यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

पिता परमेश्वर, माता परमेश्वर

परमेश्वर ने सारे मानव को सुसमाचार सुनने और इसे महसूस करके उद्धार पाने का मौका दिया है। उस अनुग्रह के द्वारा ही, विश्व में सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य आश्चर्य रूप से सफल हो रहा है, और पूरे विश्व में हर क्षेत्रों से बहुतेरी आत्माएं पश्चात्ताप करते हुए परमेश्वर की गोद में वापस आ रही हैं। लोग जिन्होंने यह सुसमाचार सुना है, उनके लिए सब से ज़्यादा अचंभित करने वाला सत्य स्वर्गीय माता है। यूरोप, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, ओशिनिया, एशिया, अफ्रीका, आदि किसी भी देश में स्वर्गीय माता के सत्य के सामने सुसमाचार सुनाने के लिए द्वार खुल जाता है। इससे हमें पता चलता है कि देश-देश के लोग स्वर्गीय माता के उद्धार के लिए बहुत तरसते रहे…

पुराने नियम में एक बार भी “यीशु” नाम नहीं पाया गया है। तब, यीशु के चेले कैसे उन्हें मसीह के रूप में पहचान पाए और उन पर विश्वास कर सके?

पुराने नियम में एक भी ऐसा वचन नहीं था कि आनेवाले मसीह का नाम “यीशु” है। यदि “यीशु” नाम की भविष्यवाणी की भी गई होती, हम इस बात से सहमत नहीं हो सकते कि एक मनुष्य मसीह है क्योंकि उसका नाम यीशु है; यह इसलिए है, क्योंकि “यीशु” नाम यहूदियों के बीच आम था।(कुल 4:11) इस कारण, यीशु का नाम एक निश्चित आधार नहीं है जिसके माध्यम से हम विश्वास कर सकते हैं कि यीशु मसीह हैं। सबसे ठोस सबूत वे कार्य हैं जिन्हें यीशु ने मसीह के बारे में पुराने नियम की भविष्यवाणियों के अनुसार पूरा किया। इसके लिए, यीशु ने कहा कि वह “बाइबल(पवित्रशास्त्र)” ही है जो मसीह की गवाही देती है। तुम पवित्रशास्त्र में ढूंढ़ते हो, क्योंकि…

अन्त तक धीरज रखो

हम इस्राएलियों के जंगल में 40 वर्ष के इतिहास को याद करें। सभी इस्राएलियों ने कनान पहुंचने के लिए जंगल में लगातार कठोर यात्रा की, फिर भी बहुत से लोगों ने बीच में अपनी यात्रा छोड़ दी। कुछ लोगों ने 20 या 30 वर्ष तक चलने के बाद यात्रा छोड़ी, और कुछ लोगों ने कनान पहुंचने से पहले यात्रा छोड़ी, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के ग्रहण योग्य जीवन नहीं जिया। उनके समान हम भी इस समय मसीही यात्रा कर रहे हैं। मैं आशा करता हूं कि इस यात्रा में बिना किसी को छोड़े हम सब स्वर्ग के कनान तक सब सुरक्षित रूप से पहुंचें। अब विश्वासी जीवन जीने के लिए अनेक परिस्थितियां पहले से बेहतर हो गई हैं। लेकिन मुझे लगता…

हम पवित्र आत्मा को “परमेश्वर” कहते हैं, और हम यह भी कहते हैं कि हम पर्व के दौरान पवित्र आत्मा पाते हैं। हम कैसे पवित्र आत्मा की परिभाषा कर सकते हैं?

बाइबल में कई उदाहरण हैं कि एक ही शब्द का अलग–अलग अर्थों में इस्तेमाल होता है। उदाहरण के लिए, जब हम नए नियम में शब्द “व्यवस्था” को देखते हैं, व्यवस्था मूल रूप में दस आज्ञाओं को, जो मूसा के समय में दी गई थीं, या उनसे संबंधित विस्तृत व्याख्याओं को संकेत करती है।(रो 7:7; याक 2:11; यूह 8:5, 17) लेकिन, कभी–कभी वह व्यवस्थाओं सहित पंचग्रंथ या संपूर्ण पुराने नियम को भी संकेत करती है।(गल 4:21; लूक 24:44; यूह 12:34) बेशक, वे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन विस्तार से कहा जाए तो उनके अर्थ अलग होते हैं। शब्द “पवित्र आत्मा” के साथ भी ऐसा ही है। मूल रूप से, पवित्र आत्मा उन परमेश्वर को संकेत करता है जिनके पास…

