यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

क्या सच में आत्मा का अस्तित्व है?

आत्मा धर्म के दायरे से परे लंबे अरसे से लोगों के बीच में चर्चा और बहस का विषय रही है। हाल ही में एक प्रसिद्ध ब्रिटिश भौतिक वैज्ञानिक ने कहा, “मौत के बाद की दुनिया सिर्फ उन लोगों के द्वारा रचित एक परी की कहानी है जो मृत्यु से डरते हैं,” और उसका यह बयान भी विवाद का विषय बन गया। जो सोचते हैं कि मृत्यु के बाद सब कुछ समाप्त हो जाता है, उन लोगों के लिए आत्मा और कुछ नहीं बल्कि मनुष्यों की कल्पना से बनाई गई चीज है। सिर्फ नास्तिक ही नहीं, बल्कि आस्तिक भी जो परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा करते हैं, यह जोर देते हैं कि आत्मा नहीं होती। जैसे 2,000 वर्ष पहले सदूकियों…

युवक अबशालोम के प्रति उदार रहना

दाऊद के पुत्र अबशालोम ने राजद्रोह की साजिश रची; उसने दाऊदपुर ले लिया और हाकिमों के साथ अपने पिता को मारने की योजना बनाई। उस बीच, दाऊद ने राज्य को फिर व्यवस्थित करने के लिए अपने सैनिकों को भेजा। जब सब सैनिक निकलने लगे, दाऊद ने द्वार की बगल में खड़ा रहकर सब प्रधानों को आज्ञा दी, “मेरे लिए यह करो, युवक अबशालोम के प्रति उदार रहना।” एप्रैम नामक वन में हुआ युद्ध भयंकर था। अबशालोम के अनुयायी दाऊद के सैनिकों से बुरी तरह हार गए, और अबशालोम दाऊद के जन योआब के भाले से मारा गया। यह समाचार सुनकर राजा बहुत घबराया। और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा; और चलते चलते यों कहता गया,…

बड़े और सामर्थी लोग

इन दिनों में, नई वाचा के सुसमाचार की ज्योति तेजी से फैल रही है। इस बीच दुष्ट शैतान सुसमाचार के कार्य में बाधा डालने के लिए हर संभव उपाय कर रहा है। दुष्ट आत्माओं के विरुद्ध हमारी लड़ाई में, हम परमेश्वर के सारे हथियार, यानी परमेश्वर के प्रति विश्वास, उद्धार की आशा और अंत तक सत्य की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प करते हुए, और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहनते हुए जीत हासिल कर रहे हैं। यद्यपि हमारा दुश्मन, शैतान हर तरह की बुरी बातों के साथ हमें रोकता है, हम सुसमाचार का प्रचार इस दृढ़ विश्वास के साथ करते हैं कि निश्चित रूप से हम शैतान पर विजय पाएंगे। इसलिए सुसमाचार का कार्य रुकता…

जो मेरा आदर करें मैं उनका आदर करूंगा

इस्राएल में राजा स्थापित होने से पहले, एली एक महायाजक के रूप में इस्राएलियों का नेता था, और होप्नी और पीनहास नामक उसके दो पुत्र थे। दोनों पुत्रों ने भी अपने पिता के साथ याजक का पद पाया था। हालांकि, उन्होंने परमेश्वर को मेलबलि चढ़ाने से पहले ही उसका मांस अपने लिए लिया और परमेश्वर की भेंट का तिरस्कार करने की हिम्मत की। जिन्होंने याजक के पद को भूलकर सब बुरा काम किया उन दोनों पुत्रों की अफवाह पूरे इस्राएल में फैल गई। उसे सुनकर, एली ने अपने पुत्रों से आग्रहपूर्वक कहा कि वे कुकर्म करना बन्द करें, तो भी उन्होंने न तो अपनी गलती के लिए पछतावा किया और न ही अपने कुकर्म से फिरे। तब परमेश्वर के एक…

