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प्रत्येक आत्मा के उद्धार के लिए एक अद्भुत योजना

एडमोंटन, कनाडा से जोशुआ माइकल दिम

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जीवन में घटित होने वाली बहुत सी बातों में कुछ बातें केवल साधारण घटनाएं होती हैं, जबकि कुछ बातें जीवन को बदलने वाली घटनाएं होती हैं। मैं यह कह सकता हूं कि अपनी पत्नी से मिलना मेरे जीवनकाल में घटी सबसे महत्वपूर्ण घटना थी, क्योंकि मैंने अपनी पत्नी के द्वारा एलोहीम परमेश्वर को ग्रहण किया।

मेरी पत्नी दक्षिण अमेरीकी देश कोलम्बिया से है। जब वह हाई स्कूल की छात्रा थी, उसका परिवार कनाडा में आकर बस गया। पहले वे विंडसर में पहुंचे, लेकिन जल्द ही उन्होंने क्यूबेक के मॉन्ट्रियल में शिफ्ट करने की योजना बनाई। लेकिन उनकी योजना के अनुसार चीजें नहीं हुई थीं, इसलिए वे मॉन्ट्रियल के बजाय एडमोंटन में पहुंच गए। मेरी पत्नी ने जो उस वक्त एक हाई स्कूल की छात्रा थी, एडमोंटन के बहुत सारे स्कूलों में से एक स्कूल में प्रवेश किया। वह मेरा स्कूल ही था।

स्कूल में हम दोनों का एक अच्छा रिश्ता था। हम कॉलेज में प्रवेश करने के बाद प्रेमी-प्रेमिका बने, और मेरे एडमोंटन चले जाने के बाद वहां से फिर वापस आने तक हम एक-दूसरे पर भरोसा करते हुए खुशहाल भविष्य का सपना देखते थे। लेकिन एक दिन उसने कहा कि उसने बाइबल के अद्भुत वचन सुने, और उसने कुछ ऐसी चीजों के बारे में बात करना शुरू किया जिन्हें मैंने कभी नहीं सुना था, जैसे – फसह का पर्व और स्वर्गीय माता। मैं एक ऐसे परिवार में बड़ा हुआ था जिसमें ईसाई धर्म की गहरी जड़ जमी थी, इसलिए मैं उनमें से किसी बात को भी स्वीकार नहीं कर सकता था।

मेरी पत्नी ने चर्च ऑफ गॉड में ईमानदारी से विश्वास का जीवन जीना शुरू किया। भले ही मैंने सख्ती से उसकी बात सुनने से इनकार कर दिया था, लेकिन वह हर रोज मुझे बाइबल के वचन बताती थी और केवल मुझे ही नहीं, बल्कि अपने परिवारवालों जैसे अपनी मां, छोटे भाई आदि को भी प्रचार करती थी। चूंकि मैंने सोचा कि किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वास को बदलना कठिन है फिर चाहे वह उसका प्रियजन हो, इसलिए उसके प्रयास मेरे दृष्टिकोण से व्यर्थ दिख रहे थे। लेकिन मेरे उद्धार की आशा करने वाली मेरी पत्नी के सच्चे और ईमानदार मन ने मेरे दृष्टिकोण को बदल दिया। लगातार वचनों को सुनते हुए मेरा कठोर हृदय धीरे-धीरे कोमल हो गया। एकाएक मेरे कदम सिय्योन की ओर बढ़ गए। थोड़े समय के बाद एलोहीम परमेश्वर के सामने मैंने अपना सिर झुकाया और नई वाचा के सत्य को प्राप्त किया।

जैसे-जैसे मैं वचन का अध्ययन करता था, मेरा यह विश्वास पक्का होता गया कि उद्धार की ओर मेरी अगुवाई करने के लिए सब कुछ परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार हुआ था; परमेश्वर ने अपनी योजना के तहत मेरी पत्नी के परिवार को कोलम्बिया से कनाडा तक शिफ्ट कर दिया। सिर्फ इससे परमेश्वर की योजना समाप्त नहीं हुई जो मेरे उद्धार के लिए तैयार की गई थी। यह तो शुरुआत थी। परमेश्वर ने एक विशेष मार्ग तैयार किया, जिससे मैं स्वर्गीय प्रजा के रूप में अपने अन्दर उचित विश्वास, प्रेम और आशा रखते हुए ईश्वरीय स्वभाव में भाग ले सकता था। वह सुसमाचार का प्रचार करने का आशीषित मार्ग था।

परमेश्वर के अनुग्रह में हमारी शादी हुई थी, और हमने प्रचार करने के लिए अधिक प्रयास किया। लेकिन मैं अपनी पत्नी की तुलना में कुछ हद तक अनाड़ी था। क्योंकि मैंने कभी भी गहराई से बाइबल का अध्ययन नहीं किया था और किसी को भी नहीं सिखाया था, इसलिए मैं नहीं जानता था कि क्या करना चाहिए और कैसे करना चाहिए। मुझे तो बस उन लोगों के बारे में चिंता होती थी जो सत्य को जाने बिना उद्धार की ओर नहीं आ रहे थे।

