यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, फिर भी वह क्यों मनुष्य के रूप में आए?

परमेश्वर जब भी चाहें, वह अवश्य ही मनुष्य के रूप में प्रकट हो सकते हैं। क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास ऐसी शक्ति है कि वह शरीर रूप का धारण कर सकते हैं या उसे उतार सकते हैं। फिर क्यों परमेश्वर एक कमजोर बालक और पुत्र के रूप में स्वयं पृथ्वी…

दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे…

फसह

यीशु ने उनसे कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जब तक तुम मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।“यूह 6:53 फसह का पर्व वह पर्व है, जिसके द्वारा विपत्ति हमें छोड़कर गुजर जाती है। यह पर्व पवित्र कैलेंडर…

विश्व सुसमाचार और माता का समर्थन

हर कोई अपने आत्मिक घर की कमी महसूस करता है जो खुशी और हर्ष से भरपूर रहता है, और वहां जाने की कामना करता है। लेकिन स्वर्ग जाने के लिए हमें पहले पृथ्वी पर अपने दिए हुए जीवन के सही मार्ग पर पूरी तरह चलना चाहिए। जिस प्रकार इस्राएली 40 वर्ष तक जंगल के मार्ग पर चलने के बाद ही कनान देश में पहुंच सके, उसी प्रकार हम तभी स्वर्ग में पहुंच सकेंगे जब हम आत्मिक जंगल, यानी विश्वास के मार्ग पर पूरी तरह चलेंगे जिस पर पिता चले और माता आज चल रही हैं। हम अपने पापों के कारण इस पृथ्वी पर निकाल दिए गए हैं। अपनी पापी संतानों को स्वर्ग के राज्य में लौटाने के लिए, परमेश्वर ने…

मुझे कहा गया कि पुराने नियम की व्याख्या छाया के रूप में की जाती है और नए नियम की व्याख्या उसकी असलियत के रूप में की जाती है। इस पर विश्वास करने का बाइबल का क्या आधार है?

बाइबल गवाही देती है कि पुराने नियम की व्यवस्था “आनेवाली अच्छी वस्तुओं की छाया है”(इब्र 10:1)। बाइबल में यह भी कहा गया है कि परमेश्वर ने प्राचीनकाल से उस बात को बताया है जो अब तक नहीं हुई है(यश 46:10), और जो अब हो रहा है वह पहले भी हो चुका है(सभ 3:15)। ये सभी वचन दिखाते हैं कि पुराने नियम के युग में परमेश्वर ने प्रतिरूप और छाया के द्वारा पहले ही यह जानने दिया है कि वह बाद में क्या पूरा करेंगे। पुराने नियम में मलिकिसिदक और नए नियम में यीशु आइए हम कुछ उदाहरणों के द्वारा इस तथ्य की पुष्टि करें कि पुराना नियम छाया है और नया नियम उसकी असलियत है। सबसे पहले आइए हम एक…

आसान मार्ग और सही मार्ग

हर किसी के जीवन में हमेशा एक आसान मार्ग होता है और एक सही मार्ग होता है। जब जापान ने कोरिया को अपना उपनिवेश बनाया, कुछ लोगों ने एक आसान और आरामदायक जीवन जीने के मार्ग को चुना, लेकिन कुछ ने सही मार्ग को चुना और अपने देश की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। अपने चुनाव के अनुसार, उन्होंने पूरी तरह से अलग–अलग जीवन जिया, और अंत में उन्हें बिल्कुल अलग–अलग परिणाम मिले: पहले वाले लोगों पर देशद्रोही का कलंक लगाया गया, लेकिन दूसरे वाले लोगों को कोरियाई आजादी के सेनानी के रूप में ख्याति प्राप्त हुई, और पीढ़ी दर पीढ़ी उनके नामों को याद किया जाता है। हमारे विश्वास के जीवन में…

यीशु कौन हैं?