मनुष्य, मसीह यीशु

आजकल हम जो मसीह का प्रचार कर रहे हैं, प्रथम चर्च के जैसी स्थिति में कभी-कभी पड़ते हैं। आइए हम देखते हैं, मसीह के विषय में जो इस धरती पर शरीर पहन कर आया, प्रथम चर्च के सुसमाचारक कैसे साक्षी देते और सुसमाचार का प्रचार करते थे? और उस समय के धार्मिक नेता किस बात पर अत्याचार करते थे? आइए हम विस्तार से उनके बारे में जांच करें जो स्वर्ग में जाते हैं और जिन्हें नरक जाना पड़ता है। इसके द्वारा हमें अनुग्रहमय विश्वास लेना है ताकि हम परमेश्वर के न्याय करने आते समय उससे प्रशंसा पा सकें। मसीह यीशु मनुष्य था "जो यह चाहता है कि सब लोग उद्धार प्राप्त करें और सत्य को जानें। क्योंकि परमेश्वर एक ही…

एलोहीम परमेश्वर

अपने माता–पिता का पालन करना यह हर एक सन्तान का कर्तव्य होता है। उसी तरह से, मनुष्य का मूलभूत कर्तव्य परमेश्वर को जानना और उनकी आज्ञाओं का पालन करना है। सभी लोगों को इस संसार में ज्योति के रूप में आए परमेश्वर को पहचानना चाहिए। हालांकि, उनके लिए उन्हें पहचानना आसान नहीं है, क्योंकि, शैतान ने, जो “इस संसार का प्रभु” कहलाता है, लोगों के मनों को अंधा कर दिया है, ताकि वे मसीह के महिमा की ज्योति को देख न सकें।(2कुर 4:4) ... आओ, हम ज्ञान ढूंढ़ें, वरन् यहोवा का ज्ञान प्राप्त करने के लिये यत्न भी करें; क्योंकि यहोवा का प्रगट होना भोर का निश्चित है; वह वर्षा के समान हमारे ऊपर आएगा, वरन् बरसात के अन्त की…

एक ही बात आवश्यक है

मार्था नामक एक स्त्री ने यीशु को अपने घर में आमंत्रित किया। यीशु वचन सिखाने लगे, तब मार्था की बहन मरियम प्रभु के चरणों में बैठ​कर, जो कुछ वह कह रहे थे उसे सुन रही थी। मार्था को उनकी सेवा करने के लिए बहुत कुछ तैयारी करनी थी, और उसका मन व्यस्त हो गया। इसलिए वह यीशु के पास आकर कहने लगी। “हे प्रभु, क्या आपको कुछ भी चिन्ता नहीं कि मेरी बहन ने मुझे सेवा करने के लिए अकेली ही छोड़ दिया है? उससे कह दीजिए कि वह मेरी सहायता करे।” तब यीशु ने कहा। “हे मार्था, तू बहुत सी बातों के लिए चिंतित और व्याकुल रहती है। लेकिन बस एक ही बात आवश्यक है। मरियम ने उसी उत्तम…

यीशु ने क्रूस पर निश्चित रूप से कहा, “पूरा हुआ।” अगर ऐसा हो, तो हमें अब से सब्त का दिन और फसह का पर्व जैसे किसी भी नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है, है न?

यीशु ने क्रूस पर मृत्यु होने से पहले कहा, “पूरा हुआ।”(यूहन्ना 19:30) क्या इस शब्द का अर्थ यह होता है कि हमें कुछ भी करने की जरूरत नहीं है? यीशु के शब्द का अर्थ होता है कि वह कार्य पूरा हुआ, जो “हमें” नहीं, लेकिन “यीशु” को प्रथम आगमन के समय पृथ्वी पर पूरा करना चाहिए था। अगर हम इस पर अध्ययन करें कि यीशु ने क्या पूरा किया, तो हम समझ सकते हैं कि परमेश्वर के लोगों को और अधिक पवित्रता से सब्त और फसह जैसे परमेश्वर के नियमों का पालन करना चाहिए। बहुतों की छुड़ौती के लिए यीशु बलिदान हो गए जो यीशु को इस पृथ्वी पर करने चाहिए थे, उन महत्वपूर्ण कार्यों में से एक यह था…

पुराने नियम में एक बार भी “यीशु” नाम नहीं पाया गया है। तब, यीशु के चेले कैसे उन्हें मसीह के रूप में पहचान पाए और उन पर विश्वास कर सके?