प्रभु में आनन्दित रहो

जब हम परमेश्वर की बनाई रचनाओं को ध्यान से देखें, तब हमें एहसास होता है कि परमेश्वर हमें कितने ज़्यादा अनुग्रह के वरदान दे रहा है। ताज़ी हवा, स्वच्छ पानी, हरे पेड़–पौधे, हमारे पास प्यारे लोग, मौसम या ऋतु में आते बदलाव से आनन्ददायक अनुभूति, आदि बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिनके लिए हम धन्यवादित व आनन्दित हो सकते हैं। इसलिए बाइबल अक्सर कहती है कि धन्यवादित व आनन्दित होना सद्गुण है जो मसीहियों को अपनाना चाहिए। पश्चिमी–पूर्वी दोनों देशों में, पुराने समय से ऐसी प्रथा चलती थी कि राजमहल या किले पर, जहां राजा रहता था, विशेष झण्डा लगा होता था। यह इस बात का चिन्ह था कि राजा उसमें है। इस तरह से मसीहियों का हमेशा आनन्दित होना…

आज चर्च यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं। लेकिन 2,000 वर्ष पहले जब यीशु आए, तब क्यों लोगों ने यीशु पर विश्वास नहीं किया और उन्हें क्रूस पर चढ़ा दिया?

इसके अनेक कारण थे; 2,000 वर्ष पहले यहूदियों के यीशु को अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में सबसे बड़ा कारण यह था कि उन्होंने बाइबल की भविष्यवाणियों पर विश्वास नहीं किया(यूह 5:46–47)। यीशु ने कहा कि वह जो उनके मसीह होने की गवाही देता है, बाइबल है। और जिस दिन उनका पुनरुत्थान हुआ, उस दिन भी उन्होंने अपने चेलों को, जिन्हें यकीन नहीं था कि वह मसीह हैं, बाइबल के द्वारा अपने बारे में गवाही देकर उनके हृदयों में दृढ़ विश्वास प्रदान किया(यूह 5:39; लूक 24:25–27, 32)। इसी कारण प्रेरितों ने भी बाइबल के द्वारा गवाही दी कि यीशु मसीह हैं(प्रे 17:2)। यहूदी लोग बाइबल की भविष्यवाणियों को न तो जानते थे और न ही उन पर विश्वास करते थे।…

सभी चर्च सुसमाचार का प्रचार करने का दावा करते हैं, लेकिन सुसमाचार का अर्थ अस्पष्ट है। सुसमाचार क्या है?

लगभग दो हजार साल पहले, यीशु पृथ्वी पर आए और हमें बचाने के लिए स्वर्ग के राज्य का सुसमाचार प्रचार किया। चूंकि वह यीशु थे जिन्होंने राज्य के सुसमाचार का प्रचार किया, सुसमाचार का अर्थ वे सभी शिक्षाएं हैं जिसे यीशु ने हमें स्वर्ग के राज्य की ओर नेतृत्व करने के लिए दिया। और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा।मत 24:14 यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं…

पवित्र नगर यरूशलेम

बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, यरूशलेम की महिमा पूरे विश्व में बहुत तेज रफ्तार से प्रसारित होती जा रही है। यह समाचार जारी हो रहा है कि विश्व के जगह ­ जगह से सिय्योन की सन्तान यरूशलेम की ओर आ रही हैं। जब हम ऐसे चिह्न और लक्षण को देखते हैं, तो हमें लगता है कि यरूशलेम की महिमा सामरिया और पृथ्वी के छोर तक विश्व में सारी जातियों को प्रसारित होने का दिन निकट है, जैसे परमेश्वर ने भविष्यवाणी की है। आइए हम यरूशलेम की वास्तविकता के बारे में जिसकी महिमा पूरे विश्व में प्रसारित होगी, और आशीष के बारे में जो यरूशलेम की महिमा में सम्मिलित होने वाले पाएंगे, बाइबल के वचन को जांचें। पवित्र नगरी यरूशलेम मसीह…

यरूशलेम से प्रेम रखनेवाले हे सब लोगो

एक एक वर्ष करके जैसे ­जैसे विश्वास के जीवन का वक्त गुज़र रहा है, वैसे ­वैसे पिता और माता के अनुग्रह के द्वारा सुन्दर स्वर्गदूतों की छवि में बदल जाने का क्षण निकट आ रहा है। इस समय, सिय्योन की सन्तान को, जो प्रतिज्ञा की सन्तान के रूप में बुलाई गई है, यरूशलेम माता के प्रति, जो बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, सुसमाचार के कार्य का नेतृत्व कर रही है, सही दृष्टिकोण रखना चाहिए। सिर्फ माता का बाह्य स्वरूप नहीं, बल्कि हमें माता का, जो हमारे लिए खुद को बलिदान कर रही है, अंतर्स्वरूप भी देखना चाहिए। तब हम ऐसा विश्वास रख सकेंगे जो परमेश्वर के उत्तराधिकारी, उद्धार पाने वाले के योग्य है। आइए हम बाइबल की भविष्यवाणी के द्वारा…

