यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

हमें परमेश्वर का प्रेम जानने दे

परमेश्वर हमें विविध आज्ञाएं देता है और हमें कहता है कि इसका पालन करें। यह न तो परमेश्वर अपने लिए है और न ही कट्टर तरीके से हमारी आज़ादी को बाधित करने के लिए है। परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना, भाई और बहनों को प्रेम देना, प्रचार करना ... आदि, इन में कुछ भी नहीं है जो प्रेम के आधारित नहीं है। परमेश्वर के सभी वचन के पीछे परमेश्वर का अदृश्य प्रेम होता है। परमेश्वर जो पापी सन्तानों को बचाने के लिए आया परमेश्वर के प्रेम को थोड़ा सा समझने के लिए, सब से पहले हमें आत्मा के विषय में जानना चाहिए। यदि हम आत्मा के सिद्धांत को न समझ लें, तो हम यह नहीं जान सकते कि मानव…

चांदी का मैल दूर करो

जैसे–जैसे हम दिन प्रतिदिन ज़िन्दगी जी रहे हैं, परमेश्वर का राज्य अधिक पास आ रहा है। स्वर्ग दिन प्रतिदिन पास आ रहा है, फिर भी, यदि अभी तक हमारे अन्दर गन्दगी फैली हुई है, तो हम ऐसी अपवित्र आत्मा के साथ परमेश्वर के राज्य में कभी प्रवेश नहीं कर सकेंगे। जैसा परमेश्वर पवित्र है, वैसे परमेश्वर के लोग भी पवित्र हैं।(1पत 1:15–16; 2:9 संदर्भ) स्वर्गीय पिता और माता के अनन्त राज्य में जाने के लिए, हमें अपने अन्दर उस गन्दगी को दूर करना चाहिए जिससे परमेश्वर प्रसन्न नहीं होता। जैसे ही हम अपने अन्दर जमी हुई सारी गन्दगियों को हटाएंगे, तभी हम स्वर्ग से आत्मिक अनुग्रह और कृपा पाकर, स्वर्ग के राज्य में वापस जाएंगे। चांदी का मैल दूर कर…

वचन के करीब रहो

बाइबल में अगर हम विश्वास के उन पूर्वजों के जीवन को देखें, जिनसे परमेश्वर ने प्रेम किया और जिन्होंने उद्धार पाया, तो हम जान सकेंगे कि उनमें एक समानता थी और वह यह थी कि वे हमेशा परमेश्वर के वचन के करीब रहे और उन्होंने उसके वचन को संपूर्ण माना। उनकी तरह, हमें भी वचन के करीब रहना चाहिए ताकि हम अनन्त स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकें। मनुष्य अपने करीबी लोगों से प्रभावित होता है। अगर कोई एयरकंडिशनर के नजदीक रहे, तो उससे ठंडी हवा दी जाती है, और अगर वह हीटर के नजदीक रहे, तो उससे गर्म हवा दी जाती है। उसी तरह से, अगर कोई परमेश्वर के नजदीक रहे, तो उससे परमेश्वर की जीवन की ऊर्जा…

संसार को बचाने वाले मनुष्य बनो

हम कैसे एक योग्य और मूल्यवान जीवन जी सकते हैं? बहुत से दार्शनिकों ने स्वार्थ केन्द्रित और अहं केन्द्रित जीवन जीने के बजाय, मानवजाति की भलाई के लिए सहकारी जीवन जीने के बारे में ज्यादा सोचा है। मोंटेसक्यू नामक 18वीं सदी के एक फ्रांसीसी दार्शनिक ने ये मशहूर शब्द कहे: “यदि मैं ऐसी किसी चीज को जानता जो मेरे लिए लाभकारी है लेकिन मेरे परिवार के लिए हानिकारक है, तो मैं अपने विचार से उसे निकालता। यदि मैं ऐसी किसी चीज को जानता जो मेरे परिवार के लिए फायदेमंद है लेकिन मेरे देश के लिए नुकसानदेह है, तो मैं उसे भूल जाने की कोशिश करता। और यदि मैं ऐसी किसी चीज को जानता जो मेरे देश के लिए फलप्रद है…

