जीवन का सत्य
बाइबल में सब्त क्या है? सब्त की शुरुआत, सप्ताह का दिन, अर्थ और महत्व
जीवन का पुनरुत्थान और दण्ड का पुनरुत्थान
आइए हम उस सत्य के द्वारा जो यीशु ने चेलों को सिखाया, जीवन के पुनरुत्थान और दण्ड के पुनरुत्थान के बारे में अध्ययन करें, और इस युग में जीवन के पुनरुत्थान का भागी होने का मार्ग जानें। इससे अचम्भा मत करो; क्योंकि वह समय आता है कि जितने कब्रों में हैं वे उसका शब्द सुनकर निकल आएंगे। जिन्होंने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे और जिन्होंने बुराई की है वे दंड के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे। यूह 5:28–29 यीशु के वचनों के द्वारा हम समझ सकते हैं कि जीवन का पुनरुत्थान है और दण्ड का पुनरुत्थान है। प्रेरित पौलुस ने भी गवाही दी कि दो प्रकार के पुनरुत्थान होंगे। और परमेश्वर से आशा रखता…
बादल और शरीर
पुराने नियम में मसीह के आने के बारे में बहुत सी भविष्यवाणियां थीं। 2,000 वर्ष पहले धार्मिक नेताओं के लिए यीशु को मसीह के रूप में स्वीकार करना बहुत मुश्किल था, क्योंकि वह गुप्त रूप से आए थे। इसलिए प्रेरित यूहन्ना ने इस प्रकार लिखा: “जो आत्मा मान लेती है कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया है वह परमेश्वर की ओर से है, और जो आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है (1यूह 4:2–3)।” यह दिखाता है कि उस समय यह विश्वास करना बहुत कठिन था कि मसीह शरीर में आए। इसलिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत जो प्रथम चर्च के संतों के पास था, वह यह था…
हारून की रीति और मलिकिसिदक की रीति
बाइबल में याजक के दो प्रकार के दल(रीति) हैं: हारून की रीति और मलिकिसिदक की रीति। 1. हारून की रीति हारून की रीति एक याजक के दल की रीति है, जिसमें याजक पुरानी वाचा के नियम और विधियों के अनुसार परमेश्वर को बलिदान चढ़ाते थे। हारून लेवीय गोत्र का था, इसलिए हारून की रीति को लेवीय याजक पद(लेवियों की रीति) भी कहा जाता है। अब्राहम से, जो विश्वास का पूर्वज था, इसहाक उत्पन्न हुआ, इसहाक से याकूब उत्पन्न हुआ, और याकूब से 12 पुत्र उत्पन्न हुए। याकूब और उसकी पत्नी लिआ का तीसरा बेटा लेवी था। जब याकूब का बेटा यूसुफ मिस्र का शासक बन गया, तब याकूब और उसका परिवार मिस्र में चले गए, और उन्होंने 430 सालों के…
परमेश्वर की प्रतिज्ञा और स्वर्ग
पुराना वर्ष चला गया है, और एक नया वर्ष शुरू हुआ है। अतीत को देखते हुए, मुझे लगता है कि मेरे सभी दिन इतनी जल्दी बीत गए कि जैसे मैं एक ही रात की नींद से जाग गया हूं। यह मुझे याद दिलाता है कि वह दिन नजदीक आ रहा है जब हम स्वर्ग जाएंगे। हमें बहुत आभारी होना चाहिए कि हमारे लिए स्वर्ग का राज्य है। जब यीशु 2,000 वर्ष पहले इस पृथ्वी पर आए थे, तो उन्होंने सिखाया कि स्वर्ग और नरक का अस्तित्व वास्तव में है और हमसे उस मार्ग का अनुसरण करने को कहा जो उन्होंने हमारे लिए खोला था, ताकि हम सभी स्वर्ग जा सकें। फिर उन्होंने पृथ्वी पर अपने जीवन के दौरान सत्य की…
पिन्तेकुस्त का दिन
नए नियम के पिन्तेकुस्त के दिन को पुराने नियम में “सप्ताहों का पर्व” कहा जाता था। 2,000 वर्ष पहले, यीशु के पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद, इस दिन परमेश्वर ने अपने लोगों पर पवित्र आत्मा की सामर्थ्य उंडेली, ताकि वे यीशु मसीह के बारे में गवाही दे सकें। उन्होंने संसार की सभी जातियों को स्वर्ग के राज्य के सुसमाचार का प्रचार किया, जो यीशु ने उन्हें सिखाया था। मसीह ने स्वर्गारोहण के दिन पर विश्व सुसमाचार का मिशन घोषित किया। यह पिन्तेकुस्त का दिन था जो विश्व सुसमाचार की आग को प्रज्वलित कराने के लिए एक चिंगारी बना। पिन्तेकुस्त के दिन पर चेलों पर उंडेला गया पवित्र आत्मा प्रथम चर्च के सुसमाचार के विकास के लिए प्रेरक शक्ति बन गया।…
हम मनुष्य कहां से आए हैं और कहां जा रहे हैं?