उदार और दयालु बनो

उदार होने का मतलब है, समुद्र जैसे बड़े मन से दूसरों को समझना और उनकी भावनाओं का आदर करना, जैसे माता की शिक्षा में लिखा है। बाइबल में हर कहीं उदार होने के बारे में अनेक शिक्षाएं लिखी हैं, क्योंकि पूरे विश्व में स्वर्गीय माता की महिमा को प्रकट करने के लिए लोग जो बुलाए गए हैं, उन्हें जो सद्गुणों में से अपनाना चाहिए, वह उदारता का सदगुण है। जब से हम सिय्योन की सन्तान हैं, हमें अपने सारे मन, प्राण और बुद्धि से परमेश्वर का आदर करना चाहिए। परमेश्वर हमसे चाहता है कि जब हम इसे करें, तब इसके साथ–साथ अवश्य ही उदारता का गुण रखें। परमेश्वर की इच्छा के अनुसार, हम अभी तक, सिर्फ आगे की ओर देखते…

परमेश्वर का बीज

बाइबल में लिखा है कि परमेश्वर अन्तिम समय में उद्धार पाने वालों को अपना वंश(बीज) मानता है, और परमेश्वर तब अपने वंश(बीज) को देखेगा जब वह अपने प्राण की दोषबलि चढ़ाएगा। प्रकृति की समस्त वस्तुओं में बीज एक अद्भुत विशेषता रखता है। एक विशेषता यह है कि जब बीज जीवन लेकर उगता है, तब वह मातृ पौधे का रूप ले लेता है, और दूसरी विशेषता यह है कि बीज अवश्य ही फल लाता है। कोई भी बीज हो, बीज में अंकुर निकलता है और बीज अपना मूल रूप लेकर बढ़ता है, और आखिर में वह अवश्य ही बहुत सारे फल पैदा करता है। परमेश्वर ने कहा है कि वह हमें अपना वंश(बीज) मानता है। इस वचन में गहरा अर्थ निहित…

अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे

नई वाचा का सुसमाचार पूरे विश्व में फैलाया जा रहा है। आत्मिक रूप से अंधे आंखें खोलते हैं और बहिरे सुनते हैं, और घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहे लोग जिलाए जाते हैं। परमेश्वर के अपने लहू से स्थापित की गई नई वाचा की सामर्थ्य सचमुच, आश्चर्यजनक एवं अद्भुत है। जो कोई नई वाचा पर विश्वास करते और मनाते हैं, परमेश्वर ने उन लोगों से ऐसा वादा किया है कि वे बिना शर्त के पापों की क्षमा और अनन्त जीवन पाएंगे, और परमेश्वर उनका परमेश्वर ठहरेगा आर वे उसकी प्रजा ठहरेंगे।(यिर्म 31:31–34 संदर्भ) हम स्वर्ग में पाप करने के कारण इस धरती पर निकाल दिए गए हैं, और हम कैदी हैं जिन्होंने मृत्युदंड की सजा पाई…

लोग जो परमेश्वर के पक्ष में हैं और लोग जो अपने पक्ष में हैं

विश्वास की इस यात्रा में जिसमें अनन्त स्वर्ग की आशा करते हुए आगे कदम बढ़ाते हैं, हम किस तरह के लोग हैं? क्या हम परमेश्वर के हैं? या क्या हम खुद के हैं? यदि हम पिछले दिनों के बारे में सोचें, तो हमें अवश्य ही लगेगा कि परमेश्वर के होने के बजाय, हम बहुत बार खुद के बनते थे। मन में तो बार–बार हम इच्छा बनाते रहते हैं कि ‘मैं परमेश्वर का होऊंगा!’, फिर भी ऐसा जीवन जीने से हम बार–बार चूक जाते हैं। इसलिए इस समय, आइए हम परमेश्वर के वचन के द्वारा स्पष्ट रूप से देखें कि क्या हम अब परमेश्वर के होते हुए जी रहे हैं, या फिर खुद के होते हुए जी रहे हैं। जो अपने…

उद्देश्यपूर्ण जीवन

पूरी दिनचर्या खत्म होने के बाद कभी रात में, व एक वर्ष खत्म होने के बाद कभी नववर्ष में, लोग अपने बीते समय को याद करते हैं। हर एक को बराबर समय दिया जाता है। लेकिन कोई अपने समय को ईमानदारी से गुजारता है तो कोई समय बेकार गंवाता है। ऐसा फर्क इस बात से पड़ता है कि उसके पास उद्देश्य है या नहीं। जब हम जीवन में कुछ उद्देश्य बनाकर उसे प्राप्त करने की पूरी कोशिश करें, तब हमें सफल परिणाम मिल सकता है। इसलिए एक व्यक्ति या कोई समुदाय काम करने से पहले उद्देश्य को तय करते हैं। हमारे विश्वासी जीवन में भी एक ही होता है। हर एक को दिया गया बराबर समय अब बीतता जा रहा…

