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स्वतंत्रता की व्यवस्था, फसह

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बाइबल की 66 पुस्तकें भविष्यद्वक्ताओं के व्यक्तिगत विचार या दर्शनशास्त्र के अभिलेख नहीं, लेकिन मानव जाति के उद्धार के लिए दी गई परमेश्वर की शिक्षाएं हैं। चूंकि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हुए उद्धार की अभिलाषा करते हैं, हमें इस बात पर पूरी तरह विश्वास करके परिश्रमपूर्वक बाइबल का अध्ययन करना चाहिए।

बाइबल कहती है कि ऊपर की यरूशलेम अर्थात् हमारी माता ‘स्वतंत्र’ हैं और यह कि चूंकि मसीह ने हमें स्वतंत्र कर दिया है इसलिए हम अब और पाप के दास नहीं लेकिन स्वतंत्र हैं(गल 4:26; यूह 8:32-36)। हम स्वतंत्र पिता परमेश्वर और स्वतंत्र माता परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, इसलिए हम स्वतंत्र संतान हैं। आइए हम बाइबल में स्वतंत्रता का अर्थ खोजें और परमेश्वर के अनुग्रह के लिए धन्यवाद दें जिन्होंने हमें स्वतंत्रता की व्यवस्था अर्थात् नई वाचा के फसह से अनंत स्वतंत्रता दी।

पाप और मृत्यु के दास

मसीह के इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मानव जाति को उद्धार देना है(लूक 19:10)। बाइबल में उद्धार का अर्थ किसी को पाप से मुक्त करके स्वतंत्रता देना है। परमेश्वर के अनुग्रह से छुड़ाए जाकर स्वतंत्रता पाने से पहले, हम पाप और मृत्यु की जंजीर में बंधे हुए थे।

इस प्रकार मैं यह व्यवस्था पाता हूं कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है। क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं। परन्तु मुझे अपने अंगों में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है। मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा? हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद हो। इसलिये मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं। रो 7:21-25

प्रेरित पौलुस ने मनुष्यों का ऐसा वर्णन किया कि वे पाप के बन्धन में बंधे हुए हैं। उसने यह कहते हुए विलाप किया, “मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?” यह दिखाता है कि मनुष्य का जीवन बहुत कष्टदायक है: मनुष्य पाप और मृत्यु की जंजीर में जकड़े जाकर चाहने पर भी स्वतंत्रता नहीं पा सकते और उन्हें अंत में मरना पड़ता है।

लेकिन, यदि मृत्यु की व्यवस्था है तो जीवन की व्यवस्था भी है।

अत: अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं। [क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन् आत्मा के अनुसार चलते हैं।] क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया। रो 8:1-2

पाप और मृत्यु की व्यवस्था के अधीन अभागा जीवन जी रहे लोगों को छुड़ाने के लिए मसीह ने इस पृथ्वी पर आए और जीवन की आत्मा की व्यवस्था दी। आइए हम जानें कि जीवन की व्यवस्था क्या है जिसे मसीह ने स्वयं स्थापित किया था।

मसीह के लहू से स्थापित की गई जीवन की व्यवस्था, फसह

हम को उसमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है… इफ 1:7

क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारा निकम्मा चालचलन जो बापदादों से चला आता है, उससे तुम्हारा छुटकारा चांदी-सोने अर्थात् नाशवान वस्तुओं के द्वारा नहीं हुआ; पर निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने, अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा हुआ। 1पत 1:18-19

बाइबल कहती है कि हमें मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा मिली है। आत्मिक दास के रूप में नहीं लेकिन स्वतंत्र होकर जीने के लिए, हमें मसीह का बहुमूल्य लहू चाहिए जो हमें पाप से छुड़ाता है। मसीह का बहुमूल्य लहू पाए बिना, कोई भी पाप और मृत्यु की जंजीर से मुक्त नहीं हो सकता।

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं। जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है, अनन्त जीवन उसी का है; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा। क्योंकि मेरा मांस वास्तव में खाने की वस्तु है, और मेरा लहू वास्तव में पीने की वस्तु है।” यूह 6:53-55

जीवन नहीं होने का अर्थ है मृत्यु का दास बनना। जो कोई यीशु का मांस नहीं खाता और उनका लहू नहीं पीता, वह मृत्यु के दासत्व में रहता है। पाप की मजदूरी मृत्यु है(रो 6:23)। इसलिए, केवल पापों की क्षमा पाने के द्वारा ही हम मृत्यु से मुक्त होकर अनंत जीवन पा सकते हैं।

