने अन्दर पर्याप्त जीवन का जल, यानी परमेश्वर का वचन रखते हैं, उनके लिए क्लेश सिर्फ संकट नहीं, बल्कि एक अवसर बनेगा, और आखिरकार उनके अनन्त जीवन और उद्धार की आशा पूरी हो जाएगी। इसी कारण हमें क्लेशों में भी खुश रहना चाहिए।