उपदेश
यह आपको परमेश्वर के वचनों पर जो आपकी आत्मा को पुनर्जीवित करते हैं, दिन-रात ध्यान करने में सहायता करने के लिए है।
जिन्हें पवित्र आत्मा की लालसा है और जिन्हें शरीर की लालसा है
परमेश्वर ने हमसे हमेशा पवित्र आत्मा की लालसाएं रखने के लिए कहा है। चूंकि पवित्र आत्मा परमेश्वर हैं, इसलिए पवित्र आत्मा की लालसाएं वो लालसाएं हैं जो परमेश्वर हमें देते हैं, और जो परमेश्वर के हृदय के अनुकूल हैं। इसके विपरीत, शरीर की लालसाएं वो लालसाएं है जो शैतान आत्मिक चीजों की ओर से हमारा ध्यान मोड़ने के लिए हमारे मन में बिठा देता है। जब यीशु ने अपनी सेवकाई प्रारंभ की, तब शैतान ने यीशु की परीक्षा ली। उस समय भी शैतान ने जगत के धन, उच्च पद और वैभव जैसी शरीर की लालसाओं का उपयोग करके यीशु को लुभाने का प्रयास किया। हालांकि, यीशु ने परमेश्वर के वचनों का उपयोग करके, जो हमारे अंदर पवित्र आत्मा की लालसाओं…
संत जो परीक्षा पर विजयी होते हैं
जब हम इस्राएलियों की जंगल की यात्रा को देखें, तब हम परीक्षा पर विजयी होने की बुद्धि पा सकते हैं। इस्राएलियों ने मिस्र के अधीन 430 वर्षों तक गुलामी का जीवन काटने के दौरान हर प्रकार के कष्टों को सहन किया और परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा मिस्र से आजाद होकर कनान देश की ओर कदम बढ़ाए जहां दूध और मधु की धाराएं बहती थीं। वे परमेश्वर की चुनी हुई प्रजाएं थीं, और उन्होंने फसह का पर्व मनाया और परमेश्वर से वाचा के वचन अर्थात् दस आज्ञाएं और व्यवस्थाएं, विधियां व नियम प्राप्त किए। मगर उनमें से अधिकतर कनान देश में नहीं पहुंच पाए और जंगल में नष्ट किए गए। इसका कारण यह था कि वे परीक्षा पर विजयी नहीं…
सदा आनन्दित रहो
स्वर्ग का राज्य जहां हम जा रहे हैं, वह जगह कितने आनंद और उल्लास से भरी रहेगी! बाइबल हमें कहती है कि इस पृथ्वी की वस्तुएं स्वर्ग की वस्तुओं का प्रतिरूप और प्रतिबिम्ब है(इब्र 8:5)। इसलिए अगर हम ध्यान से आनन्द की भावनाओं को जांचेंगे जो परमेश्वर ने हम मनुष्यों को दी हैं, तो हम सच्चे आनन्द को महसूस कर सकते हैं जो हम स्वर्ग में भोगेंगे। आनन्द और खुशी जो हम महसूस करते हैं, वह मुस्कान और हंसी के द्वारा व्यक्त होते हैं। हर दिन की बातचीत में जब हम भारी विषयों या नकारात्मक चीजों के बारे में बातें करते हैं, तब हम असहज महसूस करते हैं और हमारे चेहरे सख्त हो जाते हैं। इसके विपरीत, जब हम कुछ…
यह परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है
जब परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो,” उजियाला हो गया, और जब परमेश्वर ने एक अन्तर बनाकर उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया, वैसा ही हो गया। वे परमेश्वर की दृष्टि में अच्छे थे। हालांकि, इस युग में जो पवित्र आत्मा और दुल्हिन की आवाज का पालन करते हैं और उनके बुलाने पर उनके पास आते हैं, वे लोग परमेश्वर की दृष्टि में सबसे सुंदर हैं। हम अनन्त स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लक्ष्य की दिशा में विश्वास के मार्ग की ओर जा रहे हैं। इस विश्वास के जंगल की यात्रा में कुछ लोग मनुष्यों को प्रसन्न करने के लिए विश्वास के मार्ग पर चल रहे हैं, और दूसरे परमेश्वर को प्रसन्न…