अभिमानी न हो

अब, पूरे संसार से अलग हुए परिवार बादल की तरह सिय्योन में उमड़ आ रहे हैं। तो हमारा मन पहले से और ज्यादा विकसित होना चाहिए। जितना ज्यादा सदस्य सत्य में आते हैं, उतना ही ज्यादा अगुवे सिय्योन में मांगे जाते हैं। हम जो परमेश्वर से पहले बुलाए जाकर सुसमाचार के पवित्र कार्य में सहयोगी हो रहे हैं, जब नम्र मन से परमेश्वर का आदर करेंगे और सदस्यों की सेवा करेंगे, तब सुसमाचार का कार्य बहुत ही जल्दी पूरा होगा। हमें सिर्फ वचन सुनना ही नहीं, परन्तु परमेश्वर की सारी शिक्षाओं को जीवन में लागू करना चाहिए। परमेश्वर उन नकली मसीहियों से बिल्कुल खुश नहीं होता जो चर्च के अन्दर मसीही बनते हैं, लेकिन चर्च के बाहर परमेश्वर के मार्ग…

हठीला और कठोर स्वाभाव

परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा, हम सिय्योन की प्रजाओं के रूप में बुलाए गए हैं, और हमारे असंख्य व अधिक से अधिक पाप क्षमा और मुक्त हो गए हैं। क्योंकि हमने परमेश्वर से इतना बड़ा अनुग्रह पाया है, हमारे लिए अपनी सारी जिन्दगी पूरी तरह से पश्चाताप करते हुए बिताना आवश्यक है। उद्धार का दिन पास आ रहा है, फिर भी यदि हम अभी तक अपने पापी स्वभाव व ज़िद का त्याग नहीं करेंगे, और पश्चातापहीन होते हुए परमेश्वर की इच्छा का विरोध करेंगे, तब हमें दी हुई पापों की क्षमा निरर्थक होगी। हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि हम मूल रूप से ऐसे पापी हैं जो स्वर्ग में भयंकर पाप करके नीचे इस धरती पर निकाल दिए गए…

बाइबल उद्धार के लिए मैनुअल है।

जब हम इलेक्ट्रिक उत्पाद खरीदते हैं, इसका इस्तेमाल करने से पहले, जो हमें शुरू में देखना चाहिए, वह मैनुअल है। मैनुअल के द्वारा मशीन की जानकारी मिलती है जैसे मशीन की सुविधाएं, मशीन को चालू करने का ढंग, मशीन का इस्तेमाल और सावधानी। उस उत्पाद की पूरी जानकारी लेने के द्वारा ही, हम लंबे समय तक सही तरह से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे मैनुअल में उत्पाद के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित की गई है, वैसे ही बाइबल में स्वर्ग जाने का पूरा तरीका एकत्रित किया गया है। दूसरे शब्दों में बाइबल ‘उद्धार के लिए मैनुअल’ है। बाइबल की 66 किताबों में स्वर्ग जाने के तरीके विस्तार से लिखे गए हैं जो परमेश्वर ने स्वयं सिखाए थे, और…

घृणा को त्याग कर प्रेम में बदलते जाएं

एक बार मैंने परिवार की परिभाषा के बारे में एक वाक्य पढ़ा– “परिवार पिता का राज्य है, माता की दुनिया है और बच्चों का स्वर्ग है।” परिवार पिता का राज्य, माता की दुनिया और बच्चों का स्वर्ग इसलिए हो सकता है, क्योंकि परिवार के सदस्य एक–दूसरे के लिए गहरे प्रेम और समर्पण भाव रखते हैं। हम स्वर्गीय परिवार के सदस्यों को भी इस तरह एक साथ मिल–जुलकर रहना चाहिए। परमेश्वर परिवार की उस भट्ठी में हमें निर्मल करता है, जहां झगड़ा, घृणा, ईर्ष्या आदि सांसारिक स्वभाव पिघल जाते हैं, ताकि हमारा स्वभाव स्फटिक जैसा निर्मल बनकर प्रेमी–स्वभाव बन सके। परमेश्वर ने हमारे लिए आत्मिक परिवार और शारीरिक परिवार का संबंध इसलिए बनाया है, जिससे हम परिवार के जरिए प्रेम से…

घृणा को त्याग कर प्रेम में बदलते जाएं

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