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प्रार्थना क्या है?

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प्रार्थना परमेश्वर से आशीष मांगने की एक विधि है। प्रार्थना में हम सिर्फ आशीष नहीं, बल्कि जब हमारे सामने कठिनाइयां आती हैं, सहायता भी मांगते हैं।

दूसरों से सहायता लिए बिना, हमारे लिए इस संसार में जीवन जीना मुश्किल है। क्योंकि हमारी क्षमता सीमित है। उसी तरह से हम परमेश्वर से सहायता लिए बिना नहीं जी सकते। इसलिए हमें उन परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए जो हमारी कमजोरी के बारे में जानते हैं और हमारी सहायता करते हैं।

मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा, ढूंढ़ो तो तुम पाओगे, खटखटाओ तो तुम्हारे लिए खोला जाएगा। क्योंकि प्रत्येक जो मांगता है उसे मिलता है, और जो ढूंढ़ता है वह पाता है, और जो खटखटाता है उसके लिए खोला जाएगा। मत 7:7–8

इन वचनों के द्वारा, परमेश्वर ने हमसे वादा किया है कि सब कुछ तभी पूरा होगा जब हम इसके लिए प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना की सामर्थ्य असीमित है, और यह शून्य से किसी चीज की सृष्टि करने की सामर्थ्य रखती है। इसलिए हमें परमेश्वर से सहायता पाने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्‍वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्भाले रहूंगा। यश 41:10

तब, आइए हम और विस्तार से देखें कि प्रार्थना क्या है।

पहला, प्रार्थना आत्मा का सांस लेना है

सभी मनुष्य सांस लेने के द्वारा जिन्दा रह सकते हैं। उसी तरह से सदस्यों की आत्माएं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, प्रार्थना करने के द्वारा जिन्दा रह सकती हैं।

दूसरा, प्रार्थना परमेश्वर और हमारे बीच बातचीत है

परमेश्वर हमारी आत्माओं के पिता हैं, और हम उनकी संतान हैं। इसलिए, हम प्रार्थना के द्वारा कभी खुशी की बातें और कभी दुख की बातें करते हुए परमेश्वर से बातचीत करते हैं।

तीसरा, प्रार्थना परमेश्वर को टेलीफोन करके बताने जैसा है

जब कभी दिन–रात हम प्रार्थना करते हैं, हमारी प्रार्थनाएं परमेश्वर के पास सीधे पहुंचती हैं जो हमेशा हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं।

हमारे विश्वास के जीवन में ऐसी बहुत सी बातें हैं जो हमें मांगनी चाहिए, ढूंढ़नी चाहिए और खटखटानी चाहिए। जब हम हर पल मांगते, ढूंढ़ते और खटखटाते हैं, तब परमेश्वर हमारी अभिलाषाओं को पूरा करेंगे।

पुनर्विचार के लिए प्रश्न
जब हम उस मुश्किल स्थितियों का सामना करते हैं जिसे हम अकेले संभाल नहीं सकते, तब हमें क्या करना चाहिए?
प्रार्थना क्या है? (कृपया तीन बातों के साथ विस्तार से जवाब दीजिए)