यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

विश्वास के पूर्वज जो परीक्षा पर विजयी हुए

शैतान ने सृष्टि के समय से ही सभी प्रकार की दुष्ट योजनाओं से परमेश्वर की संतानों को लुभाया। हमें अनन्त स्वर्ग के राज्य की ओर बढ़ने के लिए शैतान के सभी प्रलोभनों पर विजयी होना चाहिए। विश्वास के पूर्वजों के कई अभिलेख हैं, जो शैतान के प्रलोभन पर विजयी होकर आशीषित किए गए थे। आइए हम उनके कामों के द्वारा विश्वास के रवैए के बारे में अध्ययन करें जो हमारे पास प्रलोभन पर जय पाने के लिए होना चाहिए। 1. यीशु चालीस दिन और चालीस रात भूखे रहने के बाद, यीशु को शैतान के द्वारा परखा गया। यह दिखाता है कि जब हम यीशु पर विश्वास करेंगे और उनका पालन करेंगे, तब हम भी ऐसे ढंग से परखे जाएंगे। पहले…

शैतान की परीक्षा और विजय

शैतान आत्मिक दुनिया में हमारे विश्वास को कमजोर करता है, और भौतिक चीजें, यश, माता-पिता, सन्तान, झगड़ा, घृणा, शक्ति, पैसा, प्रेम, ईर्ष्या, डाह, प्रतिष्ठा इत्यादि जैसी सांसारिक बातों के द्वारा, हमें नाश और पतन की ओर ले जाता है, ताकि हम पीछे हटें और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न कर सकें। हमें शैतान की ऐसी परीक्षाओं पर विजय पानी चाहिए। 1. शैतान कैसे हमें परीक्षा देता है? जब हम गरीब होते हैं, शैतान भौतिक चीजों के द्वारा परीक्षा करता है। वह हमें परमेश्वर के प्रयोजन पर संदेह कराने के द्वारा परीक्षा करता है। वह हमें इस संसार की महिमा और धन-सम्पत्ति को दिखाने के द्वारा और हमारे मन में परमेश्वर के प्रति विश्वास पैदा करने के बजाय सांसारिक चीजों…

क्यों हमें सिय्योन में इकट्ठा होने के लिए प्रयास करना चाहिए

जैसे माता-पिता तब खुश होते हैं जब उनकी संतान इकट्ठी होती हैं, ठीक वैसे ही परमेश्वर चाहते हैं कि उनके लोग इकट्ठे हों, और वह उन्हें आशीष देते हैं जब वे इकट्ठे होते हैं। "फिर मैं तुम से कहता हूं, यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिए एक मन होकर उसे मांगें, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्वर्ग में है, उनके लिए हो जाएगी। क्योंकि जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठा होते हैं, वहां मैं उनके बीच में होता हूं।" मत 18:19-20 परमेश्वर का वचन, "जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठा होते हैं, वहां मैं उनके बीच में होता हूं,” इसका मतलब यह नहीं है कि जब हम…

प्रार्थना के विषय क्या होने चाहिए?

परमेश्वर की सहायता के बिना हम कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। परमेश्‍वर इंतजार करते हैं कि हम उनसे मदद मांगें(मत 7:7-8), और अदृश्य रूप से हमारी प्रार्थनाओं पर कान लगाते हैं। इसलिए, हमें निरंतर प्रार्थना में लगे रहने का प्रयास करना चाहिए(1थिस 5:17)। प्रार्थना के विषय क्या होने चाहिए? आप पहले परमेश्वर के राज्य और उनकी धार्मिकता की खोज करें(मत 6:25-34)। सम्पूर्ण बुद्धि के लिए प्रार्थना करें(याक 1:5)। प्रार्थना करें कि आप परीक्षा में न पड़ें।(लूक 22:40)। प्रार्थना करें कि आप पर पवित्र आत्मा उंडेल दें(लूक 11:13)। प्रार्थना करें कि वचन सुनाने का द्वार खोल दें(कुल 4:2-6)। प्रार्थना करें कि आप साहस से सुसमाचार के रहस्य को प्रकट कर सकें(इफ 6:18-19)। प्रार्थना करें कि आप पूर्ण विश्वास के साथ…

हमें कब प्रार्थना करनी चाहिए?

बाइबल में लिखा है कि विश्वास के पुर्वजों ने प्रार्थना के द्वारा कठिनाइयों पर जय पाने के बाद आशीष प्राप्त की। यीशु, जो उद्धारकर्ता के रूप में पृथ्वी पर आए, उन्होंने भी प्रार्थना के द्वारा सुसमाचार का कार्य किया। ईसाइयों के जीवन में प्रार्थना आवश्यक है; यह परमेश्वर और हमारे बीच की एक कड़ी है। यदि हम अपनी इच्छाएं और आशाएं परमेश्वर को बताना चाहते हैं, तो हमें प्रार्थना करनी चाहिए। तब, हमें परमेश्वर से कब प्रार्थना करनी चाहिए? 1) हमें लगातार प्रार्थना में बने रहना चाहिए हमें, जो कुछ भी करते हैं उसकी शुरुआत, प्रार्थना से करनी चाहिए, और उसे प्रार्थना से आगे बढ़ाना चाहिए और उसे प्रार्थना से समाप्त करना चाहिए, ताकि हम इस वचन को, “निरन्तर प्रार्थना…