जब से मनुष्य इस पृथ्वी पर हैं, सभ्यता का विकास निरंतर हो रहा है। हालांकि, ऐसे अनगिनत रहस्य हैं जिन्हें मनुष्य हल नहीं कर सके हैं। उनमें से एक मनुष्य की आत्मा का सत्य है जिसे जानने के लिए सभी युगों के और देशों के लोग जिज्ञासु रहे हैं: इस पृथ्वी पर पैदा होने से पहले हम कहां थे? क्या मृत्यु सब बातों का अंत है या मृत्यु के बाद एक और दुनिया है? जीवन से संबंधित इन सभी सवालों के जवाब न पा सकने के कारण, वे सभी अज्ञात रूप से मृत्यु से डरते हैं; चूंकि वे नहीं जानते कि वे कहां जा रहे हैं, वे इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि उनके भविष्य में क्या होने…
प्रायश्चित्त के दिन का अर्थ
सब्त और तीन बार में सात पर्व इत्यादि परमेश्वर के पर्व, जिनका वर्णन बाइबल में है, वे सिर्फ पुराने नियम की व्यवस्था नहीं हैं, लेकिन उनमें से हर एक के पास मानवजाति के उद्धार के लिए महान अर्थ है। परमेश्वर सिय्योन के लोगों को बचाते हैं जो पर्व मनाते हैं और जिन्होंने पर्वों के अनुसार बलिदान(आराधना) चढ़ाकर परमेश्वर से वाचा बांधी है, उन्हें “मेरे भक्त” कहकर बुलाते हैं(यश 33:20-24; भज 50:1-5)। परमेश्वर यह भी कहते हैं कि वह अपनी संतानों को इकट्ठा करेंगे जो अंतिम दिनों में पर्व मनाने के लिए प्रयास करती हैं, और पृथ्वी के सभी लोगों में उनकी कीर्ति और प्रशंसा फैलाएंगे(सपन 3:14-20)। बाइबल में परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के अनुसार, लोग जो परमेश्वर के नियत पर्वों सहित…
फसह वह सत्य है जो जीवन बचाता है
पृथ्वी दुनिया में लोगों के लिए विशाल लग सकती है, लेकिन यह ब्रह्मांड की विशालता में बस एक छोटी सी बिंदु है। बाइबल हमें बताती है कि यह पृथ्वी डोल में की एक बूंद या पलड़ों पर की धूल के तुल्य ठहरी(यश 40:15)। परमेश्वर ने हम, मनुष्यों के लिए, जो इस छोटी पृथ्वी पर रहते हैं, एक वाचा स्थापित की है। सभी व्यवस्था, नियम और आज्ञाओं में, जो महान ब्रह्मांड का प्रबंधन करने वाले परमेश्वर द्वारा दिए गए हैं, परमेश्वर की ऐसी इच्छा शामिल है कि वह हमें स्वर्ग में सर्वदा अनंत जीवन और आनंद भोगने देंगे। परमेश्वर ने नई वाचा का फसह पुन:स्थापित किया है और हमें इस युग में इसे मनाने की अनुमति दी है। यह भी परमेश्वर…
अनन्त दुनिया के लिए तैयारी करना
बाइबल में लिखा है कि, “मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है।”(भज 103:15) इससे यह प्रतीत होता है कि मनुष्य का जीवन कितना छोटा और व्यर्थ है। इस पृथ्वी पर जीवन सब कुछ नहीं है; इस पृथ्वी पर के हमारे जीवन के बाद एक नया जीवन है; हम जिस स्थान से आए हैं, वहां वापस जाएंगे। इस जीवन के समाप्त होने के बाद, हम सभी को मरणोत्तर जीवन में प्रवेश करना चाहिए। तब आइए हम यह सोचने के लिए कुछ समय लें कि जिस स्वर्ग के राज्य में हम जा रहे हैं, हम उस स्थान के लिए कितना समय या प्रयास लगा रहे हैं। एक सेवक की सलाह पुराने समय में…
नई वाचा का सब्त
परमेश्वर ने हमारे उद्धार के लिए बाइबल की 66 पुस्तकें लिखीं और प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के अंत में चेतावनी दी कि बाइबल के वचनों में न तो कुछ बढ़ाना और न ही उनमें से कुछ निकालना। यह हमें इस बात को समझने देता है कि परमेश्वर के वचन में कितना अधिकार निहित है। केवल वे ही लोग जो एक शब्द भी छोड़े बिना बाइबल के हर एक वचन को महत्व देते हैं परमेश्वर के उद्धार की प्रतिज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। नई वाचा में फसह, सब्त, पर्व, ओढ़नी का नियम, बपतिस्मा इत्यादि जैसे कई नियम हैं। उनमें से, आइए हम सब्त से जुड़ी बाइबल की शिक्षाओं और उनमें समाई हुई परमेश्वर की इच्छा की जांच करें। सृष्टि के समय स्थापित…
