बाइबल के वचन
बाइबल हमें उद्धार पाने में बुद्धिमान बनाती है(2तीम 3:15)। आइए हम इससे परमेश्वर की सच्ची इच्छा सीखें।
यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?
परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…
दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?
यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…
फसह
यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…
परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्यों पर शासन करते हैं
दानिय्येल राजा नबूकदनेस्सर की आज्ञानुसार उसके सामने आ खड़ा हुआ। वह राजा के सपने का अर्थ बताने के लिए बुलाया गया था। “हे बेलतशस्सर1, मैं जानता हूं कि किसी भी रहस्य को समझना तेरे लिए कठिन नहीं है। मैंने जो सपना देखा था, उसका अर्थ समझाओ जैसा पहले तू ने किया था। मेरे सामने धरती के बीचों–बीच एक वृक्ष खड़ा था। वह वृक्ष बड़ा होता हुआ एक विशाल मजबूत वृक्ष बन गया। वृक्ष की चोटी आकाश छूने लगी। वृक्ष की पत्तियां सुन्दर थीं। वृक्ष की शाखाओं पर चिड़ियों का बसेरा था, और हर किसी ने वृक्ष पर लगे भरपूर फलों को खाया। तभी एक पवित्र पहरुआ स्वर्ग से उतर आया। जब उसने ऊंचे शब्द से पुकारकर कहा, ‘वृक्ष को काट…
वे सभी एक चित होकर प्रार्थना में लगे रहे
“परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।” जब यीशु अंतिम वचन कहने के बाद स्वर्ग चले गए, तब उनके चेले जैतून पहाड़ से यरूशलेम लौट आए। वे उस अटारी में गए जहां वे रह रहे थे, और सभी एक चित्त होकर प्रार्थना में लगे रहे। दस दिन बाद, पिन्तेकुस्त का दिन आया। एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उससे सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया, और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। यह ठीक वैसे ही हुआ जैसे यीशु ने कहा…
कृतज्ञता के द्वारा सुसमाचार का चमत्कारकृतज्ञता के द्वारा सुसमाचार का चमत्कार
“आपका धन्यवाद!” यह शायद एक शिष्टाचार है जो लोग आमतौर पर तब कहते हैं जब हम उनके स्टोर से कुछ खरीदते हैं। फिर भी, जब भी हम ऐसा सुनते हैं, तो हमें अच्छा लगता है और यदि हमें कुछ खरीदना होता है, तो हम दोबारा उस दुकान पर जाने की इच्छा रखते हैं। जब हम दूसरों से ऐसा कहते हैं, तब भी हम वैसा ही महसूस करते हैं; जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं जिसने हमारी मदद की है या हमारे लिए कुछ अच्छा किया है, तो हमें भी अच्छा महसूस होता है। ऐसा कहा जाता है कि हमारे दैनिक जीवन में सरल कृतज्ञता के अभ्यास हमारे भीतर असीम क्षमता विकसित करने का स्रोत…
वह पूरा हाल मुझे मालूम था
सेनापति नामान जो कोढ़ की बीमारी से पीड़ित था, परमेश्वर के भक्त एलीशा के पास गया। जब नामान ने परमेश्वर के भक्त के वचन के अनुसार यरदन नदी को जाकर उसमें सात बार डुबकी लगाई, तब उसका शरीर फिर छोटे बालक के शरीर–जैसा स्वच्छ हो गया। तब उसने एलीशा को उपहार देना चाहा। “उस यहोवा की शपथ, जिसकी मैं सेवा करता हूं! मैं कुछ भी स्वीकार नहीं करूंगा।” एलीशा ने अंत तक उसके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया, तब नामान उसे उपहार देने की इच्छा छोड़ने को विवश हो गया । जब नामान एलीशा के पास से कुछ ही दूर चला गया था, एलीशा का सेवक गेहजी नामान के पीछे दौड़ता गया। नामान ने उसे अपने पीछे दौड़ता देखा और…