चौथी शताब्दी से लेकर आज तक, यीशु के स्वरूप को लेकर लगातार विवाद चल रहा है। कुछ चर्च त्रिएक से इनकार करते हुए यीशु को हमारी तरह सृष्ट किया गया एक जीव समझते हैं। कुछ चर्च कहते हैं कि यीशु एक स्वर्गदूत हैं। कुछ चर्च दावा करते हैं कि परमेश्वर और यीशु दोनों का उद्देश्य और इच्छा एक ही हैं, इसी कारण भले ही उन दोनों को एक जैसा माना जा सकता है, लेकिन वे दोनों एक नहीं हैं। क्यों सभी चर्चों में एक ही बाइबल को लेकर अलग–अलग व्याख्या है? यह इसलिए है क्योंकि वे पवित्र शास्त्र को जो पवित्र आत्मा की प्रेरणा से लिखा गया है, पाप से ढकी हुई शारीरिक आंखों से देखकर उसकी व्याख्या करते हैं।…

सबसे महान कार्य

दुनिया में विभिन्न प्रकार के काम और व्यवसाय हैं। उनमें से ऐसे बहुत से महान काम हैं जो लोगों को लाभ देते हैं और उनमें युग की चेतना जगाते हैं, और जिनका इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रहता है। तब सबसे महान कार्य क्या है? परमेश्वर वास्तव में महान हैं। वह हर एक काम भी जिसका महान परमेश्वर स्वयं प्रबंधन और नेतृत्व करते हैं, निश्चय ही महान है। परमेश्वर ने अपने महान कार्यों में से एक कार्य हमें सौंपा है। वह यह है, “संसार की सब जातियों में सुसमाचार का प्रचार करना है(मत 24:14)।” संसार की चीजों का अपना–अपना अर्थ और मूल्य है, लेकिन उनका वैभव कुछ समय के लिए बरकरार रहता है और फिर गायब हो जाता है। लेकिन…

आत्मा के बारे में प्रेरितों के विचार

“क्या होता है जब मनुष्य मरता है?” “क्या मनुष्य के पास सच में आत्मा होती है?” “मृत्यु के बाद मनुष्य कहां जाता है?” ये अनगिनत लोगों के लिए लंबे समय से अनसुलझे सवाल थे। अनगिनत लोगों ने “मैं” के अस्तित्व के बारे में सोचा और इस पर अध्ययन किया, लेकिन कोई भी जवाब नहीं पा सका। यह न जानते हुए कि किसने “मुझे” बनाया है, उन्होंने आत्मा के विषय में जानने की लालसा को पूरा करने के लिए विभिन्न विचारों व दर्शनों को प्रस्तुत किया है। लेकिन आत्मा के बारे में जो ज्ञान मसीह के द्वारा सिखाया गया है, वह मानवजाति को यह जानने देता है कि वे कौन हैं, उनके अस्तित्व का मूल्य कितना है और उनके जीवन का…

बाइबल में हम अक्सर “मुहर” शब्द देख सकते हैं। तब मुहर क्या है और इसका हमारे साथ क्या संबंध है?

“मुहर” एक छाप है जिस पर एक व्यक्ति या संगठन का नाम उत्कीर्ण है और जिसका पहचान के प्रमाणीकरण के उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है। परमेश्वर की मुहर का मतलब परमेश्वर की छाप है। सभी युगों में परमेश्वर उन पर अपनी मुहर लगाते हैं जो धर्मी माने जाते हैं। परमेश्वर की इस इच्छा के अनुसार प्रेरित होने की छाप भी है और विश्वास की धार्मिकता की छाप भी है। पवित्र आत्मा भी बयाने के रूप में एक छाप है (1कुर 9:2, रो 4:11, 2कुर 1:22)। परमेश्वर का मुहर लगाने का कार्य इस युग में भी घटित होता है। लेकिन यह पहले की तुलना में अलग है। परमेश्वर की मुहर जो हमें प्राप्त करनी चाहिए, वह छुटकारे का चिन्ह…

हर धर्म में कुछ भोजन हैं जिन्हें खाना निषिद्ध है। मैंने सीखा है कि ईसाई धर्म में भी कुछ निषिद्ध भोजन हैं। लेकिन हर चर्च में निषिद्ध भोजन अलग–अलग होते हैं। उनमें से कौन सा सही है और बाइबल में भोजन को निषिद्ध करने का मानक क्या है?