एक मनुष्य की आज्ञाकारिता और एक मनुष्य का आज्ञा–उल्लंघन

परमेश्वर के अनन्त राज्य में पहुंचने के लिए, हमें हमेशा अपने विश्वास को मज़बूत करना चाहिए, और अपने जीवन में स्वर्गीय पिता और माता की इच्छा को हमेशा पहला स्थान देना चाहिए। यदि हमने परमेश्वर के वचनों में से कोई वचन अब तक, न माना हो, तो पछताकर पूरी तरह से आज्ञाकारी रहना है। सिय्योन में प्रत्येक व्यक्ति, जो इस युग में सुसमाचार का नबी है, अधिक महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से, परमेश्वर के सुसमाचार के कार्य में बाधाएं डाली जा सकती हैं, और एक मनुष्य के आज्ञा मानने से, परमेश्वर की आशीष और अनुग्रह के द्वारा सुसमाचार के कार्य में तेज़ी लायी जा सकती है। आदम का आज्ञा–उल्लंघन बाइबल में इसका ठोस उदाहरण…

परमेश्वर से नम्रता सीखें

बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, बहुत से लोग सिय्योन में इकट्ठे हो रहे हैं। उनमें से कुछ सदस्य अपने पापी स्वभाव व बुरी आदत को त्याग कर, स्वर्ग का ईश्वरीय स्वभाव धारण किए हुए हैं और अपने जीवन को परिवर्तित करने का प्रयास कर रहे हैं। और कुछ सदस्य अभी तक अपने पापों की गन्दगी को, जो संसार से जमी हुई थी, नहीं निकाल पाए हैं। इसलिए हमें, जो पहले बुलाए गए हैं, उन सदस्यों के प्रति, जो सत्य में आए हैं लेकिन जिन्हें स्वभाव को सुधारना है, अनुग्रहकारी बात व स्वभाव का अच्छा आदर्श बनना चाहिए। सिय्योन की सन्तान के जो आवश्यक प्रेम के गुण हैं, उनमें से नम्रता के बारे में परमेश्वर के वचन के द्वारा सीखेंगे जो…

बन्धुआई से लौटे हुए सब लोगों ने झोपड़ियों का पर्व मनाया

सम्बल्लत और तोबियाह के रुकावट के बावजूद, इस्राएलियों ने एक हाथ में हथियार पकड़कर दूसरे हाथ से मंदिर बनाने का काम करते हुए आखिरकार यरूशलेम मंदिर के निर्माण कार्य को पूरा किया। जब सातवां महीना आया, खुशी से भरे हुए लोग एक मन होकर, भोर के समय से जलफाटक के सामने वाले चौक में इकट्ठे हुए, और उन्होंने एज्रा शास्त्री को व्यवस्था की पुस्तक ले आने को कहा। एज्रा ने बड़ी आवाज से व्यवस्था के वचन को पढ़ा। तब लोग उसे सुनकर और समझकर रोते रहे। उसके बाद जब घराने के मुख्य-मुख्य पुरुष, याजक और लेवीय लोगों ने व्यवस्था की पुस्तक के अनुसार झोपड़ियों के पर्व को मनाने की घोषणा की, तब लोगों ने डालियां ले आकर झोपड़ियां बनाईं और…

यहोवा का सन्दूक

बाइबल पुराने नियम और नए नियम से, अर्थात् पुरानी वाचा और नई वाचा से, जो परमेश्वर ने मानव को दीं, बनी है। पुराने नियम, यानी पुरानी वाचा के केंद्र में पवित्रस्थान था। और परम पवित्रस्थान में, जो पवित्रस्थान में सब से महत्वपूर्ण स्थान था, वाचा का सन्दूक था। वाचा के सन्दूक में पत्थर की पटियाएं रखी थीं, जिस पर दस आज्ञाएं लिखी हुई थीं। परमेश्वर की व्यवस्था रखी जाने से यह व्यवस्था का सन्दूक कहलाता था, और परमेश्वर की साक्षी रखी जाने से यह साक्षीपत्र का सन्दूक कहलाता था। सामान्यत: यह पवित्र सन्दूक कहलाया जाता है। पुराने नियम के इतिहास में वाचा के सन्दूक के मुताबिक अनेक घटनाएं लिखी हैं। ये वाचा के सन्दूक के महत्व के बारे में जानकारी…

