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फसह और विपत्तियों से पार होने का कारण

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परमेश्वर ने शैतान को नष्ट करने और अपनी संतानों को अनंत जीवन देने के लिए फसह की स्थापना की। जो कोई भी सिय्योन में रहता है, वह फसह के महत्व को अच्छी तरह जानता है। अब, हमें और अधिक सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है कि जब हम फसह मनाते हैं तो विपत्तियां हमारे ऊपर से क्यों पार हो जाती हैं।

फसह का सही अर्थ क्या है? हमें विपत्तियों से मुक्त करने के लिए फसह की शक्ति का स्रोत क्या है? आइए हम परमेश्वर के सामने विनम्र और शालीन स्वभाव के साथ, बाइबल के द्वारा इन मामलों का अध्ययन करें।

फसह के मेमने के लहू के द्वारा विपत्तियों से बचना

फसह लगभग 3,500 वर्ष पहले स्थापित किया गया परमेश्वर का पर्व है। जब इस्राएली मिस्र में दास के रूप में रहते थे, तब परमेश्वर ने फिरौन को मिस्र से इस्राएल को मुक्त करने की आज्ञा दी। लेकिन उसने परमेश्वर की आज्ञा को अस्वीकार कर दिया और परमेश्वर मिस्र पर दस विपत्तियां लाए। दसवीं विपत्ति जो पहिलौठों को मारने की विपत्ति थी, पवित्र कैलेंडर के अनुसार पहले महीने के चौदहवें दिन की रात को मिस्र पर आने वाली थी: परमेश्वर ने मृत्यु की विपत्ति को उन घरों पर से पार होने दिया जिनके द्वार के अलंगों और चौखट के सिरे पर फसह के मेमने का लहू लगाया गया था। यह फसह का दिन था।

और उसके खाने की यह विधि है : कमर बांधे, पांव में जूती पहिने, और हाथ में लाठी लिए हुए उसे फुर्ती से खाना; वह तो यहोवा का पर्व होगा। क्योंकि उस रात को मैं मिस्र देश के बीच में होकर जाऊंगा, और मिस्र देश के क्या मनुष्य क्या पशु, सब के पहिलौठों को मारूंगा; और मिस्र के सारे देवताओं को भी मैं दण्ड दूंगा; मैं यहोवा हूं। और जिन घरों में तुम रहोगे उन पर वह लहू तुम्हारे लिए चिह्न ठहरेगा; अर्थात् मैं उस लहू को देखकर तुम को छोड़ जाऊंगा, और जब मैं मिस्र देश के लोगों को मारूंगा, तब वह विपत्ति तुम पर न पड़ेगी और तुम नष्ट न होगे। निर्ग 12:11-13

उस दिन, मिस्र देश में सिंहासन पर विराजनेवाले फिरौन से लेकर गड़हे में पड़े हुए बंधुए तक, सबके पहिलौठों को मार डाला गया था। मिस्र में एक भी ऐसा घर न था जिसमें कोई मरा न हो(निर्ग 12:29-30)। लेकिन, इस्राएली जिन्होंने अपने घरों के द्वार के अलंगों और चौखट के सिरे पर मेमने का लहू लगाया था, मिस्र में पहिलौठों की मृत्यु की विपत्ति से बच गए थे।

क्योंकि यहोवा देश के बीच होकर मिस्रियों को मारता जाएगा; इसलिये जहां जहां वह चौखट के सिरे, और दोनों अलंगों पर उस लहू को देखेगा, वहां वहां वह उस द्वार को छोड़ जाएगा, और नाश करनेवाले को तुम्हारे घरों में मारने के लिये न जाने देगा। निर्ग 12:23

यहां, हमें ध्यान से विचार करने की आवश्यकता है कि विपत्ति इस्राएल के लोगों पर से क्यों पार हुई। फसह के मेमने के लहू के कारण इस्राएलियों पर से यह विपत्ति पार हुई; इसका खुद लोगों से कोई लेना-देना नहीं था। न तो एक बुद्धिमान मनुष्य का घर और न ही संसार के खजाने से भरा एक अमीर मनुष्य का घर और न ही एक प्रभावशाली शाही परिवार का महल विपत्ति से बच सकता था। केवल फसह के मेमने के लहू से चिह्नित घर ही विपत्ति से बचाया जा सकता था।