न्याय का सिंहासन और कार्यों का अभिलेख
हम प्रकाशितवाक्य में देखते हैं कि एक पुस्तक जिसमें हर व्यक्ति के अपने जीवनकाल में किए गए कार्यों का अभिलेख है, न्याय के सिंहासन के सामने खोली जाएगी जब परमेश्वर मानवजाति का न्याय करेंगे। जो कुछ उस पुस्तक में लिखा है उसके अनुसार, परमेश्वर जांचेंगे कि क्या उसने धर्म का काम किया है या अधर्म का काम किया है, और क्या उसने परमेश्वर की इच्छानुसार भला काम किया है या दुष्ट काम किया है; इस तरह परमेश्वर इस पृथ्वी पर हमारे जीवन के पूरे पाठ्यक्रम के द्वारा हमें जांचेंगे और हमारे कामों के अनुसार हमारा न्याय करेंगे। इसलिए हर पल जो हमें हर दिन दिया जाता है, बहुत ही महत्वपूर्ण है। जिनके कार्यों का अभिलेख दुष्ट कामों से भरा है,…
प्रचार जो उद्धार की बातचीत है
हम एक दिन में भी बहुत सी बातचीत करते हैं; हम अपने व्यवसाय के लिए बातचीत करते हैं और घर में अपने परिवार वालों के साथ मैत्रीपूर्ण बातचीत करते हैं और चर्च में सदस्यों के हाथ थामकर “परमेश्वर आपको आशीष दें” कहते हुए अभिवादन करते हैं। मुझे लगता है कि मानव जीवन में बातचीत का बड़ा महत्व है। बातचीत के बिना दूसरों को समझना और अपने विचारों एवं भावनाओं का आदान–प्रदान करना मुश्किल है। इस तरह बातचीत करना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन हम बातचीत करने के दौरान व्यर्थ और निकम्मी बातें भी करते हैं।(मत 12:34–37) इसलिए परमेश्वर ने हमें सुन्दर बातचीत करने का ढंग सिखाया है। वही प्रचार है। प्रचार एक बातचीत है, जिसे हम परमेश्वर के वचनों को विषय…
योना का जहाज और पौलुस का जहाज
जब मनुष्य मरता है, तब वह न्याय का सामना करता है।(इब्र 9:27) एक व्यक्ति अपराधी है या नहीं, और यदि वह अपराधी है तो उसका अपराध कितना बड़ा है, इसका आखिरी निर्णय करने की प्रक्रिया ही न्याय है। आत्मिक दुनिया में भी ऐसा ही होता है। लोग जो नहीं जानते कि नरक का दुख कितना भयंकर है, वे इस पृथ्वी पर अपना कीमती समय बर्बाद करते हैं। वे अपने जीवन के अन्त में उस हालत का सामना करेंगे, जिसमें उन्हें अपने किए पर अफसोस होगा। चूंकि परमेश्वर जानते हैं कि मनुष्य के जीवन के अन्त में क्या होगा, इसलिए वह इस पृथ्वी पर शरीर धारण करके आए। उन्होंने हमारे पापों के लिए क्रूस पर एक पापबलि के रूप में अपना…
अनन्त दुनिया के लिए तैयारी करना
बाइबल में लिखा है कि, “मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है।”(भज 103:15) इससे यह प्रतीत होता है कि मनुष्य का जीवन कितना छोटा और व्यर्थ है। इस पृथ्वी पर जीवन सब कुछ नहीं है; इस पृथ्वी पर के हमारे जीवन के बाद एक नया जीवन है; हम जिस स्थान से आए हैं, वहां वापस जाएंगे। इस जीवन के समाप्त होने के बाद, हम सभी को मरणोत्तर जीवन में प्रवेश करना चाहिए। तब आइए हम यह सोचने के लिए कुछ समय लें कि जिस स्वर्ग के राज्य में हम जा रहे हैं, हम उस स्थान के लिए कितना समय या प्रयास लगा रहे हैं। एक सेवक की सलाह पुराने समय में…
क्या आप परमेश्वर से प्रेम करते हैं?