परीक्षा पर जय पाओ

हम जो स्वर्ग की ओर विश्वास के द्वारा दौड़ रहे हैं, हमारे सामने कभी न कभी परीक्षाएं और बाधाएं आती हैं। जब हम इस परीक्षा पर विजयी होते हैं, तभी आत्मिक कनान, स्वर्ग तक सुरक्षित रूप से जा सकते हैं। लेकिन परीक्षा को न सह कर बीच में अपनी दौड़ को रोकें, तो स्वर्ग हम से दूर हो जाएगा। हमारे अपने विश्वास को मजबूत करना और बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। लेकिन इससे ज्यादा यह जरूरी होता है कि परीक्षा पर विजयी होने की दृढ़ इच्छा रखकर अनन्त स्वर्ग तक लगातार दौड़ें। जब कोई मसीही जीवन शुरू करता है, उसी समय से उस पर परीक्षा आती है, और स्वर्ग जितना हमारे पास आता है, उतनी ज्यादा परीक्षा कठोर बनती है। आइए…

पाप की मज़दूरी मृत्यु है

बाइबल कहती है कि मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया।(रो 5:12) इस पर जो परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते हैं, उन्हें बुरा लगता है और वे कभी–कभी झींकते हुए बोलते हैं कि ‘चर्च में लोगों को क्यों पापी कहा जाता है?’ लेकिन दरअसल, सब मनुष्य मूल रूप से पापी हैं। हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, और हम उस परमेश्वर के अनुग्रह के लिए धन्यवाद देते हुए स्तुति चढ़ाते हैं जिसने हम पापियों को मृत्यु से बचाया। परन्तु आइए हम अपने आप से प्रश्न पूछें– “इस बात में हां–हां करते हुए भी कि मैं पापी हूं, क्या मैं अपने पाप को पूरी तरह से जानता हूं? और क्या यह न जानते हुए भी मैं पछता…

सुसमाचार के सैनिक

बाइबल में युद्ध का इतिहास बहुत बार लिखा गया है। युद्ध की हार–जीत इस पर निर्भर करती थी कि परमेश्वर इस्राएलियों के साथ था या नहीं। बाइबल में ऐसा उल्लेख क्यों किया गया है? यह हमें इसकी शिक्षा देता है कि हमें किस विश्वास और रवैए से आत्मिक युद्ध करना चाहिए। परमेश्वर ने सुसमाचार के सैनिक के रूप में हमें बुलाया है। आइए हम जांच करें कि सुसमाचार के सैनिक के लिए किस मानसिक रवैए और तैयारी की आवश्यकता है, और इस समय सुसमाचार के सैनिक के रूप में शस्त्र–सज्जित करें। सैनिक के चुनाव के लिए परमेश्वर का मानदण्ड हमें गिदोन के समय के इतिहास में यह दृश्य मिलता है जिसमें परमेश्वर ने सैनिकों को चुना। इस्राएली मिद्यान के अधीन…

माता के द्वारा सौंपा गया कार्य

जो विश्वास के एक सही मार्ग पर चलते हैं, वे निश्चय ही एक विशेष बदलाव पाते हैं। जब लोग परमेश्वर पर विश्वास करना शुरू करते हैं, तब वे कैसे बच सकते हैं और स्वर्ग जा सकते हैं, इसके बारे में सोचते हैं। जैसे-जैसे वे नई वाचा के सत्य में अपने उद्धार के विषय में विश्वस्त हो जाते हैं, वे परमेश्वर के हृदय के सदृश होने लगते हैं जो सारी मानव जाति को बचाना चाहते हैं। यदि पहले हम केवल अपने बारे में चिन्ता करते थे, तो अब हमें पूरे संसार की ओर देखना चाहिए। परमेश्वर ने हमें उद्धार और दूसरे बहुत से आशीर्वाद दिए हैं। यदि हम सत्य में हैं और पिता और माता पर विश्वास करते हैं, तो हमें…