यह वही हो जिसे परमेश्वर ने ठहराया हो
वह संध्या का समय था। एक यात्री जो धूल से ढका हुआ था, नगर के बाहर स्थित कुएं के पास रुका। वह अब्राहम का सेवक था जो अपने स्वामी के इकलौते बेटे, इसहाक की पत्नी खोजने के लिए कनान से बहुत दूर निकल आया। इस बूढ़े सेवक ने कुएं के पास ऊंटों को घुटनों के बल बिठाया और अपने दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगा: “हे यहोवा, तू मेरे स्वामी अब्राहम का परमेश्वर है। अब वह समय है जब पानी भरने के लिए नगर से लड़कियां आती हैं। जब मैं एक लड़की से पीने का पानी मांगूं, तो उस लड़की को खुशी से मुझे पानी देने दीजिए और उससे पहले कि मैं उससे मांगूं, उसे मेरे ऊंटों को भी पानी…
यीशु मसीह के नाम से
पतरस और यूहन्ना मंदिर में जा रहे थे। तभी उन्होंने एक व्यक्ति को देखा जो जन्म से ही लंगड़ा था और मंदिर के द्वार की ओर ले जाया जा रहा था। वे उसे वहां हर दिन बैठा दिया करते थे ताकि वह मंदिर में जानेवालों से भीख के पैसे मांग लिया करे। इस व्यक्ति ने जब देखा कि पतरस और यूहन्ना मंदिर में प्रवेश करने ही वाले हैं, तो उसने उनसे पैसे मांगे। तब पतरस ने कहा, “मेरे पास चांदी या सोना तो है नहीं, किन्तु जो कुछ है, मैं वह तुझे देता हूं; यीशु मसीह के नाम से चल फिर।” फिर उसने उसका दाहिना हाथ पकड़ कर उसे उठाया। तुरंत उसके पांवों और टखनों में बल आ गया। और…
हे अल्पविश्वासी, तू ने क्यों संदेह किया?
यीशु ने अपने चेलों को नाव पर चढ़ाया और झील के पार जाने के लिए विवश किया। और वह अकेले में प्रार्थना करने को पहाड़ पर चले गए। नाव झील के बीच लहरों से डगमगा रही थी, क्योंकि हवा सामने की थी। भोर के आसपास, यीशु झील पर चलते हुए उनके पास आए। चेले यीशु को झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए और उन्हें भूत समझते हुए डर के मारे चिल्लाए, “ढाढ़स बांधो! मैं हूं, डरो मत!” यीशु ने चेलों को यकीन दिलाया। तब पतरस बहादुरी से आगे बढ़ा। “हे प्रभु, यदि तू ही है, तो मुझे अपने पास पानी पर चलकर आने की आज्ञा दे।” यीशु ने कहा, “चला आ!” तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के…
प्रार्थना के बिना
यीशु मसीह के चेलों के चारों ओर बड़ी भीड़ लगी है और शास्त्री उनके साथ विवाद कर रहे हैं। यीशु ने इसे देखकर उसका कारण पूछा। तब भीड़ में से एक ने उत्तर दिया। “हे गुरु, मैंने अपने पुत्र को आपके चेलों के पास लाया था, जिस पर एक दुष्टात्मा सवार है, और उनसे उस दुष्टात्मा को बाहर निकालने का अनुरोध किया था, परन्तु वे निकाल न सके।” तब यीशु ने उसे अपने पास लाने को कहा। उसका शरीर मरोड़ने लगा और वह भूमि पर गिरकर मुंह से फेन बहाते हुए लोटने लगा। तब यीशु ने अशुद्ध आत्मा को यह कहकर डांटा। “हे गूंगी और बहिरी आत्मा, मैं तुझे आज्ञा देता हूं, उसमें से निकल आ, और उसमें फिर कभी…
विश्वासी व्यक्ति के लिए