यीशु का मांस और लहू जिससे हम अनंत जीवन पाते हैं, फसह के द्वारा दिया जाता है।

… उसने कहा, “नगर में अमुक व्यक्ति के पास जाकर उससे कहो, ‘गुरु कहता है कि मेरा समय निकट है। मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहां पर्व मनाऊंगा’।” अत: चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी और फसह तैयार किया… जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।” मत 26:17-28

मसीह का बहुमूल्य लहू जो पाप और मृत्यु की व्यवस्था को तोड़ देता है, नई वाचा का फसह है जिसे मसीह लेकर आए। जीवन की व्यवस्था अर्थात् फसह जो हमें मसीह के मांस और लहू से पापों की क्षमा पाने में सक्षम बनाता है, मानव जाति के लिए परमेश्वर के सबसे बड़े प्रेम का उपहार है।

स्वर्गीय पिता और माता जो स्वतंत्रता की व्यवस्था लेकर आए

जैसे पौलुस ने कहा था, हम अभागे मनुष्य हैं जो मृत्यु की देह से अपने आपको छुड़ा नहीं सकते। इसलिए, हमें किसी ऐसे व्यक्ति की सख्त जरूरत है जो हमें बचा सकता है। इस मृत्यु की देह से हमें कौन छुड़ाएगा?

केवल परमेश्वर को पाप क्षमा करने का अधिकार है। मानव जाति को अनंत मृत्यु से छुड़ाकर उद्धार के मार्ग पर ले जाने के लिए परमेश्वर स्वयं इस पृथ्वी पर आए।

सेनाओं का यहोवा इसी पर्वत पर सब देशों के लोगों के लिये ऐसा भोज तैयार करेगा जिसमें भांति भांति का चिकना भोजन और निथरा हुआ दाखमधु होगा; उत्तम से उत्तम चिकना भोजन और बहुत ही निथरा हुआ दाखमधु होगा। और जो पर्दा सब देशों के लोगों पर पड़ा है, जो घूंघट सब जातियों पर लटका हुआ है, उसे वह इसी पर्वत पर नष्ट करेगा। वह मृत्यु का सदा के लिये नाश करेगा, और प्रभु यहोवा सभों के मुख पर से आंसू पोंछ डालेगा, और अपनी प्रजा की नामधराई सारी पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा ही कहा है। उस समय यह कहा जाएगा, “देखो, हमारा परमेश्वर यही है, हम इसी की बाट जोहते आए हैं, कि वह हमारा उद्धार करे। यहोवा यही है; हम उसकी बाट जोहते आए हैं। हम उससे उद्धार पाकर मगन और आनन्दित होंगे।” यश 25:6-9

परमेश्वर की व्यवस्था जिसमें पापों की क्षमा की शक्ति है, नई वाचा का फसह है जो जीवन की आत्मा की व्यवस्था अर्थात् स्वतंत्रता की व्यवस्था है। बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, जो जीवन की रोटी और निथरे हुए दाखमधु से पाप और मृत्यु का नाश करते हैं और हमारा उद्धार करते हैं वह निश्चय ही हमारे परमेश्वर हैं।

जैसे भविष्यवाणी की गई थी कि परमेश्वर स्वतंत्रता की व्यवस्था से अपने लोगों का उद्धार करेंगे, वैसे ही पिता परमेश्वर ने इस पृथ्वी पर आकर फसह के सत्य को पुनर्स्थापित किया जिसे लंबे समय तक माना नहीं गया था, और माता भी नई वाचा के फसह के द्वारा प्रकट हुई हैं, जो उनकी संतानों को पाप और मृत्यु से स्वतंत्र करता है। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में वह दृश्य दर्ज किया गया है, जहां आत्मा और दुल्हिन सभी लोगों को जीवन का जल देने के लिए बुलाते हैं(प्रक 22:17)। यह इसलिए क्योंकि आत्मा और दुल्हिन, स्वर्गीय पिता और स्वर्गीय यरूशलेम माता के पास नई वाचा अर्थात् जीवन का वह सत्य है जो लोगों को स्वतंत्र कर सकता है।