परमेश्वर हमसे प्रेम करते हैं। उन्होंने संसार की सृष्टि से पहले प्रेम से हमें चुन लिया, और जब क्रूस पर उनकी सांस थम गई थी, उस अंतिम क्षण तक हमारी सुरक्षा के लिए चिंता की, और इस क्षण भी, वह लगातार हमसे प्रेम करते हैं। क्या सच में हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं? चाहे अब हम परमेश्वर में विश्वास के मार्ग पर चल रहे हैं, आइए हम यह सोचने के लिए कुछ समय लें कि क्या सच में हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं। बाइबल कहती है कि, “तेरेइयरूशलेमउ प्रेमी कुशल से रहें,”(भज 122:6) और “जो बातें आंख ने नहीं देखीं और कान ने नहीं सुनीं, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं, वे ही हैं जो…
बिना डर के प्रचार करना
हाल ही में, हमारे स्वर्गीय परिवार के बहुत से सदस्य सिय्योन में वापस लौट रहे हैं, और परमेश्वर हमें संसार की हर जगह में सिय्योन स्थापित करने की अनुमति दे रहे हैं। जैसे कि बाइबल में भविष्यवाणी की गई थी, पूरा संसार अब सुसमाचार की पुकार से भर गया है।(हब 2:14; मत 24:12) इस वर्तमान समय में, जब पूरा संसार परमेश्वर के वचनों से भर रहा है, आइए हम इसके बारे में सोचें कि हम सुसमाचार का प्रचार करने के लिए कितने ऊंचे स्वर से पुकार रहे हैं। हमें सुसमाचार का प्रचार करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए; यदि हम हिचकनेवाले हैं, तो हमें सदा के लिए उसका अफसोस रहेगा। डर के साथ प्रचार करने में परमेश्वर के आशीर्वाद गंवाने का…
शब्द और उद्धार
शब्दों का एक व्यक्ति के जीवन में बड़ा महत्व होता है। हम अक्सर देखते हैं कि लोग जो बोलते हैं वह इस बात का कारण बनता है कि वे दूसरों का विश्वास खो देते हैं जिसे उन्होंने उस समय तक हासिल किया, और वह लोगों के बीच परस्पर भरोसे के टूट जाने का कारण भी बन सकता है। बिना बात किए जीवन जीना असंभव है। यदि हम दूसरों से बात करते हैं, हम क्या कहने जा रहे हैं, हमें इसके बारे में सावधान रहने की जरूरत है और सुननेवालों की भावनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि सुननेवाले इसके बारे में क्या सोचेंगे, उनके विश्वास पर इसका क्या असर पड़ेगा, और यह क्या परिणाम सामने लाएगा।…
चुनाव के द्वारा जीवन
अब, आइए हम समय निकालकर सोचें कि हम कितने आशीषित हैं कि हम अपने विश्वास के जीवन में परमेश्वर के वचन के अनुसार चुना हुआ जीवन जीते हैं, ताकि हम परमेश्वर के वचन का पालन करके और हर समय वह चुनाव करके जिससे पिता और माता प्रसन्न हों, स्वर्ग जा सकें। मूसा, अब्राहम, नूह, आदम और हव्वा से लेकर पतरस, यूहन्ना और याकूब जैसे यीशु के चेलों तक, जब हम अपने विश्वास के पूर्वजों के जीवन को देखते हैं, तो उन सभों ने अपना जीवन चुनाव से जिया। जंगल की यात्रा के दौरान, इस्राएलियों ने अपने जीवन के हर समय में नकारात्मक चुनाव करके अपना समय व्यर्थ गंवाया। हमारे जीवन के साथ भी ऐसा ही है। जीवन चुनावों की श्रृंखला…
अनन्त जीवन, माता परमेश्वर