सन्तुष्ट रहना सीख लो

हाल ही में, सुसमाचार विदेश में बहुत ही जल्दी प्रसारित किया जा रहा है। क्योंकि सिय्योन परिवार के सदस्य प्रत्येक परिस्थिति में संतोषी रहते हैं और हमेशा परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं, इसी कारण परमेश्वर उन्हें पवित्र आत्मा की शक्ति बढ़ाने पर बल दे रहा है। आर्थिक और सांस्कृतिक हर दृष्टि से सुसमाचार का प्रचार करना बिल्कुल आसान नहीं है, फिर भी सिय्योन के सदस्य खुश मन से और स्वेच्छा से सुसमाचार की सेवा कर रहे हैं। हरेक सदस्य कहता है कि जितनी मुश्किल और कठिन स्थिति होती है, उतना ही ज्यादा उसे महसूस होता है कि पिता और माता उसके साथ है। वे दुख और पीड़ा में भी कुड़कुड़ाए बिना निरन्तर खुशी रहते हैं और धन्यवाद देते हैं, तो…

पूरीम

हामान ने सारे फारस[मादी-फारस] में हर यहूदी को मार डालने के दिन को “पूर(चिट्ठी)” डालकर नियुक्त किया(एस 3:7)। मगर उसी दिन जिसे हामान ने यहूदियों को मारने के दिन के रूप में चुना, एस्तेर और मोर्दकै ने हामान को पराजित किया(एस 9:1)। इस घटना का स्मरण करने का दिन पूरीम है। मूसा की व्यवस्था में तीन बार में सात पर्व हैं जो परमेश्वर ने मूसा के द्वारा स्थापित किए। लेकिन “पूरीम” इस्राएलियों का एक पर्व है जो तीन बार के सात पर्वों में शामिल नहीं है। आइए हम “पूरीम” की शुरुआत के बारे में देखें। 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि यहूदियों को बेबीलोन में बंदी बनाया गया था। हालांकि, बेबीलोन थोड़े समय के बाद फारस[मादी-फारस] के द्वारा नष्ट हो गया। इसलिए फारस…

परमेश्वर जिसने उद्धार दिया

समय हमारा इन्तजार नहीं करता, पर अनन्तकाल की ओर तेजी से चल रहा है। जब हम फिर कर पिछले समय को देखते हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर के, जिसने उद्धार दिया, प्रेम व अनुग्रह के लिए धन्यवाद और स्तुति दें। सन्तान अपने पालन-पोषण करने वाले मां-बाप के प्रयत्न को नहीं जानती। नासमझ सन्तान यह महसूस नहीं कर पाती कि मां-बाप ने उसके बचपन में कितना प्रयास और बलिदान किया, और वह प्रौढ़ होने के बाद भी, मानो वह अपने आप बढ़ गया हो, मां-बाप के प्रेम और बलिदान को भूल जाती है। उसी तरह से जो हमें अनन्त जीवन देते हैं और स्वर्ग में अगुवाई करते हैं, स्वर्गीय पिता और माता के प्रेम की चौड़ाई व गहराई…

सुलैमान का न्याय और माता

बाइबल परमेश्वर के बारे में साक्षी देने की पुस्तक है, अर्थात् यह एलोहीम परमेश्वर, यानी पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर की साक्षी देती है। बाइबल की 66 पुस्तकें न केवल पिता परमेश्वर की साक्षी देती है, बल्कि ये माता परमेश्वर के बारे में सत्य की साक्षी, आदम व हव्वा के बीच संबंध, इब्राहीम परिवार का इतिहास, नई यरूशलेम की भविष्यवाणी, आदि के द्वारा देती हैं। मसीह पिता और माता जानना बाइबल में सब से बड़ा रहस्य है, पर बाइबल कहती है कि लोगों की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर(शैतान) ने अन्धा कर दिया है कि वे मसीह के तेजोमय सुसमाचार की ज्योति को, न देख सकें।(2कुर 4:4) जिन्होंने मसीह के लहू से छुटकारा पाया है, केवल वे ही परमेश्वर…