कुछ भोजन हैं जो परमेश्वर ने अपने लोगों को खाने से मना किया है। भोजन से संबंधित नियम सृष्टि के समय से लेकर नए नियम के समय तक मौजूद है, लेकिन हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि भोजन के बारे में परमेश्वर ने हर युग में अपने लोगों को अलग–अलग नियम दिए हैं। आज बहुत से चर्चों के पास भोजन के बारे में अपने–अपने नियम होते हैं और वे अपने नियमों का पालन करने पर जोर देते हैं। उनमें से ज्यादातर कहते हैं कि उनके भोजन के नियम बाइबल पर आधारित हैं, लेकिन वे ऐसा इसलिए दावा करते हैं क्योंकि वे समय पर ध्यान न देने की गलती करते हैं। पुराने समय में यद्यपि किसी भी प्रकार के…

परमेश्वर सिय्योन नगर में शरीर में वास करते हैं

सभी ईसाइयों को जो उद्धार और अनन्त जीवन की आशा करते हैं, एक चीज को अनदेखा नहीं करना चाहिए, और वह चीज है, परमेश्वर से मिलना। यशायाह नबी ने लिखा, “जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो।” इन वचनों के द्वारा, हम समझ सकते हैं कि हम परमेश्वर से सिर्फ तभी मिल सकते हैं जब परमेश्वर हमारे निकट हैं। तब, आइए हम खोजें कि परमेश्वर के निकट रहने का समय कब है, हम कहां परमेश्वर से मिल सकते हैं, और परमेश्वर कैसे हमें अपने लोग बनाते हैं और हमें उद्धार देते हैं। सिय्योन नगर – सच्चा चर्च जहां परमेश्वर निवास करते हैं हमारे पर्व के नगर…

आज ईसाई धर्म एक सबसे बड़ा धार्मिक समूह है जिसको मानने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। लेकिन मुझे कहा गया कि प्रथम चर्च के युग में ईसाइयों के ऊपर अत्यंत अत्याचार हुआ था। उन पर क्यों अत्याचार किया गया था? और वे कैसे अत्यंत अत्याचार के बीच अपना विश्वास कायम रख सके थे?

सबसे पहले हमें जानना चाहिए कि चाहे कोई भी युग हो, क्लेश और यातनाएं हमेशा परमेश्वर के लोगों के ऊपर आते हैं जो स्वर्ग की आशा रखते हुए ईमानदार जिंदगी जीते हैं(रो 8:17)। 2,000 वर्ष पहले निहित स्वार्थ वाले यहूदी धर्म और इस्राएल पर शासन करने वाले रोम जैसी दुनिया की शक्तियों का उपयोग करके शैतान ईसाई चर्च को सताता था जो सत्य का पालन करता था। लेकिन प्रथम चर्च के लोगों ने यीशु के स्वर्गारोहण के बाद पिन्तेकुस्त के दिन उण्डेले गए पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से युक्त होकर साहसपूर्वक सुसमाचार का प्रचार करना शुरू किया। जिस तरह गन्धरस जितना ज्यादा कट जाता है वह उतना ही सुगंध बिखेरता है, उसी तरह जितना अधिक ईसाइयों पर अत्याचार तीव्र होता…

मरियम मगदलीनी के आंसू

मत्ती में परमेश्वर का वर्णन “हमारे पिता”(मत 6:9) के रूप में किया गया है। गलातियों में परमेश्वर को “हमारी माता” के रूप में बताया गया है(गल 4:26)। 2कुरिन्थियों में हमें परमेश्वर के बेटे और बेटियां कहा गया है(2कुर 6:19)। हम बाइबल के इन सभी वचनों को एक साथ रखकर देखें तो हम जान सकते हैं कि हम स्वर्ग की संतान हैं और स्वर्गीय परिवार के सदस्य हैं जिनके पास पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर हैं। जो भी हो, चूंकि स्वर्ग में पाप करने के कारण हमें इस पृथ्वी पर निकाल दिया गया है, इसलिए हमें यह याद नहीं है। हमारे लिए जो तीसरे आयाम में रहते हैं, यह याद करना बहुत मुश्किल है कि आत्मिक दुनिया में क्या हुआ था।…