हम विपत्तियों से बच सकते हैं क्योंकि हम में फसह के मेमने का लहू है, और इसलिए नहीं कि हम खुद जो फसह मनाते हैं, शक्तिशाली हैं। हमें इस पर सावधानी से विचार करना चाहिए: चूंकि परमेश्वर हमारी रक्षा करते हैं और हमें अपने अदृश्य प्रेम और अनुग्रह से आलिंगन करते हैं, तो सभी विपत्तियां हम पर से गुजर जाती हैं, दुष्ट देवताओं का न्याय किया जाता है और हमें इस पापमय संसार से छुटकारा मिलता है। इसलिए, केवल फसह के बारे में विचार न करें, बल्कि उन परमेश्वर के हाथ को भी महसूस करें जो फसह के द्वारा हमारी रक्षा करते हैं।

सच में भयानक प्राणी

मैं आपको एक कल्पित कहानी सुनाता हूं। एक दिन एक लोमड़ी एक बाघ से मिली। लोमड़ी ने बाघ से कहा, “क्या तुम जानते हो कि जानवर तुम से ज्यादा मुझ से डरते हैं?” उसने दावा किया कि वह जंगल का सबसे खूंखार जानवर है।

बाघ जो जानवरों का राजा होने का दावा करता था, उस पशु की दुस्साहस पर आश्चर्यचकित था जिसे ऐसा लग रहा था कि वह बाघ के पिछले पैर की एक लात से ही गिर जाएगा। तब लोमड़ी ने उससे कहा, “यदि तुम मुझ पर विश्वास नहीं करते, तो मेरे पीछे जंगल में आओ। तुम देखोगे कि सभी जानवर मुझ से डरते हैं या नहीं।”

लोमड़ी ने आत्मविश्वास से बाघ से कहा। संदेहजनक रूप से बाघ लोमड़ी के पीछे चला। जहां भी लोमड़ी जाती है, वहां सभी जानवर बहुत डर गए और भाग गए। खरगोश जैसे छोटे जानवर और यहां तक कि भालू जैसे विशाल और मजबूत जानवर भी सब भाग गए।

“अब तुम अपने आप देख सकते हो। ऐसा कोई जानवर नहीं है जो मुझ से डरता नहीं।”

लोमड़ी ने गर्व से कहा। लेकिन वास्तव में, जानवर लोमड़ी से डरकर नहीं भाग रहे थे, बल्कि उसके पीछे चलनेवाले बाघ से डरकर भाग रहे थे।

कभी-कभी हम अपने आसपास में भी ऐसी ही घटना होते हुए देख सकते हैं। वयस्क कभी-कभी कुछ बच्चों के सामने भी घबरा जाते हैं और भयभीत होते हैं। यह आमतौर पर तब होता है जब बच्चे के माता-पिता आर्थिक रूप से धनी और प्रभावशाली होते हैं। दरअसल, वे स्वयं बच्चों से नहीं डरते, बल्कि उनकी पृष्ठभूमि से डरते हैं।

हमारा दुश्मन शैतान हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता और जब हम सत्य का प्रचार करते हैं तो वह पीछे हट जाता है। यह हम में फसह के मेमने के लहू की वजह से है। परमेश्वर ने फसह पर मिस्र के सभी देवताओं को दण्ड दिया था। इससे हम जान सकते हैं कि शैतान सबसे ज्यादा फसह के मेमने के लहू से डरता है।

फसह का मेमना, मसीह

प्रेरितों ने गवाही दी कि मसीह फसह के मेमने की वास्तविकता हैं।

आईबीपी बाइबल, पुराना खमीर निकालकर अपने आप को शुद्ध करो कि ऐसा नया गूंधा अर्थात् अखमीरी आटा बन जाओ जैसा कि तुम वास्तव में हो। क्योंकि हमारे फसह का मेमना मसीह भी बलिदान हुआ है इसलिए हम… फसह मनाएं। 1कुर 5:7-8

हमारे फसह का मेमना, मसीह अपना बहुमूल्य लहू बहाकर हमारे लिए बलिदान हो गए। इसलिए, बाइबल कहती है कि हमें फसह को अवश्य ही मनाना चाहिए।

