यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

“मैं अपनी मां में था”

बच्चे कभी-कभी मजाक से कहते हैं, "मुझे लगता है मेरी मां एक ईश्वर है। चाहे मैंने इसे चोरी-छिपे किया था, फिर भी किसी न किसी तरह वह उसके बारे में जानती है।" वह केवल मेरा खुशी और आनंदित होना ही नहीं, बल्कि वह मेरा बीमार पड़ जाना, अकेला और दुखी होना भी जानती है। यह ऐसा है जैसे कि वह मुझ से भी अधिक मेरे बारे में जानती हो। इतना ही नहीं, वह मृत्यु के जोखिम में भी अपने बच्चों की रक्षा करती है। 27 सप्ताह की आयु का अपरिपक्व शिशु मर गया था लेकिन वह दो घंटे तक उसकी माता की बांहों में रखे जाने से पुनर्जिवित हो गया। चाहे हम इस अंतरराष्ट्रीय खबर का उल्लेख न करें, ऐसी…

पृथ्वी के चारों ओर ढाई बार की यात्रा

‘80 दिन में दुनिया की सैर’ 1873 में प्रकाशित हुआ जूल्स वर्न द्वारा रचा गया एक उपन्यास है। कहानी में, फिलियस फोग नामक लंदन का एक सज्जन 20,000 पाउंड बाजी पर लगाता है कि अस्सी दिनों में पूरी दुनिया की सैर करना संभव है या नहीं। बाजी जीतने के लिए, वह और उसका सेवक पासपार्टू लंदन से आरंभ करके भारत, जापान और अमेरिका से गुजरकर लंदन वापस आने के लिए अस्सी दिन की एक लंबी यात्रा पर निकल जाते हैं। परन्तु, अद्भुत बात यह है कि कहानी में पूरी दुनिया की यात्रा से भी दोगुना से ज्यादा लंबी यात्रा हमारे शरीर में हो रही है। जो यह दिलचस्प यात्रा कर रहा है वह रक्त है। रक्त अस्थि मज्जा में बनाया…

सब्त का दिन

परमेश्वर ने हमें सृष्टिकर्ता परमेश्वर को स्मरण करने का दिन, सब्त का दिन मनाने की आज्ञा दी। यह विश्राम का दिन है, परन्तु सब से बढ़कर परमेश्वर की आकाश और पृथ्वी की सृष्टि को स्मरण करने का दिन है। परमेश्वर ने सब्त के दिन को दूसरे दिन से अलग किया और इसे दस आज्ञाओं में से चौथी आज्ञा के रूप में नियुक्त किया। “तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना।”निर्ग 20:8 परमेश्वर के लोगों को परमेश्वर के इच्छानुसार विश्रामदिन यानी सब्त के दिन को पवित्र मनाना चाहिए। परमेश्वर इसके अनुसार कि वे सब्त का दिन मनाते हैं या नहीं, अपने लोगों को दूसरे लोगों से अलग करते हैं(यहेज 20: 11-17; यश 56: 1-7)। तब सप्ताह का कौन सा…

ओढ़नी

परमेश्वर की सेवा करने वाले संतों के लिए नियमित आराधना मनाते समय उचित वस्त्र पहनना उनका कर्तव्य है। परमेश्वर हमें सिखाते हैं कि हमें पवित्र मन से आराधना की तैयारी करनी चाहिए, और पुरुष को अपना सिर नहीं ढकना चाहिए जबकि स्त्री को अपना सिर ढकना चाहिए। ... हर एक पुरुष का सिर मसीह है और स्त्री का सिर पुरूष है, और मसीह का सिर परमेश्वर है। जो पुरुष सिर ढांके हुए प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है। परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है।1कुर 11:3-5 हमारी आराधना का उद्देश्य परमेश्वर की महिमा को प्रदर्शित करना है।…