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उबुंटू की मानसिकता से सभी मानव जाति को प्रचार करना

युगांडा के कंपाला और रवांडा के किगाली में शॉर्ट टर्म मिशन टीम

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अमेरिका में लॉस एंजिल्स चर्च और आसपास के शाखा चर्चों ने दो टीम बनाई और युगांडा और रवांडा के लिए शॉर्ट टर्म मिशन की योजना बनाई। युगांडा अफ्रीका के पूर्वी भाग के भीतरी इलाके में स्थित है, और रवांडा युगांडा का पड़ोसी देश है जो युगांडा के दक्षिण-पश्चिमी भाग के साथ अपनी सीमा का साझा करता है। भले ही ये दो देश एक दूसरे के नजदीक हैं, वे कई मायनों में अलग हैं; उदाहरण के लिए, युगांडा के निवासी अंग्रेजी और स्वाहिली का उपयोग आधिकारीक भाषा के रूप में करते हैं, लेकिन रवांडा के रहनेवाले आमतौर पर फ्रेंच और किन्यारुआण्डा का उपयोग करते हैं।

हम में से अधिकांश के लिए, दोनों देश अज्ञात दुनिया थे, जिनके बारे में हमने केवल नाम ही सुना था। हम उम्मीदों और उत्साह से भरे हुए थे, खासकर जब हमने सुना कि रवांडा में अभी तक सुसमाचार का प्रचार नहीं किया गया है। यह सोचते हुए कि वहां कितने स्वर्गीय परिवार के सदस्य हमारा इंतजार कर रहे होंगे, हमने अपने शॉर्ट टर्म मिशन की तैयारी बड़ी उत्साह के साथ की। हम ईमानदारी से वहां स्वर्गीय परिवार के सदस्यों को खोजना और उन देशों में जहां हमारे लिए सब कुछ नया था, पिता और माता के सुसमाचार के मार्ग का पालन करते हुए उनके बलिदान को थोड़ा सा भी महसूस करना चाहते थे।

एलए से तुर्किये होकर युगांडा की राजधानी कंपाला तक पहुंचने में हमें पूरे दो दिन लग गए। रवांडा की टीम को युगांडा से एक बस लेनी पड़ी और उनकी मंजिल किगाली तक पहंचने के लिए ग्यारह घंटे की यात्रा और करनी पड़ी। असामान्य रूप से लंबी-दूरी की यात्रा करने के बावजूद भी, हम अपनी थकान भूलकर परमेश्वर के वचन और प्रचुर प्रेम के साथ अपने खोए हुए भाइयों और बहनों को खोजने के लिए बाहर सड़क पर चले गए। कृतज्ञतापूर्वक, एक भाई और उसकी पत्नी ने जो मूल रूप से युगांडा से थे, वहां हमसे पहले पहुंचकर हमारे लिए अस्थायी आवास और परिवहन की तैयारी कर दी, इसलिए हम तुरंत प्रचार करने पर ध्यान केंद्रित कर पाए। हमारी दो शॉर्ट टर्म मिशन टीम के पास दो सप्ताह में हासिल करने का लक्ष्य था:

युगांडा टीम: मिशनरी जोड़े की सहायता करके बहुत से भाइयों और बहनों को खोजना
रवांडा टीम: रवांडा में पहला हाउस-चर्च स्थापित करना

युगांडा में शॉर्ट टर्म मिशन शुरू से ही अच्छा था। लोग सिय्योन की ओर धारा के समान चले आने लगे और उन्होंने परमेश्वर का वचन अध्ययन किया, और इसलिए हम समय पर भोजन भी नहीं कर सके क्योंकि लोग तुरंत सत्य को ग्रहण करके बपतिस्मा लेते थे।

रवांडा में, जहां पहली बार नई वाचा का प्रचार किया जा रहा था, जहां-कहीं हम गए वह सुसमाचार का पहला पदचिन्ह छोड़ने के समान था। युगांडा के विपरीत, वहां फल तुरंत उत्पन्न नहीं किए गए, लेकिन हमने इस बात पर, कि परमेश्वर हमें अच्छी आत्माओं से मिलने देंगे, संदेह नहीं किया।