शैतान हमसे इसलिए नहीं डरता कि हमें बड़ा विश्वास और सामर्थ्य है, बल्कि इसलिए कि मसीह का बहुमूल्य लहू हम में है।

क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारा निकम्मा चालचलन जो बापदादों से चला आता है, उससे तुम्हारा छुटकारा चांदी-सोने अर्थात् नाशवान् वस्तुओं के द्वारा नहीं हुआ; पर निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने, अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा हुआ। 1पत 1:18-19

हम को उसमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है… इफ 1:7

यह हमारी बुद्धि और ज्ञान के द्वारा नहीं, लेकिन मसीह के लहू के द्वारा हमें छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा मिली है। बाइबल हमें बताती है कि उद्धार हमारे द्वारा नहीं, लेकिन मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा मिलता है।

यदि हम मानते हैं कि हम मसीह के बलिदान के लहू से उद्धार पाते हैं, तो हम समझ सकते हैं कि हमें परमेश्वर की इच्छा का पालन क्यों करना चाहिए और परमेश्वर के सामने खुद को नम्र क्यों करना चाहिए।

फसह में मसीह का मांस और लहू

फसह के मेमने के लहू के बारे में जिससे हमें अपने निकम्मे चाल-चलन से और पाप और मृत्यु से छुटकारा मिलता है, यीशु ने हमें इस प्रकार सिखाया।

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं। जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है, अनन्त जीवन उसी का है; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा। क्योंकि मेरा मांस वास्तव में खाने की वस्तु है, और मेरा लहू वास्तव में पीने की वस्तु है। जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है वह मुझ में स्थिर बना रहता है, और मैं उस में… जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा।” यूह 6:53-57

मसीह के लहू के द्वारा न केवल विपत्ति, वरन पाप और मृत्यु भी हमसे दूर हो जाते हैं। परमेश्वर ने अपना बहुमूल्य लहू हम में डालने के लिए हमें जीवन का सत्य, नई वाचा का फसह दिया है।

… “ ‘मेरा समय निकट है। मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहां पर्व मनाऊंगा’।” अत: चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी और फसह तैयार किया… जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।” मत 26:17-19, 26-28

… यीशु ने पतरस और यूहन्ना को यह कहकर भेजा : “जाकर हमारे खाने के लिये फसह तैयार करो।”… फिर उसने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उनको यह कहते हुए दी, “यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिये दी जाती है : मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।” इसी रीति से उसने भोजन के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, “यह कटोरा मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिये बहाया जाता है नई वाचा है।” लूक 22:7-8, 19-20

फसह वह वाचा है जिसे परमेश्वर ने अपने लहू के द्वारा स्थापित किया है। फसह के मेमने के लहू के बिना, हम न तो विपत्तियों से बच सकते हैं और न ही शैतान को हरा सकते हैं। इसलिए फसह के मेमने की वास्तविकता मसीह ने हमें अपने मांस और लहू के रूप में फसह की रोटी और दाखमधु दिया है। उन्होंने हमसे वादा किया है कि यदि हम उनका मांस खाते हैं और उनका लहू पीते हैं, तो हम उन में स्थिर बने रहते हैं, और वह हम में।

फिर भी, आज बहुत से चर्च दावा करते हैं कि फसह का पर्व मनाने की जरूरत नहीं है। क्या उनका दावा सही है? नहीं। फसह के मेमने के लहू के बिना, शैतान के द्वारा कभी भी हम पर आसानी से हमला किया जा सकता है। इसी कारण, परमेश्वर ने कहा कि यदि कोई फसह का पर्व नहीं मनाता, तो उसे परमेश्वर के लोगों में से नष्ट किया जाएगा।

“इस्राएलियों से कह कि चाहे तुम लोग चाहे तुम्हारे वंश में से कोई भी किसी लोथ के कारण अशुद्ध हो, या दूर की यात्रा पर हो, तौभी वह यहोवा के लिये फसह को माने… परन्तु जो मनुष्य शुद्ध हो और यात्रा पर न हो, परन्तु फसह के पर्व को न माने वह प्राणी अपने लोगों में से नष्ट किया जाए, उस मनुष्य को यहोवा का चढ़ावा नियत समय पर न ले आने के कारण अपने पाप का बोझ उठाना पड़ेगा।” गिन 9:10-13