आराधकों के रवैए

आराधकों को परमेश्वर के प्रति आदर व्यक्त करने का रवैया होना चाहिए। यदि हम एक राजा से मिलने वाले हैं, तो हम उस बैठक की तैयारी करने की पूरी कोशिश करेंगे। तो ब्रह्माण्ड के सृष्टिकर्ता, परमेश्वर से मिलने के लिए हमें कितना अधिक तैयारी करनी चाहिए। पहले, हमें आराधना का महत्व और उसकी आशीष के बारे में महसूस करना चाहिए और आराधना को संसार की किसी भी चीज से ज्यादा महत्व देना चाहिए और धन्यवादी मन के साथ आराधना में भाग लेना चाहिए। हमें दूसरों के विश्वास से नहीं, बल्कि अपने विश्वास से आराधना में भाग लेना है। और, पवित्र और अनुग्रहपूर्ण ढंग से आराधना करने के लिए हमारे पास आराधना के लिए तैयारी करने की मानसिकता होनी है। आइए…

आराधना का क्रम

प्रत्येक विधि एक नियत क्रम में संचालित की जाती है। उसी तरह, परमेश्वर की आराधना करने का एक क्रम है। हर स्थानीय चर्च की विशेष परिस्थिति के अनुसार आराधना का कुछ अलग सा क्रम हो सकता है। आराधना का सामान्य क्रम निम्म लिखित है: 1) शांत प्रार्थना हम अपनी आंखें बंद करते हुए, पवित्र मन के साथ परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं(भज 143:5); यह खामोशी से की जाती है। 2) प्रशंसा हम नए गीत के साथ परमेश्वर को धन्यवाद और महिमा देते हैं(प्रक 5:13); इस समय हम खड़े होकर गीत गाते हैं। 3) प्रार्थना धन्यवाद, महिमा, पश्चात्ताप और आशाओं के क्रम से प्रार्थना की जाती है। आम तौर पर उपदेशक प्रार्थना करता है।(इस समय भी सब सदस्य खड़े होते हैं)…

आराधना के बारे में

आराधना स्वयं को दीन बनाते हुए और उन परमेश्वर को प्रार्थना और प्रशंसा के साथ महिमा और धन्यवाद देते हुए हमारे आदर की भावना व्यक्त करने की एक विधि है, जो हम मरणाधीन मानव जाति को स्वर्ग के राज्य में ले जाने के लिए अनंत जीवन, उद्धार और पापों की क्षमा देते हैं। तब, हमें किस दिन परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए? वे दिन जो हमें परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए, इस प्रकार है: पहले, हमें सब्त के दिन परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए। सब्त का दिन सृष्टिकर्ता परमेश्वर की सामर्थ्य को स्मरण करने का दिन है। सब्त का दिन मनाने के द्वारा, हम पुष्टि करते हैं कि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की, और हम इस दिन…

आराधना के उद्देश्य

हम मूल रूप से स्वर्ग के पापी हैं। हमारे परमेश्वर की आराधना करने का उद्देश्य क्या है? पहला, परमेश्वर के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए जो उपासना का विषय बन जाता है, वह परमेश्वर है, जिन्होंने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की, मनुष्यों को जीवन का श्वास दिया, हमें पापों से बचाया और सत्य के वचनों के द्वारा हम से स्वर्ग का राज्य देने का वादा किया। परमेश्वर में, जिन्होंने सब कुछ बनाया, किसी चीज का अभाव नहीं है। फिर भी, उन्होंने हमें आज्ञा दी है कि हम उनकी आराधना करें। यह इसलिए नहीं है कि वह हमें अपनी सेवा करवाना चाहते हैं, बल्कि इसलिए है कि वह हम, आराधकों को बहुतायत से आशीष और स्वर्ग के राज्य के…

सब्त का दिन

परमेश्वर ने हमें सृष्टिकर्ता परमेश्वर को स्मरण करने का दिन, सब्त का दिन मनाने की आज्ञा दी। यह विश्राम का दिन है, परन्तु सब से बढ़कर परमेश्वर की आकाश और पृथ्वी की सृष्टि को स्मरण करने का दिन है। परमेश्वर ने सब्त के दिन को दूसरे दिन से अलग किया और इसे दस आज्ञाओं में से चौथी आज्ञा के रूप में नियुक्त किया। “तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना।”निर्ग 20:8 परमेश्वर के लोगों को परमेश्वर के इच्छानुसार विश्रामदिन यानी सब्त के दिन को पवित्र मनाना चाहिए। परमेश्वर इसके अनुसार कि वे सब्त का दिन मनाते हैं या नहीं, अपने लोगों को दूसरे लोगों से अलग करते हैं(यहेज 20: 11-17; यश 56: 1-7)। तब सप्ताह का कौन सा…

ओढ़नी

परमेश्वर की सेवा करने वाले संतों के लिए नियमित आराधना मनाते समय उचित वस्त्र पहनना उनका कर्तव्य है। परमेश्वर हमें सिखाते हैं कि हमें पवित्र मन से आराधना की तैयारी करनी चाहिए, और पुरुष को अपना सिर नहीं ढकना चाहिए जबकि स्त्री को अपना सिर ढकना चाहिए। ... हर एक पुरुष का सिर मसीह है और स्त्री का सिर पुरूष है, और मसीह का सिर परमेश्वर है। जो पुरुष सिर ढांके हुए प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करता है, वह अपने सिर का अपमान करता है। परन्तु जो स्त्री उघाड़े सिर प्रार्थना या भविष्यद्वाणी करती है, वह अपने सिर का अपमान करती है, क्योंकि वह मुण्डी होने के बराबर है।1कुर 11:3-5 हमारी आराधना का उद्देश्य परमेश्वर की महिमा को प्रदर्शित करना है।…