बिना मेरे द्वारा

परमेश्वर के मानव जाति को बाइबल देने का मकसद उनके आत्माओं का उद्धार देना है। बाइबल हमें उद्धार पाने के लिए बुद्धि देती है।(1पत 1:9, 2तीम 3:15–17 संदर्भ) परमेश्वर पर पूरी लगन से विश्वास करने पर भी, यदि कोई उद्धार का रास्ता न जानने से उद्धार न पा सके, तो वह बहुत अभागा आदमी होगा। आत्माओं का उद्धार पाने के लिए, बाइबल को, जिसमें परमेश्वर का वचन है, सही रूप से समझना और महसूस करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ने बाइबल में उद्धार का रास्ता बताया है। यह ही हमारे बाइबल को यत्न सहित पढ़ने का कारण है। मार्ग, सत्य और जीवन परमेश्वर ही है परमेश्वर ने प्रत्येक युग में नबी के द्वारा अपना वचन सुनाया था। मूसा के समय, उसने…

नम्रता का गुण

"मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।" जब मसीह ने राज्य का सुसमाचार प्रचार करना शुरू किया, उसने हम से सब से पहले, मन फिराने पर बड़ा जोर दिया।(मत 4:17) मन फिराव के लिए पहला कदम यह है, स्वयं को पापी मान कर दीन करना। इसलिए स्वर्ग की आशा रखकर, पूर्ण पश्चात्ताप करने के लिए हमें नम्रता का गुण सीखना चाहिए। नम्रता का विपरित गुण घमण्ड है। जब हम यहेजकेल अध्याय 28 में ‘सूर का राजा' और यशायाह अध्याय 14 में ‘बेबीलोन का राजा' के पिछले जन्म की बातें देखें, तब हम जान सकते हैं कि घमण्ड ही पाप का मूल है। घमण्ड से चूर होकर, हम स्वर्ग में उषाकाल के पुत्र, भोर के तारों के पाप…

एक व्यक्ति की भूमिका

प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित कार्यभार के साथ जन्म लेता है। इसलिए इस पृथ्वी परजन्मा कोई भी व्यक्ति निकम्मा नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति छोटे या बड़े पैमाने पर, दूसरे लोगों के जीवन को प्रभावित करते हुए मानव इतिहास में एक भूमिका नीभा रहा है। मैं ने एक बार “पेड़ लगाने वाला मनुष्य” नामक कहानी पढ़ी थी। एक सुनसान और उजाड़ पहाड़ी इलाके में, कहानी का कथावाचक एक दिन एक मनुष्य से मिला जो प्रतिदिन 100 शाहबलूत के बीज बोता था। कुछ साल बीत गए, और जब वह कथावाचक फिर से उसी जगह पर गया, तो आश्चर्यजनक रूप से वह उजाड़ भूमि सुंदर और उपजाऊ बन गई थी। उस एक मनुष्य के कारण जिसने यह न सोचते हुए कि लोग उसको समझेंगे…

जीवन के जल का सोता

यरूशलेम माता के उद्धार का समाचार पूरे विश्व में प्रसारित होता जा रहा है, जिससे संसार के प्रत्येक महाद्वीप में अनेक आत्माएं परमेश्वर के पास आ रही हैं। माता की सच्चाई आत्मिक मास्टर कुंजी है जो कहीं भी बन्द मनुष्यों के मन को खोल सकती है। यह कितना आश्चर्यजनक है! लोग, जिन्होंने कई वर्ष तक सुसमाचार को नहीं सुना था, थोड़े समय के अन्दर खुले मन से सत्य को स्वीकार करते हैं। माता परमेश्वर के बारे में सत्य ने ही ऐसे असंभव कार्य को संभव कर दिया है। बाइबल ने भविष्यवाणी की कि जीवन का जल यरूशलेम से बह निकलेगा और जहां जहां यह जल बहता है, वहां वहां सभी प्राणी जीवन पाएंगे। आइए हम जीवन के जल के सोते…