यदि किसी को परमेश्वर के लोगों में से नष्ट किया जाता है, तो वह विपत्तियों से बच नहीं सकता, उद्धार नहीं पा सकता और इसके बजाय वह नरक जाने के लिए नियुक्त है। पुराने नियम के समय में, परमेश्वर ने अपने लोगों को अपने घरों के द्वार के अलंगों और चौखट के सिरे पर फसह के मेमने का लहू लगाकर विपत्तियों से बचने दिया। नए नियम के समय में, परमेश्वर अपने लोगों को फसह का मेमना, यीशु के मांस को खाकर और उनके लहू को पीकर विपत्तियों से बचने और उद्धार प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। इसलिए परमेश्वर ने स्पष्ट रूप से कहा कि फसह के बिना हम परमेश्वर के लोग नहीं बन सकते। इतना ही नहीं, यदि कोई भी फसह न मनाए तो वह परमेश्वर के लोगों में से नष्ट किया जाएगा।

मसीह के बहुमूल्य लहू में निहित पवित्र प्रेम

क्यों मसीह के बहुमूल्य लहू में विपत्तियों को पार करने की शक्ति है? क्योंकि इसमें उनका अत्यधिक प्रेम और बलिदान शामिल है। नबी यशायाह ने यीशु के रूप के बारे में जो 700 साल बाद आएंगे इस तरह भविष्यवाणी की:

… वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरुष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उससे मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और हम ने उसका मूल्य न जाना। निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम लोग चंगे हो जाएं। हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया… यश 53:1-12

हमने ही पाप किया, लेकिन हमारे पापों का दंड मसीह ने स्वयं सह लिया। हमारे पापों को उठाते हुए, वह कोड़ों से मारे गए और उनका शरीर कांटों से फट गया; उन्होंने स्वेच्छा से क्रूस पर अपना जीवन त्याग दिया। इससे उन्होंने हमारे प्रति अपना प्रेम स्पष्ट रूप से साबित किया। उन्होंने अपना बहुमूल्य लहू इस सबूत के लिए बहाया कि वह हमसे प्रेम करते हैं। इसलिए, नष्ट करने वाले स्वर्गदूत जो ऐसी कहानी को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, और हमारा दुष्ट दुश्मन शैतान भी हमारे पास आने की हिम्मत भी नहीं कर सकते।

फसह की वाचा के लहू में मसीह का प्रेम शामिल है, जिन्होंने अपने मांस के फाड़े जाने के और अपना लहू बहने के अत्यधिक दर्द को सहन करते हुए हमें जीवन दिया। सारी सृष्टियां उनके पवित्र बलिदान के लहू यानी उनके पवित्र प्रेम के सामने नमन करती हैं। यीशु के बलिदान के लहू से हम पर मुहर लगाई गई है। इस लहू की शक्ति से, सभी विपत्तियां हम पर से पार हो जाती हैं।

तेरे निकट हजार, और तेरी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा। परन्तु तू अपनी आंखों से दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा। हे यहोवा, तू मेरा शरणस्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है, इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा। क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें। भज 91:7-11

पुराने नियम में फसह के मेमने का लहू उनके घरों के द्वार के अलंगों और चौखट के सिरे पर लगाया गया था। लेकिन नए नियम में, फसह के मेमने का लहू नई वाचा के द्वारा हमारे माथों और हृदयों पर लगाया जाता है। इसलिए, भले ही नष्ट करने वाला स्वर्गदूत हमारे पास आता है, जब वह हमारे अंदर मसीह के लहू को देखता है, तो वह हम पर से पार हो जाता है। हमारे निकट हजार, और हमारी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे, परन्तु कोई भी विपत्ति उन संतों के पास न आएगी जिन पर नई वाचा फसह के सत्य में मेमने के बहुमूल्य लहू से मुहर लगाई गई है। इसी कारण हम फसह के द्वारा विपत्तियों से बच सकते हैं।