वैज्ञानिक लंबे समय से जीवन की शुरुआत और प्रकृति के प्रति जिज्ञासु थे, और उन्होंने उस पर लगातार अध्ययन किया है। परिणाम में हाल ही में उन्होंने जाना कि मनुष्य सहित सभी जीवों की विशेषताएं और उनकी जीवनावधि उस जीन से निर्धारित होती है जो वे अपने माता–पिता से विरासत में पाते हैं। मगर अब भी जीवन के बारे में बहुत से अनसुलझे हुए सवाल हैं। बाइबल वह पुस्तक है जो उन परमेश्वर की गवाही देती है जो जीवन के सृष्टिकर्ता हैं और जो स्वयं अनन्त जीवन हैं। बाइबल में जीवन के रहस्य हैं जिन्हें वैज्ञानिक अभी तक सुलझा नहीं सके हैं। इस समय आइए हम बाइबल में उन रहस्यों को खोजें जो संसार की सृष्टि के समय से गुप्त…
जब हम परमेश्वर के द्वारा बुलाए जाते हैं
जब हम परमेश्वर के द्वारा बुलाए जाते हैं, ‘क्या मैं इसके योग्य हूं?’ ‘क्या मेरे पास यह करने की क्षमता है?’ ऐसा सोचते हुए, हम पहले अपनी क्षमताओं की जांच करते हैं। यदि हम सोचेंगे कि जो परमेश्वर ने हमें करने के लिए बुलाया, क्या उसे हम असल में अपनी क्षमता से कर पाएंगे या नहीं, तो हम अंत में यह कहते हुए समाप्त कर देंगे कि हम यह नहीं कर सकेंगे। जब परमेश्वर हमें बुलाते हैं, तब जो हम सभी को करना चाहिए, वह “आमीन” कहते हुए, परमेश्वर की बुलाहट का पालन करना है। तब परमेश्वर की शक्ति के द्वारा उद्धार का कार्य तेजी से चलेगा। परमेश्वर हमें बुला रहे हैं, इसका कारण यह नहीं कि वह हमारी क्षमताओं…
मसीह की सुगन्ध और माता की सुगन्ध
आज हर वह सिय्योन जो माता और माता के प्रेम का प्रचार करता है, सुसमाचार का कार्य अनुग्रहपूर्ण और सुचारु रूप से कर रहा है। जितना ज्यादा माता का सत्य प्रसारित किया जाता है, उतनी अधिक आत्माएं सिय्योन की ओर उमड़ आती हैं। ऐसा क्यों होता है? ऐसा इसलिए होता है कि सिय्योन में माता की सुगन्ध है। बाइबल ने परमेश्वर के लोगों की तुलना आकार की दृष्टि से ज्योति से की है, और स्वाद की दृष्टि से नमक(मत 5:13-16) से की है, और गंध की दृष्टि से “मसीह की सुगन्ध” से की है, जो मसीह के ज्ञान की सुगन्ध पूरे संसार में फैलाती है। पवित्र आत्मा के युग में परमेश्वर के लोग वह सुगन्ध हैं जो हमारे मसीह, पवित्र…
नई वाचा का सब्त
परमेश्वर ने हमारे उद्धार के लिए बाइबल की 66 पुस्तकें लिखीं और प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के अंत में चेतावनी दी कि बाइबल के वचनों में न तो कुछ बढ़ाना और न ही उनमें से कुछ निकालना। यह हमें इस बात को समझने देता है कि परमेश्वर के वचन में कितना अधिकार निहित है। केवल वे ही लोग जो एक शब्द भी छोड़े बिना बाइबल के हर एक वचन को महत्व देते हैं परमेश्वर के उद्धार की प्रतिज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। नई वाचा में फसह, सब्त, पर्व, ओढ़नी का नियम, बपतिस्मा इत्यादि जैसे कई नियम हैं। उनमें से, आइए हम सब्त से जुड़ी बाइबल की शिक्षाओं और उनमें समाई हुई परमेश्वर की इच्छा की जांच करें। सृष्टि के समय स्थापित…
सब्त और परमेश्वर का उद्धार