मैं बस लोगों को हमारे चर्च में आने के लिए आमंत्रित कर रहा था। इस बीच, मेरे एक दोस्त ने मुझसे कहा, “मैं तुम्हारे चर्च जाने से पहले चाहता हूं कि तुम मुझे बाइबल सिखाओ।” मैं नहीं जानता था कि मुझे उसे कौन सा वचन बताना है, इसलिए मैंने पहले ही एक पुस्तकालय में बाइबल का अध्ययन किया और जो मैंने अध्ययन किया था उसे समझा दिया। मेरी बात सुनने के बाद, उसकी आंखों में आंसू उमड़ आए और उसने कहा, “वाकई जीवन अर्थपूर्ण है। सचमुच परमेश्वर का अस्तित्व है!” परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए वह परमेश्वर की सन्तान बन गया। वह भाई मैथ्यू है। अब वह एक सुसमाचार के सेवक के रूप में आगे बढ़ रहा है और एक शाखा चर्च का प्रबंध करने में मदद कर रहा है।

परमेश्वर के द्वारा दी गई आत्माओं की देखभाल करते समय मैं बहुत कुछ सीख सका। जीवन की ओर एक व्यक्ति की अगुवाई करने के लिए मुझे सबसे पहले जिस चीज की जरूरत थी, वह करुणा थी। करुणा का अर्थ एक आत्मा पर तरस खाना और उसका ख्याल रखना है। यदि आप एक मरती हुई आत्मा को बचाना चाहते हों, तो आपको उसके बारे में अच्छे से पता होना चाहिए। आपको प्रत्येक व्यक्ति पर बहुत बारीकी से ध्यान देते हुए सोचना पड़ता है कि उसे किस प्रकार के वचन की जरूरत है, वह किस चीज को जानने के लिए उत्सुक है, उसे कहीं चोट तो नहीं लगी है या फिर उसने सत्य की निन्दा करने वाली निराधार अफवाह तो नहीं सुनी है।

भाई इयान को और अधिक प्रार्थनाओं और देखभाल की जरूरत थी। शुरू में वह वचन सुनकर उलझन में पड़ गया था क्योंकि उसने अपने जीवन में पहली बार उसे सुना था, और उसके परिवार ने उसके नए चर्च को बर्दाश्त नहीं किया था। मुझे बहुत निराशा महसूस हुई जब मैं उससे मिल नहीं सकता था और न ही उससे संपर्क कर सकता था। मैं परेशान भी था क्योंकि चीजें जैसी मैं चाहता था वैसी नहीं हो रही थीं। इसके द्वारा, मुझे तीव्रता से एहसास हुआ कि सुसमाचार के प्रचारकों को अवश्य ही मन में दूसरों के प्रति करुणा का भाव रखना चाहिए और उन्हें असीम प्रेम, बलिदान, धीरज, कोमलता, दयालुता, संयम इत्यादि बाइबल की सभी शिक्षाओं को अपनाना और अमल में लाना चाहिए।

वास्तव में ये सब सद्गुण वो मन और व्यवहार है जो माता अपने बच्चों की देखभाल करते समय रखती है। जब माताएं अपने बच्चों का पालन-पोषण करती हैं, तब वे चीज को अपने नजरिए से देखने के बजाय अपने बच्चों के नजरिए से देखने की कोशिश करती हैं। वे चौकस रहकर अपने बच्चों पर बहुत बारीकी से ध्यान देती हैं ताकि उन्हें चोट न लगे या वे बीमार न हो जाएं, और उन सभी चीजों को प्रदान करती हैं जिनकी उनके बच्चों को जरूरत होती है। खासकर माताएं अपने आप से अधिक अपने बच्चों से प्रेम करती हैं, और चाहे जो हो जाए, वे कभी अपने बच्चों से हार नहीं मानतीं।

मैं हर एक चीज को नकारात्मक नजरिए से ही देखता था और मुझ में धैर्य की कमी रहती थी। इसलिए पहले छोटी-छोटी बात पर भी मैं आसानी से परेशान होता था और क्रोध फूट पड़ता था। मेरे आंतरिक स्वभाव को बदलना मेरे लिए आवश्यक था। मैं अपने अन्दर झांकते हुए अपने खुरदरे व्यक्तित्व को सुधारने और अपनी कमजोरियों को ठीक करने का प्रयास करता था।

जब मैं धीरे-धीरे स्थिरतापूर्वक अपने कुरूप और भद्दे व्यक्तित्व को सुधार रहा था, भाई इयान को परमेश्वर की इच्छा का एहसास हुआ और विश्वास में दृढ़ खड़ा हुआ। उसके पिता और उसके परिवार के अन्य सदस्य जो सत्य को अस्वीकार करते थे, उनकी भी सिय्योन में अगुवाई की गई।

