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“मैं पापियों को बुलाने आया हूं”

मत्ती 9:9–13

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यीशु ने एक लकवा के रोगी को कफरनहूम में चंगा किया, और फिर वह वहां से चले। उसने मत्ती नामक एक व्यक्ति को देखा जो चुंगी की चौकी पर बैठा, और उससे कहा,

“मेरे पीछे चला आ।”

यीशु के शब्द पर, बिना किसी हिचकिचाहट के मत्ती खड़ा हुआ और उसके पीछे हो लिया। मत्ती ने अपने घर में यीशु को भोजन पर बुलाया, और यीशु के साथ बहुत से चुंगी वसूलने वाले और पापी भी खाने बैठे। यह देखकर फरीसियों ने यीशु के चेलों से पूछा,

“तुम्हारा गुरु चुंगी वसूलने वालों और पापियों के साथ क्यों खाता है?”

यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा,

“मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।”

यहूदियों को चुंगी वसूलने वालों से बड़ी नफरत थी, क्योंकि वे यहूदियों से चुंगी लेते थे और उसे रोम को देते थे। सभी यहूदी उन्हें पापियों के रूप में तुच्छ समझते थे। उसके बावजूद, यीशु जो तुच्छ और नजरअंदाज किए गए थे उन लोगों के साथ खाते थे। बेशक यीशु को पता था कि लोग यीशु की ओर उंगली उठाएंगे। लेकिन वह एक ही वजह से उनके साथ रहते थे कि वह पापियों को बुलाने और उन्हें पश्चाताप करवाने के लिए आए थे।

परमेश्वर, जो निष्कलंक और निर्दोष हैं, पृथ्वी पर अपमानित किए गए, क्योंकि वह तुच्छ व नगण्य समझे जानेवाले पापियों के साथ रहते थे। जो पापियों को बचाने के लिए पापियों के रूप में आए और जिन्होंने हमारे बजाय सभी प्रकार के कष्टों को झेला, वे स्वर्गीय पिता और माता हैं, जो अब भी हमारे साथ हैं।