यदि हम अभ्यास न करें

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जब एक विश्व प्रसिद्ध गायिका ने कोरिया में एक प्रदर्शन किया, सभी श्रोताओं ने निराशा महसूस की। यहां तक कि वे क्रोधित हो गए। गायिका को श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने की उत्कृष्ट क्षमता प्राप्त थी, इसलिए उसकी प्रस्तुति को सीधा सुनने के लिए बहुत लोगों ने महंगी टिकटें खरीदी थीं। लेकिन उसकी आवाज इतनी अस्थिर और कमजोर थी कि पीछे बैठे श्रोता उसे सुन नहीं पा रहे थे। इसका कारण यह था कि वह पर्याप्त अभ्यास किए बिना मंच पर आई थी।

चाहे आप कुछ चीज करने में कुशल और अभ्यस्त हों, लेकिन यदि आप उसे लम्बे समय के बाद दुबारा करने की कोशिश करें, तो आपको उसे करने में अनाड़ीपन हो सकता है। चाहे आप कोई वाद्य बजाने में निपुण हों, लेकिन यदि आप लम्बे समय तक उसका अभ्यास न करें, तो आपकी उंगलियां सही तरीके से नहीं चलेंगी। और चाहे आप एक साल तक बड़े यत्नपूर्वक व्यायाम करके मांसपेशियां मजबूत बनाएं, फिर भी यदि आप व्यायाम जारी न रखें, तो एक महीने में वे कमजोर पड़ेंगी।

चाहे संगीत हो, चाहे व्यायाम हो, चाहे अध्ययन हो, चाहे कुछ भी हो, आप निरन्तर अभ्यास और प्रयास करने के द्वारा ही अपनी क्षमता बनाए रख सकते हैं। हमारे विश्वास के जीवन के साथ भी ऐसा ही है। चाहे कोई कितना भी अच्छा विश्वासी क्यों न हो, लेकिन यदि वह प्रार्थना न करे, परमेश्वर के वचन का अध्ययन न करे और परमेश्वर की शिक्षा पर अमल न करे, तब जैसे-जैसे समय बीतेगा, वह अपना ईश्वरीय स्वभाव और भक्तिपूर्ण जीवन छोड़ देगा। शायद एक दिन उसे ऐसा लगेगा मानो उसने कभी वह चीज न की हो। इतना ही नहीं, उसे फिर से करने की हिम्मत तक नहीं होगी।

आइए हम प्रतिदिन भक्तिपूर्ण होने का अभ्यास करें। यह परमेश्वर की ऐसी सन्तान के रूप में, जो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करेगी, अंत तक बने रहने का एकमात्र मार्ग है।

यदि हम अभ्यास न करें

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