यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

परमेश्वर का वचन और भोजन

भोजन खाए बिना, मनुष्य ठीक से काम नहीं कर सकते, न तो ठीक से सोच सकते हैं और न ही अपने उद्देश्य और योजनाओं को पूरा कर सकते हैं। आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। यदि हम आत्मिक भोजन न खाएं, तो हम उन आत्मिक कार्यों के अनुग्रहमय परिणाम नहीं प्राप्त कर सकते जिनकी हम आशा करते हैं। बाइबल हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि परमेश्वर का वचन हमारे लिए जीवन का भोजन है और उसमें हमारी आत्माओं को नया करने की शक्ति है। यीशु ने हमें सिखाया है कि, “नाशवान् भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है”(यूह 6:27)। यीशु ने चेतावनी दी कि हमें नाशवान् भोजन…

परमेश्वर एकमात्र समाधान है

जब कभी हम किसी समस्या का सामना करते हैं, तब हम उससे मदद मिलने की उम्मीद करते हैं जो हमें ऐसा दिखता है कि वह समस्या को सुलझा देगा, और हम उस पर निर्भर हो जाते हैं। पृथ्वी की वस्तुएं स्वर्ग की वास्तविक वस्तुओं की छाया है।(इब्र 8:5) फिर भी, जब हम कुछ करते हैं, तो हम अक्सर छाया का पालन करने की कोशिश करते हैं। छाया का पालन करना किसी काम का नहीं है। हमें वास्तविकता का पालन करना चाहिए। वह परमेश्वर हैं जो सुसमाचार के कार्य का नेतृत्व करते हैं और उसे पूरा करते हैं। इस पृथ्वी पर सब कुछ तभी हासिल किया जा सकता है जब परमेश्वर स्वर्ग में उसकी मंजूरी देते हैं। कोई भी अपनी बुद्धि,…

चाहे झूठ के साथ सत्य को छिपाने की कोशिश करे

दो स्त्रियां यीशु की कब्र पर पहुंचीं और वहां एक स्वर्गदूत से मिलीं। स्वर्गदूत ने उनसे कहा कि यीशु जी उठे हैं, तब वे बड़े आनन्द के साथ यीशु के चेलों को यह समाचार सुनाने के लिए दौड़ गईं। पहरुए भी नगर में गए और जो कुछ कब्रिस्तान में घटा थ, उस सब की सूचना महायाजकों को जा सुनाई। महायाजकों ने पुरनियों से मिलकर एक योजना बनाई। उन्होंने पहरुओं को बहुत सा धन देकर कहा, “तुम यह कहो कि ‘रात को जब हम सो रहे थे, तो उसके चेले आकर उसकी लाश को चुरा ले गए।’ और यदि तुम्हारी यह बात हाकिम के कान तक पहुंचेगी, तो हम उसे समझा लेंगे और तुम्हें जोखिम से बचा लेंगे।” जैसा पहरुओं को…

जो कुछ सारा तुझ से कहे, उसकी सुन

अब से 3,500 साल पहले जब परमेश्वर सीनै पर्वत पर उतरा, उसने बड़ी ऊंची आवाज़ में दस आज्ञाओं की घोषणा की, और इन्हें पत्थर की पटियाओं पर खोदा। परमेश्वर की सारी आज्ञाओं का संहिताबद्ध किए जाने से, पुराने नियम बाइबल जो आज हम देखते हैं, का आधार बन गया। और 2 हज़ार वर्ष पहले, इस धरती पर देहधारी होकर आए यीशु के कार्य और उसकी शिक्षाओं को अभिलिखित किए जाने से, बाइबल नए नियम का केन्द्रीय स्तम्भ बन गया। जैसे पतरस, यूहन्ना और याकूब भक्तिपूर्वक यीशु का पालन करते थे, और यीशु ने पर्वत पर बहुत से लोगों के सामने धर्मोपदेश दिया, उसने बीमारों को चंगा किया और अनेक आश्चर्यकर्म किए और फसह के पर्व पर ऐसा वादा करके नई…

पिता परमेश्वर, माता परमेश्वर

परमेश्वर ने सारे मानव को सुसमाचार सुनने और इसे महसूस करके उद्धार पाने का मौका दिया है। उस अनुग्रह के द्वारा ही, विश्व में सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य आश्चर्य रूप से सफल हो रहा है, और पूरे विश्व में हर क्षेत्रों से बहुतेरी आत्माएं पश्चात्ताप करते हुए परमेश्वर की गोद में वापस आ रही हैं। लोग जिन्होंने यह सुसमाचार सुना है, उनके लिए सब से ज़्यादा अचंभित करने वाला सत्य स्वर्गीय माता है। यूरोप, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, ओशिनिया, एशिया, अफ्रीका, आदि किसी भी देश में स्वर्गीय माता के सत्य के सामने सुसमाचार सुनाने के लिए द्वार खुल जाता है। इससे हमें पता चलता है कि देश-देश के लोग स्वर्गीय माता के उद्धार के लिए बहुत तरसते रहे…