पुराने नियम में एक भी ऐसा वचन नहीं था कि आनेवाले मसीह का नाम “यीशु” है। यदि “यीशु” नाम की भविष्यवाणी की भी गई होती, हम इस बात से सहमत नहीं हो सकते कि एक मनुष्य मसीह है क्योंकि उसका नाम यीशु है; यह इसलिए है, क्योंकि “यीशु” नाम यहूदियों के बीच आम था।(कुल 4:11) इस कारण, यीशु का नाम एक निश्चित आधार नहीं है जिसके माध्यम से हम विश्वास कर सकते हैं कि यीशु मसीह हैं। सबसे ठोस सबूत वे कार्य हैं जिन्हें यीशु ने मसीह के बारे में पुराने नियम की भविष्यवाणियों के अनुसार पूरा किया। इसके लिए, यीशु ने कहा कि वह “बाइबल(पवित्रशास्त्र)” ही है जो मसीह की गवाही देती है। तुम पवित्रशास्त्र में ढूंढ़ते हो, क्योंकि…

शैतान की निन्दा और परमेश्वर की विजय

अब, सुसमाचार पूरे संसार में, पूर्व से पश्चिम तक प्रचार किया जा रहा है। परमेश्वर का कार्य नियत समय आने पर शीघ्रता से पूरा हो जाएगा। जैसे जैसे समय निकट आता जा रहा है, शैतान और भी उग्रतापूर्वक हमारी निन्दा कर रहा है। हम, परमेश्वर की सन्तानों को जो पहले नहीं सहे उन परीक्षणों, परेशानियों, सतावों और प्रलोभनों को सहना पड़ सकता है। आइए हम, बाइबल के द्वारा यह देखें कि शैतान परमेश्वर के सत्य की कैसे निन्दा करता है, और परमेश्वर कैसे अन्त में उस पर विजय पाते हैं,(प्रक 18) ताकि हम भी खुशी के साथ विश्वास में दृढ़ता से खड़े रहते हुए, उस पर विजय पा सकें। बाइबल भविष्यवाणी करती है कि परमेश्वर शैतान के प्रतिरोध पर विजय…

तेरा विश्वास बड़ा है

जब यीशु सूर और सैदा के प्रदेश में आया, एक अन्यजाति स्त्री यीशु के पांवों के पास गिरी और ऊंची आवाज से चिल्लाकर कहा। “हे प्रभु! दाऊद की सन्तान, मुझ पर दया कीजिए! मेरी बेटी को दुष्टात्मा बहुत सता रहा है। दुष्टात्मा को बाहर निकाल दीजिए।” यीशु ने उससे एक शब्द भी नहीं कहा। जब चेलों ने आकर उनसे स्त्री को विदा करने के लिए विनती की, तब यीशु ने अपना मुंह खोला और जवाब दिया। “मैं केवल इस्राएल के लोगों के लिए जो खोई हुई भेड़ों के समान हैं, भेजा गया।” तब उस स्त्री ने फिर से यीशु के सामने झुककर विनती की। लेकिन, यीशु ने दृढ़ता से कहा। “लड़कों की रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना उचित नहीं।”…

परमेश्वर का शरीर में आने का कारण

आजकल यीशु के पवित्र चित्र में, जो यीशु का चित्रण करता है, यीशु की आकृति, जिसकी कल्पना लोग करते हैं, अति पवित्र और ईश्वरीय दिखती है। लेकिन जब यीशु आया, उस समय के लोग ‘यीशु को कैसा समझते थे?’, ‘जिस चर्च को यीशु ने स्थापित किया उसे कैसे देखते थे?”, और “स्वर्ग के सुसमाचार को जिसे यीशु ने सुनाया उसे कैसे सोचते थे?” जब तक हम इसे न जाने तब तक हम मसीह को नहीं जान सकते। मसीह मूल रूप से परमेश्वर का स्वरूप था, और वह बालक रूप में पैदा होने से पहले सर्वशक्तिमान पिता परमेश्वर था।(फिलि 2:5, यश 9:6 संदर्भ) लेकिन जब यीशु ने कहा, “मैं और पिता एक हैं।”, यहूदियों ने उस पर पथराव करने के लिए…

हम पवित्र आत्मा को “परमेश्वर” कहते हैं, और हम यह भी कहते हैं कि हम पर्व के दौरान पवित्र आत्मा पाते हैं। हम कैसे पवित्र आत्मा की परिभाषा कर सकते हैं?