पर ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है। क्योंकि लिखा है, “हे बांझ, तू जो नहीं जनती आनन्द कर; तू जिसको पीड़ाएं नहीं उठतीं, गला खोलकर जय जयकार कर; क्योंकि त्यागी हुई की सन्तान सुहागिन की सन्तान से भी अधिक हैं।” हे भाइयो, हम इसहाक के समान प्रतिज्ञा की सन्तान हैं। और जैसा उस समय शरीर के अनुसार जन्मा हुआ आत्मा के अनुसार जन्मे हुए को सताता था, वैसा ही अब भी होता है। परन्तु पवित्रशास्त्र क्या कहता है? “दासी और उसके पुत्र को निकाल दे, क्योंकि दासी का पुत्र स्वतंत्र स्त्री के पुत्र के साथ उत्तराधिकारी नहीं होगा।” इसलिये हे भाइयो, हम दासी के नहीं परन्तु स्वतंत्र स्त्री की सन्तान हैं। गल 4:26-31

इसहाक के समान प्रतिज्ञा की संतान बनने के लिए, हमारे पास माता होनी चाहिए जो स्वतंत्र हैं। चूंकि हम यरूशलेम माता की बांहों में आए हैं, इसलिए हमें समझना चाहिए कि सच्ची स्वतंत्रता क्या है और इस सत्य में स्वर्गीय माता को सही तरह से समझकर ग्रहण करना चाहिए। बाइबल वर्णित करती है कि पाप से मुक्त होना ही स्वतंत्रता है, और यह कि जो पाप और मृत्यु की व्यवस्था में बंधे नहीं हैं वे स्वतंत्र हैं। बाइबल इस बात पर भी जोर देती है कि हम दासी की नहीं, लेकिन स्वतंत्र स्त्री की संतान हैं, क्योंकि पिता और माता हमें पाप और मृत्यु से छुड़ाकर उद्धार के मार्ग पर ले जाने के लिए जीवन का सत्य अर्थात् नई वाचा लाए हैं।

हम नई वाचा से परमेश्वर की ‘प्रतिज्ञा की संतान’ बन गए हैं। अब्राहम के परिवार में, स्वतंत्र स्त्री से उत्पन्न हुआ पुत्र इसहाक ही अब्राहम का वारिस बन गया था। इसहाक इसलिए अब्राहम की संपत्ति का वारिस बन सका क्योंकि उसके पिता और माता स्वतंत्र थे। उसी तरह, हम भी स्वतंत्र हैं और परमेश्वर के राज्य को विरासत में पाने की शानदार आशीष प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि हमारे स्वर्गीय पिता और माता स्वतंत्र हैं।

फसह हमें परमेश्वर के वारिस बनने देता है

न तो एलीएजेर जो एक दास था और न ही इश्माएल जो एक दासी से पैदा हुआ था, अब्राहम की संपत्ति का वारिस हो सकता था। पुराने नियम का यह इतिहास एक भविष्यवाणी है: जो पाप और मृत्यु के दास हैं वे कभी भी परमेश्वर के राज्य के वारिस नहीं हो सकते। इसलिए परमेश्वर ने हमें नई वाचा के फसह के माध्यम से स्वतंत्रता देकर यह कहा है कि हम फिर से पाप और मृत्यु के दास न बनें।

मसीह ने स्वतंत्रता के लिये हमें स्वतंत्र किया है; अत: इसी में स्थिर रहो, और दासत्व के जूए में फिर से न जुतो। गल 5:1

जब इस्राएली मिस्र के दासत्व से स्वतंत्रता पाने के लिए तरस रहे थे, तब परमेश्वर ने उन्हें फसह मनाने देने के लिए उनके पास भविष्यवक्ता मूसा को भेजा। फसह मनाने से पहले, वे दास थे, लेकिन फसह मनाने के बाद, वे स्वतंत्र हुए।

अतीत में हुई बात एक छाया है जो यह दिखाती है कि नई वाचा के फसह के द्वारा लोग पाप और मृत्यु के दासत्व से स्वतंत्र हो सकते हैं। जब हम पाप और मृत्यु की जंजीर में जकड़े हुए थे तब हम दास थे, लेकिन अब हमने परमेश्वर द्वारा स्थापित नई वाचा का फसह मनाकर पापों की क्षमा और अनंत स्वतंत्रता पाई है।

नई वाचा अर्थात् स्वतंत्रता की व्यवस्था की बदौलत, हम दासत्व का जुआ उतारकर परमेश्वर की ऐसी संतान बने हैं जिनमें परमेश्वर का मांस और लहू हैं। परमेश्वर स्वयं इस तथ्य की गवाही देते हैं।

आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं; और यदि सन्तान हैं तो वारिस भी, वरन् परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, कि जब हम उसके साथ दु:ख उठाएं तो उसके साथ महिमा भी पाएं। रो 8:16-17