सब्त और परमेश्वर का उद्धार
अगर हम अपने चारों ओर नजर दौड़ाकर देखें, तो वास्तव में हमारे आसपास बहुत सी कीमती चीजें हैं। हालांकि, वे हमेशा हमारे बगल में होते हैं, तो हम अक्सर उनके महत्व को भूल जाते हैं और उनकी उपेक्षा करते हैं। उसी तरह, हम सब्त के अनमोल सत्य की उपेक्षा कर सकते हैं क्योंकि हम इसे मानने के आदी हो गए हैं। जब परमेश्वर ने शुरुआत में सभी चीजें बनाईं, तो उन्होंने छह दिनों तक काम किया और सातवें दिन अपने सभी कार्यों से आराम किया, और विशेष रूप से सातवें दिन को पवित्र बनाया। 3,500 साल पहले, परमेश्वर ने व्यवस्थाओं की घोषणा की और दस आज्ञाओं के पत्थर की तख्तियों पर लिखा, “तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण…
फसह और प्रतिज्ञा का चिह्न
आज दुनिया के तमाम हिस्सों में हो रही विपत्तियों की खबरों के कारण पूरे विश्व में तनाव बढ़ रहा है। बाइबल युद्ध और संघर्ष सहित भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट, असामान्य मौसम की घटनाओं जैसी विपत्तियों की चेतावनी हजारों वर्ष पहले दे चुकी थी। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ऐसी विपत्तियां इस पवित्र आत्मा के युग में जिसमें हम जी रहे हैं, एक ही बार में उंडेली जा रही हैं। परमेश्वर ने अपने लोगों को विपत्तियों से रक्षा करने के लिए, इस युग में फसह को पुनर्स्थापित किया है। 3,500 वर्ष पहले, निर्गमन के समय में परमेश्वर ने इस्राएलियों को किसी भी बात से बढ़कर फसह का ज्ञात कराया। यह इसलिए था क्योंकि मिस्र में एक भयंकर विपत्ति आने वाली…
फसह और उद्धार का सत्य
आज, दुनिया परमेश्वर के वचन सुने बिना आत्मिक प्यास और बड़े पैमाने पर हो रही विपत्तियों से पीड़ित है(आम 8:11; यिर्म 44:23)। फिर भी, कुछ लोग परमेश्वर के वचन का इनकार करके यह दावा करते हैं, “नई वाचा का फसह उद्धार का सत्य नहीं है। इसलिए हमें इसे मनाने की आवश्यकता नहीं है।” यीशु ने उन दिनों के धार्मिक नेता, फरीसियों और शास्त्रियों के कपट पर फटकार लगाई और कहा कि स्वर्ग के राज्य के भेदों की समझ उन्हें नहीं दी गई है। अब भी, ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा तो करते हैं, लेकिन परमेश्वर की इच्छा को सही ढंग से नहीं समझते। जैसा कि बाइबल कहती है कि परमेश्वर के ज्ञान के न होने…
फसह और विपत्तियों से पार होने का कारण
परमेश्वर ने शैतान को नष्ट करने और अपनी संतानों को अनंत जीवन देने के लिए फसह की स्थापना की। जो कोई भी सिय्योन में रहता है, वह फसह के महत्व को अच्छी तरह जानता है। अब, हमें और अधिक सावधानी से विचार करने की आवश्यकता है कि जब हम फसह मनाते हैं तो विपत्तियां हमारे ऊपर से क्यों पार हो जाती हैं। फसह का सही अर्थ क्या है? हमें विपत्तियों से मुक्त करने के लिए फसह की शक्ति का स्रोत क्या है? आइए हम परमेश्वर के सामने विनम्र और शालीन स्वभाव के साथ, बाइबल के द्वारा इन मामलों का अध्ययन करें। फसह के मेमने के लहू के द्वारा विपत्तियों से बचना फसह लगभग 3,500 वर्ष पहले स्थापित किया गया परमेश्वर…
बपतिस्मा क्या है?