बाइबल में कई उदाहरण हैं कि एक ही शब्द का अलग–अलग अर्थों में इस्तेमाल होता है। उदाहरण के लिए, जब हम नए नियम में शब्द “व्यवस्था” को देखते हैं, व्यवस्था मूल रूप में दस आज्ञाओं को, जो मूसा के समय में दी गई थीं, या उनसे संबंधित विस्तृत व्याख्याओं को संकेत करती है।(रो 7:7; याक 2:11; यूह 8:5, 17) लेकिन, कभी–कभी वह व्यवस्थाओं सहित पंचग्रंथ या संपूर्ण पुराने नियम को भी संकेत करती है।(गल 4:21; लूक 24:44; यूह 12:34) बेशक, वे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन विस्तार से कहा जाए तो उनके अर्थ अलग होते हैं। शब्द “पवित्र आत्मा” के साथ भी ऐसा ही है। मूल रूप से, पवित्र आत्मा उन परमेश्वर को संकेत करता है जिनके पास…

दासों की मानसिकता और पुत्रों की मानसिकता

हम ऐसे सेवक हैं जिन्हें परमेश्वर ने योग्य ठहराकर सुसमाचार का कार्य सौंपा है, और हम परमेश्वर के महान मिशन में भाग ले रहे हैं। फिर, सुसमाचार के कार्य के प्रति हमारा रवैया कैसा है? यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। हम आत्मिक लवनेवालों के रूप में जो सुसमाचार के बीज फैलाते हैं और गेहूं इकट्ठे करते हैं, हमारे पास कौन सी मानसिकता है, दासों की मानसिकता या पुत्रों की मानसिकता? क्या हम सिर्फ आंगनों पर चलते हुए दासों की मानसिकता के साथ काम नहीं कर रहे हैं? दासों की मानसिकता और पुत्रों की मानसिकता में बड़ा अंतर है। पुत्र की मानसिकता वाला मनुष्य परमेश्वर के साथ दुख उठाता है कि उनके साथ महिमा भी पाए आइए हम ऐसा मानें…

रहब और अजगर

... क्या तू वही नहीं है जिसने रहब को टुकड़े टुकड़े किया था, जिसने अजगर को छेदा? क्या तू वही नहीं जिस ने समुद्र को अर्थात् गहिरे सागर के जल को सुखा डाला और उसकी गहराई में अपने छुड़ाए हुओं के लिए पार जाने का मार्ग निकाला था? यश 51:9 आइए हम अजगर और रहब के बारे में अध्ययन करें, जिन्हें परमेश्वर ने अतीत में टुकड़े टुकड़े किया था और अंतिम दिन में भी टुकड़े टुकड़े करेंगे। “रहब,” जो यशायाह 51:9 में प्रकट होता है, वह राहब(רחב) वेश्या नहीं है जिसने उन दो भेदियों को छिपाया था जिन्हें यहोशू ने कनान देश का भेद लेने के लिए भेजा था। एक इब्रानी नाम, “रहब(רהב)” एक पौराणिक कथा में एक समुद्री राक्षस…

कृतज्ञता के द्वारा सुसमाचार का चमत्कारकृतज्ञता के द्वारा सुसमाचार का चमत्कार

“आपका धन्यवाद!” यह शायद एक शिष्टाचार है जो लोग आमतौर पर तब कहते हैं जब हम उनके स्टोर से कुछ खरीदते हैं। फिर भी, जब भी हम ऐसा सुनते हैं, तो हमें अच्छा लगता है और यदि हमें कुछ खरीदना होता है, तो हम दोबारा उस दुकान पर जाने की इच्छा रखते हैं। जब हम दूसरों से ऐसा कहते हैं, तब भी हम वैसा ही महसूस करते हैं; जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं जिसने हमारी मदद की है या हमारे लिए कुछ अच्छा किया है, तो हमें भी अच्छा महसूस होता है। ऐसा कहा जाता है कि हमारे दैनिक जीवन में सरल कृतज्ञता के अभ्यास हमारे भीतर असीम क्षमता विकसित करने का स्रोत…