जिसने उस विश्वास को दृढ़ किया वह माता की आशीष का वचन था। माता ने हर चीज के विषय में पूछा जैसे वहां ज्यादा गर्मी है या नहीं, वहां का जल और भोजन कैसा है, हमारे शरीर की अवस्था कैसी है, और फिर उन्होंने हमें यह कहकर आशीष दी, “बहुत से अच्छे फल उत्पन्न कीजिए! टीम के सभी सदस्य सुसमाचार के सेवक बनिए!” माता ने रवांडा टीम को प्रथम हाउस चर्च स्थापित करने की आशीष देना नहीं भूला।

अपनी संतानों को विश्वास और साहस दे रही माता की आवाज के जरिए उनका प्रेम हम तक सिधा पहुंचाया गया। हम लंबी भौतिक दूरी को महसूस नहीं सकते थे। हमने माता के वचन की ओर जोर से आमीन कहा और हम अपने मिशन के लिए अधिक उत्साही रहे।

फोन पर माता की आशीष प्राप्त करने के लगभग 2 घंटे बाद, हमने आखिरकार रवांडा टीम से पहले फल की खबर सुनी। वह वही व्यक्ति था जिसने पिछले दिन कुछ घंटों तक अध्ययन किया था; वह हमारे आवास में वापस आया, उसने बहुत से विषयों का अध्ययन किया और एलोहीम परमेश्वर को ग्रहण किया। वह भाई इस्लामी देश में ऊंचे पद पर हुआ करता था। वह मुसलमान के लिए इतना उत्साही था कि वह कुरान(मुस्लिम धर्म ग्रंथ) की सभी आयातों को भी याद रख सकता था, लेकिन उसने अपने विश्वास के जीवन पर विराम लगा दिया क्योंकि आत्मिक दुनिया से जुड़े सवालों को न सुलझाने के कारण उसे खालीपन महसूस हुआ, और वह 19 वर्षों से सत्य की तलाश कर रहा था। नई वाचा का सत्य सुनने के दौरान, वह बहुत खुश था क्योंकि उसके लंबे समय से रहे प्रश्नों का उत्तर दिया गया, और उसने सभी आराधना और साथ ही प्रचार में भी भाग लेकर हमें हैरान कर दिया। यह भाई जो किन्यारुआण्डा, फ्रांसीसी, अग्रेंजी और अरबी सहित पांच भाषाओं में बोल सकता है, अपनी प्रतिभा का पूरी तरह से उपयोग करके शॉर्ट टर्म मिशन टीम के लिए अनुवादक होने के लिए स्वेच्छा से काम किया।

अच्छे फल उत्पन्न करने की माता की पहली आशीष इस तरह पूरी हुई। निश्चय ही वह आशीष युगांडा की टीम को भी बहुतायत से दी गई। युगांडा के लोगों ने बाइबल में इतनी रुचि दिखाई कि हमें यहां पहले से ही न आने की बात पर बुरा लगा, और लगभग सभी लोगों ने दुबारा मिलने और अध्ययन करने के वादे को निभाया। हम सत्य का प्रचार करते हुए मजे में थे।

बहुत से लोगों ने स्वर्गीय पिता और माता की संतान के रूप में फिर से जन्म लेना चाहा और नया जीवन प्राप्त किया। उन आत्माओं को देखकर जो परमेश्वर के वचन के प्रति आज्ञाकारी रहने का संकल्प ले रही थीं, हमें इस भविष्यवाणी की पूर्णता के स्थल पर बुलाने के लिए परमेश्वर को बार बार धन्यवाद दिया, “भांति भांति की भाषा बोलनेवाली सब जातियों में से दस मनुष्य, एक यहूदी पुरुष के वस्त्र की छोर को यह कहकर पकड़ लेंगे, ‘हम तुम्हारे संग चलेंगे, क्योंकि हम ने सुना है कि परमेश्वर तुम्हारे साथ है।(जर्क 8:23)।’”

