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खुशी

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संसार में अब तक खुशी के बारे में अनेक प्रकार के अध्ययन किए गए हैं। अध्ययनों की अवधि, विषय या तरीके विभिन्न प्रकार के हैं, लेकिन उनके परिणाम एक जैसे ही हैं।

अध्ययन कहते हैं कि लोगों की खुशी जो भौतिक चीजों से प्राप्त होती है, केवल उस स्तर तक बरकरार रहती है जहां वे अपने कमाए पैसों से भोजन कर सकते हैं और अपनी जीविका चला सकते हैं। लेकिन जब वे उस स्तर को पार करते हैं, तब उनकी खुशी जो शुरुआत में भौतिक चीजों से प्राप्त थी, गायब हो जाती है, और चाहे उनकी कमाई कितनी भी बढ़ जाए, लेकिन उनकी खुशी नहीं बढ़ती। इसी कारण कम आय वाले देशों के खुशी सूचकांक ऊंचे स्तरों के होते हैं।

हर व्यक्ति का खुशी का मानदंड अलग-अलग होता है, इसलिए खुशी के बारे में निश्चित रूप से यह कहना कि वह कैसी है, मुश्किल होता है। लेकिन खुश लोगों में कुछ समानताएं अवश्य होती हैं। वे आत्मविश्वासी होते हैं, और उनके पास जीवन का स्पष्ट लक्ष्य होता है, और वे हर दिन अर्थपूर्ण जीवन जीते हैं।

एलोहिस्ट जिन्होंने एलोहीम परमेश्वर को ग्रहण किया है, उनके मुंह से हर समय “खुशी” शब्द निकलता है। चूंकि उन्हें अपने उद्धार का निश्चय होता है, इसलिए हमेशा उनके चेहरों पर आत्मविश्वास और मुस्कुराहट उभर आती है। वे निश्चित रूप से जानते हैं कि उन्हें किसके लिए जीवन जीना चाहिए, इसलिए वे कुछ काम करने से नहीं हिचकते। वे संसार के लोगों को उद्धार का समाचार सुनाते हुए अर्थपूर्ण जीवन जीते हैं। इसी कारण यह स्वाभाविक बात है कि एलोहिस्ट हर दिन खुश होते हैं।