अब भाई इयान के परिवार के सदस्य सुसमाचार के प्रचारक बनकर स्वर्ग के राज्य की ओर बलपूर्वक प्रवेश कर रहे हैं। मेरी सास, साला, छोटा भाई और दोस्त भी स्वर्ग की आशा के साथ मेहनत से सुसमाचार का प्रचार कर रहे हैं। जब भी मैं सोचता हूं कि हम में से प्रत्येक की उद्धार की ओर अगुवाई करने के लिए और हमारा सुसमाचार के ऐसे प्रचारकों के रूप में पालन पोषण करने के लिए जो बाइबल की भविष्यवाणियों को पूरा करेंगे, परमेश्वर ने कितनी तैयारियां की होंगी, तब अवर्णनीय धन्यवाद मेरे हृदय की गहराई से उमड़ता है। भाइयों और बहनों को सुसमाचार के कार्य के लिए कड़ी मेहनत करते हुए देखकर, हर बार मैं भावुक हो जाता हूं और मैं अपने आप से फिर से वादा करता हूं कि परमेश्वर के अनुग्रह का थोड़ा सा भी बदला चुकाने के लिए मैं अपने सभी खोए हुए स्वर्गीय परिवार के सदस्यों को जल्दी ढूंढ़ निकालूंगा।

अब मैं सुसमाचार के सहकर्मी की भूमिका निभा रहा हूं और मैं अपने कंधों पर कुछ भारी बोझ महसूस कर रहा हूं। एक बार, एक भाई जो मेरे साथ वचन का अध्ययन कर रहा था, उसने मेरी ओर संकेत करके कहा, “मैं उसकी तरह सुसमाचार का प्रचार करूंगा।” उसी क्षण बड़ी तीव्रता के साथ मुझे यह एहसास हुआ कि मेरा व्यवहार चाहे वह अच्छा हो या बुरा, दूसरों के लिए एक उदाहरण हो सकता है। क्योंकि मैंने इसके बारे में गहराई से पहले कभी नहीं सोचा था, उसकी बात ने मुझे बहुत चीजों का एहसास कराया। सबसे पहले खुद ही सही मार्ग पर जाना ही भाइयों और बहनों को सही मार्ग पर ले जाने का सबसे अच्छा तरीका है। क्योंकि भले ही सत्य अच्छा और स्पष्ट है, यदि मैं जो सत्य को पहुंचाता हूं, ठीक से व्यवहार न करूं, तो लोगों को विश्वास करना मुश्किल लगेगा।

दूसरों के लिए एक अच्छा उदाहरण स्थापित करना हमेशा आसान नहीं होता है। कभी-कभी मैं परिस्थितियों और हालातों के अनुसार शायद अपनी भावनाओं, शब्दों और व्यवहारों को नियंत्रित नहीं कर पाऊंगा, और जब मुझे अनपेक्षित रूप से आने वाली कठिन परीक्षा और पीड़ा का सामना करना पड़े और मैं यह न जानूं कि मुझे क्या करना चाहिए, तो शायद मेरी आंखों के आगे अंधेरा सा छा जाएगा और मेरे मन में हार मान लेने का ख्याल आ सकेगा। लेकिन मैं जितने अधिक संकट में होता हूं, उतना अधिक मैं माता पर निर्भर होता हूं और माता के बेचैन मन को समझने की कोशिश करता हूं जो हमारे उद्धार के लिए आंसू बहाती हैं और प्रार्थना करती हैं। जब वे सभी शिक्षाएं जिन्हें माता ने स्वयं मुझे दिखाया है, मेरे विश्वास में पूरी तरह से प्रवेश करेंगी, तब मैं ईश्वरीय स्वभाव में हिस्सा ले सकूंगा और सुसमाचार का महान मिशन पूरा कर सकूंगा।

मेरा मानना है कि स्वर्गीय सन्तानों को दिया गया जीवन का समय और सुसमाचार के मार्ग पर होने वाली घटनाओं और अनुभवों की श्रृंखलाएं वो प्रक्रियाएं होती हैं जिनसे वे माता का एहसास करते हुए माता के बारे में सब कुछ सीखते हैं। मैं सिय्योन के सदस्यों से एक सवाल पूछना चाहता हूं। परमेश्वर ने आपके लिए किस प्रकार की विशेष प्रक्रिया तैयार की है ताकि आप माता को प्राप्त कर सकें? बाद में स्वर्ग में आपका हर एक दिन कैसे याद किया जाएगा जब आप माता के सदृश बन रहे हैं? मैं बड़ी बेसब्री से उस दिन की प्रतीक्षा कर रहा हूं जब हम प्रेमपूर्ण स्वर्गीय माता की बांहों में एक साथ इकट्ठे होंगे और दोस्ताना बातचीत करेंगे।