यीशु के चेलों ने एक लड़के को, जिस पर दुष्टात्मा सवार थी, चंगा करने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं कर सके। जब वे इसके बारे में शास्त्री के साथ विवाद कर रहे थे, उन्होंने यीशु को देखा और उनकी तरफ दौड़े। यीशु के चारों ओर बड़ी भीड़ लग गई। “तुम उनसे किस बात पर विवाद कर रहे हो?” तब भीड़ में से एक व्यक्ति ने उत्तर दिया, “हे गुरु, मैं अपने बेटे को आपके पास लाया। उस पर एक दुष्टात्मा सवार है।” बचपन से लड़के की जान को कई बार खतरा होता था; दुष्टात्मा उसे मार डालने के लिए कभी आग में गिरा देती थी तो कभी पानी में। लड़के के पिता ने चेलों से उस दुष्टात्मा को बाहर…
स्वर्ग की आशीष जो तीस चांदी के सिक्के में बेच दी
फसह से पहले यहूदा इस्करियोती प्रधान याजकों के पास गया। “यदि मैं उसे तुम्हारे हाथ में पकड़वा दूं, तो मुझे क्या दोगे?” चूंकि प्रधान याजक यीशु को जो अपनी आंखों का कांटा बन गए, पकड़कर मार डालने की साजिश रच रहे थे, उन्होंने यहूदा का स्वागत करके उसे तीस चांदी के सिक्के तौलकर दे दिए। यहूदा उसी समय से यीशु को पकड़वाने का अवसर ढूंढ़ने लगा। पतरस, यूहन्ना और मत्ती के जैसे यहूदा इस्करियोती बारह चेले में से एक था जिसे यीशु ने स्वयं चुना। उसने इतना विश्वास जीता था कि उसके पास पैसों की थैली रहती थी, और उसने यीशु के बिल्कुल पास से उनके चमत्कारी कार्यों को देखा था। वह ऐसा जीवन था जिसकी आजकल बहुत से ईसाई…
मैं अब देखता हूं
यीशु ने जाते हुए जन्म से अंधे एक व्यक्ति को देखा। “यह इसलिए हुआ कि परमेश्वर के काम उसमें प्रगट हों।” यह कहकर यीशु ने भूमि पर थूका, और उस थूक से मिट्टी सानी, और वह मिट्टी उस अंधे की आंखों पर लगाई। और उससे कहा, “जा और शीलोह के तालाब में धो आ।” फिर उस अंधे ने जाकर आंखें धो डालीं। जब वह लौटा तो उसे दिखाई दे रहा था। फिर लोग जो उसे भीख मांगता देखने के आदी थे, पूछने लगे कि उसकी आंखें कैसे खुल गईं। “यीशु नाम के एक व्यक्ति ने मिट्टी सान कर मेरी आंखों पर लगाई और मुझसे कहा, ‘जा और शीलोह में धो आ।’ और मैं जाकर धो आया। बस मुझे आंखों की…
भविष्यवाणी को जानना और उस पर विश्वास करना
जब यीशु का जन्म हुआ, पूर्व से तीन ज्योतिषी यरूशलेम आए। “यहूदियों के नवजात राजा कहां हैं? हमने उनका तारा पूर्व में उदित होते देखा। हम उन्हें दण्डवत् करने आए हैं।” जब राजा हेरोदेस ने यह सुना तो वह बहुत बेचैन हुआ और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया। राजा ने यहूदी समाज के सभी महायाजकों और शास्त्रियों को इकट्ठा करके उनसे पूछा, “मसीह का जन्म कहां होना चाहिए?” “यहूदिया के बैतलहम में, क्योंकि भविष्यवक्ता के द्वारा लिखा गया कि: ‘यहूदा की धरती पर स्थित बैतलहम में से एक शासक प्रकट होगा जो इस्राएल की देखभाल करेगा।’ ” तब हेरोदेस ने उन ज्योतिषियों को चुपके से बुलाया और उनसे पूछताछ कर यह पता कर लिया कि वह तारा ठीक किस…
“धन्य हैं वे जो बिना देखे ही विश्वास करते हैं।”
यीशु की मृत्यु होने के बाद तीसरे दिन की शाम को जब चेले यहूदियों के भय से दरवाजे बंद किए एकत्र थे, तब यीशु जो मृत्यु से जी उठे, उनके बीच आकर खड़े हो गए। हालांकि सब दरवाजे बंद थे, यीशु घर के अन्दर आए, और उन्होंने अपने चेलों से कहा, “तुम्हें शांति मिले।” तब चेलों को यीशु के पुनरुत्थान पर पूर्ण विश्वास हुआ, और वे बहुत आनन्दित हो उठे। यीशु के आने के समय बारहों में से एक थोमा उनके साथ नहीं था। इसलिए उसने यीशु के पुनरुत्थान पर संदेह किया। “जब तक मैं उनके हाथों में कीलों का निशान न देख लूं, कीलों की जगह पर अपनी उंगली न रख दूं और उनकी बगल में अपना हाथ न…
“निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा”
मूसा मिस्र का महल छोड़ने के बाद, मिद्यान के जंगल में चरवाहे के रूप में रहता था। एक दिन जब वह भेड़–बकरियों को चरा रहा था, वह होरेब नामक परमेश्वर के पर्वत को गया। उस पर्वत में कोई मनुष्य कहीं दिखाई न दिया, और वहां मूसा ने एक झाड़ी को जलते हुए देखा जो भस्म नहीं हो रही थी। अजीब दृश्य देखकर उसे आश्चर्य हुआ, और वह उसे निकट से देखने को मुड़ा चला गया। उस पल में, परमेश्वर ने झाड़ी के बीच से उसको पुकारा। “मूसा, निकट न आ। अपने पांवों से जूतियों को उतार दे, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र भूमि है। मैं तेरे पिता का परमेश्वर हूं। मैंने उन कष्टों को देखा है…
‘ऐसा ही होना अवश्य है,’ इस पवित्रशास्त्र के वचन के अनुसार
रात को यीशु अपने चेलों के साथ गतसमनी नामक एक स्थान में आए। जब यीशु प्रार्थना कर चुके, तो वह नींद से भरे चेलों के पास आए। “उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वानेवाला निकट आ पहुंचा है।” जब वह यह कह ही रहे थे, यहूदा इस्करियोती आया, और उसके साथ तलवारों और लाठियों से लैस प्रधान याजकों और लोगों के पुरनियों की भेजी एक बड़ी भीड़ भी थी। यहूदा ने उस संकेत के अनुसार यीशु को चूमा, जिसे उसने पहले सैनिकों के साथ बनाया था। “हे मित्र, जिस काम के लिए तू आया है, उसे कर।” फिर भीड़ के लोगों ने पास जाकर यीशु को दबोच कर बंदी बना लिया। यीशु के चेलों में से पतरस ने तलवार खींच ली और…
कठिनाई और दुख का सामना करते हुए
यह तब हुआ जब पौलुस और उसके साथी कैसरिया में आए और फिलिप्पुस के घर जाकर उसके साथ ठहरे। एक दिन, यहूदिया से अगबुस नामक एक नबी पौलुस से मिलने आया। उसने एक कमरबंध उठाकर उससे अपने ही पैर और हाथ बांध लिए और बोला, “पवित्र आत्मा यह कहता है, ‘यरूशलेम में यहूदी लोग, जिसका यह कमरबंध है, उसे ऐसे ही बांध कर अन्यजातियों के हाथ में सौंप देंगे।” वह कमरबंध जो अगबुस अपने हाथों और पैरों में बांधे था, पौलुस का था। वहां के लोगों ने रोते हुए पौलुस से यरूशलेम न जाने की विनती की। इस पर पौलुस ने उत्तर दिया, “इस प्रकार रो–रो कर मेरा दिल तोड़ते हुए यह तुम क्या कर रहे हो? मैं तो यरूशलेम…
“मैं पापियों को बुलाने आया हूं”
यीशु ने एक लकवा के रोगी को कफरनहूम में चंगा किया, और फिर वह वहां से चले। उसने मत्ती नामक एक व्यक्ति को देखा जो चुंगी की चौकी पर बैठा, और उससे कहा, “मेरे पीछे चला आ।” यीशु के शब्द पर, बिना किसी हिचकिचाहट के मत्ती खड़ा हुआ और उसके पीछे हो लिया। मत्ती ने अपने घर में यीशु को भोजन पर बुलाया, और यीशु के साथ बहुत से चुंगी वसूलने वाले और पापी भी खाने बैठे। यह देखकर फरीसियों ने यीशु के चेलों से पूछा, “तुम्हारा गुरु चुंगी वसूलने वालों और पापियों के साथ क्यों खाता है?” यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा, “मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।” यहूदियों को चुंगी वसूलने वालों से…
मुझे बपतिस्मा लेने में क्या बाधा है?
