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अपने परिवार की भावनाओं का सम्मान करें!

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हमारे पास कई भावनाएं होती हैं – खुशी, उदासी, क्रोध, उम्मीद, भय, कृतज्ञता, इत्यादि। हम इन भावनाओं को किसी भी तरह से व्यक्त करना चाहते हैं, और जब हमारी भावनाओं का दूसरों द्वारा सम्मान किया जाता है तो हम स्थिरता और खुशी महसूस करते हैं।

हमारी भावनाओं को स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना, और एक दूसरे की भावनाओं को समझना और स्वीकार करना बातचीत की मूल बातें हैं। भले ही आप असहमत हैं, फिर भी आप एक सुखद बातचीत कर सकते हैं यदि आप दूसरे व्यक्ति की भावनाओं को समझते हैं।

आप अपने परिवार की भावनाओं पर कितना कान लगाते हैं और उनकी परवाह करते हैं? उनकी विविध भावनाओं का सम्मान कीजिए और इस महीने उनके साथ सक्रिय रूप से सहानुभूति रखिए क्योंकि उनकी भावनाएं आपके परिवार की तरह ही कीमती हैं।

टिप्स
अपने परिवार की भावनाओं को पढ़ें।
(“आप आज खुश लग रहे हैं।” “क्या आप काम करते हुए थके नहीं हैं?”)
उनकी बातों को ध्यान से सुनें और समझें।
(“अच्छा, ऐसा हुआ था।” “मैं भी परेशान हुआ होता।”)
पूछें कि वह ऐसा क्यों महसूस करता/करती है।
(“कुछ ऐसा हुआ होगा जो आपको परेशान करता हो। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वह क्या है?”)
उनकी भावनाओं की उपेक्षा न करें या उनकी भावनाओं का न्याय न करें।
(न कहें “क्या आप केवल इस बात से परेशान हैं?” “यह एक मूर्खतापूर्ण विचार है।”)
भावना परिवर्तन के लिए जोर न लगाएं बल्कि प्रतीक्षा करें।
(न कहें “अब गुस्से को उड़ा दो!” “रोना बंद करो।”)
छोटे बच्चों के लिए, उनकी भावनाओं को स्वीकार करें और उन्हें सही व्यवहार की जानकारी दें।
(“तुम बहुत परेशान हुए होंगे। लेकिन अपने दोस्त को मारना गलत है।”)
सावधान रहें कि आप अपनी नकारात्मक भावनाओं को छाने बिना अपने परिवार के सामने प्रकट न करें।
अपने परिवार को अक्सर सकारात्मक भावनाओं को व्यक्त करें।
(“मैं इस तरह एक साथ खाने के लिए खुश हूं।” “जब आप हंसते हैं तो मुझे अच्छा लगता है।”)