परमेश्वर नई वाचा माननेवालों को अपनी संतान के रूप में स्वीकार करते हैं। आजकल लोग डीएनए टेस्ट के जरिए अपने जैविक माता-पिता या बच्चों का पता लगा सकते हैं। उसी तरह, परमेश्वर यह जांच करके कि हम में उनका मांस और लहू हैं या नहीं, हमें अपनी संतान के रूप में पहिचानते हैं। फसह के द्वारा हममें परमेश्वर का पवित्र मांस और लहू है, इसलिए हम परमेश्वर को पिता और माता कहकर बुला सकते हैं।

परमेश्वर ने मानव जाति को अपना डीएनए विरासत में पाने देने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और मूल्यवान व्यवस्था अर्थात् फसह को स्थापित किया। यीशु ने कहा कि उन्हें फसह खाने की बड़ी लालसा थी। यह इसलिए क्योंकि केवल वे जो पापों की क्षमा देने वाले यीशु के मांस और लहू यानी फसह की रोटी और दाखमधु खाते और पीते हैं, अनंत जीवन पाकर परमेश्वर की ऐसी संतान बन सकते हैं जो परमेश्वर के राज्य को विरासत में पाएंगी।

पाप और मृत्यु की जंजीर में बंधी मानव जाति को स्वतंत्रता देना

बाइबल बताती है कि अंत के दिनों में केवल थोड़े ही बचेंगे और उन्हें परमेश्वर के बीज कहती है। अंत में, लोग जो परमेश्वर के सदृश हैं वे उद्धार पाएंगे; वे प्रतिज्ञा की संतान हैं जिन्हें परमेश्वर ने इस पृथ्वी पर बचाकर रखा है।

और यशायाह इस्राएल के विषय में पुकारकर कहता है, “चाहे इस्राएल की सन्तानों की गिनती समुद्र के बालू के बराबर हो, तौभी उनमें से थोड़े ही बचेंगे। क्योंकि प्रभु अपना वचन पृथ्वी पर पूरा करके, धार्मिकता से शीघ्र उसे सिद्ध करेगा।” जैसा यशायाह ने पहले भी कहा था, “यदि सेनाओं का प्रभु हमारे लिये कुछ वंश[बीज, किंग जेम्स वर्जन] न छोड़ता, तो हम सदोम के समान हो जाते, और अमोरा के सदृश ठहरते।” रो 9:27-29

और न अब्राहम के वंश होने के कारण सब उसकी सन्तान ठहरे, परन्तु (लिखा है) “इसहाक ही से तेरा वंश[बीज, किंग जेम्स वर्जन] कहलाएगा।” अर्थात् शरीर की सन्तान परमेश्वर की सन्तान नहीं, परन्तु प्रतिज्ञा की सन्तान वंश गिने जाते हैं… रो 9:7-13

न तो एलीएजेर और न ही इश्माएल, लेकिन केवल इसहाक ही अब्राहम के बीज के रूप में माना गया, क्योंकि उसके पिता और माता स्वतंत्र थे। हम भी इसहाक के समान प्रतिज्ञा की संतान बनकर परमेश्वर के बीज के रूप में माने जा सकते हैं, क्योंकि स्वर्गीय पिता और माता स्वतंत्र हैं।

हम स्वर्गीय पिता और स्वर्गीय माता में नई वाचा के फसह के द्वारा पूर्ण रूप से पाप और मृत्यु की जंजीर से स्वतंत्र हो गए हैं और हमने अनंत जीवन पाया है। हमें पाप और मृत्यु की व्यवस्था में बंधे हुए लोगों को स्वतंत्रता का प्रचार करना चाहिए। भविष्यवाणी का समय आने पर, लगभग 1,600 वर्षों में जीवन की व्यवस्था अर्थात् फसह प्रकट किया गया है, और अब संसार के पांच महासागरों और छह महाद्वीपों में इसका प्रचार किया जा रहा है। आइए हम इस बात पर दृढ़ता से विश्वास करके कि राज्य का सुसमाचार जाति जाति के लोगों को प्रचार किया जाएगा, और अधिक आत्माओं को जीवन की व्यवस्था अर्थात् नई वाचा के फसह का प्रचार करें। मैं आप सभी से ईमानदारी से प्रतिज्ञा की संतान बनने के लिए कहता हूं, जो परमेश्वर की कृपा से सभी मानव जाति के लिए मुक्ति और अनंत जीवन का मार्ग खोल सकती हैं।