“उठ और दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से गाजा को जाता है।” परमेश्वर के स्वर्गदूत से निर्देश पाकर फिलिप्पुस चल दिया और जंगल में पहुचा। वहां फिलिप्पुस एक एकान्त जगह में इथोपिया के उच्चाधिकारी खोजे से मिला। वह आराधना करने के लिए यरूशलेम में गया था, और लौटते हुए वह अपने रथ में बैठकर पवित्रशास्त्र पढ़ रहा था। पवित्र आत्मा के निर्देशानुसार फिलिप्पुस ने उस रथ के पास जाकर उससे पूछा, “क्या जिसे तू पढ़ रहा है, उसे समझता है?” “मैं भला तब तक कैसे समझ सकता हूं, जब तक कोई मुझे इसकी व्याख्या नहीं करे?” फिर उसने फिलिप्पुस से विनती की कि वह रथ पर चढ़कर उसके पास बैठे। “वह भेड़ के समान वध होने…
हम में झगड़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम तो भाई हैं
मिस्र से निकलने के बाद अब्राम(अब्राहम) ने अपनी पत्नी और लूत के साथ कनान के दक्खिन देश से होकर यात्रा की और बेतेल तक पहुंचा। अब्राहम पशुओं और चांदी–सोने का बड़ा धनी था, और लूत के पास भी अधिक पशु थे। इसलिए वे दोनों साथ नहीं रह सकते थे। इस कारण अब्राहम और लूत के पशुओं के चरवाहों में झगड़े हुआ करते थे। तब अब्राहम लूत से कहने लगा, “हम दोनों में, मेरे और तुम्हारे चरवाहों में झगड़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम तो भाई हैं। हम एक दूसरे से अलग हो जाएं। यदि तुम बाईं ओर जाओगे, तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा, और यदि तू दाहिनी ओर जाओगे, तो मैं बाईं ओर जाऊंगा।” तब लूत ने निगाह दौड़ाई और…
शब्द जिनके कारण नामान ने अपना मन बदला
नामान अराम के राजा की सेना का सेनापति था, किन्तु वह विकट चर्मरोग से पीड़ित था। एक दिन वह अपने विकट चर्मरोग को ठीक करने के लिए एलीशा नबी के द्वार पर पहुंचा। हालांकि, एलीशा नामान के सामने नहीं आया, लेकिन उसने एक सन्देशवाहक को नामान के पास भेजा। सन्देशवाहक ने कहा, “जाओ, और यरदन नदी में सात बार नहाओ। तब तुम्हारा चर्मरोग स्वस्थ हो जाएगा और तुम पवित्र तथा शुद्ध हो जाओगे।” नामान क्रोधित होकर चला गया, क्योंकि उसने सोचा कि कम से कम परमेश्वर का नबी एलीशा बाहर आएगा और परमेश्वर से प्रार्थना करके उसके कोढ़ के स्थान पर अपना हाथ फेरकर कोढ़ को ठीक करेगा। इससे अधिक असहनीय बात यह थी कि उसे अन्य स्वच्छ नदियों को…