मुट्ठी भर बीजों से

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1979 में भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में भीषण बाढ़ आई।

बाढ़ग्रस्त इलाकों में सब कुछ तबाह हो गया।

फाइंग नामक एक किशोर ने उजड़े इलाकों में पेड़ लगाने का सुझाव दिया। लेकिन लोगों ने उसकी बात को नजरअंदाज किया। फाइंग ने अकेले मुट्ठी भर बांस के बीज बोए।

उसके लगभग तीस वर्ष बाद मुट्ठी भर बांस के बीजों ने अनेकों प्रकार के जंगली जानवरों और पेड़–पौधों से भरा एक घना जंगल बना दिया।