भोजन जो हम खा सकते हैं, और भोजन जो हमें नहीं खाना है

यहूदी धर्म जो मूसा की व्यवस्था का पालन करता है, और ईसाई धर्म जो मसीह की व्यवस्था का पालन करता है, उनके बीच बहुत से अंतर हैं। उनमें से एक है, भोजन के बारे में नियम। आइए हम अदन वाटिका के समय से शुरू होकर मूसा की व्यवस्था के युग से गुजरकर प्रथम चर्च के युग तक, कालानुक्रम के अनुसार भोजन के नियमों का अध्ययन करें और फिर उस शिक्षा को देखें जिसका हमें इस नए नियम के युग में पालन करना चाहिए। हर युग में दिया गया भोजन 1. अदन वाटिका में दिया गया भोजन अदन वाटिका में, परमेश्वर ने मानवजाति को भोजन के लिए बीजवाले सब पौधे और सब फल दिए। फिर परमेश्वर ने उनसे कहा, “सुनो, जितने…

मूर्तियों से दूर रहोमूर्तियों से दूर रहो

मूर्ति एक दृश्य या अदृश्य प्रतिमा है, जिसे शैतान ने इसलिए बनाया है कि हम परमेश्वर से दूर होकर उसकी उपासना करें। एक झूठा सिद्धांत जो हमें सत्य का पालन करने से रोकता है, वह भी एक प्रकार की मूर्ति है। व्यापक अर्थ में हर चीज जिसे हम परमेश्वर से अधिक प्रिय मानते हैं, एक मूर्ति है। इस समय, आइए हम विस्तार से देखें कि मूर्ति क्या है। 1.दृश्य मूर्तियां “तू अपने लिए कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, या पृथ्वी पर, या पृथ्वी के जल में है। तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना...” निर्ग 20:4–5 परमेश्वर के द्वारा सृजा गया अंतरिक्ष असीम है; वह मानव ज्ञान से भी…

पापों की क्षमा और उद्धार के बीच में क्या अंतर है?

पापों की क्षमा और उद्धार का अर्थ एक ही है। हम अपने मूल को महसूस करने के बाद इसे आसानी से समझ सकते हैं। उद्धार जिसकी हमें जरूरत है, वह पापों की क्षमा है “उद्धार” शब्द का अर्थ है, किसी को कठिनाई या खतरे से बचाना। बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति को चंगा होने में मदद करना या फिर उस व्यक्ति को बचाना जिसकी जान को खतरा है, एक प्रकार का उद्धार है। लेकिन उद्धार जो परमेश्वर हमें प्रदान करते हैं, वह शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा का उद्धार है, और हमारी आत्माओं का उद्धार ही हमारे विश्वास का प्रतिफल है। उससे तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास करके ऐसे आनन्दित…

डर को विश्वास में बदलो

जब इस्राएली सात वर्ष तक मिद्यानियों के वश में कर दिए गए, तब इस्राएल के पास जो दुखों में परमेश्वर को पुकार रहा था, परमेश्वर ने अपना दूत भेजा, ताकि वह इस्राएलियों को छुड़ानेवाले न्यायी चुन सके। परमेश्वर का दूत आया और एक बांज के पेड़ के नीचे बैठा, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था। उस समय योआश का पुत्र गिदोन छिपे–छिपे एक दाखरस के कुण्ड में गेहूं झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे। परमेश्वर ने दूत के द्वारा उससे कहा, “जाओ और मिद्यानी लोगों से इस्राएल को छुड़ाओ। मैं तुझे भेजता हूं।” गिदोन ने जाना कि परमेश्वर ने उसे इस्राएल के नेता के रूप में चुना। लेकिन उसे पता नहीं था कि क्या करना है।…

सर्वोत्तम टीमवर्क के साथ स्वर्ग की ओर

जंगली हंस अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर वी के आकार में झुंड बनाकर लंबी उड़ान भरते हैं। उनके वी के आकार में झुंड बनाने के पीछे कुछ कारण होता है। जब सबसे आगे रहने वाला हंस अपने पंखों को फड़फड़ाता है, तब हवा में भंवर उत्पन्न उत्पन्न होता है और वह भंवर पीछे जाते–जाते ऊर्जा उत्पन्न करता है। इसके द्वारा पीछे उड़नेवाले हंस सबसे आगे वाले हंस की तुलना में ज्यादा आसानी से उड़ान भर सकते हैं। लेकिन वी के आकार को पूरे समय बनाए रखना सबसे आगे वाले लीडर–पक्षी के लिए बहुत मुश्किल काम होता है। जंगली हंस इस समस्या को समझदारी से सुलझाते हैं। एक निश्चित लीडर को नियुक्त करने के बजाय, वे बारी–बारी से लीडर की जगह लेते…