विवाह एक प्रेमी जोड़े के लिए जीवन की नई शुरुआत है। विवाह समारोह के दौरान वे अपने जीवन के बाकी समय में पति और पत्नी के रूप में सुख-दुख को बांटने की शपथ लेते हैं। उसी तरह, बपतिस्मा परमेश्वर की ओर जाने के लिए पहला कदम है, और यह एक विधि है जिसमें हम परमेश्वर के साथ वाचा बांधते हैं। बपतिस्मा के द्वारा परमेश्वर हमारे सभी पापों को क्षमा करते हैं, और हम अपने जीवन के पिछले पापमय मार्ग से फिरने और अपने जीवन के बाकी समय में सिर्फ परमेश्वर की सेवा करने के द्वारा परमेश्वर के लोगों के रूप में जीने की प्रतिज्ञा करते हैं। बपतिस्मा हमारे जीवन में एक ऐसा मोड़ होता है, जिसके द्वारा हमारे अतीत के…
फसह का पर्व स्वर्ग के द्वार को खोलने की चाबी है
आज दुनिया में बहुत से चर्च हैं जो कहते हैं कि उन्हें परमेश्वर पर विश्वास है। लेकिन सिर्फ चर्च ऑफ गॉड है जो परमेश्वर के पर्वों में से एक नई वाचा का फसह मनाता है जिसमें उद्धार की प्रतिज्ञा शामिल है। जैसे कि बाइबल कहती है, “मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्ट हो गई(हो 4:6),” बहुत से लोग बाइबल को सही तरह से नहीं समझते और फसह को तुच्छ समझते हैं कि उसे मनाने की जरूरत नहीं है; वे सोचते हैं कि यदि वे परमेश्वर पर सिर्फ विश्वास करें तो स्वर्ग का राज्य उन्हें दिया जाएगा। बाइबल के वचनों के द्वारा आइए हम फसह के अर्थ पर पुनर्विचार करें और झूठ में से सत्य को पहचानें। वे…
विपत्ति और फसह का पर्व
जब हम सुबह उठकर न्यूज चैनल देखते हैं, तब बहुत सारी विपत्तियों और दुर्घटनाओं की खबरें सुनते हैं। विभिन्न प्रकार की विपत्तियों में से सबसे बड़ी विपत्ति क्या है? परमेश्वर ने किस विपत्ति से हमें बचाने के लिए फसह को मानव जाति के लिए औषधि के रूप में निर्धारित किया है? चाहे संसार में घटित होने वाली विपत्तियां कितने ही लंबे समय तक क्यों न जारी रहें, लेकिन वे मनुष्य के जीवनकाल से भी अधिक समय तक नहीं घट सकतीं। लेकिन बाइबल में एक विपत्ति है जो युगानुयुग जारी रहती है; भले ही लोग उस विपत्ति की पीड़ा अत्यधिक होने के कारण मरने की लालसा करेंगे, लेकिन मृत्यु उनसे भागेगी। हमें नई वाचा का फसह देने के पीछे परमेश्वर की…
यीशु ने क्रूस पर निश्चित रूप से कहा, “पूरा हुआ।” अगर ऐसा हो, तो हमें अब से सब्त का दिन और फसह का पर्व जैसे किसी भी नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है, है न?
यीशु ने क्रूस पर मृत्यु होने से पहले कहा, “पूरा हुआ।”(यूहन्ना 19:30) क्या इस शब्द का अर्थ यह होता है कि हमें कुछ भी करने की जरूरत नहीं है? यीशु के शब्द का अर्थ होता है कि वह कार्य पूरा हुआ, जो “हमें” नहीं, लेकिन “यीशु” को प्रथम आगमन के समय पृथ्वी पर पूरा करना चाहिए था। अगर हम इस पर अध्ययन करें कि यीशु ने क्या पूरा किया, तो हम समझ सकते हैं कि परमेश्वर के लोगों को और अधिक पवित्रता से सब्त और फसह जैसे परमेश्वर के नियमों का पालन करना चाहिए। बहुतों की छुड़ौती के लिए यीशु बलिदान हो गए जो यीशु को इस पृथ्वी पर करने चाहिए थे, उन महत्वपूर्ण कार्यों में से एक यह था…
पिता परमेश्वर, माता परमेश्वर
परमेश्वर ने सारे मानव को सुसमाचार सुनने और इसे महसूस करके उद्धार पाने का मौका दिया है। उस अनुग्रह के द्वारा ही, विश्व में सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य आश्चर्य रूप से सफल हो रहा है, और पूरे विश्व में हर क्षेत्रों से बहुतेरी आत्माएं पश्चात्ताप करते हुए परमेश्वर की गोद में वापस आ रही हैं। लोग जिन्होंने यह सुसमाचार सुना है, उनके लिए सब से ज़्यादा अचंभित करने वाला सत्य स्वर्गीय माता है। यूरोप, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, ओशिनिया, एशिया, अफ्रीका, आदि किसी भी देश में स्वर्गीय माता के सत्य के सामने सुसमाचार सुनाने के लिए द्वार खुल जाता है। इससे हमें पता चलता है कि देश-देश के लोग स्वर्गीय माता के उद्धार के लिए बहुत तरसते रहे…