इस बीच, हम रवांडा के प्रथम हाउस चर्च को स्थापित करने के लिए जो माता की दूसरी आशीष थी, हर जगह दौड़े। यहां-वहां जाते वक्त, हमें अचानक अब्राहम का इतिहास याद आया। जब परमेश्वर ने अब्राहम को आज्ञा दी कि वह अपने पिता के घर को छोड़ दे और उस भूमि पर जाए जहां वह उसे दिखाएंगे, तो उसे नहीं पता था कि वह कहां जा रहा है और उसके लिए क्या इंतजार कर रहा है। फिर भी, अब्राहम परमेश्वर के वचन पर निर्भर होते हुए चला गया। इसी तरह, यह विश्वास करते हुए कि आशीष की जगह पहले से तैयार हो चुकी होगी, हम जल्दी-जल्दी चले।

लेकिन यह वास्तव में आसान नहीं था। हम विदेशियों के लिए एक अच्छी इमारत की खोज करना कठिन था क्योंकि हम उस जगह के बारे में अच्छी तरह नहीं जानते थे, इसीलिए हम गुरुवार के दोपहर तक जो शॉर्ट टर्म मिशन यात्रा का आखरी दिन था, कोई भी अच्छी जगह नहीं मिली। लेकिन, हमने प्रार्थना करना जारी रखा और हार न मानते हुए आराधना करने की जगह खोजने का प्रयास किया, और परिणामस्वरूप, हमारे जाने से कुछ घंटे पहले एक हाउस चर्च की स्थापना चमत्कारिक ढंग से की गई, और तुरंत नए हाउस चर्च में पहला फल उत्पन्न हुआ। वह यह पुष्टि करने का क्षण था कि शब्द, ‘असंभव’ परमेश्वर की शब्दावली में नहीं है।

हम रवांडा में किगाली हाउस चर्च के बारे में चिंतित थे क्योंकि वहां केवल कुछ ही नए सदस्य थे, लेकिन हमने यह खबर सुनी कि दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन चर्च ने वहां एक सेवक को भेजने का निर्णय लिया है, और हम यह कहते हुए चिल्लाए, “हमारे परमेश्वर सच में सर्वोत्तम हैं!” हमारे पिता और माता ने शुरू से अंत तक हमारा साथ देते हुए हमारी सहायता की।

क्या आपने कभी शब्द, ‘उबुंटू’ सुना है? इसका अर्थ है “मैं हूं क्योंकि आप हैं।” यह अफ्रीका में बांटु जनजाति का एक शब्द है, वास्तव में बांटु लोग युगांडा और रवांडा में भी रहते हैं। हम भी वैसा ही महसूस करते हैं। चूंकि हमारे पास हमारे भाई और बहनें हैं जिन्होंने हमें सुसमाचार का प्रचार किया था, आज हम हैं, और चूंकि हमारे साथ सिय्योन के हमारे प्रिय सदस्य हैं, हम प्रतिदिन स्वर्गीय खलिहान में परिपूर्ण आशीष बटोर सकते हैं। यह शॉर्ट टर्म मिशन के दौरान भी ऐसा था। हम हर पल उन भाई-बहनों के साथ रहकर खुश और द्रवित हुए जो एक दूसरे का सम्मान करते हैं और एक दूसरे के लिए बेहतर चीज त्याग देते हैं।

हम इस तरह के एक सपने जैसा समय बिताने के बाद अमेरिका लौट गए। “सुसमाचार के सेवक बनिए” माता की यह आशीष अभी भी हमारे लिए बाकी है। इसे पूरी करने के लिए कई चीजें हैं; हमें अपने पापी स्वभाव को निकाल देना है, अधिक विनम्र बनना है, और निरर्थक चीजों के लिए अपनी सारी इच्छाओं को दूर फेंकना है।

उन चीजों को पूरा करने के लिए जो सबसे ज्यादा जरूरी है, वह एकता है, और एकता की कुंजी प्रेम है। पिता और माता के उदाहरण का पालन करते हुए और उबुंटू की मानसिकता का स्मरण रखते हुए जो हमने अफ्रीका में सीखा, ताकि सभी मानव जाति को प्रचार करने का मिशन जल्द से जल्द पूरा हो सके।