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18 नवम्बर, 2019

शैतान की परीक्षा और विजय

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शैतान आत्मिक दुनिया में हमारे विश्वास को कमजोर करता है, और भौतिक चीजें, यश, माता-पिता, सन्तान, झगड़ा, घृणा, शक्ति, पैसा, प्रेम, ईर्ष्या, डाह, प्रतिष्ठा इत्यादि जैसी सांसारिक बातों के द्वारा, हमें नाश और पतन की ओर ले जाता है, ताकि हम पीछे हटें और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न कर सकें। हमें शैतान की ऐसी परीक्षाओं पर विजय पानी चाहिए।

1. शैतान कैसे हमें परीक्षा देता है?

  1. जब हम गरीब होते हैं, शैतान भौतिक चीजों के द्वारा परीक्षा करता है।
  2. वह हमें परमेश्वर के प्रयोजन पर संदेह कराने के द्वारा परीक्षा करता है।
  3. वह हमें इस संसार की महिमा और धन-सम्पत्ति को दिखाने के द्वारा और हमारे मन में परमेश्वर के प्रति विश्वास पैदा करने के बजाय सांसारिक चीजों के प्रति ज्यादा लगाव पैदा करने के द्वारा परीक्षा करता है।
  4. वह हमें मूर्तिपूजा के द्वारा परीक्षा करता है।
  5. वह हमारे आसपास के लोगों को हमारी निन्दा कराने के द्वारा परीक्षा करता है।
  6. वह हमारी धन-सम्पत्ति बढ़ाने के द्वारा और हम से अपना सारा ध्यान परमेश्वर की सेवा नहीं, पर सिर्फ धन कमाने में लगवाने के द्वारा परीक्षा करता है।
  7. वह झूठी बातों से हमारे मन में सत्य पर संदेह पैदा करने के द्वारा परीक्षा करता है।
  8. वह हिंसा और धमकी आदि से हमें परमेश्वर की ओर आगे बढ़ने से रोकने के द्वारा परीक्षा करता है।
  9. वह सदस्यों के बीच संबंध अलग करता है और उन्हें एक दूसरे से घृणा कराता है, ताकि वे मेल मिलाप से न रहें।

2. हम कैसे परीक्षा पर विजयी हो सकते हैं?

  1. हम प्रार्थना में लगे रहकर विजयी हो सकते हैं(मत 26:41)।
  2. हम विश्वास को ढाल के रूप में लेकर विजयी हो सकते हैं(इफ 6:16); विश्वास एक हथियार है जिससे हम शैतान का विरोध कर सकते हैं और संसार पर विजयी हो सकते हैं(1यूह 5:4)।
  3. हम परमेश्वर के वचन पर भरोसा करके विजयी हो सकते हैं(मत 4:2-11)।
  4. हम धीरज और धैर्य रखकर विजयी हो सकते हैं(याक 1:2-4)।
  5. हम केवल परमेश्वर पर निर्भर होकर विजयी हो सकते हैं।
  6. हम परमेश्वर के सम्पूर्ण कवच को धारण करके विजयी हो सकते हैं(इफ 6:13)।
  7. हम भक्ति के साथ जीवन जीने से विजयी हो सकते हैं(2पत 2:9)।
  8. जितना शैतान हमें एक दूसरे से घृणा करने के लिए लुभाए, फिर भी यदि हम उससे अधिक भाई-बहनों से प्रेम करें, तो हम परीक्षा पर विजयी हो सकते हैं।

शैतान हमें पाप करने, विश्वास से भटकने, अपने विश्वास को छोड़ने, परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए लुभाता है, ताकि हम अन्त में शैतान का पीछा करें। दूसरे शब्दों में, परीक्षा हमारी आत्माओं को नष्ट करके हमें नरक में ले जाने वाला फंदा है। शैतान हमारा शत्रु है जो इसे हमारी आत्माओं को मारने के लिए अपनी सबसे बड़ी खुशी का साधन मानता है।

हमें शैतान के परीक्षाओं पर विजय पानी चाहिए। आइए हम, अनंत स्वर्ग के राज्य को सोचते हुए सभी परीक्षाओं पर विजय पाएं और आशीष प्राप्त करें।

पुनर्विचार के लिए प्रश्न
1. हम कैसे परीक्षा पर विजय पा सकते हैं?
2. आइए हम सोचें कि जब हम परिक्षा में पड़ गए थे तब हम कैसे परीक्षा पर विजय पा सके।
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