आइए हम कहें, “हम खुश हैं!”

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हाल ही में आपने कभी यह कहा है कि “मैं खुश हूं?”

जब हम परेशान या असंतुष्ट होते हैं, तो हम अपनी भावनाओं को आसानी से शब्दों में व्यक्त करते हैं, लेकिन जब हम खुश या संतुष्ट होते हैं, तो हम प्राय: अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं करते। एक ऐसी कहावत है: “जब तक घंटी को कोई नहीं बजाता, तब तक वह घंटी नहीं है। और जब तक गीत को कोई नहीं गाता, तब तक वह गीत नहीं है।” खुशी के साथ भी ऐसा होगा।

जब आप खुश और आनन्दित होते हैं, तो सिर्फ न हंसिए या सिर्फ खुशी की भावना को महसूस न कीजिए, परन्तु अपनी खुशी को मुंह से व्यक्त कीजिए। जैसे मनुष्य वहां बार–बार जाना चाहता है जहां उसे बुलाया जाता है, वैसे ही यदि आप बार–बार खुशी के बारे में कहें, तो खुशी बार–बार आना चाहेगी।

टिप्स
जब आप खुश होते हैं, तब कहिए, “मैं ( ) के कारण खुश हूं,” “मैं खुश हूं क्योंकि ( )।”
परिवार वालों से कहिए, “आप खुश होंगे क्योंकि ( ),” “आप कितने खुश हैं क्योंकि ( )!”
चाहे आपको परिवारवालों पर गुस्सा आए, फिर भी गुस्सा मत कीजिए और मुस्कुराते हुए कहिए, “यदि हम ( ), तो हम अधिक खुश हो जाएंगे।”
आइए हम गिनती करें कि हमने एक दिन में कितनी बार यह कहा, “मैं खुश हूं।” और हर दिन उस गिनती को बढ़ाते रहिए।
एक महीने तक मिशन को पूरा करने के बाद परिवार के साथ अपनी भावनाओं को साझा कीजिए।