वह जो परमेश्वर ने हमें दिया है

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सुदूर क्षेत्रों के खोजकर्ता कहते हैं कि उनके लिए एक दिन का सबसे कठिन समय सुबह उठने का समय है। तम्बू के अन्दर लेटकर जब वे बाहर बह रही तेज हवा की आवाज को सुनते हैं, तब वे डर जाते हैं और इसलिए उनके लिए नींद से उठकर तुरंत बिस्तर का त्याग करना कठिन है। लेकिन यदि वे उठकर बाहर जाते हैं, बहुत बार ऐसा होता है कि मौसम उतना बुरा नहीं है जितना वे सोचते हैं।

हर किसी के पास ऐसा ही अनुभव है। आपने जो करने का निर्णय लिया है उसे अमल में लाने में काफी समय लगता है, लेकिन एक बार यदि आप उसे अमल में लाएं, आप महसूस करेंगे कि वह तो कुछ भी नहीं है लेकिन आपने उसे करने से संकोच किया। इसका कारण डर है। चाहे हम जो भी करें, जरूर हमें उसे करने के लिए अपने मन को तैयार करना चाहिए। मगर यदि आप यह सोचकर डर जाएं कि आप अपेक्षा के विपरीत शायद गलतियों–चूकों या असफलताओं का सामना करेंगे, तो यह आपके पांव को जाल में फंसाएगा।

यदि आप आत्मिक खोजकर्ता हैं जो आगे चलकर सुसमाचार का रास्ता बनाते हैं, तो आपको यह जानना चाहिए कि डर की भावना वह चीज नहीं है जिसे परमेश्वर ने दिया है।

क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ्य और प्रेम और संयम की आत्मा दी है। 2तीम 1:7

परमेश्वर ने हमें ऐसी सामर्थ्य दी है जिससे हम कुछ भी कर सकते हैं, और हमें ऐसी शक्ति दी है जिससे हम आत्माओं से प्रेम कर सकते हैं और अपने आप पर नियंत्रण रख सकते हैं। विश्वास के जंगल में चाहे बाहर से हवा की कितनी भी उग्र और प्रचंड आवाज हमें सुनाई दे, आइए हम बिल्कुल न डरें और अपने घुटनों को सीधा करके बाहर निकल जाएं। तब हम जो परमेश्वर ने हमें दिए हैं, उन्हें एक एक करके देख सकेंगे।