जहां कहीं हम जाते हैं, परमेश्वर हमारे साथ होते हैं

आज हम यह विजय का समाचार सुनते हैं कि सदस्य यह विश्वास करके कि राज्य का सुसमाचार संसार के सभी लोगों को अवश्य प्रचार किया जाएगा, जहां कहीं यरूशलेम की महिमा की ज्योति चमकाते हैं, वहां बहुत सी आत्माएं परमेश्वर की बांहों में वापस आती हैं। परमेश्वर हमारे हर एक काम में मदद करते हैं जो हम उनकी पवित्र इच्छा का पालन करने के लिए करते हैं, और हमारी विजय के लिए महिमा का मार्ग तैयार करते हैं। जहां कहीं भी हम जाएं, वहां परमेश्वर ने हमारे साथ होने का वादा किया है और हमें पूरी निडरता से सुसमाचार का प्रचार करने को कहा है। मैं आशा करता हूं कि आप सामरिया और पृथ्वी की छोर तक सुसमाचार का प्रचार…

छोटे कार्यों की महान सामर्थ्य

जब लंबी सर्दियों के बाद वसंत आता है, बहुत लोग संकल्प बनाते हैं और नई चुनौती देते हैं, जैसे वे भी शीतनिद्रा से जाग उठे हों। विश्वविद्यालय के छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए विदेशी भाषा सीखते हैं या लाईसेंस पाने के लिए पढ़ाई करते हैं, और कर्मचारी जो अपने तंग कार्यक्रम में व्यस्त रहते हैं, आत्म–उन्नति के लिए कुछ समय निकालते हैं। चाहे उनका संकल्प दो–तीन दिनों से अधिक टिका न रहे, लेकिन यह बात ही अपने आपमें बहुत अर्थपूर्ण है कि उन्होंने एक योजना बनाई और उसके लिए प्रयास किए। क्योंकि अक्सर लोग यह नहीं जानते कि उन्हें क्या करना है, और चाहे ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें वे करना चाहते हैं, फिर भी उन्हें कैसे…

पोस्ट–ट्रुथ के युग में लोग झूठ पर विश्वास करते हैं

“क्या आप जानते हैं कि स्पैगेटी पेड़ पर उगती है?” 1 अप्रैल 1957 को BBC के द्वारा यह झूठी खबर का प्रसारण किया गया। शुरुआत में लोग केवल मजे के लिए झूठी खबर बनाते थे, लेकिन हाल ही में वह झूठी खबर बड़े पैमाने पर समाज पर असर डाल रही है। इंटरनेट पर समाचार लेख के रूप में लिखी गई झूठी खबर लोगों को गलत जानकारी देकर भ्रमित कर रही है। साल 2016 की ग्रीष्म ऋतु में जब अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव नजदीक आ रहा था, ऐसी बहुत सी झूठी खबरों के लेख थे जो किसी एक उम्मीदवार के लिए लाभदायक और दूसरे विरोधी उम्मीदवार के लिए हानिकारक थे। कुछ संदिग्ध महसूस करके प्रेस ने उनके बारे में पता लगाया।…

उद्धार की खबर सुनकर

सदोम वह शहर था जहां पर अब्राहम का भतीजा लूत रहता था। परमेश्वर ने सदोम और अमोरा के भ्रष्ट नगरों का नाश करने को दो स्वर्गदूत भेजे। लूत के अनुरोध पर, स्वर्गदूत उसके घर में रह गए और उसे उद्धार का समाचार दिया। “क्या इस नगर में ऐसा व्यक्ति है जो तुम्हारे परिवार का है? क्या तुम्हारे दामाद, बेटे, बेटियां या अन्य कोई तुम्हारे परिवार का व्यक्ति है? यदि इस नगर में तुम्हारे परिवार का है तो उन सभों को लेकर इस स्थान से निकल जाओ। परमेश्वर ने हम लोगों को इस नगर को नष्ट करने के लिए भेजा है। यह नगर जल्द ही नष्ट हो जाएगा।” इसलिए लूत बाहर गया और अपनी बेटियों से विवाह करने वाले दामादों को…

उद्धार की खबर सुनकर

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