एक तीर

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एक कुशल तीरंदाज था। उसने एक तीरंदाजी प्रतियोगिता में भाग लिया था, लेकिन अपने आखिरी प्रयास में एक गलती करने के कारण वह चैंपियन बनने से चूक गया था। उसके बाद वह उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया जितनी उसकी क्षमता थी।

एक दिन उसके कोच ने उससे कहा, “आज से तुम एक दिन में सिर्फ एक ही बार तीर चलाओ।”

शुरू में उसे समझ में नहीं आया कि कोच उससे ऐसी बात क्यों कह रहा है, लेकिन उसे विश्वास था कि कोच के ऐसा कहने का कुछ कारण है, और वह हर दिन सिर्फ एक तीर चलाता था।

कुछ महीनों के बाद, आखिरकार वह प्रतियोगिता में चैंपियन बन गया। तो उसने अपने कोच से पूछा कि उसने उसे एक दिन में सिर्फ एक बार तीर चलाने के लिए क्यों कहा था।

“यदि तुम्हारे पास ज्यादा तीर होते, तो तुम शायद ऐसा सोचोगे कि, ‘भले ही मैं इस बार गलती करूं, फिर भी मेरे पास और भी मौके होंगे,’ और इस कारण से तुम्हारे लिए अपना ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन यदि तुम्हारे पास सिर्फ एक ही तीर होता, तो तुम ऐसा सोचोगे कि, ‘यदि मैं इस बार गलती करूं, तो मेरे पास कोई मौका नहीं बचेगा,’ और तुम उस एक तीर के साथ अपना सर्वोत्तम प्रयास कर सकोगे। यदि तुम इस तरह की मानसिकता रखकर आगे अभ्यास करोगे, तो तुम जरूर अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन कर सकोगे।”