अन्त तक धीरज रखो

हम इस्राएलियों के जंगल में 40 वर्ष के इतिहास को याद करें। सभी इस्राएलियों ने कनान पहुंचने के लिए जंगल में लगातार कठोर यात्रा की, फिर भी बहुत से लोगों ने बीच में अपनी यात्रा छोड़ दी। कुछ लोगों ने 20 या 30 वर्ष तक चलने के बाद यात्रा छोड़ी, और कुछ लोगों ने कनान पहुंचने से पहले यात्रा छोड़ी, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के ग्रहण योग्य जीवन नहीं जिया। उनके समान हम भी इस समय मसीही यात्रा कर रहे हैं। मैं आशा करता हूं कि इस यात्रा में बिना किसी को छोड़े हम सब स्वर्ग के कनान तक सब सुरक्षित रूप से पहुंचें। अब विश्वासी जीवन जीने के लिए अनेक परिस्थितियां पहले से बेहतर हो गई हैं। लेकिन मुझे लगता…

प्रभु में आनन्दित रहो

जब हम परमेश्वर की बनाई रचनाओं को ध्यान से देखें, तब हमें एहसास होता है कि परमेश्वर हमें कितने ज़्यादा अनुग्रह के वरदान दे रहा है। ताज़ी हवा, स्वच्छ पानी, हरे पेड़–पौधे, हमारे पास प्यारे लोग, मौसम या ऋतु में आते बदलाव से आनन्ददायक अनुभूति, आदि बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिनके लिए हम धन्यवादित व आनन्दित हो सकते हैं। इसलिए बाइबल अक्सर कहती है कि धन्यवादित व आनन्दित होना सद्गुण है जो मसीहियों को अपनाना चाहिए। पश्चिमी–पूर्वी दोनों देशों में, पुराने समय से ऐसी प्रथा चलती थी कि राजमहल या किले पर, जहां राजा रहता था, विशेष झण्डा लगा होता था। यह इस बात का चिन्ह था कि राजा उसमें है। इस तरह से मसीहियों का हमेशा आनन्दित होना…

पवित्र नगर यरूशलेम

बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, यरूशलेम की महिमा पूरे विश्व में बहुत तेज रफ्तार से प्रसारित होती जा रही है। यह समाचार जारी हो रहा है कि विश्व के जगह ­ जगह से सिय्योन की सन्तान यरूशलेम की ओर आ रही हैं। जब हम ऐसे चिह्न और लक्षण को देखते हैं, तो हमें लगता है कि यरूशलेम की महिमा सामरिया और पृथ्वी के छोर तक विश्व में सारी जातियों को प्रसारित होने का दिन निकट है, जैसे परमेश्वर ने भविष्यवाणी की है। आइए हम यरूशलेम की वास्तविकता के बारे में जिसकी महिमा पूरे विश्व में प्रसारित होगी, और आशीष के बारे में जो यरूशलेम की महिमा में सम्मिलित होने वाले पाएंगे, बाइबल के वचन को जांचें। पवित्र नगरी यरूशलेम मसीह…

यरूशलेम से प्रेम रखनेवाले हे सब लोगो

एक एक वर्ष करके जैसे ­जैसे विश्वास के जीवन का वक्त गुज़र रहा है, वैसे ­वैसे पिता और माता के अनुग्रह के द्वारा सुन्दर स्वर्गदूतों की छवि में बदल जाने का क्षण निकट आ रहा है। इस समय, सिय्योन की सन्तान को, जो प्रतिज्ञा की सन्तान के रूप में बुलाई गई है, यरूशलेम माता के प्रति, जो बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, सुसमाचार के कार्य का नेतृत्व कर रही है, सही दृष्टिकोण रखना चाहिए। सिर्फ माता का बाह्य स्वरूप नहीं, बल्कि हमें माता का, जो हमारे लिए खुद को बलिदान कर रही है, अंतर्स्वरूप भी देखना चाहिए। तब हम ऐसा विश्वास रख सकेंगे जो परमेश्वर के उत्तराधिकारी, उद्धार पाने वाले के योग्य है। आइए हम बाइबल की भविष्यवाणी के द्वारा…

यरूशलेम से प्रेम रखनेवाले हे सब लोगो

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