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सुंदर मन और हृदयस्पर्शी शब्द

उजॉन्गबू, कोरिया से जंग युन यंग

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मेरा 8 साल का बेटा आसानी से भयभीत होता है। जब वह रात को बाथरूम जाता या उसे पानी की जरूरत होती, तो उसे मुझे या मेरे पति को जगाना पड़ता था। एक दिन वह भोर को जागकर अकेले बाथरूम गया। मुझे आश्चर्य हुआ कि वह ऐसा कैसे कर सकता है, इसलिए मैंने आवाज सुनकर उसका पीछा किया। कुछ पल बाद, उसने बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया।

“ओह? क्या वह मेरा बेटा नहीं?”

हैरान होकर मैं लिविंग-रूम की ओर चली गई। वह मेरा बेटा था जो बाथरूम से बाहर आया।

“सोल! तुमने दरवाजा क्यों बंद किया? क्या तुम्हें डर नहीं लगा?”

“मैंने इसीलिए बंद किया क्योंकि मैं फ्लश की आवाज से अपने परिवार को जगाना नहीं चाहता था।”

उसके शब्दों ने मेरा दिल छू लिया। उसे बिस्तर पर लिटाकर, मैंने उसे गले लगाया और फुसफुसाकर उससे कहा कि उसके दूसरों के प्रति विचारशीलता से मैं प्रभावित हुई।

एक शाम को, रात्रि भोजन के बाद मैं रसोईघर की सफाई कर रही थी। मेरा दूसरा बेटा, हमेशा की तरह, मेरे काम के समाप्त हो जाने की प्रतिक्षा कर रहा था। वह पांच साल का है और जब मैं घर का काम समाप्त करती हूं तो वह मेरे साथ सोता है। शायद उस दिन वह बहुत थका हुआ था; उसने मुझसे बार बार पूछा, “क्या आप उसके बाद सोने जा रही हैं?” इसलिए मैंने उससे पहले बिस्तर पर जाने के लिए कहा। पर उसने यह कहकर जिद्द की कि वह मेरा इंतजार करेगा। चूंकि वह इंतजार करते हुए उबाऊ हो गया, इसीलिए वह मेरे पास आया।

“मम्मी, आप थक गई होंगी। काश आपके पास एक मदद करने वाली मशीन होती। तब मैं आपके साथ बिस्तर पर जल्दी जा सकता हूं।”

मैं उसकी प्यारी कल्पना से खुश थी और उसकी इस सोच से कि उसकी मां घर के काम से थक जाएगी, मैंने उस पर गर्व महसूस किया।

पहला बेटा हमारे परिवार के प्रति विचारशील है और दूसरा बेटा अपनी मां की कड़ी मेहनत को समझता है। मैंने अपने बच्चों से यह सीखा कि दूसरों के बारे में सोचना कितना सुंदर है। मैं भी एक सुंदर मन रखूंगी और दूसरों के प्रति विचारशील बनूंगी ताकि मैं स्नेही शब्दों से उन्हें द्रवित कर सकूं।