जीवित रहने के लिए अनुकूलित मानव इंद्रियां

सुपरमैन, हमारा सुपरहीरो जिसे हमने बचपन में फिल्मों में देखा था! उसके पास अलौकिक शक्ति है। वह न केवल आकाश में स्वतंत्र रूप से उड़ सकता है, बल्कि एक हाथ से कार उठा सकता है, दूर की वस्तुएं स्पष्ट रूप से देख सकता है और यहां तक कि बहुत दूर की सूक्ष्म ध्वनियां भी सुन सकता है; ये वे शक्तियां हैं जो मनुष्यों के पास नहीं हो सकतीं। इसी कारण, सुपरमैन बच्चों के लिए ईर्ष्या का पात्र है। फिर अगर हमें सुपरमैन जैसी विशेष शक्ति मिल जाए तो क्या होगा? बाहरी उत्तेजनाओं के लिए उचित प्रतिक्रिया मनुष्य इंद्रियों के माध्यम से पर्यावरण से आने वाले विभिन्न संकेतों और सूचनाओं को स्वीकार करता है। इसके बाद मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग…

मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियां दूंगा

यीशु ने कैसरिया फिलिप्पी के प्रदेश में आकर अपने चेलों से पूछा, "लोग मुझे क्या कहते हैं?" "कुछ तो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला कहते हैं, और कुछ एलिय्याह!" "कुछ यिर्मयाह या भविष्यद्वक्‍ताओं में से कोई एक कहते हैं!” चेलों के जवाब पर, यीशु ने उन्हें फिर से पूछा, "परन्तु तुम्हारे बारे में क्या? तुम मुझे क्या कहते हो?” पतरस आत्मविश्वास से भरी आवाज में जवाब देता है। "आप जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह हैं।" "पतरस, तू धन्य है; क्योंकि मेरे पिता ने जो स्वर्ग में हैं, यह बात तुझ पर प्रगट की है।" यीशु ने पतरस को विशेष अनुग्रह दिया जिसने उन्हें परमेश्वर के रूप में पहचाना। "तू पतरस(पत्थर) है। मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा, और अधोलोक के फाटक…

प्रभु! मैं एक पापी मनुष्य हूं!

हमने स्वर्ग में पाप किया, और हम इस शरणनगर, पृथ्वी पर निकाल दिए गए थे। यह बहुत स्वाभाविक है कि हम अपने निज देश की अभिलाषा करते हैं। हम सभी उत्साह से स्वर्ग में वापस जाने की इच्छा रखते हैं, पर हम आसानी से भूल जाते हैं कि हम पापी हैं। अब आइए हम देखें कि हम पापियों का, जिन्हें पश्चाताप करने की जरूरत है, कर्तव्य क्या है, ताकि हम स्वर्ग के राज्य में लौट सकें। पापी होने की पहचान और बोध होना आवश्यक है बहुत से लोग खुद के बारे में नहीं जानते। हम भी नहीं जानते थे कि हम कौन हैं: पृथ्वी पर हमारे आने की वजह क्या था? क्यों हम अपने 70 या 80 वर्षों के जीवनकाल…

आज चर्च यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं। लेकिन 2,000 वर्ष पहले जब यीशु आए, तब क्यों लोगों ने यीशु पर विश्वास नहीं किया और उन्हें क्रूस पर चढ़ा दिया?

इसके अनेक कारण थे; 2,000 वर्ष पहले यहूदियों के यीशु को अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में सबसे बड़ा कारण यह था कि उन्होंने बाइबल की भविष्यवाणियों पर विश्वास नहीं किया(यूह 5:46–47)। यीशु ने कहा कि वह जो उनके मसीह होने की गवाही देता है, बाइबल है। और जिस दिन उनका पुनरुत्थान हुआ, उस दिन भी उन्होंने अपने चेलों को, जिन्हें यकीन नहीं था कि वह मसीह हैं, बाइबल के द्वारा अपने बारे में गवाही देकर उनके हृदयों में दृढ़ विश्वास प्रदान किया(यूह 5:39; लूक 24:25–27, 32)। इसी कारण प्रेरितों ने भी बाइबल के द्वारा गवाही दी कि यीशु मसीह हैं(प्रे 17:2)। यहूदी लोग बाइबल की भविष्यवाणियों को न तो जानते थे और न ही उन पर विश्वास करते थे।…

आज चर्च यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं। लेकिन 2,000 वर्ष पहले जब यीशु आए, तब क्यों लोगों ने यीशु पर विश्वास नहीं किया और उन्हें क्रूस पर चढ़ा दिया?

33:07
0:00 33:07

प्लेबैक गति

1x

यह आवाज़ AI द्वारा उत्पन्न है। कुछ भिन्नताएँ हो सकती हैं।