घमण्ड

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वे जो स्वस्थ होते हैं, उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति बेपरवाह होने की अधिक संभावना होती है। चूंकि उनके शरीर में ऐसा कोई विशेष हिस्सा नहीं है जिसमें घाव हों, इसलिए वे आंख बंद करके अपने स्वास्थ्य के प्रति निश्चिंत रहते हैं, पर वे अचानक आकस्मिक रूप से बीमारी के शिकार होते हैं। इसलिए स्वस्थ दिखने वाले लोग भी अचानक बीमार पड़ जाते हैं।

इसके विपरीत वे जो निर्बल होते हैं, वे अपने स्वास्थ्य की अच्छी तरह से देखभाल करते हैं। चूंकि वे जानते हैं कि वे निर्बल हैं, इसलिए वे स्वस्थ रहने के लिए अस्वस्थ आदतों को छोड़ने का हर संभव प्रयास करते हैं और स्वस्थ खाना खाते हुए शारीरिक रूप में तंदुरुस्त रहने का प्रयास करते हैं।

“… इसलिए मैं बड़े आनंद से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूंगा कि मसीह की सामथ्र्य मुझ पर छाया करती रहे।” 2कुर 12:9

प्रेरित पौलुस अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करता था ताकि वह अहंकारी न बनते हुए हमेशा परमेश्वर पर ही निर्भर रह सके। यदि उसमें किसी भी चीज का अभाव न होता और वह हर चीज में कुशल होता, तब वह शायद परमेश्वर के द्वारा दी गई अपनी बड़ी महिमा के कारण अंहकारी बनता था और एक शारीरिक बीमारी के बजाय घातक आत्मिक बीमारी से दुख भोगता था।

हर किसी के पास अपनी निर्बलता होती है। मगर यदि हम अपनी निर्बलता का नम्रता कहे जाने वाले हथियार के रूप में इस्तेमाल करें, तब हम आसानी से अहंकार नामक अपने शत्रु को हरा सकते हैं। आइए हम निर्बल होने से हर्षित रहें और लगातार परमेश्वर से मुलाकात करें जो हमारे निर्बल होने के समय हमारे लिए कार्य करते हैं।