बलिदान भरे प्रेम के लिए धन्यवाद करने का विश्वास

मसीह के अत्याधिक कष्ट के कारण हम आज यहां हैं। यदि हम इस पर विचार करें, तो हमारे पास परमेश्वर के सामने घमंड करने के लिए कुछ भी नहीं है। हम कुछ भी नहीं हैं, बिल्कुल कुछ भी नहीं है। जो वास्तव में महान और भयानक है वह फसह का मेमना, मसीह के बलिदान का लहू है जो हमें अनंत स्वर्ग के राज्य की संतान बनाता है। इसलिए हमें अहंकारी नहीं होना चाहिए और घमंडी मन नहीं रखना चाहिए।

क्योंकि तुझ में और दूसरे में कौन भेद करता है? और तेरे पास क्या है जो तू ने (दूसरे से) नहीं पाया? और जब कि तू ने (दूसरे से) पाया है, तो ऐसा घमण्ड क्यों करता है कि मानो नहीं पाया? 1कुर 4:7

अपने आप को अपने विश्वास के केंद्र में रखने की कोशिश करना मूर्खता है। हम खुद पर गर्व नहीं कर सकते; हमारा ज्ञान, बुद्धि, बाइबल की अच्छी समझ इत्यादि सब कुछ परमेश्वर की ओर से आया है।

जो लोग इसे समझते हैं वे हमेशा मसीह के प्रेम को अपने मन में रखते हैं, वे धीरजवन्त और कृपालु हैं, वे डाह नहीं करते, अपनी बड़ाई नहीं करते और घमंड नहीं करते जैसा कि 1कुरिन्थियों 13 में लिखा गया है। हालांकि, जो लोग परमेश्वर के अनुग्रह को भूल जाते हैं वे अभिमानी या अहंकारी बन जाते हैं। बाइबल कहती है कि परमेश्वर हमारे गर्व के कारण भीतर ही भीतर सिसकता रहेंगे(यिर्म 13:15-17 आईबीपी बाइबल)।

कुछ लोग पूछते हैं, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि हम कोई पाप करें या नहीं, क्योंकि हम फसह मनाते हैं, है न?” यह बाइबल की ज़बरदस्त विकृति है। हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए। फसह के बहुमूल्य लहू हमारे पाप को मिटाने का एक रबड़ है। इसके विपरीत हमारे पाप फसह के बहुमूल्य लहू को मिटाने का एक रबड़ है। मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा, परमेश्वर ने स्वर्ग में किए हमारे सभी पापों को क्षमा कर दिया है। हम उनके बहुमूल्य लहू को कैसे बदनाम कर सकते हैं? यदि हम ऐसा करते हैं, तो उनका लहू अब और हमारे लिए प्रभावी नहीं होगा। भले ही किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा गया है, लेकिन उसे काटा जा सकता है। इसलिए बाइबल हमें कहती है कि जब तक मसीह दुनिया का न्याय करने के लिए नहीं आएंगे तब तक जो कुछ हमारे पास है, उसे थामे रहें, ताकि कोई हमारे जीवन के मुकुट छीन न ले।

हमें मसीह के बहुमूल्य लहू को संजोना चाहिए, जो उनके उदात्त अनुग्रह से हमें दिया गया है। हमें फसह के द्वारा पापों की क्षमा और अनंत जीवन पाने पर बहुत अधिक गर्व है, हालांकि, यदि हम इसमें निहित बलिदान भरे प्रेम को नहीं समझते, तो उसका क्या लाभ होगा? परमेश्वर ने हमें जो अनुग्रह और प्रेम दिया है, उसके बारे में सोचते हुए, हम सिय्योन की संतानों को हर बात में धन्यवाद करना और सदा आनंदित रहना चाहिए।

हमें दुनिया भर के सभी लोगों को सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए जो अभी भी फसह को नहीं जानते और उद्धार और परमेश्वर के अनुग्रह से दूर हो गए हैं, ताकि वे भी अपने अंदर मसीह के बहुमूल्य लहू को संजो सकें। स्वर्गीय पिता और माता के बलिदान के बहुमूल्य लहू की बदौलत हम सभी आज यहां हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, आइए हम अधिक विनम्र हृदय के साथ, हमेशा स्वर्गीय पिता और माता को महिमा दें और प्रचुर आशीष प्राप्त करें।