अगर हम अपने चारों ओर नजर दौड़ाकर देखें, तो वास्तव में हमारे आसपास बहुत सी कीमती चीजें हैं। हालांकि, वे हमेशा हमारे बगल में होते हैं, तो हम अक्सर उनके महत्व को भूल जाते हैं और उनकी उपेक्षा करते हैं। उसी तरह, हम सब्त के अनमोल सत्य की उपेक्षा कर सकते हैं क्योंकि हम इसे मानने के आदी हो गए हैं। जब परमेश्वर ने शुरुआत में सभी चीजें बनाईं, तो उन्होंने छह दिनों तक काम किया और सातवें दिन अपने सभी कार्यों से आराम किया, और विशेष रूप से सातवें दिन को पवित्र बनाया। 3,500 साल पहले, परमेश्वर ने व्यवस्थाओं की घोषणा की और दस आज्ञाओं के पत्थर की तख्तियों पर लिखा, “तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण…
परमेश्वर से प्रेम करने का तरीका
यह स्वाभाविक है कि जब आप किसी से प्रेम करते हैं तो आप उसके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं। लेकिन यदि आप उनकी भावनाओं पर विचार किए बिना अपने ही तरीके से उसके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं, तो क्या होगा? हम कुछ ऐसा भी कर सकते हैं जिसे वे नापसंद करते हैं। क्या इसे हम सच्चा प्यार कह सकते हैं? तो हमें परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को कैसे व्यक्त करना चाहिए? यदि हम अपने तरीके से उनके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं, तो इसे ऐसा नहीं कहा जा सकता कि हम परमेश्वर से सच में प्रेम करते हैं। चूंकि परमेश्वर कहते हैं, “क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे…
फसह और प्रतिज्ञा का चिह्न
आज दुनिया के तमाम हिस्सों में हो रही विपत्तियों की खबरों के कारण पूरे विश्व में तनाव बढ़ रहा है। बाइबल युद्ध और संघर्ष सहित भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट, असामान्य मौसम की घटनाओं जैसी विपत्तियों की चेतावनी हजारों वर्ष पहले दे चुकी थी। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ऐसी विपत्तियां इस पवित्र आत्मा के युग में जिसमें हम जी रहे हैं, एक ही बार में उंडेली जा रही हैं। परमेश्वर ने अपने लोगों को विपत्तियों से रक्षा करने के लिए, इस युग में फसह को पुनर्स्थापित किया है। 3,500 वर्ष पहले, निर्गमन के समय में परमेश्वर ने इस्राएलियों को किसी भी बात से बढ़कर फसह का ज्ञात कराया। यह इसलिए था क्योंकि मिस्र में एक भयंकर विपत्ति आने वाली…
फसह और उद्धार का सत्य
आज, दुनिया परमेश्वर के वचन सुने बिना आत्मिक प्यास और बड़े पैमाने पर हो रही विपत्तियों से पीड़ित है(आम 8:11; यिर्म 44:23)। फिर भी, कुछ लोग परमेश्वर के वचन का इनकार करके यह दावा करते हैं, “नई वाचा का फसह उद्धार का सत्य नहीं है। इसलिए हमें इसे मनाने की आवश्यकता नहीं है।” यीशु ने उन दिनों के धार्मिक नेता, फरीसियों और शास्त्रियों के कपट पर फटकार लगाई और कहा कि स्वर्ग के राज्य के भेदों की समझ उन्हें नहीं दी गई है। अब भी, ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा तो करते हैं, लेकिन परमेश्वर की इच्छा को सही ढंग से नहीं समझते। जैसा कि बाइबल कहती है कि परमेश्वर के ज्ञान के न होने…